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24/08/2026

मोदी जी, SC/ST Act भेदभाव रोकने के लिए बना था, पर ऐसा लगता है कि इसका उद्देश्य ही दुरुपयोग है

अजीत भारती ने क्या कहा, किस संदर्भ में कहा और भाषा उचित थी या नहीं इस पर बहस हो सकती है। मैं उनकी हर बात या हर शब्द का समर्थन नहीं करता। लेकिन अगर पहले अजीत भारती के परिवार पर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई और उसके जवाब में उन्होंने प्रतिक्रिया दी, तो पूरे मामले को SC/ST Act के तहत ले जाने पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

2018 में आपकी सरकार ने SC/ST Act को और कठोर किया था। उद्देश्य था अत्याचार के खिलाफ़ मजबूत सुरक्षा और यह सुरक्षा रहनी भी चाहिए।

लेकिन कानून जितना शक्तिशाली हो, उसके दुरुपयोग के खिलाफ़ सुरक्षा उतनी ही मजबूत होनी चाहिए।

और मोदी जी, एक काम और कर दीजिए

नल-जल योजना से हर घर में नल जरूर लगवा दीजिए।

खासकर उन घरों में भी, जिनके बारे में राजनीति हमें बार-बार बताती है कि उन्होंने 5,000 वर्षों से पानी नहीं पिया।

पानी सबको मिले, सम्मान सबको मिले, न्याय सबको मिले इसमें कोई विवाद नहीं।

बस कानून की पाइपलाइन भी ऐसी हो कि पानी की तरह न्याय भी जाति देखकर न बहे।

अत्याचार नहीं होना चाहिए, लेकिन कानून का दुरुपयोग भी नहीं।

कल से ही सोशल मीडिया में लखनऊ के  #कैबड्राइवर द्वारा  अपनी गाड़ी में बैठे चार  #रेलवे कर्मचारियो के साथ गाली-गलौज किया ज...
18/08/2026

कल से ही सोशल मीडिया में लखनऊ के #कैबड्राइवर द्वारा अपनी गाड़ी में बैठे चार #रेलवे कर्मचारियो के साथ गाली-गलौज किया जाता है तथा #एससी एसटी का नॉरेटिव सेट करने का प्रयास करता है यह तो संयोग ही था कि वह कर्मचारी भी इसी वर्ग से आते थे इसलिए वे बाल बाल बच गए।
इस प्रकार की घटना के मूल में कहीं ना कहीं #मोदी सरकार द्वारा एससी एसटी कानून को जंगल के कानून जैसी शक्तियां प्रदान करना हैं कानून का दुरुपयोग बढ़ गया है इसके बढ़ते दुरुपयोग को रोकने के लिए #सुप्रीम कोर्ट ने #डॉक्टर सुभाष काशीनाथ महाजन बनाम #महाराष्ट्र सरकार मामले में कहा कि FIR दर्ज करने से पहले शिकायत की जांच की जाए और गिरफ्तारी से पहले उच्च अधिकारियों को सूचित किया जाए साथ ही इस केस में #अग्रिम जमानत का प्रावधान भी जारी किया था लेकिन मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को संसद में 20 मार्च 2018 को संशोधन कानून #धारा 18 A लकार सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को पलट दिया।
अब एक बार फिर मोदी सरकार ने इस कानून के दुरुपयोग को बढ़ावा देते हुए इस कानून में मिलने वाले मुवावजे की राशि में 40% बढ़ोतरी का प्रस्ताव वित्त विभाग के पास भेज दिया है अभी तक इस कानून का ज्यादा दुरूपयोग इसके तहत मिलने वाले मुवावजे की लालच में ही किया जाता रहा है। अलग-अलग अपराध के हिसाब से अलग-अलग मुआवजा FIR दर्ज होने के तुरंत बाद 25 परसेंट पैसा दे दिया जाता है उसके बाद चार्जशीट आने पर 50% और फैसला में सजा होने पर 25 परसेंट दे दिया जाता है वहीं अपमान मामूली चोट या भद्र व्यवहार पर जात सूचक शब्दों का प्रयोग या सार्वजनिक अपमान पर 80000 से 2 लाख तक का मुआवजा है ।
अब जो की मुआवजा पहले एक लाख से 12 लाख था अब वह 40% बढ़ोतरी लागू होने पर बढ़कर डेढ़ लाख से करीब 16 लख रुपए हो जाएगा इन्हीं की लालच की वजह से कैब ड्राइवर द्वारा फर्जी हंगामा किया गया जिससे वह कर्मचारियों के ऊपर एफआईआर दर्ज करवा सके और सरकार से मुआवजा ले सके।
आने वाले समय में लोगों को सावधानी से यात्रा करनी होगी क्योंकि जब चार लोग बैठते हैं तो अपना अलग-अलग बातें करते हैं या अकेले भी बैठते हैं तो मोबाइल पर कई तरह की बातें करते हैं सामने वाला ड्राइवर किस मानसिकता का है इसकी जानकारी जरुर कर लें जानकार रहें सुरक्षित रहें।
इस मामले में सरकार को कैब ड्राइवर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवानी चाहिए जिससे इसका गलत इस्तेमाल करने वाले लोगों के दिल में भय उत्पन्न हो।

लखनऊ में कैब ड्राइवर द्वारा चार रेलवे कर्मचारियों को एससी-एसटी में फंसने का प्रयास यह बताता है कि सरकार द्वारा एससी एसटी...
16/08/2026

लखनऊ में कैब ड्राइवर द्वारा चार रेलवे कर्मचारियों को एससी-एसटी में फंसने का प्रयास यह बताता है कि सरकार द्वारा एससी एसटी एक्ट में मुआवजा बढ़ाने का कितना दुष्परिणाम सामने आने वाला है यह तो भला हो की वह चारों व्यक्ति भी एससी-एसटी समुदाय से ही थे नहीं तो अगर जनरल होते तो जेल से लेकर नौकरी से टर्मिनेशन तक सभी कुछ हो गया होता इस बात ने एक सबक और दिया है कि अगर आप कैबिनेट ओला बुक करते हैं तो ड्राइवर कौन है किस कैटेगरी से है यह भी पता कर लें क्योंकि लोग यात्रा करते समय आपस में मोबाइल पर तरह-तरह की बातें करते हैं और कैब को चला रहा ड्राइवर किस मानसिकता का है यह आपको पता नहीं रहता । आज वह चारों कर्मचारी एक बहुत बड़ी मुसीबत से बच गए नहीं तो जिस प्रकार भीड़ कैंब ड्राइवर ने इकट्ठा किया था अगर दूसरी जाति का व्यक्ति होता तो अब तक उसके जान माल का नुकसान हो गया होता और वह अपनी सफाई भी नहीं दे पाता।
वही उस ड्राइवर पर कंपनी ने एक्शन लेते हुए उस पर 99 साल का बैन लगा दिया है।

"परिवारवाद के खिलाफ भाषण देना आसान है, लेकिन सत्ता मिलते ही अपने बेटे को आगे बढ़ाना असली राजनीति की पहचान बन जाती है।"उप...
06/08/2026

"परिवारवाद के खिलाफ भाषण देना आसान है, लेकिन सत्ता मिलते ही अपने बेटे को आगे बढ़ाना असली राजनीति की पहचान बन जाती है।"

उपेंद्र कुशवाहा ने भी वही रास्ता चुना, जिसकी आलोचना वे वर्षों तक दूसरों के लिए करते रहे।

विधान परिषद की शपथ ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या पार्टी में कोई ऐसा कार्यकर्ता नहीं था जिसने वर्षों तक संघर्ष किया हो? या फिर राजनीति में सबसे बड़ी योग्यता सिर्फ 'नेता का बेटा होना' रह गई है?

जब हर दल में परिवार ही उत्तराधिकारी बनेगा, तो लाखों कार्यकर्ताओं का संघर्ष, त्याग और समर्पण आखिर किस काम का?

अब फैसला बिहार की जनता को करना है।
अगर आप सचमुच परिवारवाद के खिलाफ हैं, तो विरोध सिर्फ भाषणों में नहीं, अपने वोट से भी दिखाइए। किसी भी दल या नेता को सिर्फ इसलिए समर्थन मत दीजिए क्योंकि वह नए नारे देता है। उसका आकलन उसके कर्म से कीजिए।

बिहार तभी बदलेगा, जब जनता परिवार नहीं, पात्रता चुनेगी; वंश नहीं, संघर्ष को सम्मान देगी; और नेताओं से वही आचरण मांगेगी, जिसकी वे दूसरों से अपेक्षा करते हैं।

24/07/2026

नीट छात्र हर्ष दूबे ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ले लेने से क्या छात्र आत्महत्या करना बंद कर लेंगे? उन्होंने कहा - नहीं।

हर्ष दूबे ने आगे कहा कि 90% छात्र सामान्य वर्ग से हैं, जो आरक्षण के चलते आत्महत्या कर रहे हैं। असली मुद्दा यह है कि छात्र आरक्षण की वजह से आत्महत्या कर रहे हैं, लेकिन इस पर बात क्यों नहीं हो रही है?

पत्रकार ने पूछा कि जंतर मंतर पर जो प्रदर्शन हो रहा है, उससे कुछ नहीं होगा।

हर्ष दूबे ने जवाब दिया कि यदि नीट के छात्र प्रदर्शन कर रहे होते तो जरूर असर होता, लेकिन जब हम लोग प्रदर्शन कर रहे थे तब सरकार ने लाठियों से मारकर हमें भगा दिया था।

हर्ष दूबे ने गुस्से में कहा कि इन आतंकवादियों और उपद्रवियों को सरकार प्रदर्शन करने की इजाजत दे देती है, लेकिन जब हम जैसे नीट के छात्र प्रदर्शन करते हैं तो सरकार हमें प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं देती और अपनी पुलिस से लाठियों से मारकर हमें हटवा देती है।

जब आतंकवादी और उपद्रवी प्रदर्शन करते हैं तो सरकार उन्हें उपद्रव करने और प्रदर्शन करने की पूरी छूट दे देती है और उनके आगे-पीछे दौड़ती है।

हर्ष दूबे ने कहा - एक व्यक्ति अमेरिका से आया है और नीट छात्रों के नाम पर प्रदर्शन कर रहा है। यहां देखिए, मैं शर्ट के अंदर जो बनियान पहनकर आया हूं, वह फटा हुआ है, लेकिन इज्जत ढककर आपके न्यूज़ रूम में आया हूं।

हम नीट के छात्रों के पास अमेरिका जाने के लिए पैसे नहीं हैं, यहां पढ़ाई करने के लिए भी पैसे नहीं हैं। लेकिन जब हम प्रदर्शन करते हैं तो सरकार हमें लाठियों से पीटती है। वहीं जब कोई उपद्रवी अमेरिका से आकर छात्रों के नाम पर प्रदर्शन के नाम पर उपद्रव करवाता है और आतंक फैलाता है, तो सरकार उसके तलवे चाटती है।

हर्ष दूबे का सीधा कहना था कि छात्रों की और देश की असली समस्या आरक्षण है, लेकिन इस पर कोई बात नहीं कर रहा है।

उनका कहना था कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दे देंगे, फिर दूसरा आएगा, वो भी वही करेगा। इससे क्या बदलेगा?

हर्ष दूबे का यह बयान चारों तरफ खूब वायरल हो रहा है।

ममता की ऐसी मिसाल, जिसे शब्दों में बाँध पाना मुश्किल है।जबलपुर के बरगी डैम में हुए दर्दनाक हादसे ने हृदय को झकझोर दिया। ...
01/05/2026

ममता की ऐसी मिसाल, जिसे शब्दों में बाँध पाना मुश्किल है।

जबलपुर के बरगी डैम में हुए दर्दनाक हादसे ने हृदय को झकझोर दिया। तेज तूफान और ऊँची लहरों के बीच कई जिदगियाँ पल भर में डूब गईं।

लेकिन इस भयावह मंजर में एक माँ का प्रेम अमर हो गया। वह माँ, जिसने अपनी आखिरी सांस तक अपने बच्चे को सीने से लगाए रखा। जिसने अपनी जान की परवाह किए बिना बस एक ही कोशिश की, अपने बच्चे को सुरक्षित रखने की। इस हादसे ने हमें रुला दिया, लेकिन साथ ही ममता की एक ऐसी मिसाल भी दे गया, जिसे शब्दों में बाँध पाना मुश्किल है। माँ का प्यार सच में आखिरी सांस तक साथ निभाता है।

ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करे और उनके परिवारों को इस असीम दुःख को सहने की शक्ति दे।

तुम कहते हो जातिवादी, हम कहते हैं कौन नहीं ? यहां तो सरकारी भर्ती परीक्षाओं में भी सरकार की मानसिकता दिखाई देती है। लोग ...
15/03/2026

तुम कहते हो जातिवादी, हम कहते हैं कौन नहीं ? यहां तो सरकारी भर्ती परीक्षाओं में भी सरकार की मानसिकता दिखाई देती है। लोग नींद से नहीं जागेंगे, भक्ति में विलीन रहेंगे, और सवर्ण को टारगेट करते रहेंगे ! ब्राह्मण जाति को ही अवसरवादी के विकल्प के रूप में देखना, सरकार की मानसिकता दर्शाती है, लेकिन क्या फर्क पड़ता है ? वाली आपकी सोच, नहीं बदलेगी !

14/03/2026
जब किसी बेटी के साथ अत्याचार होता है तो उसकी जाति नहीं देखी जाती, लेकिन अफसोस कुछ लोग अपराधी की जाति देखकर उसका बचाव करन...
14/03/2026

जब किसी बेटी के साथ अत्याचार होता है तो उसकी जाति नहीं देखी जाती, लेकिन अफसोस कुछ लोग अपराधी की जाति देखकर उसका बचाव करने लगते हैं।
2 दिन पहले तक जो लोग दूसरे समाज के साथ मिलकर हमारे समाज और हमारे आदरणीय मुखिया जी का मजाक उड़ा रहे थे, आज वही लोग नैतिकता की बात कर रहे हैं। सच यह है कि अपराधी का समर्थन करने वाला भी कहीं ना कहीं अपराध में भागीदार होता है।समाज को तय करना होगा कि वह बेटियों की सुरक्षा के साथ खड़ा है या अपराधियों के समर्थन में।अगर कोई भी व्यक्ति बलात्कार जैसा जघन्य अपराध करता है तो उसे तुरंत गिरफ्तार कर फास्ट ट्रैक कोर्ट में सख्त सजा मिलनी चाहिए ताकि एक उदाहरण बने। अपराधियों को बचाने वाले तथाकथित बुद्धिजीवियों और संतोष सिंह , कन्हैया भेलारी जैसे पत्रकारों को भी समाज पहचान चुका है।
जब आप बबूल बोएंगे तो आम की उम्मीद नहीं कर सकते।बेटी चाहे किसी भी समाज की हो, न्याय मिलना ही चाहिए। लेकिन जो लोग अपराधियों का मनोबल बढ़ाते हैं, समाज को भी उनके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। आज क्या चिराग पासवान जाएंगे इस बेटी के घर न्याय दिलाने के लिए क्या शांभवी चौधरी जाएंगे पूछ रहे हैं समाज आपसे ?लोग जिस तरह आप लोग दरभंगा वाली घटना पर गए थे ,क्योंकि वहां पर कुछ था भी नहीं झूठा केस मुकदमा था।। 100 में से 90 sc/st के झूठा ही रहता है ।और इसी का फायदा उठाकर वह लोग समाज में आग लगाने का काम करते हैं इस पर सरकार को बड़ी से बड़ी कार्रवाई करनी चाहिए अगर झूठ है एससी/st पकड़ा जाए। उम्मीद है कि जो जो नेता विधायक सांसद दरभंगा वाले घटना पर गए थे इस प्रकार यहां भी आकर न्याय दिलाने का काम करेंगे।। और उम्मीद है राजपूत समाज के तथाकथित नेता विधायक सांसद जो भी समाज का ठेका लेते हैं ।वह न्याय दिलाने में पीड़ित परिवार के लिए आगे आएंगे खासकर स्थानीय सांसद राजीव प्रताप रूडी जो पिछले दिनों राणा सांगा यात्रा पर बिहार में थे।

जय परशुराम
जय भवानी

सांसद साहब आज दिल्ली में हैं, लेकिन तरुण के घर जाने से डर लगता है।  अगर कोई सवर्ण अपराधी होता तो रेलिंग कूदकर पुलिस से ल...
09/03/2026

सांसद साहब आज दिल्ली में हैं, लेकिन तरुण के घर जाने से डर लगता है। अगर कोई सवर्ण अपराधी होता तो रेलिंग कूदकर पुलिस से लड़ते, रील वायरल होती !!

जिस समाज की वजह से संसद में बैठे हो, उसी की चीखें अब सुनाई नहीं देतीं।
वोट और कुर्सी की राजनीति में दलित समाज का सौदा हो चुका है।

जेल जाने का डर? बंगला-गाड़ी-कुर्सी की चिंता?
भाड़ में जाए दलित समाज, साहब को तो बस राजनीति करनी है! 😡

#दलित_न्याय "

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