24/09/2026
आजकल सड़क पर ट्रैफिक नियमों का पालन करना जैसे लोगों को जरूरी ही नहीं लगता।
सड़क पर जाम लगा है, आगे निकलने की जगह नहीं है, फिर भी लगातार हॉर्न बजाते रहेंगे। जगह नहीं है, फिर भी गाड़ी घुसा देंगे। अपनी लेन छोड़कर दूसरी लेन में गाड़ी चढ़ा देंगे और ऊपर से लगातार लाइट अप-डाउन करते रहेंगे। बस किसी तरह मुझे आगे निकलना है—बाकी किसी को परेशानी हो रही है या नहीं, इससे कोई मतलब नहीं।
और सबसे बड़ी बात—Attitude भी उतना ही है।
जगह है, फिर भी साइड नहीं देंगे। सामने से आप आ रहे हैं और रास्ता उसकी तरफ ज्यादा है, फिर भी वह यही सोचेगा कि पहले आप साइड दें, तभी मैं निकलूंगा। अपनी गलती मानना या दो कदम पीछे होकर रास्ता देना जैसे उसकी शान के खिलाफ हो।
गाड़ी चलाना आ गया है, लेकिन गाड़ी चलाने का अनुशासन और सड़क पर दूसरों का सम्मान करना शायद अभी नहीं आया।
कई लोग तो सड़क के बीच में ही अचानक गाड़ी मोड़ने लगते हैं। सीधे जा रहे थे, फिर याद आया कि वापस मुड़ना है—बस वहीं से गाड़ी मोड़ दी, चाहे पीछे पूरा जाम क्यों न लग जाए।
आखिर इतनी जल्दी किस बात की है?
अगर जल्दी है तो समय से घर से निकलें, अपने समय को मैनेज करें। सड़क पर अपनी जल्दबाजी का बोझ दूसरे लोगों पर डालना कहां तक सही है?
सरकार कितने नियम बनाएगी? पुलिस कितनी जगह खड़ी होगी? कैमरे कितने लगाए जाएंगे? चालान कितने काटे जाएंगे?
जब तक हम खुद अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेंगे, कोई भी सिस्टम पूरी तरह काम नहीं कर सकता।
आज सबसे ज्यादा जरूरत है धैर्य, अनुशासन और दूसरों के प्रति संवेदनशीलता की।
सड़क सिर्फ हमारी नहीं है।
हमारे साथ सड़क पर किसी का पिता, भाई, बहन, बच्चा या परिवार का सदस्य भी सफर कर रहा है।
कुछ मिनट की जल्दबाजी, थोड़ा सा Ego और गलत Attitude के लिए अपनी और दूसरों की जिंदगी को खतरे में डालना समझदारी नहीं है।
पहले खुद सुधरें, फिर व्यवस्था से सुधार की उम्मीद करें।
सड़क पर नियम सिर्फ पुलिस के डर से नहीं, अपनी और दूसरों की सुरक्षा के लिए मानें।