27/01/2026
“चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा,
राई लो या पहाड़ लो राजा,
मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूँ मेरा,
रोम-रोम उखाड़ लो राजा…”
— स्वर्गीय रमेश रंजन मिश्र
Dr. Kumar Vishwas द्वारा साझा की गई यह पंक्तियाँ केवल कविता नहीं, समाज की पीड़ा और व्यवस्था की विडंबनाओं का सटीक चित्रण हैं।
आज भी हम ऐसे दौर में हैं जहाँ निर्णय और नीतियाँ कभी-कभी इंसानों की मेहनत, संघर्ष और अस्तित्व को अनदेखा कर देती हैं।
📌 साहित्य की यही ताकत है—
जो बात एक पूरा आंदोलन नहीं कह पाता, वह एक कविता कह देती है।