02/01/2026
■ झारखंड में पेसा रूल लागू, पंचायती राज विभाग ने जारी किया आदेश
■ रांची, 2 जनवरी 2026: झारखंड में बहुप्रतिक्षित पेसा रूल लागू हो गया है पंचायती राज विभाग ने शुक्रवार को इसका आदेश जारी कर दिया है इस रूल के तहत सरकार ने पारंपरिक ग्राम सभाओं की सीमाओं का प्रकाशन और मान्यता के लिए एक प्रक्रिया निर्धारित की है।
इसके अनुसार उपायुक्त द्वारा गठित टीम पारम्परिक ग्राम सभा के प्रधान और सदस्यों के साथ मिलकर पारंपरिक ग्राम सभा की सीमाओं की पहचान करेगी।
और उनका अभिलेखन करेगी आपको बता दें कि 23 दिसंबर को हुई कैबिनेट की बैठक में पेसा नियमावली को मंजूरी मिली थी।
♦️ग्राम सभा की बैठक:
● ग्राम सभा की बैठक: माह में कम से कम एक बार होगी।
● कोरम: ग्राम सभा के कुल सदस्यों की संख्या के एक तिहाई सदस्यों की संख्या अनिवार्य है।
● अध्यक्षता: उस ग्राम सभा के अनुसूचित जनजातियों के ऐसे सदस्य द्वारा की जायेगी जो उस ग्राम सभा क्षेत्र में परंपरा से प्रचलित रीति-रिवाज के अनुसार मान्यता प्राप्त व्यक्ति हो।
● स्थगित बैठक: यदि बैठक हेतु निर्धारित किए गये समय पर कोरम के लिए आवश्यक संख्या में सदस्य उपस्थित नहीं हैं तो बैठक को ऐसी आगामी तिथि एवं समय के लिए स्थगित कर दिया जाएगा।
♦️प्रक्रिया:
● उपायुक्त द्वारा गठित टीम पारंपरिक ग्राम सभा की सीमाओं की पहचान करेगी और उनका अभिलेखन करेगी।
● टीम अपने प्रस्तावों को पारंपरिक ग्राम सभा द्वारा पारित प्रस्ताव प्रपत्र-1 की एक प्रति के साथ, जिलाधिकारी/उपायुक्त को प्रस्तुत करेगी।
● प्राप्त जानकारी को उपायुक्त द्वारा एक माह के लिए सार्वजनिक किया जाएगा एवं आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी।
● प्राप्त आपत्तियों के निराकरण उपरांत अनुमोदित सूचियों का प्रकाशन नियम की अधिसूचना (प्रपत्र-2 के अनुसार) की तिथि से 3 माह के भीतर अनिवार्य रूप से पूरा कर लिया जाएगा।
♦️ग्राम सभा की अध्यक्षता और बैठक की प्रक्रिया
● ग्राम सभा की अध्यक्षता करने वाले व्यक्ति को संबंधित पंचायत समिति के सचिव द्वारा प्राधिकृत पदाधिकारी / कर्मचारी द्वारा शपथग्रहण / प्रतिज्ञा कराया जाएगा।
● सभा की अध्यक्षता: पारंपरिक ग्राम प्रधान या उनके द्वारा प्रस्तावित स्थायी अध्यक्ष करेंगे।
● शपथग्रहण / प्रतिज्ञा: संबंधित पंचायत समिति के सचिव द्वारा प्राधिकृत पदाधिकारी / कर्मचारी द्वारा कराया जाएगा।
● बैठक की सूचना: बैठक की तारीख से कम से कम सात दिन पूर्व दी जाएगी।
● बैठक का स्थान: ग्राम सभा की प्रत्येक बैठक और कार्यवाही सार्वजनिक रुप से आयोजित की जाएगी।
● बैठक की तारीख एवं समय: ग्राम सभा की सामान्य बैठकों की तारीख, समय तथा स्थान पारंपरिक रूप से ग्राम सभा की अध्यक्षता कर रहे।
♦️ग्राम प्रधान द्वारा नियत किया जाएगा:
● ग्राम सभा की अध्यक्षता करने वाले व्यक्ति को शपथग्रहण / प्रतिज्ञा कराया जाएगा।
● शपथग्रहण / प्रतिज्ञा करने वाले ग्राम सभा के अध्यक्षों की सूची संबंधित प्रखण्ड विकास कार्यालय में संधारित की जाएगी।
● बैठक की सूचना संबंधित ग्राम सभा के प्रत्येक ग्रामों में सहज दृश्य / सार्वजनिक स्थानों पर इसकी एक प्रति को चिपकाया जाएगा और ग्राम सभा क्षेत्र में डुगडुगी या ढोल पिटवाकर घोषणा करते हुए प्रकाशित की जाएगी।
● ग्राम सभा की बैठक का संचालन उसकी अध्यक्षता करने वाले व्यक्ति द्वारा किया जाएगा, जो अध्यक्ष के नाम से संबोधित किया जाएगा।
● ग्राम सभा अध्यक्ष का चयन / परिवर्तन: पद रिक्त होने के एक महीना के अन्दर किया जाएगा।
● ग्राम सभा का सहायक सचिव: ग्राम सभा अपने सदस्यों में एक सहायक-सचिव का चुनाव कर सकेगी।
● बैठक का संचालन: ग्राम सभा की बैठक का संचालन अध्यक्ष द्वारा किया जाएगा।
● निर्णय की प्रक्रिया: बैठक में लिए गए निर्णयों की संक्षिप्त जानकारी पढ़कर सुनाया जाएगा।
● ग्राम सभा का कार्यालय: ग्राम पंचायत का कार्यालय ही ग्राम सभा का कार्यालय होगा।
● ग्राम सभा की बैठक का संचालन अध्यक्ष द्वारा किया जाएगा।
● बैठक में लिए गए निर्णयों की संक्षिप्त जानकारी पढ़कर सुनाया जाएगा
● ग्राम सभा के निर्णय के अलोक में ग्राम पंचायत यथासंभव कार्य करेगी
● ग्राम सभा के सरकारी योजनाओं एवं चयनित लाभुकों की योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत की कार्यकारिणी समिति की होगी।
● ग्राम सभा की बैठक में लाए गये समस्त विषय सर्वसम्मति द्वारा विनिश्वत किए जाएंगे और सर्वसम्मति द्वारा विनिश्वत नहीं होने की दशा में उपस्थित सदस्यों की बहुमत से मतदान हाथ उठाकर किया जाएगा।
● ग्राम सभा का कोष: प्रत्येक ग्राम सभा एक निधि स्थापित कर सकेगी जो निम्नलिखित चार भागों से मिलकर ग्राम कोष कहलाएगा।
● सामुदायिक संसाधनों की सुरक्षा एवं प्रबंधन: ग्राम सभा अपने पारम्परिक सीमा के भीतर के सामुदायिक संसाधनों एवं प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन कर सकेगी।
● पारंपरिक ग्राम सभा के द्वारा दंड: ग्राम सभा आर्थिक दंड अधिकतम रू 2,000/- तक का निर्धारण, आर्थिक नुकसान एवं व्यक्ति की क्षमता को देख कर सकेगी।
● पारंपरिक ग्राम सभा के निर्णय पर अपीलीय अधिकार: पारंपरिक ग्राम सभा के निर्णय से किसी पक्षकार की असहमति की स्थिति में पक्षकार सर्वप्रथम अपने समाज के उपरी सामाजिक पारंपरिक व्यवस्था के समक्ष उच्चतम स्तर (बहुस्तरीय) पर अपील कर सकेंगे।
♦️क्या होगी प्रक्रिया
● ग्राम सभा की बैठक में लाए गये समस्त विषय सर्वसम्मति द्वारा विनिश्वत किए जाएंगे।
● ग्राम सभा अपने पारंपरिक सीमा के भीतर के सामुदायिक संसाधनों एवं प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन कर सकेगी।
● ग्राम सभा आर्थिक दंड अधिकतम रू 2,000/- तक का निर्धारण, आर्थिक नुकसान एवं व्यक्ति की क्षमता को देख कर सकेगी।
● पारंपरिक ग्राम सभा के निर्णय से किसी पक्षकार की असहमति की स्थिति में पक्षकार सर्वप्रथम अपने समाज के उपरी सामाजिक पारंपरिक व्यवस्था के समक्ष उच्चतम स्तर (बहुस्तरीय) पर अपील कर सकेंगे।
● ग्राम सभा की बैठक में लाए गए समस्त विषय सर्वसम्मति द्वारा विनिश्वत किए जाएंगे और सर्वसम्मति द्वारा विनिश्वत नहीं होने की दशा में उपस्थित सदस्यों की बहुमत से मतदान हाथ उठाकर किया जाएगा।
● अपीलीय अधिकार के निर्णय पर असंतुष्टि पर अन्य अधिकार: उच्चतर स्तर के पारंपरिक ग्राम सभा के निर्णय से किसी पक्षकार की असहमति की स्थिति में असंतुष्ट पक्षकार विवाद से संबंधित न्याय प्राप्त करने हेतु समुचित वैधानिक प्रक्रिया द्वारा सक्षम न्यायालय जाने हेतु स्वतंत्र है।
● विकास योजना का अनुमोदन, लाभार्थियों का पहचान एवं सामाजिक क्षेत्र के संस्थाओं के कार्यों पर नियंत्रण: ग्राम सभा द्वारा कार्यक्रमों का प्रस्तावन एवं अनुमोदन किया जाएगा।
● लघु जल निकाय का प्रबंधन: जल स्रोतों का नियोजन एवं प्रबंधन इस प्रकार किया जाएगा कि इन्हें आगामी पीढ़ियों के लिए बरकरार रखा जाय एवं सभी ग्रामीणों का इस पर बराबर अधिकार हो।
● मछली, मखाना, पानी फल एवं अन्य उत्पाद: सभी व्यक्तियों को गांव के क्षेत्र के अधीन स्थित प्राकृतिक जल संसाधनों में परंपरा के अनुसार निजी उपभोग के लिए मछली पकड़ने का समान अधिकार होगा।
● ग्राम सभा की बैठक में लाए गए समस्त विषय सर्वसम्मति द्वारा विनिश्वत किए जाएंगे।
● ग्राम सभा द्वारा कार्यक्रमों का प्रस्तावन एवं अनुमोदन किया जाएगा।
● जल स्रोतों का नियोजन एवं प्रबंधन इस प्रकार किया जाएगा कि इन्हें आगामी पीढ़ियों के लिए बरकरार रखा जाय एवं सभी ग्रामीणों का इस पर बराबर अधिकार हो।
● सभी व्यक्तियों को गांव के क्षेत्र के अधीन स्थित प्राकृतिक जल संसाधनों में परंपरा के अनुसार निजी उपभोग के लिए मछली पकड़ने का समान अधिकार होगा।
♦️लघु खनिजों का उपयोग:
● लघु खनिजों का उपयोग: ग्राम सभा अपने अपने क्षेत्र में पाए जाने वाले मिट्टी, पत्थर, बालू, मोरम इत्यादि सहित अन्य लघु खनिजों का उपयोग ग्राम सभा द्वारा किया जा सकता है।
● लघु खनिज का खनन पट्टा: ग्राम सभा को लघु खनिज का खनन पट्टा प्राप्त करने का अधिकार है, लेकिन इसके लिए ग्राम सभा की पूर्व अनुमति आवश्यक है।
● बाजारों का प्रबंधन: ग्राम सभा अपने क्षेत्र में अवस्थित बाजारों, मेला, पारम्परिक जतरा का नियंत्रण और प्रबंधन करने में सक्षम होगी।
● उधार पर नियंत्रण: ग्राम सभा झारखण्ड निजी साहूकारी (निषेध) अधिनियम 2016 के नियमों के अनुसार कार्रवाई करने में सक्षम होगी।
● मादक द्रव्यों का विनियमन: ग्राम सभा मादक द्रव्यों के विनियमन और नशा मुक्ति के लिए कार्रवाई कर सकेगी
● लघु वन उपज: ग्राम सभा क्षेत्र की सीमा के अन्दर वन भूमि पर लघु वनोपज का स्वामित्व, संग्रहण का अधिकार तथा उसके उपयोग एवं निपटान के अधिकारों की मान्यता होगी।
● ग्राम सभा द्वारा लघु खनिजों का उपयोग और प्रबंधन किया जाएगा।
● ग्राम सभा द्वारा बाजारों, मेला, पारंपरिक जतरा का नियंत्रण और प्रबंधन किया जाएगा।
● ग्राम सभा द्वारा उधार पर नियंत्रण और मादक द्रव्यों के विनियमन के लिए कार्रवाई की जाएगी।
● ग्राम सभा द्वारा लघु वन उपज का स्वामित्व, संग्रहण का अधिकार तथा उसके उपयोग एवं निपटान के अधिकारों की मान्यता की जाएगी।