Heal with Homeopathy

Heal with Homeopathy Homeopathy Knowledge
Bimari samjho, sirf dawa nahi
Knowledge before medicine
Health awareness & education
Natural • Safe • Trusted
(11)

होम्योपैथिक दवा सिनापिस अल्बा Ø (Sinapis Alba Ø) और इसकी विभिन्न पोटेंसीText Credit – Dr. शमीम अहमददोस्तो, आज हम उस होम्...
20/08/2026

होम्योपैथिक दवा सिनापिस अल्बा Ø (Sinapis Alba Ø) और इसकी विभिन्न पोटेंसी

Text Credit – Dr. शमीम अहमद
दोस्तो, आज हम उस होम्योपैथिक दवा के बारे में बात करेंगे जिसका उल्लेख गले की खराश, खांसी, श्वासनली में जलन, साइनस से जुड़ी परेशानी, नाक बंद होना, सिरदर्द, अपच, पेट में जलन, त्वचा पर रैशेज और कुछ एलर्जी संबंधी लक्षणों के संदर्भ में होम्योपैथिक साहित्य में मिलता है। यह है सिनापिस अल्बा Ø (Sinapis Alba Ø / White Mustard)।

यह दवा सफेद सरसों के बीजों से संबंधित है। होम्योपैथिक संदर्भों में इसे गले और श्वसन तंत्र से जुड़े कुछ लक्षणों में उपयोग की जाने वाली दवा के रूप में वर्णित किया गया है। जब मरीज को गले में खराश, खांसी या नाक बंद होने जैसी परेशानी हो, तो उचित केस-टेकिंग के बाद होम्योपैथिक चिकित्सक इसके उपयोग पर विचार कर सकते हैं।

क्या है Sinapis Alba Ø?

Sinapis Alba Ø एक होम्योपैथिक मदर टिंक्चर है, जो Sinapis alba (White Mustard) से तैयार की जाती है।

मुख्य प्राकृतिक घटकों में सिनिग्रिन (Sinigrin) तथा सरसों से संबंधित अन्य यौगिक पाए जाते हैं। पारंपरिक रूप से White Mustard का उपयोग भोजन और हर्बल परंपराओं में भी किया जाता रहा है।

उत्पत्ति और इतिहास

Sinapis alba यूरोप, एशिया और भूमध्यसागरीय क्षेत्र से संबंधित पौधा है। पारंपरिक चिकित्सा में सफेद सरसों का उपयोग विभिन्न पाचन और श्वसन संबंधी शिकायतों के संदर्भ में किया जाता रहा है।

होम्योपैथिक साहित्य में Sinapis Alba का उल्लेख गले, नाक और श्वसन तंत्र से जुड़े कुछ लक्षणों तथा अन्य शारीरिक शिकायतों के संदर्भ में मिलता है।

क्लिनिकल की-नोट:

“Sore throat, cough. Nasal obstruction. Sinusitis. Gastric irritation. Useful in catarrhal affections of throat and respiratory tract.”

इन लक्षणों को होम्योपैथिक साहित्य में दवा के पारंपरिक संकेत (indications) के रूप में देखा जाता है। किसी व्यक्ति में दवा का चुनाव उसके पूरे symptom picture के आधार पर किया जाता है।

कैसे बनती है?

सफेद सरसों से होम्योपैथिक मदर टिंक्चर (Ø) तैयार की जाती है। इसके बाद होम्योपैथिक फार्माकोपिया के अनुसार विभिन्न पोटेंसी तैयार की जाती हैं, जैसे 3X, 6C, 30C आदि।

Ø फॉर्म को मदर टिंक्चर कहा जाता है, जबकि अलग-अलग पोटेंसी का चयन होम्योपैथिक चिकित्सक केस और लक्षणों के अनुसार कर सकते हैं।

उपयोग और संभावित संदर्भ

1. गले की खराश और असहजता – Sore throat
2. खांसी – Cough
3. साइनस से जुड़ी परेशानी – Sinus-related complaints
4. नाक बंद होना – Nasal obstruction
5. सिरदर्द – Headache, विशेषकर sinus-related symptoms के संदर्भ में
6. अपच और पेट में जलन – Gastric discomfort
7. त्वचा पर रैशेज – Skin eruptions
8. एलर्जी संबंधी लक्षण – Allergic complaints

इन सभी स्थितियों के कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं, इसलिए केवल लक्षण देखकर किसी एक दवा को सभी के लिए उपयुक्त मानना उचित नहीं है।

विभिन्न पोटेंसी के संबंध में सामान्य होम्योपैथिक संदर्भ

* Ø: मदर टिंक्चर; कुछ होम्योपैथिक चिकित्सक गले और श्वसन संबंधी शिकायतों में इसके उपयोग पर विचार करते हैं।
* 6C: कुछ तीव्र लक्षणों में होम्योपैथिक केस के अनुसार उपयोग किया जा सकता है।
* 30C: लक्षणों और व्यक्ति की संपूर्ण symptom picture के आधार पर उपयोग किया जा सकता है।
* 200C: अपेक्षाकृत उच्च पोटेंसी; इसका चयन चिकित्सकीय मूल्यांकन के अनुसार किया जाना चाहिए।
* 1M: उच्च पोटेंसी; इसका उपयोग और repetition अनुभवी होम्योपैथिक चिकित्सक के मार्गदर्शन में करना बेहतर होता है।

नोट: पोटेंसी और डोज सभी व्यक्तियों के लिए एक जैसी नहीं होती। इसलिए केवल किसी सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर दवा की मात्रा या repetition तय न करें।

दवाओं के कॉम्बिनेशन का उल्लेख

1. गले की खराश / खांसी:
Sinapis Alba Ø + Phytolacca Ø + Rumex 30C

2. साइनस से जुड़ी शिकायतें:
Sinapis Alba Ø + Kali B**h 30C + Hydrastis Ø

3. अपच से जुड़ी शिकायतें:
Sinapis Alba Ø + Nux Vomica 30C + Carbo Veg 30C

ये केवल होम्योपैथिक साहित्य/प्रैक्टिस में बताए जाने वाले उदाहरण हैं। हर व्यक्ति के लिए एक ही combination उपयुक्त हो, यह जरूरी नहीं है। दवाओं का चयन व्यक्ति के लक्षणों और चिकित्सकीय मूल्यांकन के अनुसार किया जाना चाहिए।

रिसर्च और क्लिनिकल अनुभव

Sinapis alba में मौजूद प्राकृतिक यौगिकों पर विभिन्न वैज्ञानिक और पारंपरिक अध्ययनों में चर्चा हुई है। White Mustard के कुछ घटकों से जुड़े digestive, irritant और अन्य biological effects का अध्ययन किया गया है।

हालांकि, इन पारंपरिक/प्रयोगशाला अध्ययनों को सीधे होम्योपैथिक दवा की clinical effectiveness का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। होम्योपैथिक उपयोग के संबंध में उपलब्ध प्रमाणों को समझने के लिए वैज्ञानिक शोध और चिकित्सकीय मूल्यांकन दोनों को ध्यान में रखना जरूरी है।

सावधानियां

* अधिक मात्रा में कच्ची/सघन सरसों या उसके घटकों का सेवन पेट में जलन या अन्य परेशानी पैदा कर सकता है।
* गर्भावस्था, स्तनपान, छोटे बच्चों या किसी गंभीर बीमारी में किसी भी होम्योपैथिक/हर्बल उत्पाद का उपयोग करने से पहले योग्य चिकित्सक से सलाह लेना बेहतर है।
* यदि लक्षण लंबे समय तक बने रहें, बार-बार हों या बढ़ रहे हों, तो उचित चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
* सांस लेने में परेशानी, तेज बुखार, चेहरे/गले में अधिक सूजन, निगलने में गंभीर कठिनाई या अचानक गंभीर एलर्जी जैसे लक्षण हों तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
* दवा की पोटेंसी, मात्रा और repetition व्यक्ति की स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है।

सिनापिस अल्बा Ø गले, श्वसन तंत्र और पाचन से जुड़ी कुछ शिकायतों के संदर्भ में होम्योपैथिक साहित्य में वर्णित दवा है। खराश, खांसी, नाक बंद होना, साइनस से जुड़ी परेशानी या पाचन संबंधी असहजता जैसे लक्षणों में इसका उल्लेख मिलता है।

लेकिन किसी भी दवा को सभी लोगों के लिए समान रूप से प्रभावी या उपयुक्त मानना सही नहीं है। सही दवा और पोटेंसी का चुनाव व्यक्ति के लक्षणों, स्वास्थ्य स्थिति और चिकित्सकीय मूल्यांकन पर निर्भर करता है।
Heal with Homeopathy

दोस्तो! लीवर हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। यह भोजन के पाचन, पोषक तत्वों के भंडारण, पित्त (Bile) के न...
14/08/2026

दोस्तो! लीवर हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। यह भोजन के पाचन, पोषक तत्वों के भंडारण, पित्त (Bile) के निर्माण तथा शरीर की प्राकृतिक प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अनियमित खान-पान, अत्यधिक तैलीय भोजन, शराब, कुछ दवाओं का लंबे समय तक सेवन तथा तनावपूर्ण जीवनशैली के कारण लीवर की सामान्य कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। ऐसी परिस्थितियों में ADEL 82 Hepat Liver Tonic को लीवर और पाचन तंत्र के लिए सहयोग देने वाला एक प्रसिद्ध जर्मन होम्योपैथिक टॉनिक माना जाता है।

मुख्य घटक एवं उनके पारंपरिक उपयोग

Carduus marianus 4X – लीवर के सामान्य स्वास्थ्य और कार्यक्षमता को सहयोग देने के लिए पारंपरिक रूप से उपयोग किया जाता है। फैटी लीवर, शराब या कुछ दवाओं के कारण प्रभावित लीवर तथा लीवर की कमजोरी जैसी स्थितियों में सहायक रूप से उपयोग किया जाता है।

Cynara scolymus MT (Artichoke) – पाचन एवं पित्त संबंधी सामान्य प्रक्रियाओं को सहयोग देने के लिए पारंपरिक रूप से उपयोग किया जाता है। वसा के पाचन में सहायता करने वाली प्राकृतिक प्रक्रियाओं को समर्थन दे सकता है।

Boldo 2X – लीवर एवं पित्ताशय की सामान्य कार्यप्रणाली को सहयोग देने के लिए पारंपरिक रूप से उपयोग किया जाता है। गैस, पेट फूलना, कब्ज तथा पाचन संबंधी सामान्य असुविधाओं में सहायक रूप से उपयोग किया जाता है।

Taraxacum officinale MT – लीवर और पाचन तंत्र की सामान्य कार्यप्रणाली को सहयोग देने के लिए पारंपरिक रूप से उपयोग किया जाता है। भूख और पाचन से जुड़ी सामान्य समस्याओं में सहायक रूप से उपयोग किया जाता है।

Chelidonium majus 6X – लीवर और पित्ताशय से संबंधित पारंपरिक होम्योपैथिक उपयोगों के लिए जाना जाता है। दाहिने ऊपरी पेट में भारीपन तथा पित्त संबंधी सामान्य असुविधाओं में सहायक रूप से उपयोग किया जाता है।

Fumaria officinalis 6X – शरीर की सामान्य मेटाबॉलिक प्रक्रियाओं और लीवर की सामान्य कार्यप्रणाली को सहयोग देने के लिए पारंपरिक रूप से उपयोग किया जाता है।

Bryonia alba 6X – पाचन संबंधी सामान्य असुविधाओं तथा कब्ज जैसी समस्याओं में पारंपरिक रूप से उपयोग किया जाता है।

Hydrastis canadensis 6X – कमजोर पाचन, भूख की कमी तथा सामान्य पाचन संबंधी असुविधाओं में सहायक रूप से उपयोग किया जाता है।

संभावित लाभ

• लीवर के सामान्य स्वास्थ्य और कार्यक्षमता को सहयोग देने में सहायक।
• फैटी लीवर जैसी स्थिति में चिकित्सकीय देखरेख के साथ सहायक रूप से उपयोग किया जा सकता है।
• गैस, अपच, एसिडिटी और भूख की कमी जैसी सामान्य पाचन संबंधी समस्याओं में सहायक।
• पीलिया जैसी स्थिति के बाद सामान्य रिकवरी के दौरान चिकित्सकीय सलाह के साथ सहायक रूप से उपयोग किया जा सकता है।
• लीवर से संबंधित सामान्य भारीपन और पाचन संबंधी असुविधा में सहयोगी।
• शरीर की प्राकृतिक मेटाबॉलिक एवं पाचन प्रक्रियाओं को समर्थन देने में सहायक।
• पाचन शक्ति एवं भूख से जुड़ी सामान्य समस्याओं में सहयोगी।

सेवन विधि

वयस्क: 5–10 मि.ली. (1–2 चम्मच) आधे कप पानी में मिलाकर दिन में 3 बार या चिकित्सक/लेबल पर दिए निर्देश के अनुसार।

बच्चे: बच्चों के लिए मात्रा उम्र और स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है, इसलिए केवल चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपयोग करें।

सावधानियाँ

गंभीर लीवर समस्या, लीवर फेलियर या पित्त नली (Biliary obstruction) से संबंधित समस्या में बिना चिकित्सकीय सलाह के इसका उपयोग न करें।

उपयोग के दौरान शराब, अत्यधिक तैलीय भोजन, जंक फूड तथा अत्यधिक मीठे पदार्थों का सेवन सीमित रखना सामान्य स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकता है।

यदि पीलिया, तेज बुखार, लगातार उल्टी, अत्यधिक पेट दर्द या लीवर एंजाइम (SGOT/SGPT) में बहुत अधिक वृद्धि जैसी स्थिति हो, तो योग्य चिकित्सक से समय पर परामर्श लेना आवश्यक है।

ADEL 82 Hepat Liver Tonic एक बहु-घटक (Multi-ingredient) जर्मन होम्योपैथिक टॉनिक है, जिसमें लीवर की सामान्य कार्यप्रणाली, पाचन, पित्त संबंधी प्रक्रियाओं तथा शरीर की प्राकृतिक प्रक्रियाओं को सहयोग देने के लिए विभिन्न घटक शामिल हैं। इसे विशेष रूप से फैटी लीवर, लीवर की कमजोरी, अपच, गैस, भूख की कमी और पीलिया के बाद की रिकवरी जैसी स्थितियों में सहायक रूप से उपयोग किया जा सकता है। हालांकि, गंभीर या लगातार बनी रहने वाली लीवर संबंधी समस्या में इसका उपयोग योग्य चिकित्सक की सलाह के साथ ही करना उचित है।
Heal with Homeopathy

होम्योपैथिक दवा जुनिपेरस कम्यूनिस Ø (Juniperus Communis Ø) और इसकी विभिन्न पोटेंसीText Credit – Dr. शमीम अहमददोस्तो, आज ...
13/08/2026

होम्योपैथिक दवा जुनिपेरस कम्यूनिस Ø (Juniperus Communis Ø) और इसकी विभिन्न पोटेंसी

Text Credit – Dr. शमीम अहमद
दोस्तो, आज हम उस दवा की बात करेंगे जिसे होम्योपैथिक साहित्य में किडनी स्टोन, यूरिनरी ट्रैक्ट से जुड़ी परेशानी, पेशाब में जलन, मूत्र में रुकावट, गाउट, हाई यूरिक एसिड, पाचन कमजोरी, अपच, गैस, महिलाओं में मासिक धर्म से जुड़ी परेशानी और त्वचा संबंधी समस्याओं में उपयोग किए जाने का उल्लेख मिलता है। यह है जुनिपेरस कम्यूनिस Ø (Juniperus Communis Ø)।

यह दवा जुनिपर (Juniper) प्लांट से तैयार की जाती है। होम्योपैथिक उपयोग में इसे किडनी और यूरिनरी सिस्टम से जुड़ी समस्याओं में उपयोग की जाने वाली दवा के रूप में जाना जाता है।

जब मरीज कहे, “डॉक्टर साहब, पेशाब में जलन है, पथरी है, यूरिक एसिड बढ़ा है, गैस बनती है” – तो होम्योपैथिक चिकित्सक लक्षणों के अनुसार इस दवा पर विचार कर सकते हैं। किसी निश्चित समय में राहत मिलने की गारंटी नहीं होती।

क्या है Juniperus Communis Ø?

Juniperus Communis Ø एक होम्योपैथिक मदर टिंक्चर दवा है, जो Juniperus communis (Juniper) प्लांट से बनाई जाती है।

मुख्य कंपाउंड: टेरपिन, फ्लेवोनॉइड्स, एसेंशियल ऑयल – Juniperus communis में पाए जाने वाले ये प्राकृतिक घटक पारंपरिक रूप से मूत्रवर्धक (Diuretic) प्रभाव से जुड़े माने जाते हैं। इसके विभिन्न पारंपरिक उपयोगों में यूरिनरी सिस्टम और पाचन से संबंधित समस्याएँ शामिल हैं।

उत्पत्ति और इतिहास:

जुनिपेरस कम्यूनिस यूरोप, एशिया और उत्तरी अमेरिका में पाया जाने वाला पौधा है। पारंपरिक चिकित्सा में इसे किडनी, गाउट और पाचन संबंधी समस्याओं में इस्तेमाल किया जाता रहा है। होम्योपैथी में इसका उल्लेख यूरिनरी ट्रैक्ट, किडनी स्टोन और गाउट से जुड़े लक्षणों में मिलता है।

क्लिनिकल की-नोट:

“Kidney stones, urinary tract infections, burning in urethra. Gout, high uric acid. Digestive atony. Menstrual complaints. Diuretic action. Useful in renal and vesical calculi.”

कैसे बनती है?

पौधे के विभिन्न भागों से मदर टिंक्चर (Ø) तैयार की जाती है। फिर 3X, 6C, 30C आदि पोटेंसी बनाई जाती हैं। Ø फॉर्म का उपयोग होम्योपैथिक प्रैक्टिस में किडनी स्टोन और यूरिक एसिड से जुड़े लक्षणों में किया जाता है।

उपयोग और फायदे:

1. किडनी स्टोन – Kidney Stones and Gravel
2. पेशाब में जलन – Burning in Urinary Tract
3. यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन – UTI
4. हाई यूरिक एसिड – Uric Acid Diathesis
5. गाउट – Gout and Joint Pains
6. पाचन कमजोरी – Digestive Atony
7. अपच और गैस – Indigestion and Flatulence
8. मासिक धर्म की समस्या – Menstrual Irregularities

विभिन्न पोटेंसी जो विभिन्न लक्षणों में इस्तेमाल की जाती हैं:

Ø Potency: किडनी स्टोन, यूरिक एसिड और जलन से जुड़े लक्षणों में – दिन में 10–15 बूंदें 3 बार, केवल चिकित्सकीय सलाह के अनुसार।

6C Potency: तीव्र जलन और दर्द से जुड़े लक्षणों में – दिन में 4 बार, चिकित्सक की सलाह के अनुसार।

30C Potency: क्रॉनिक गाउट और UTI से जुड़े लक्षणों में – दिन में 2–3 बार, चिकित्सकीय सलाह के अनुसार।

200C Potency: पुरानी यूरिक एसिड से जुड़ी समस्या में – सप्ताह में 1 डोज, चिकित्सक की सलाह के अनुसार।

1M Potency: गहरी पुरानी स्थिति में – महीने में 1 डोज, चिकित्सक की सलाह के अनुसार।

दवाओं के कॉम्बिनेशन:

1. किडनी स्टोन: Juniperus Communis Ø + Berberis Vulgaris Ø + Lycopodium 30C

2. गाउट / यूरिक एसिड: Juniperus Communis Ø + Colchicum 30C + Ledum Pal 30C

3. यूरिनरी जलन: Juniperus Communis Ø + Cantharis 30C + Sarsaparilla 30C

रिसर्च और क्लिनिकल परिणाम (2020–2025)

• क्लिनिकल अनुभवों में Juniperus communis का किडनी, यूरिनरी सिस्टम और गाउट से जुड़े लक्षणों में उपयोग बताया गया है।
• कुछ अध्ययनों में Juniperus communis के Diuretic और Anti-inflammatory प्रभावों पर चर्चा की गई है। हालांकि, किसी बीमारी के इलाज या निश्चित परिणाम के लिए मजबूत clinical evidence मानना उचित नहीं है।

सावधानियां:

• अधिक मात्रा में लेने से पेट में हल्की जलन या डायरिया हो सकता है।
• गर्भवती महिलाएँ डॉक्टर की सलाह के बिना इसका प्रयोग न करें।
• लंबे समय तक उपयोग करने से पहले योग्य चिकित्सक से सलाह लेना बेहतर है।
• बड़े किडनी स्टोन, तेज दर्द, पेशाब रुकना, बुखार या पेशाब में खून जैसी स्थिति में चिकित्सकीय देखरेख आवश्यक है।

जुनिपेरस कम्यूनिस Ø किडनी स्टोन, गाउट और यूरिनरी जलन से जुड़े लक्षणों में होम्योपैथिक प्रैक्टिस में उपयोग की जाने वाली दवा है। किसी भी होम्योपैथिक दवा का प्रयोग योग्य होम्योपैथिक चिकित्सक की सलाह से ही करें।
Heal with Homeopathy

होम्योपैथिक दवा (Coleus Aromatica Q) — कोलियस एरोमैटिका Q और इसकी विभिन्न पोटेंसीText Credit – Dr. शमीम अहमददोस्तो, आज ह...
12/08/2026

होम्योपैथिक दवा (Coleus Aromatica Q) — कोलियस एरोमैटिका Q और इसकी विभिन्न पोटेंसी

Text Credit – Dr. शमीम अहमद
दोस्तो, आज हम उस होम्योपैथिक दवा की बात करेंगे जिसका उल्लेख श्वास नली से जुड़ी शिकायतों, अस्थमा, सूखी खांसी, ब्रोंकाइटिस, पाचन संबंधी परेशानी, अपच, गैस, पेट की असहजता, मुंह की बदबू, त्वचा संबंधी शिकायतों, एलर्जी और सामान्य कमजोरी के संदर्भ में होम्योपैथिक साहित्य में मिलता है।

यह है कोलियस एरोमैटिका Q (Coleus Aromatica Q / Indian Borage / पत्थरचूर)।

यह दवा Coleus aromaticus प्लांट की ताजी पत्तियों से तैयार की जाने वाली होम्योपैथिक मदर टिंक्चर के रूप में जानी जाती है। होम्योपैथिक उपयोग में इसे श्वसन और पाचन तंत्र से जुड़ी विभिन्न शिकायतों के संदर्भ में वर्णित किया जाता है।

जब किसी व्यक्ति में सांस से जुड़ी परेशानी, सूखी खांसी, पेट में गैस या अपच जैसी शिकायतें हों, तो होम्योपैथिक चिकित्सक symptom picture के अनुसार इस दवा पर विचार कर सकते हैं। किसी भी दवा से मिलने वाला परिणाम व्यक्ति-विशेष पर निर्भर कर सकता है।

क्या है Coleus Aromatica Q?

Coleus Aromatica Q एक होम्योपैथिक मदर टिंक्चर दवा है, जो Coleus aromaticus (Indian Borage) प्लांट की ताजी पत्तियों से बनाई जाती है।

इस पौधे में carvacrol, thymol और flavonoids जैसे विभिन्न प्राकृतिक compounds पाए जाते हैं। इन plant compounds पर अलग-अलग वैज्ञानिक और प्रयोगात्मक स्तर पर अध्ययन किए गए हैं।

होम्योपैथिक संदर्भ में Coleus Aromatica Q का उल्लेख मुख्य रूप से श्वसन, पाचन और कुछ अन्य शिकायतों के संदर्भ में किया जाता है।

उत्पत्ति और इतिहास

कोलियस एरोमैटिका भारत, अफ्रीका और अन्य उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाया जाने वाला सुगंधित पौधा है।

पारंपरिक चिकित्सा और लोक उपयोग में इसकी पत्तियों का इस्तेमाल खांसी, पाचन संबंधी परेशानी और अन्य सामान्य शिकायतों के संदर्भ में किया जाता रहा है।

होम्योपैथी में भी इसका उल्लेख श्वास, पाचन और कुछ एलर्जी या त्वचा संबंधी शिकायतों के संदर्भ में मिलता है।

क्लिनिकल की-नोट

“Respiratory affections – asthma, bronchitis, dry cough. Digestive disorders – indigestion, flatulence. Skin complaints and allergies. Useful in spasmodic cough and gastric irritation.”

ये होम्योपैथिक साहित्य में वर्णित traditional indications हैं। इन्हें किसी बीमारी के निश्चित इलाज या guaranteed result के रूप में नहीं समझना चाहिए।

कैसे बनती है?

ताजी पत्तियों से मदर टिंक्चर (Q) तैयार की जाती है। इसके बाद होम्योपैथिक पद्धति के अनुसार अलग-अलग potencies तैयार की जा सकती हैं, जैसे 3X, 6C, 30C आदि।

Q form को इस दवा की मदर टिंक्चर के रूप में जाना जाता है और होम्योपैथिक practice में इसका उपयोग अलग-अलग symptom picture के आधार पर किया जाता है।

उपयोग और पारंपरिक रूप से बताए जाने वाले क्षेत्र

1. अस्थमा और श्वास संबंधी शिकायतें – Bronchial asthma और respiratory discomfort के संदर्भ में।

2. सूखी खांसी – Dry irritating cough के संदर्भ में।

3. ब्रोंकाइटिस – Bronchial irritation और respiratory complaints के संदर्भ में।

4. अपच और गैस – Indigestion and flatulence।

5. पेट दर्द / असहजता – Gastric colic और digestive discomfort के संदर्भ में।

6. एलर्जी और त्वचा संबंधी शिकायतें – Skin allergies and eruptions।

7. मुंह की बदबू – Halitosis।

8. General Debility – सामान्य कमजोरी, विशेषकर जब respiratory complaints के साथ weakness भी मौजूद हो।

इन उपयोगों को पारंपरिक/होम्योपैथिक indications के रूप में देखा जाना चाहिए, किसी बीमारी के निश्चित उपचार के दावे के रूप में नहीं।

विभिन्न पोटेंसी जो विभिन्न शिकायतों में उपयोग की जाती हैं

Q

अस्थमा, सूखी खांसी, अपच और गैस जैसी शिकायतों के संदर्भ में होम्योपैथिक practice में उपयोग का उल्लेख मिलता है।

Dose: 10–15 drops, दिन में 3 बार का उल्लेख कुछ पारंपरिक उपयोगों में मिलता है; लेकिन मात्रा व्यक्ति की स्थिति के अनुसार योग्य चिकित्सक से तय करना बेहतर है।

6C

तीव्र खांसी, irritation और संबंधित symptom picture में उपयोग का उल्लेख किया जाता है।

Dose: दिन में 4 बार का उल्लेख पारंपरिक निर्देशों में मिल सकता है, लेकिन potency और frequency व्यक्ति-विशेष के अनुसार बदल सकती है।

30C

क्रॉनिक respiratory complaints और allergy-related symptom picture में उपयोग का उल्लेख होम्योपैथिक practice में मिलता है।

Dose: दिन में 2–3 बार का उल्लेख किया जाता है; व्यक्तिगत उपयोग के लिए चिकित्सकीय सलाह उचित है।

200C

पुरानी या बार-बार होने वाली respiratory complaints में इसका उपयोग कुछ होम्योपैथिक practices में किया जाता है।

Dose: हफ्ते में 1 dose का उल्लेख मिलता है, लेकिन high potency का उपयोग चिकित्सकीय सलाह के अनुसार किया जाना चाहिए।

1M

गहरी और लंबे समय से चली आ रही symptom picture में high potency के रूप में इसका उल्लेख किया जाता है।

Dose: महीने में 1 dose का उल्लेख पारंपरिक practice में मिल सकता है; इसे self-medication के रूप में लेने के बजाय qualified homeopathic practitioner की सलाह लेना बेहतर है।

महत्वपूर्ण: ऊपर दी गई doses सामान्य जानकारी के रूप में हैं। हर व्यक्ति के लिए एक जैसी dose, frequency या duration उपयुक्त हो, यह जरूरी नहीं है।

दवाओं के कॉम्बिनेशन का उल्लेख

होम्योपैथिक practice में symptom picture के आधार पर अलग-अलग medicines का चयन या combination किया जाता है। उदाहरण के तौर पर:

1. अस्थमा / सूखी खांसी:
Coleus Aromatica Q + Blatta Orientalis 30C + Aspidosperma Q

2. अपच / गैस:
Coleus Aromatica Q + Nux Vomica 30C + Carbo Veg 30C

3. एलर्जी / त्वचा संबंधी शिकायतें:
Coleus Aromatica Q + Sulphur 30C + Azadirachta Indica Q

इन combinations का उपयोग व्यक्ति के symptoms, medical history और overall condition के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इन्हें किसी भी व्यक्ति के लिए निश्चित prescription या guaranteed treatment के रूप में नहीं समझना चाहिए।

रिसर्च और क्लिनिकल जानकारी (2020–2025)

Coleus aromaticus में मौजूद विभिन्न phytochemicals पर laboratory, experimental और traditional-use आधारित research की गई है।

इस पौधे में पाए जाने वाले compounds के संदर्भ में bronchodilator, carminative, antimicrobial और anti-inflammatory properties पर अध्ययन किए गए हैं।

हालांकि, इन findings को किसी specific disease के निश्चित इलाज या हर व्यक्ति में निश्चित clinical benefit के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है।

होम्योपैथिक clinical experience में भी Coleus Aromatica का उल्लेख respiratory और digestive complaints के संदर्भ में मिलता है।

सावधानियां

* किसी भी medicinal preparation का उपयोग उचित सलाह के अनुसार करें।
* अधिक मात्रा लेने से unwanted digestive effects जैसे दस्त या पेट की परेशानी हो सकती है।
* गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएं उपयोग से पहले डॉक्टर/स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।
* बच्चों और बुजुर्गों में self-medication से बचना बेहतर है।
* यदि सांस फूलना बहुत ज्यादा हो, सीने में दर्द हो, सांस लेने में गंभीर परेशानी हो या लक्षण लगातार बने रहें, तो तुरंत उचित medical evaluation करवाएं।
* लंबे समय तक चलने वाली खांसी, सांस की समस्या या बार-बार होने वाले respiratory symptoms में केवल self-medication पर निर्भर न रहें।
* किसी भी high potency जैसे 200C या 1M का उपयोग योग्य होम्योपैथिक चिकित्सक की सलाह से करना बेहतर है।

निष्कर्ष

Coleus Aromatica Q यानी Indian Borage / पत्थरचूर एक होम्योपैथिक मदर टिंक्चर है जिसका उल्लेख श्वसन और पाचन संबंधी विभिन्न शिकायतों के संदर्भ में मिलता है।

इसके पारंपरिक उपयोगों में सूखी खांसी, respiratory complaints, ब्रोंकाइटिस से जुड़ी शिकायतें, अपच, गैस, पेट की असहजता, एलर्जी और कुछ त्वचा संबंधी complaints का उल्लेख किया जाता है।

इसकी अलग-अलग potencies जैसे Q, 6C, 30C, 200C और 1M होम्योपैथिक practice में अलग-अलग symptom pictures के अनुसार उपयोग की जाती हैं।

हालांकि, किसी भी दवा के बारे में निश्चित इलाज, guaranteed result या निश्चित समय में राहत का दावा नहीं किया जा सकता। सही medicine, potency, dose और duration का चुनाव व्यक्ति की स्थिति के अनुसार योग्य चिकित्सक द्वारा किया जाना चाहिए।
Heal with Homeopathy

होम्योपैथिक दवा (Tellurium Metallicum) टेल्यूरियम और इसकी विभिन्न पोटेंसीText Credit – Dr. शमीम अहमददोस्तो, आज हम उस होम...
11/08/2026

होम्योपैथिक दवा (Tellurium Metallicum) टेल्यूरियम और इसकी विभिन्न पोटेंसी

Text Credit – Dr. शमीम अहमद
दोस्तो, आज हम उस होम्योपैथिक दवा की बात करेंगे जिसका उल्लेख त्वचा पर गोलाकार दाद (Ringworm), एक्जिमा जैसे त्वचा संबंधी लक्षणों, त्वचा की अप्रिय गंध के साथ होने वाले दानों, कान से आने वाले अप्रिय स्राव, शरीर से अप्रिय गंध, बाल झड़ने, पीठ दर्द, साइटिका, नर्वस कंपकंपी, सिरदर्द और त्वचा व कान से जुड़े पुराने लक्षणों के संदर्भ में होम्योपैथिक साहित्य में मिलता है। यह है टेल्यूरियम (Tellurium / Tellurium Metallicum)।

यह दवा टेल्यूरियम धातु से तैयार की जाती है। होम्योपैथिक साहित्य में इसे विशेष रूप से अप्रिय गंध वाले त्वचा और कान संबंधी लक्षणों के संदर्भ में वर्णित किया गया है।

जब मरीज कहे, “डॉक्टर साहब, शरीर से बदबू आ रही है, दाद जैसा लक्षण फैल रहा है या कान से अप्रिय स्राव आ रहा है,” तो ऐसे लक्षणों में होम्योपैथिक चिकित्सक Tellurium को लक्षणों के आधार पर विचार में ले सकते हैं।

क्या है Tellurium?

Tellurium एक होम्योपैथिक दवा है जो टेल्यूरियम धातु से तैयार की जाती है।

होम्योपैथिक साहित्य में इसका उल्लेख मुख्य रूप से त्वचा, कान और कुछ नर्वस सिस्टम से जुड़े लक्षणों के संदर्भ में मिलता है। इसकी एक प्रमुख विशेषता अप्रिय या लहसुन जैसी गंध से जुड़े लक्षणों का वर्णन है।

उत्पत्ति और इतिहास

टेल्यूरियम एक दुर्लभ धातु है। होम्योपैथिक साहित्य में डॉ. बोएरिक और अन्य होम्योपैथिक चिकित्सकों द्वारा इसके प्रूविंग और लक्षणों का उल्लेख मिलता है।

इसमें Ringworm जैसे त्वचा संबंधी लक्षणों, अप्रिय गंध वाले त्वचा स्राव, कान से आने वाले अप्रिय स्राव और Sciatica जैसे लक्षणों का वर्णन मिलता है।

बोरिक का की-नोट

“Offensive discharges. Ringworm, especially on covered parts. Eczema with offensive odour. Chronic otorrhoea with thick, offensive discharge. Garlic-like odour of breath and sweat. Sciatica. Back pain. Trembling and weakness.”

अर्थ:
अप्रिय गंध वाले स्राव, विशेष रूप से ढके हुए हिस्सों में Ringworm जैसे लक्षण, अप्रिय गंध के साथ त्वचा संबंधी लक्षण, गाढ़े और अप्रिय स्राव के साथ कान के पुराने लक्षण, सांस और पसीने में लहसुन जैसी गंध, साइटिका, पीठ दर्द, कंपकंपी और कमजोरी जैसे लक्षणों का वर्णन मिलता है।

कैसे बनती है?

टेल्यूरियम मेटल से होम्योपैथिक विधि द्वारा ट्रिटुरेशन आदि प्रक्रियाओं के माध्यम से विभिन्न पोटेंसी तैयार की जाती हैं।

उपयोग और लक्षणों का संदर्भ

रिंगवर्म (Dermatophytosis) – गोलाकार दाद जैसे त्वचा संबंधी लक्षण, खासकर ढके हुए हिस्सों पर।

एक्जिमा – अप्रिय गंध के साथ होने वाले त्वचा संबंधी लक्षण।

कान से अप्रिय स्राव – Chronic otorrhoea जैसे पुराने कान संबंधी लक्षण।

शरीर और सांस से अप्रिय गंध – Garlic-like odour जैसे लक्षण।

साइटिका – विशेष रूप से दायीं ओर के साइटिका जैसे दर्द का उल्लेख।

पीठ दर्द – Lumbar pain जैसे लक्षण।

नर्वस कंपकंपी – Trembling और weakness जैसे लक्षण।

बाल झड़ना – अप्रिय गंध के साथ scalp से जुड़े लक्षणों के संदर्भ में उल्लेख मिलता है।

विभिन्न पोटेंसी

होम्योपैथी में Tellurium की अलग-अलग पोटेंसी जैसे 6C, 12C, 30C, 200C और 1M उपलब्ध हो सकती हैं। किस पोटेंसी और कितनी मात्रा में दवा लेनी है, यह व्यक्ति के लक्षण, स्थिति और चिकित्सकीय मूल्यांकन पर निर्भर करता है।

6C / 12C: कुछ तीव्र त्वचा या कान संबंधी लक्षणों में होम्योपैथिक चिकित्सक द्वारा विचार किया जा सकता है।

30C: Ringworm जैसे त्वचा संबंधी लक्षण, एक्जिमा और साइटिका जैसे लक्षणों के संदर्भ में इसका उल्लेख मिलता है।

200C: पुराने और बार-बार दिखाई देने वाले अप्रिय गंध वाले त्वचा या कान संबंधी लक्षणों में चिकित्सक द्वारा लक्षणों के आधार पर विचार किया जा सकता है।

1M: लंबे समय से चले आ रहे या गहरे स्तर के लक्षणों में इसका चयन चिकित्सकीय मूल्यांकन के आधार पर किया जा सकता है।

पोटेंसी और सेवन की आवृत्ति स्वयं तय न करें। होम्योपैथिक दवा का चुनाव व्यक्ति के लक्षणों और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार करना उचित है।

दवाओं के कॉम्बिनेशन का उल्लेख

होम्योपैथी में अलग-अलग दवाओं का चयन व्यक्ति के लक्षणों के अनुसार किया जाता है। उदाहरण के रूप में साहित्य में विभिन्न दवाओं का अलग-अलग संदर्भों में उल्लेख मिलता है:

रिंगवर्म / एक्जिमा: Tellurium 30C, Sulphur 30C और Sepia 30C जैसी दवाओं का लक्षणों के अनुसार विचार किया जा सकता है।

कान के अप्रिय स्राव वाले लक्षण: Tellurium 30C, Merc Sol 30C और Hepar Sulph 30C जैसी दवाओं का लक्षणों के अनुसार उल्लेख मिलता है।

साइटिका: Tellurium 30C, Rhus Tox 30C और Colocynthis 30C जैसी दवाओं पर लक्षणों के अनुसार विचार किया जा सकता है।

ध्यान रखें: कई होम्योपैथिक दवाओं को एक साथ लेने से पहले योग्य होम्योपैथिक चिकित्सक से सलाह लेना बेहतर है।

रिसर्च और क्लिनिकल जानकारी

Tellurium के बारे में होम्योपैथिक साहित्य में विभिन्न लक्षणों और प्रूविंग का वर्णन मिलता है। हालांकि, किसी भी बीमारी के उपचार के लिए इसकी प्रभावशीलता को लेकर मजबूत वैज्ञानिक प्रमाणों को लेकर सावधानी बरतना आवश्यक है।

किसी त्वचा या कान की समस्या में सही कारण की पहचान महत्वपूर्ण है। उदाहरण के लिए Ringworm एक fungal infection हो सकता है, जिसके लिए उचित चिकित्सकीय जांच और प्रमाणित उपचार की आवश्यकता पड़ सकती है।

सावधानियां

• किसी भी दवा को अपनी तरफ से लंबे समय तक या बार-बार न लें।
• गर्भावस्था या स्तनपान के दौरान चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।
• बच्चों और बुजुर्गों में दवा का उपयोग विशेषज्ञ की सलाह से करें।
• यदि त्वचा की समस्या तेजी से फैल रही हो, दर्द/सूजन बढ़ रही हो या कान से लगातार स्राव आ रहा हो, तो चिकित्सकीय जांच कराएं।
• दवा की पोटेंसी और सेवन की आवृत्ति व्यक्ति की स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है।
• 3 महीने का निश्चित कोर्स या 15 दिन का निश्चित गैप हर व्यक्ति के लिए जरूरी हो, ऐसा नहीं माना जाना चाहिए; उपचार की अवधि चिकित्सक तय करें।

निष्कर्ष

टेल्यूरियम (Tellurium Metallicum) एक ऐसी होम्योपैथिक दवा है जिसका उल्लेख विशेष रूप से अप्रिय गंध वाले त्वचा और कान संबंधी लक्षणों, Ringworm जैसे त्वचा संबंधी लक्षणों, साइटिका, पीठ दर्द और कंपकंपी जैसे विभिन्न लक्षणों के संदर्भ में होम्योपैथिक साहित्य में मिलता है।

जब किसी व्यक्ति में दाद जैसे त्वचा संबंधी लक्षण, अप्रिय गंध या कान से स्राव जैसे लक्षण दिखाई दें, तो सही कारण की पहचान और उचित चिकित्सकीय सलाह महत्वपूर्ण है।

कोई भी होम्योपैथिक दवा लेने से पहले योग्य होम्योपैथिक चिकित्सक की सलाह लें। यह जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्य के लिए है और किसी बीमारी के निदान या उपचार का विकल्प नहीं है।
Heal with Homeopathy

होम्योपैथिक दवा (Silicea 200) — सिलिसिया / साइलिशिया और इसकी विभिन्न पोटेंसीText credit – Dr. Shamim Ahmadदोस्तो, आँखों ...
10/08/2026

होम्योपैथिक दवा (Silicea 200) — सिलिसिया / साइलिशिया और इसकी विभिन्न पोटेंसी

Text credit – Dr. Shamim Ahmad
दोस्तो, आँखों की रोशनी और आँखों से जुड़े लक्षणों की सीरीज़ में आज चौदहवीं महत्वपूर्ण दवा है – सिलिसिया (Silicea / Silica / Flint)।

होम्योपैथिक साहित्य में Silicea का उल्लेख आँखों में लंबे समय से रहने वाली जलन, सूजन, स्राव, पलकों से जुड़े लक्षण, आँखों में विदेशी वस्तु जैसा महसूस होना, धुंधला दिखाई देना, आँखों की कमजोरी, पुरानी ब्लीफेराइटिस, कॉर्निया में धुंधलापन और आँखों से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे लक्षणों के संदर्भ में मिलता है।

सिलिसिया की मदर टिंक्चर (Q) के बारे में भी होम्योपैथिक साहित्य में विभिन्न उपयोगों का उल्लेख मिलता है। आँखों में किसी भी प्रकार की दवा या आई-वॉश का प्रयोग डॉक्टर/नेत्र विशेषज्ञ की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए।

यह दवा उन होम्योपैथिक मामलों में विचार की जाती है जहाँ लक्षण धीरे-धीरे विकसित हों, लंबे समय से बने हुए हों, स्राव या सूजन की प्रवृत्ति हो, ठंड से परेशानी बढ़ती हो और गर्मी से आराम महसूस होता हो।

जब मरीज कहे, “डॉक्टर साहब, आँखों में लंबे समय से स्राव है, पलकें सूजी रहती हैं, धुंधला दिखाई देता है या पुरानी समस्या के बाद आँखों में कमजोरी महसूस होती है” – तो होम्योपैथिक चिकित्सक लक्षणों की पूरी तस्वीर के आधार पर Silicea जैसी दवा पर विचार कर सकते हैं। किसी भी दवा का चयन व्यक्ति के लक्षणों और चिकित्सकीय मूल्यांकन पर निर्भर करता है।

क्या है Silicea?

Silicea एक होम्योपैथिक remedy है, जिसका स्रोत silica (flint / quartz) है।

मुख्य होम्योपैथिक संकेत: लंबे समय से बने रहने वाले सूजन/स्राव से जुड़े लक्षण, कमजोरी, संवेदनशीलता और ठंड से प्रभावित होने वाली शिकायतें।

उत्पत्ति और इतिहास

सिलिका प्रकृति में व्यापक रूप से पाई जाती है। होम्योपैथिक साहित्य में Silicea का लंबे समय से वर्णन मिलता है और इसे विभिन्न पुराने एवं लंबे समय से बने हुए लक्षणों के संदर्भ में इस्तेमाल की जाने वाली remedies में शामिल किया जाता है।

भारत में भी यह होम्योपैथिक practice में विभिन्न प्रकार के chronic symptoms के संदर्भ में जानी-पहचानी remedy है।

Clinical Key-note:

“Chronic suppurations. Pus discharges slowly. Eyes – chronic inflammation, foreign body sensation. Lids swollen, agglutinated. Vision weak, dim. Worse cold, new moon. Better warmth, wrapping up. Chilly, lack of vital heat.”

इन key-notes को किसी व्यक्ति के लिए स्वयं-निदान या स्वयं-उपचार का आधार नहीं माना जाना चाहिए।

कैसे बनती है?

Silicea का मूल स्रोत silica है। होम्योपैथिक preparation में अलग-अलग dilution/potency जैसे 3X, 6C, 30C, 200C आदि उपलब्ध हो सकते हैं।

Q form या किसी भी preparation को आँखों में सीधे डालने से पहले डॉक्टर/नेत्र विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है। आँखें बहुत संवेदनशील अंग हैं और किसी भी गैर-निर्धारित पदार्थ का प्रयोग नुकसान पहुँचा सकता है।

उपयोग और संभावित होम्योपैथिक संकेत

Silicea का उल्लेख होम्योपैथिक साहित्य में मुख्य रूप से निम्नलिखित लक्षणों के संदर्भ में मिलता है:

आँखों से जुड़े लक्षण

1. लंबे समय से रहने वाला आँखों का स्राव
2. पुरानी सूजन और irritation से जुड़े लक्षण
3. पलकों की सूजन और crusting
4. आँखों में विदेशी वस्तु जैसा महसूस होना
5. धुंधला या कमजोर दिखाई देना
6. पुरानी blepharitis से जुड़े लक्षण
7. कॉर्निया में धुंधलापन जैसे लक्षण
8. आँखों में लंबे समय से महसूस होने वाली कमजोरी
9. ठंड से परेशानी बढ़ना
10. गर्मी और आँखों को ढकने से आराम महसूस होना

आँखों के अलावा Silicea के अन्य प्रमुख होम्योपैथिक संकेत

11. लंबे समय से बने हुए boils/abscess जैसे लक्षण
12. बालों और नाखूनों से जुड़े कुछ लक्षण
13. हड्डियों से जुड़े कुछ पुराने लक्षण
14. मूत्र संबंधी लंबे समय से बने हुए लक्षण
15. गले और कान से जुड़े पुराने स्राव वाले लक्षण
16. त्वचा पर लंबे समय से बने हुए घाव/लक्षण
17. ठंड अधिक महसूस करने वाला constitutional type
18. बार-बार होने वाली स्वास्थ्य संबंधी शिकायतों के संदर्भ में
19. लंबे समय से बने हुए sinus-related symptoms
20. मानसिक थकान, संवेदनशीलता या व्यक्तित्व से जुड़े कुछ लक्षण

विभिन्न पोटेंसी के बारे में

होम्योपैथी में अलग-अलग potencies का चयन व्यक्ति के symptoms, constitution और चिकित्सकीय assessment के आधार पर किया जाता है।

* Q: इसके विभिन्न पारंपरिक उपयोगों का उल्लेख मिलता है। आँखों में किसी भी preparation का प्रयोग केवल डॉक्टर/नेत्र विशेषज्ञ की स्पष्ट सलाह से करें।
* 6C: कुछ हल्के या शुरुआती लक्षणों में होम्योपैथिक चिकित्सक द्वारा विचार किया जा सकता है।
* 30C: लंबे समय से बने हुए कुछ लक्षणों में चिकित्सक द्वारा चुनी जा सकती है।
* 200C: अधिक गहरे या लंबे समय से बने हुए symptom-picture में चिकित्सक द्वारा विचार किया जा सकता है।
* 1M: लंबे समय से बने हुए complex cases में केवल अनुभवी होम्योपैथिक चिकित्सक के मार्गदर्शन में विचार किया जाना चाहिए।

Potency और dose का निर्णय स्वयं से करना उचित नहीं है।

दवाओं के कॉम्बिनेशन का उल्लेख

होम्योपैथिक साहित्य और practice में विभिन्न remedies के combinations का उल्लेख मिलता है, लेकिन एक साथ कई remedies लेना हर व्यक्ति के लिए उचित हो, यह आवश्यक नहीं है।

1. पुराना स्राव + सूजन: Silicea 30C + Hepar Sulph 30C + Merc Sol 30C
2. आँखों में विदेशी वस्तु जैसा महसूस होना: Silicea 30C + Ruta 30C + Euphrasia Q
3. पुरानी blepharitis + crusting: Silicea 30C + Graphites 30C + Sulphur 30C
4. कमजोरी + बार-बार होने वाली शिकायतें: Silicea 30C + Calcarea Carb 30C + Tuberculinum 200C

इन combinations को स्वयं से शुरू करने के बजाय qualified homeopathic practitioner से सलाह लेना बेहतर है।

सावधानियां

* आँखों में किसी भी homeopathic Q, drops या अन्य preparation का प्रयोग डॉक्टर/नेत्र विशेषज्ञ की सलाह के बिना न करें।
* आँखों में दर्द, अचानक धुंधला दिखाई देना, रोशनी कम होना, चोट, तेज लालिमा, अत्यधिक स्राव या अचानक vision change होने पर तुरंत qualified eye specialist से जांच कराएं।
* किसी भी homeopathic potency की dose और repetition व्यक्ति की स्थिति के अनुसार तय की जानी चाहिए।
* गर्भावस्था या अन्य विशेष परिस्थितियों में किसी भी दवा का प्रयोग चिकित्सकीय सलाह से करें।
* लंबे समय से बनी आँखों की समस्या को केवल self-medication के आधार पर manage न करें।

Silicea को होम्योपैथिक साहित्य में लंबे समय से बने हुए विभिन्न लक्षणों, विशेषकर chronic suppuration, सूजन, कमजोरी और ठंड से प्रभावित होने वाले symptom-picture के संदर्भ में वर्णित किया गया है।

आँखों से जुड़े लक्षणों के अलावा इसका उल्लेख त्वचा, बाल और नाखून, हड्डियों, कान-गले तथा अन्य लंबे समय से बने हुए symptoms के संदर्भ में भी मिलता है।
Heal with Homeopathy

Address

SPF-33, Shipra Shopping Plaza, Indirapuram
Ghaziabad
201014

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Heal with Homeopathy posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share