24/05/2026
अल्लाह की रजा के लिए मोमिन इस शदीद गर्मी मे अराफात के मैदान मे खड़े होंगे अपने ईमान के साथ ❤
हज के दौरान अराफात के मैदान 🕋🕋
- - ) और वहां ठहरने (वुकूफ़)
का इस्लाम में सबसे बड़ा दर्जा है।
इस मौके पर हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अराफात के मैदान में दिए गए अपने ऐतिहासिक 'विदाई हज' के खुत्बे (Al-Wida Khutba) में कई अहम बातें फरमाईं:दुआओं की क़बूलियत:
आप ﷺ ने फरमाया कि अराफात के दिन अल्लाह की रहमत बहुत करीब होती है। इस दिन की गई दुआ सबसे बेहतरीन दुआ होती है।गुनाहों की माफी: अराफात का दिन मगफिरत (माफी) का है
। हदीस में आता है कि इस दिन अल्लाह अपने बंदों के गुनाहों को माफ करते हैं और जहन्नुम से लोगों की सबसे ज्यादा आजादी इसी दिन होती है।
इंसानी हुकूक और बराबरी: आपने फरमाया कि किसी अरबी को अजमी पर और किसी अजमी को अरबी पर कोई फजीलत (बड़प्पन) हासिल नहीं है, और न ही किसी गोरे को काले पर या काले को गोरे पर। सब आदम (अलै.) की औलाद हैं
औरतों के हुकूक: आप ﷺ ने फरमाया कि औरतों के मामले में अल्लाह से डरो, उनके साथ भलाई और नरमी से पेश आओ