17/02/2026
क्या आप जानते हैं कि आज जिस गणेशोत्सव को हम इतने धूमधाम से मनाते हैं, उसे कभी अंग्रेजों ने रोकने की कोशिश की थी?
गणपति बप्पा, यानी भगवान गणेश, जिनका उल्लेख ऋग्वेद से लेकर पुराणों तक मिलता है, बुद्धि, विवेक और विघ्नहर्ता के रूप में पूजे जाते हैं। शिवपुराण के अनुसार, माता पार्वती ने उन्हें अपने शरीर के उबटन से बनाया था, और शिवजी द्वारा उनका सिर काटे जाने के बाद हाथी का सिर लगाकर उन्हें पुनर्जीवन दिया गया। यह कथा प्रतीक है—अहंकार के अंत और बुद्धि के आरंभ का।
गणेशोत्सव का सार्वजनिक रूप 1893 में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने शुरू किया। उनका उद्देश्य था—ब्रिटिश शासन के दौरान लोगों को एकजुट करना। धार्मिक उत्सव को उन्होंने राष्ट्रीय एकता का माध्यम बना दिया।
दस दिनों तक चलने वाला यह पर्व भाद्रपद मास की चतुर्थी से शुरू होकर अनंत चतुर्दशी तक चलता है। मूर्ति स्थापना, वेद मंत्र, आरती और अंत में विसर्जन—ये सब जीवन के चक्र का प्रतीक हैं: आगमन, उत्सव और फिर प्रकृति में विलय।
गणपति बप्पा सिर्फ एक देवता नहीं, बल्कि एक संदेश हैं—हर नई शुरुआत से पहले विवेक को प्रणाम करो, क्योंकि जहाँ बुद्धि है, वहीं सफलता है।