21/08/2026
सब कहते हैं कि BJP के शासन में “रामराज्य” है।
लेकिन मेरा सवाल है—क्या यही रामराज्य है?
दिनदहाड़े/सार्वजनिक परिवहन में मोबाइल चोरी हो जाए, पीड़ित तुरंत 112 पर फोन करे, फिर भी पुलिस को आने में करीब 30 मिनट लगें और थाने में जाकर यह कह दिया जाए कि “हमारे पास फोन ट्रैक करने जैसी कोई सुविधा नहीं है।”
अगर एक आम नागरिक अपनी शिकायत लेकर पुलिस के पास जाए और उसे मदद के बजाय निराशा मिले, तो जवाबदेही किसकी है?
मैं किसी पर झूठा आरोप नहीं लगा रही। मैं सिर्फ अपनी घटना के आधार पर सवाल पूछ रही हूँ—क्या आम नागरिक को ऐसी ही व्यवस्था मिलनी चाहिए?
अगर इसे रामराज्य कहा जाता है, तो फिर आम आदमी की सुरक्षा और न्याय की जिम्मेदारी कौन लेगा?
मुझे राजनीति नहीं, अपने साथ हुई घटना में न्याय और कार्रवाई चाहिए।