08/12/2025
#फीलिंग
आज की कहानी का शीर्षक है "फीलिंग" ये अंग्रेजी का शब्द है। मगर मेरी कहानी हिंदी में है और थोड़ा गुर्जर भाषा में। मै और मेरा दोस्त आफ्टर ऑफिस कुछ तूफानी करने के मूड में थे। मेरा ये दोस्त लगभग २-३ साल से मुझसे नहीं मिला था। एक दिन मैंने मोबाइल पर उसका स्टेटस देखा और उसको ग्रीन हार्ट भेज दिया तो बातो का सिलसिला शुरू हो गया और मिलने का भी डिसाइड हो गया। मेरा दोस्त एन० सी० आर० का एक गुर्जर, जिसका नाम "कसाना" है । जो निहायती सुन्दर, सभ्य, पढ़ा लिखा, भला इंसान है ।
हम दोनों ही तूफानी मूड में बड़ रहे थे। मैंने वा सु पूछी कहा रह रहो इतने दिना सु ना फ़ोन कर रौ ना कोई मैसेज - कदी केदार याद भी कर लिया कर। उसने कहा - तुम घना याद कर रहे। मैंने उससे कहा - साडे "कसाना" तुम लोगो की फाड़ो, किसे ने काए दिन फाड़ी तुम्हारी। उसने तुरंत अपना गिलास, मुँह से लगाया झट से खली किया एक टिक्का खाया और टिस्सू पेपर से मुँह साफ़ किया। उसने कहा - हा भाई एक दिन एक बन्दे ने मेरी फाड़ दी। मैंने पुछा क्या हुआ था।
भाई तुम्हे तो पता ही है जैसे तुम्हारी गैल बैठु हु, ऐसे ही एक ऍम० आर० दोस्त है उसके साथ भी कदी - कदार बैठु। एक दिन वा ने अपने घर बुला लियो। मैंने उस-सु कही यार घर में ठीक ना रहतौ, बहार ही ठीक है। उसने कहा - घर पर कोई नहीं है, जब तक बीवी - बच्चे आएंगे हम अपना काम ख़तम कर चुके होंगे। मैंने उससे कहा - तब तो कोई दिक्कत ना है। हम उसके घर पहुंचे, एक - एक पैग पिया ही था। की वो भाई साहब अचानक अपने कमरे की ओर भागे और अपनी बीवी की चुन्नी ओड कर आ गए वो भी लाल रंग की। मेरे सामने बैठ कर दूसरा पैग बनाने लगे। मै ये देख कर थोड़ा सुन्न सा हो गया। फिर भाई साहब ने अपना चुन्नी वाला रुख किचन की ओर किया और खीरा काटने लगे। खीरा काट कर उसमे चाट मसाला और निम्बू मिला कर मेरे सामने रख कर कहा, लो खाओ और अपना गिलास उठा कर फिर किचन की ओर चले गए। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था और भाई साहब लाल चुन्नी में मुझे मुन्नी बदनाम हुई वाली - मलाइका लग रहे थे। अब शायद वो सेब काटने की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने अपना गिलास मुँह से लगाया और मुझे भी पिने का इशारा करने लगे । सेब में टूथ पिक लगा कर फिर प्लेट मेरे सामने रख दिया और फिर कहा, लो खाओ। भाई साहब ने अपना गिलास मेरे गिलास से टकरा कर कहा , जल्दी से इसे ख़तम करो तो दूसरा बनाए। मैंने तुरंत ही पी लिया। भाई साहब ने तीसरा पैग बनाया और फिर अपना गिलास ले के किचन में चले गए। अब वो पापड़ भून रहे थे। भाई साहब ने किचन से मुझसे पुछा क्या हु एन्जॉय नहीं कर रहे क्या ? मेरी फटी पड़ी थी! लेकिन मैंने डरते - डरते पूछ ही लिया। भाई साहब जब सु तुमने यु लाल रंग की चुन्नी ओडी, मेरो रंग सफ़ेद हो गयो। भाई साहब ने थोड़ा घूँघट निचे किया और बोला क्यू डर लग रहा है क्या ? और पापड़ ले कर फिर मेरे पास आ गए और सामने बैठ गए। अब मेरी थोड़ी और फट गई और मै उठने लगा। भाई साहब ने पुछा टॉयलेट जाना है क्या ? मैंने कहा नहीं घर जा रहा हु। भाई साहब खड़े उठे उन्होंने लाल चुन्नी उतारी और सोफे में फेकते हुए बोले इससे डर गए क्या ? मेरे मुँह से आवाज ना निकली। भाई साहब ने कहा बैठो बताता हु ये चुन्नी तुम्हारे लिए नहीं किसी और के लिए ओडी थी।
मैंने पुछा क्या मतलब, उन्होंने कहा कोई आशिक है जो मेरे किचन की खिड़की पर सामने की बिल्डिंग से लेजर लाइट मारता है - यही कोई सात बजे के करीब। ये सिलसिला लगभग २ महीने से चल रहा है। मैंने पुछा भाई साहब ये शुरू कैसे हुआ , उन्होंने कहा एक दिन में खाना बना रहा था तब मुझ पर लाइट पड़ी, तभी से मैंने नोटिस किया। अगले दिन भी यही सिलसिला शुरू हुआ तो मैंने उस लाइट मारने वाले को सम्मान देने के लिए तुम्हारी भाभी की चुनी ओढ़ना शुरू कर दि - ताकि उसे थोड़ा अच्छी फीलिंग आये। मैंने थोड़ा गुस्ताखी करते हुए पुछा, भाई साहब माफ़ करना कही वो आशिक भाभी का तो नहीं। उन्होंने कहा, तेरी भाभी से जायदा तो मै किचन में रहता हु वो तो लेट आती है। जैसे आज तुम इस चुन्नी से डर गए वैसे ही एक दिन तुम्हारी भाभी भी डर गयी थी। मैंने पुछा कैसे - उन्होंने कहा एक दिन मै सूप पिने में और किताब पड़ने में इतना मशगूल हो गया था की चुन्नी उतारना ही भूल गया था। जब तुम्हारी भाभी आयी तो उसने मुझे इस हालत में देखा, तो रोता हुआ चेहरा बना कर पुछा ये क्या ? मैंने उसे भी यही बताया की उस लाइट वाले को अच्छी फीलिंग के लिए चुन्नी पहनी है। तब से वो मेरे लिए कोई ना कोई चुन्नी बैड पर निकल कर जाया करती है।
मेरा और कसाना का तूफ़ान भी थम गया था। मैंने उस-सु कही चल बहुत बढ़िया लगा तुझसु मिल कर।
कैलाश बिष्ट
अल्मोड़ा