25/01/2023
पावन वसंतपंचमी के शुभ अवसर पर
भगवत् गीता के दशम अध्याय " विभूति योग " में भगवान श्री कृष्ण ' ऋतूनाम् कुसुमाकर: ' की घोषणा कर वसंत ऋतु की श्रेष्ठता घोषित करते हैं ।
ऋतुराज वसंत के आगमन के साथ ही प्रकृति जीवंत एवं चैतन्यमय हो उठती है।
ऋग्वेद में उल्लेख है - " सरस्वतीं देवयन्तो हवन्ते " अर्थात् देव-पद के अभिलाषी सरस्वती का आह्वान करते हैं।
देवी भागवत में वर्णित है -
आदौ सरस्वती पूजा कृष्णेन विनिर्मिता।
यत्प्रसादान्मुनि श्रेष्ठ मूर्खो भवति पण्डित:।।
अर्थ - श्रीकृष्ण ने सबसे पहले माता सरस्वती के महत्व का वर्णन किया और कहा कि उनकी पूजा अवश्य की जानी चाहिए , जिनकी कृपा से मूर्ख भी विद्वान हो जाता है।
माता सरस्वती विद्या , कला और संगीत की सबसे प्राचीन अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं। अतः वसंत पंचमी पर ज्ञान की देवी सरस्वती का पूजन किया जाता है ।
माता सरस्वती के हाथों में वीणा एवं पुस्तक सुशोभित हैं। उनका वाहन हंस है।
वीणा - पुस्तकधारिणी आराध्या माता सरस्वती के सामीप्य से भक्त को कभी यह अनुभूति होती है कि वह मां सरस्वती की वीणा बन गया है। उसकी हृदय-तंत्री का हर तार उनकी उंगली - स्पर्श से झंकृत हो उठा है , जिसमें से अनहद - नाद की धारा प्रवाहित हो रही है।
तो कभी ऐसा लगता है कि वह वाहन के रूप में हंस बन कर मानसरोवर के तट पर दिव्य - ज्ञान के मोती चुग रहा है।
वसंतपंचमी तिथि का विशेष महत्व --
१. माता सरस्वती का प्राकट्य वसंतपंचमी तिथि को हुआ था।
२. महादेव शंकर ने कामदेव को भस्म कर दिया था। उनकी पत्नी रति के अनुनय - विनय पर शंकर जी ने उसे पुनः जीवनदान वसंत पंचमी को दिया था।
३. माता शबरी द्वारा श्री राम को बेर खिलाने की घटना वसंतपंचमी को ही हुई थी ।
४. जब रावण माता सीता का हरण कर लंका ले गया था , तो बसंतपंचमी के दिन ही प्रभु श्रीराम दक्षिण की तरफ बढ़े थे।
५. पृथ्वीराज चौहान के हाथों विदेशी आक्रांता मोहम्मद गोरी का वध तथा पृथ्वीराज चौहान के आत्म बलिदान की घटना भी वसंतपंचमी को हुई थी।
६. विद्वान राजा भोज का जन्म वसंतपंचमी को हुआ था।
७. कविवर सूर्यकांत त्रिपाठी ' निराला ' का जन्म वसंतपंचमी को हुआ था , जिन्होंने अपनी काव्य-कृति " वर दे ! वीणावादिनी वर दे " के माध्यम से मां शारदा की आराधना की थी।
८. गायत्री परिवार के जनक युगऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य का आध्यात्मिक जन्म - दिवस भी बसंत पंचमी ही है।
९. भारत रत्न पंडित मदन मोहन मालवीय जी ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना वसंतपंचमी के दिन ही की थी।
मिथिलेश ओझा की ओर से आपको वसंतपंचमी की हार्दिक बधाई।
।। भगवती सरस्वती देवी की जय ।।