01/09/2026
कानून पास होते रहे, सवाल उठते रहे! हरियाणा विधानसभा सत्र का असली हासिल क्या?
'पप्पू’ पर बवाल: गौतम का वार, हुड्डा का पलटवार
एक तरफ 11 विधेयकों के जरिए सरकार का सुधार एजेंडा, दूसरी तरफ रोजगार और कर्मचारियों के सवाल, हरियाणा विधानसभा के पूरे सत्र की असली कहानी क्या है?
आरके सेठी
चंडीगढ़, 1 सितम्बर।
हरियाणा विधानसभा का मानसून सत्र मंगलवार को खत्म हो गया। 27 अगस्त से 1 सितंबर तक चले इस सत्र में सरकार ने अपना विधायी एजेंडा आगे बढ़ाया, अंतिम दिन 11 विधेयक पारित किए और इससे पहले चार विधेयक सदन की मंजूरी पा चुके थे। लेकिन विधानसभा की पूरी तस्वीर केवल कानून बनने तक सीमित नहीं रही। रोजगार, संविदा कर्मचारियों, सफाई कर्मचारियों, स्थानीय सुविधाओं, किसानों और कानून-व्यवस्था से जुड़े सवाल सदन में लगातार गूंजते रहे। दूसरी तरफ सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच शुरुआती दिन से ही टकराव, निलंबन, विशेषाधिकार प्रस्ताव और तीखी बयानबाजी ने राजनीतिक तापमान बनाए रखा।
‘पप्पू’ पर बवाल: गौतम का हुड्डा पर हमला
गुरु रविदास जयंती के सरकारी संकल्प पर चर्चा के दौरान बीजेपी विधायक रामकुमार गौतम ने नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर तीखा व्यक्तिगत हमला करते हुए कहा—“आपके पप्पू को वंदे मातरम से क्या तकलीफ है। हुड्डा साहब, आप तो देशभक्त परिवार से हैं।” गौतम की इस टिप्पणी पर सदन में हंगामा खड़ा हो गया। हुड्डा ने तत्काल आपत्ति जताते हुए कहा कि विधानसभा में वंदे मातरम गाया गया था और कांग्रेस ने उसका समर्थन किया था, इसलिए इस तरह की टिप्पणी स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने गौतम की टिप्पणी को विधानसभा की कार्यवाही से हटाने की मांग की। कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल ने भी गौतम से माफी की मांग की। विवाद आगे बढ़ा तो भुक्कल की ओर से की गई एक जातिगत टिप्पणी में इस्तेमाल “ब्राह्मण” शब्द को भी कार्यवाही से हटा दिया गया, जिसके बाद बीजेपी विधायकों ने माफी की मांग की। कांग्रेस विधायक अशोक अरोड़ा ने बाद में कहा कि यदि किसी की भावना आहत हुई है तो वह क्षमा मांगते हैं और स्पष्ट किया कि ब्राह्मण समाज उनके लिए पूजनीय है। इस पूरे प्रकरण ने आखिरी दिन की कार्यवाही को विधायी बहस से निकालकर व्यक्तिगत राजनीतिक हमले, राष्ट्रवाद और जातीय टिप्पणी के तीखे टकराव में बदल दिया।
आज आखिरी दिन क्या हुआ?
सत्र के अंतिम दिन सरकार ने 11 विधेयक पारित कराए। इनमें हरियाणा विनियोग संख्या-3 विधेयक, राज्य अल्पसंख्यक आयोग विधेयक, शामलात भूमि संशोधन विधेयक, स्थानीय लेखा-परीक्षा विधेयक, निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक, महिला आयोग संशोधन विधेयक, जीएसटी संशोधन विधेयक, पंचायती राज संशोधन विधेयक, राज्य फिजियोथेरेपी परिषद निरसन विधेयक, विधि अधिकारी नियुक्ति संशोधन विधेयक और हरियाणा राइट टू बिजनेस विधेयक शामिल हैं। इससे पहले चार विधेयक, हरियाणा न्यायालय संशोधन, नगरपालिका संशोधन, नगर निगम संशोधन और बाबा श्री खाटू श्याम चुलकाना धाम पूजास्थल विधेयक पारित हो चुके थे। यानी पूरे सत्र में कुल 15 विधेयक पारित हुए।
11 विधेयक-पूरी तस्वीर
अंतिम दिन पारित विधेयकों में 2026-27 के लिए 7,136.63 करोड़ रुपये तक के अतिरिक्त विनियोजन को मंजूरी देने वाला विनियोग विधेयक शामिल है। राज्य अल्पसंख्यक आयोग विधेयक से धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों के हितों की निगरानी के लिए वैधानिक ढांचा मिलेगा। शामलात भूमि संशोधन विधेयक में 31 मार्च 2004 तक शामलात भूमि पर बने पात्र मकानों से जुड़े मामलों में उपायुक्तों को मंजूरी की शक्ति देने का प्रावधान है। स्थानीय लेखा-परीक्षा विधेयक स्थानीय निकायों, पंचायती राज संस्थाओं, विश्वविद्यालयों और अन्य संस्थानों के स्थानीय फंड के स्वतंत्र और समयबद्ध ऑडिट का ढांचा तैयार करता है। निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक के जरिए उच्च शिक्षा में निजी भागीदारी बढ़ाने का रास्ता खुलता है। महिला आयोग संशोधन से गैर-सरकारी सदस्यों की संख्या पांच से बढ़ाकर सात की गई है। जीएसटी संशोधन केंद्र के अनुरूप कर संबंधी प्रावधानों में बदलाव करता है। पंचायती राज संशोधन में ग्राम सभा के कोरम से जुड़ी व्यवस्था बदली गई है। फिजियोथेरेपी परिषद निरसन विधेयक केंद्रीय नियामक ढांचे के बाद राज्य की अलग परिषद को समाप्त करता है। विधि अधिकारी नियुक्ति संशोधन में विशेष योग्यता वाले अधिकारियों की संख्या बढ़ाई गई है। और राइट टू बिजनेस विधेयक पात्र उद्यमों के लिए कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया आसान करते हुए स्व-प्रमाणन, समयबद्ध मंजूरी और कुछ परिस्थितियों में डीम्ड अप्रूवल का प्रावधान करता है।
सरकार का एजेंडा साफ दिखाई देता है
इन विधायी फैसलों को एक साथ देखें तो सरकार की प्राथमिकताएं स्पष्ट दिखाई देती हैं- प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल करना, कारोबार को आसान बनाना, स्थानीय संस्थाओं की ऑडिट व्यवस्था मजबूत करना, उच्च शिक्षा में निजी निवेश बढ़ाना, पंचायत व्यवस्था में प्रक्रियागत अड़चनें कम करना और सामाजिक संस्थाओं को नया वैधानिक आधार देना। यानी सरकार इस सत्र को केवल राजनीतिक बहस का मंच नहीं, बल्कि विधायी और प्रशासनिक सुधार के मंच के रूप में पेश कर सकती है।
सदन की दूसरी तस्वीर रोजगार थी
विधानसभा की दूसरी बड़ी कहानी हरियाणा कौशल रोजगार निगम यानी एचकेआरएन रही। कांग्रेस ने भर्ती व्यवस्था, पारदर्शिता, आरक्षण और संविदा कर्मचारियों के भविष्य को लेकर सवाल उठाए। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि एचकेआरएन ने ठेकेदारों और बिचौलियों की भूमिका खत्म की है तथा भर्ती व्यवस्था को ऑनलाइन और ट्रेसेबल बनाया है। सरकार के अनुसार यह व्यवस्था नियमित सरकारी नौकरियों का विकल्प नहीं, बल्कि नियमित भर्ती होने तक आवश्यक सेवाओं को बनाए रखने का माध्यम है।
मुख्यमंत्री ने आंकड़ों से दिया जवाब
मुख्यमंत्री ने सदन में कहा कि एचकेआरएन के तहत 28,350 नए कर्मचारियों की तैनाती की गई है। इनमें 6,788 कर्मचारी अनुसूचित जाति से हैं, जो उनके अनुसार निर्धारित हिस्से से अधिक है। पिछड़े वर्गों के 8,128 कर्मचारी हैं। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया ऑनलाइन है और व्यक्तिगत सिफारिशों के बजाय विभागों की मांग के आधार पर चलती है। सरकार के अनुसार 2021 से अब तक विभिन्न विभागों से हजारों मांगें मिली हैं और बड़ी संख्या में शिकायतों का निपटारा किया गया है।
सैनी का कांग्रेस पर सीधा पलटवार
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर यह सवाल भी उठाया कि जिस संविदा व्यवस्था पर वह आज सवाल कर रही है, उसके शासनकाल में भी संविदा कर्मचारियों की संख्या तेजी से बढ़ी थी। सरकार का दावा है कि 2005 से 2014 के बीच कांग्रेस शासन में करीब 71 हजार संविदा कर्मचारी बढ़े। सैनी ने कहा कि एचकेआरएन ने दशकों पुरानी ठेकेदार आधारित व्यवस्था को बदलकर पारदर्शी और संस्थागत व्यवस्था बनाई है। यह मुख्यमंत्री का स्पष्ट राजनीतिक जवाब था- सरकार एचकेआरएन को समस्या नहीं, बल्कि पुरानी समस्या का समाधान मानती है।
31 अक्टूबर तक मिली मोहलत
एचकेआरएन कर्मचारियों की स्थिति को लेकर सरकार ने एक व्यावहारिक कदम भी उठाया। जिन कर्मचारियों की संविदा अवधि 31 अगस्त को समाप्त होनी थी, उनकी सेवा अवधि 31 अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दी गई। इससे तत्काल संकट टला, लेकिन संविदा कर्मचारियों की दीर्घकालिक सेवा सुरक्षा का सवाल खत्म नहीं हुआ।
सफाई कर्मचारी- सदन से सड़क तक
सफाई कर्मचारियों का आंदोलन सत्र का दूसरा बड़ा जनसरोकार वाला मुद्दा रहा। कांग्रेस ने उनकी मांगों को लेकर सरकार को घेरा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सरकार ने कर्मचारियों की 12 मांगें स्वीकार कर ली हैं और जिन मामले अदालतों में विचाराधीन हैं, उनमें न्यायिक निर्देशों के अनुसार आगे बढ़ा जाएगा। उन्होंने विपक्ष पर सफाई कर्मचारियों की चिंताओं का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया।
अतिथि शिक्षकों का सवाल भी जुड़ा
रोजगार और सेवा सुरक्षा की इसी बड़ी तस्वीर में अतिथि शिक्षकों का मुद्दा भी सामने आया। सरकार ने विश्वविद्यालयों में कार्यरत पात्र अतिथि शिक्षकों के लिए सेवा सुरक्षा को लेकर नए कानूनी प्रावधान की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही। इससे साफ है कि कर्मचारी और रोजगार से जुड़े सवाल केवल एचकेआरएन तक सीमित नहीं हैं।
सदन में दिखा असली हरियाणा
प्रश्नकाल और शून्यकाल में विधायकों ने पानी की कमी, जलभराव, सीवर, नालों और ड्रेनों की सफाई, स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों, सड़क और दूसरी स्थानीय सुविधाओं से जुड़े सवाल उठाए। इन सवालों की खासियत यह थी कि वे सीधे नागरिक जीवन से जुड़े थे। विधानसभा के भीतर बड़े विधेयकों की चर्चा के साथ हर विधायक अपने क्षेत्र का वह हरियाणा भी लेकर आया, जहां छोटी-सी बुनियादी सुविधा की कमी भी बड़ी समस्या बन जाती है।
सत्र की शुरुआत ही टकराव से हुई
27 अगस्त को सत्र शुरू होते ही कांग्रेस और सरकार के बीच टकराव सामने आ गया। कांग्रेस विधायकों ने सदन में प्रवेश के दौरान कथित दुर्व्यवहार का आरोप लगाया और विरोध किया। बाद में आठ कांग्रेस विधायकों को निलंबित किया गया। मुख्यमंत्री ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि किसी विपक्षी सदस्य को सदन में प्रवेश से नहीं रोका गया और न ही अपमानित किया गया। यानी सत्र की शुरुआत ही इस सवाल से हुई कि विधानसभा में सत्ता और विपक्ष के बीच संवाद का स्तर कितना स्वस्थ है।
सत्र में सहमति की जगह भी बची रही
सारे राजनीतिक टकराव के बीच सदन ने कुछ मुद्दों पर सर्वसम्मति भी दिखाई। संत गुरु रविदास महाराज के 650वें प्रकाश पर्व के अवसर पर ‘समरसता संकल्प अभियान’ से जुड़ा प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ। सरकार ने कुरुक्षेत्र के उमरी में गुरु रविदास धाम विकसित करने की योजना की जानकारी भी दी। यह संकेत महत्वपूर्ण है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद कुछ सामाजिक और सार्वजनिक मुद्दों पर विधानसभा में सहमति की गुंजाइश बनी हुई है।
तो फिर सत्र का असली हासिल क्या?
अगर केवल विधायी उपलब्धि देखें तो सरकार के पास 15 पारित विधेयकों का रिकॉर्ड है। अगर नीति देखें तो कारोबार, प्रशासन, स्थानीय निकाय, शिक्षा और सामाजिक संस्थाओं से जुड़े कई बदलाव आगे बढ़े। अगर जनसरोकार देखें तो रोजगार, संविदा कर्मचारी, सफाई कर्मचारी, पानी, स्वास्थ्य और स्थानीय सुविधाओं के सवाल अभी भी बहस में हैं। और अगर संसदीय राजनीति देखें तो सरकार और विपक्ष के बीच संवाद के साथ टकराव भी लगातार दिखाई दिया।
असली परीक्षा अब शुरू होगी
सत्र समाप्त हो गया है, लेकिन जिन सवालों पर बहस हुई वे खत्म नहीं हुए। एचकेआरएन कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा, सफाई कर्मचारियों की मांगें, युवाओं के रोजगार, स्थानीय निकायों की जवाबदेही और बुनियादी सुविधाओं की समस्याएं अब सदन से बाहर सरकार के सामने रहेंगी। दूसरी तरफ सरकार द्वारा पारित कानूनों को लागू करके उनके परिणाम दिखाने की जिम्मेदारी भी अब उसी की है।