Ghazipur Aajkal Samachar

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विश्व आदिवासी दिवस पर गाजीपुर में सपा कार्यालय डॉक्टर लोहिया मुलायम सिंह भवन, बंशी बाजार में गोष्टी हुई। गोष्ठी में आदिव...
09/08/2026

विश्व आदिवासी दिवस पर गाजीपुर में सपा कार्यालय डॉक्टर लोहिया मुलायम सिंह भवन, बंशी बाजार में गोष्टी हुई। गोष्ठी में आदिवासी मुसहर समाज के वर्तमान हालातों पर चिंता जताई गई।
इस मौके पर सपा जिलाध्यक्ष गोपाल सिंह यादव आदिवासी मुसहर समाज के वर्तमान हालात पर चिंता जताते हुए कहे-देश की आजादी के इतने वर्षों बाद भी मुसहर समाज को शिक्षा, सम्मान, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक न्याय के समान अवसर नहीं मिल पाए हैं।
मुसहर समाज की बड़ी तादात में मौजूदगी का जिक्र करते वह कहे कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व पर उनके पूर्ण विश्वास का यह सबूत है। इसके लिए पार्टी समाज का धन्यवाद करती है। जिलाध्यक्ष दावा किए कि 2027 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर मुसहर समाज को शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, निजी भूमि और उनके अधिकार दिलाने का काम किया जाएगा।
गोष्ठी की अध्यक्षता आदिवासी स्वाभिमान पार्टी बिरसा मुंडा के राष्ट्रीय अध्यक्ष आनंद मुसहर किए। वह समाजवादी पार्टी के लिए समर्थन जताते हुए 2027 में अखिलेश यादव को दोबारा उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने का संकल्प दोहराए।
गोष्ठी में पूर्व विधायक खुर्शीद अहमद, रामधारी यादव, राजेंद्र वनवासी, डॉ. एके यादव, रसीला आदिवासी, वीरेंद्र वनवासी, बसंती वनवासी, लालमुनि वनवासी, वीरेंद्र समेत बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष मौजूद रहे। संचालन वीरेंद्र बनवासी किए।
अब सवाल यही है-मुसहर समाज का यह सियासी समर्थन 2027 के चुनाव में समाजवादी पार्टी के लिए कितना बड़ा समीकरण साबित होगा ?

कौस्तुभ श्रीवास्तव की सफलता इसलिए खास है, क्योंकि वह पहले ही प्रयास में CAPF परीक्षा में ऑल इंडिया 34वीं रैंक हासिल किए ...
09/08/2026

कौस्तुभ श्रीवास्तव की सफलता इसलिए खास है, क्योंकि वह पहले ही प्रयास में CAPF परीक्षा में ऑल इंडिया 34वीं रैंक हासिल किए हैं।
कौस्तुभ की प्रतिभा का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 12वीं की पढ़ाई के दौरान वह NDA में AIR-10 हासिल किए थे। इसके बाद IIT मंडी से B.Tech किए।
पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्हें निजी कंपनी में करीब 32 लाख रुपये सालाना का पैकेज मिला लेकिन कौस्तुभ आकर्षक कॉरपोरेट करियर छोड़कर देश सुरक्षा का रास्ता चुने।
उनको आर्मी में लेफ्टिनेंट बनने का अवसर भी मिला था, लेकिन अपनी माता की इच्छा और पारिवारिक परिस्थितियों को देखते हुए वह CAPF की तैयारी का फैसला किए।
इस तैयारी के करीब एक साल वह गाजीपुर में अपने पिता के साथ रहकर बिताए। सीमित संसाधनों और अनुशासित दिनचर्या के बीच लगातार मेहनत किए और अब देश की प्रतिष्ठित परीक्षा में शानदार रैंक हासिल कर लिए।
कौस्तुभ के पिता संजय कुमार श्रीवास्तव सीएमओ ऑफिस गाजीपुर में सहायक हैं, जबकि माता सीमा श्रीवास्तव गृहणी हैं। परिवार गाजीपुर में माल गोदाम रोड पर रहता है।
खास बात यह भी है कि परिवार में सफलता की कहानी यहीं नहीं रुकती।
कौस्तुभ के छोटे भाई स्निग्ध श्रीवास्तव भी NEET-UG 2026 में शानदार रैंक हासिल किए हैं और अब MBBS में प्रवेश की तैयारी कर रहे हैं।
एक ही परिवार के दो बेटों की राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है।
कौस्तुभ अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के मार्गदर्शन, अनुशासन और लगातार मेहनत को देते हैं।
NDA में टॉप-10, IIT से B.Tech, 32 लाख का पैकेज ठुकराया और अब CAPF में AIR-34
कौस्तुभ की यह कहानी बताती है कि सही लक्ष्य और मजबूत इरादा हो, तो मंजिल जरूर मिलती है।

09/08/2026

...पर "पंडीजी" का यजमान कौन ?
#ब्राह्मण #अखिलेशयादव #मायावती #यूपी_राजनीति #2027चुनाव

गाजीपुर में समाजवादी पार्टी की सामाजिक न्याय पीडीए जिला कमेटी की बैठक में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी तेवर साफ...
08/08/2026

गाजीपुर में समाजवादी पार्टी की सामाजिक न्याय पीडीए जिला कमेटी की बैठक में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी तेवर साफ दिखाई दिए।
आठ अगस्त को सपा के समता भवन में हुई इस बैठक में पार्टी जिलाध्यक्ष गोपाल यादव प्रदेश की भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधे।
जिलाध्यक्ष आरोप लगाए कि सरकार की गरीब और पिछड़ा विरोधी नीतियों के चलते पूरा पीडीए तबका हताश और निराश है। सरकार के खजाने में गरीबों के लिए कुछ नहीं है, जबकि सरकार की तिजोरी अडानी और अपने तमाम पूंजीपति मित्रों के लिए खुली है।
वह सरकार पर लोकतंत्र और संविधान की मर्यादाओं की अनदेखी करने का भी आरोप लगाए। कहे कि सरकार के कार्यकाल में आए दिन लोकतंत्र की हत्या हो रही है और भाजपा सरकार सत्ता के जोर पर अभिव्यक्ति की आजादी छीनना चाहती है।
बैठक में स्थानीय समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया गया। गोपाल यादव कहे कि सरकार का जनता की बुनियादी सुविधाओं से कोई लेना-देना नहीं है। नहरों में पानी नहीं है, बिजली आपूर्ति अनियमित है और बरसात के दिनों में क्षेत्र की जनता को अंधेरे में रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। अंधेरे के कारण हर वक्त विषैले जंतुओं का खतरा भी बना रहता है।
साधन सहकारी समितियों पर खाद की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाए गए। बैठक में लगभग सभी वक्ता एक स्वर से इन समस्याओं को किसानों, गरीबों और ग्रामीण जनता से सीधे जुड़ा मुद्दा बताए।
वहीं, पीडीए जिला कमेटी के संयोजकगण शशिकांत विश्वकर्मा, मुन्नीलाल राजभर और रामजनम चौहान एक स्वर में छात्र, किसान और नौजवान विरोधी नीतियों वाली सरकार को उखाड़ फेंकने का आह्वान किए।
तीनों संयोजक कमेटी के सदस्यों से 2027 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को दोबारा मुख्यमंत्री बनाने का संकल्प लेने की अपील भी किए।
यानी गाजीपुर में पीडीए की यह बैठक सिर्फ संगठनात्मक बैठक तक सीमित नहीं रही। इसमें सरकार की नीतियों के खिलाफ मुद्दे गिनाए गए और 2027 के लिए समाजवादी पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने का स्पष्ट संदेश भी दिया गया।
बैठक में पूर्व विधायक खुर्शीद अहमद, डॉ. प्रमोद विश्वकर्मा, ओमप्रकाश विश्वकर्मा, विनोद विश्वकर्मा, उर्मिला विश्वकर्मा, रामकृत राजभर, गुलाब राजभर, चंचल राजभर, रामविजय चौहान, हरिहर चौहान, डॉक्टर राजकुमार शर्मा, दिवाकर विश्वकर्मा, रामसहाय विश्वकर्मा, सिद्धनाथ विश्वकर्मा, दीनानाथ विश्वकर्मा, अभिषेक विश्वकर्मा, राधेश्याम विश्वकर्मा और श्रवण चौहान समेत कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
अब देखना होगा कि गाजीपुर में सपा का यह PDA अभियान 2027 की सियासत में कितना असर डालता है और क्या पार्टी इन मुद्दों को गांव-गांव तक पहुंचाकर अपने राजनीतिक आधार को और मजबूत कर पाती है।

यूपी की राजनीति में विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय लोकदल यानी आरएलडी  को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ...
07/08/2026

यूपी की राजनीति में विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय लोकदल यानी आरएलडी को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामाशीष राय न सिर्फ अपने पद से, बल्कि पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिए हैं। वह अपना इस्तीफा सीधे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी को भेजे हैं।
अपने इस्तीफे में रामाशीष राय सबसे पहले जयंत चौधरी का आभार जताए हैं कि वह उन्हें प्रदेश अध्यक्ष जैसी अहम जिम्मेदारी दिए। फिर अपने इस्तीफे में वह मौजूदा राजनीति को लेकर कई गंभीर सवाल भी खड़े किए हैं।
रामाशीष राय कहे हैं कि वह लोकनायक जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति आंदोलन से प्रेरित होकर राजनीति में आए थे। उनका मानना है कि जिस भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, महंगाई और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए उस दौर में आंदोलन हुआ था, आज वही चुनौतियां और भी गंभीर रूप में सामने दिखाई दे रही हैं।
फिर आगे वह कहते हैं कि भारतीय लोकतंत्र धीरे-धीरे धनबल और प्रभावशाली वर्गों के नियंत्रण में सिमटता जा रहा है। समाज को जाति, उपजाति और संप्रदाय के आधार पर बांटने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। किसान अपनी फसल का उचित मूल्य पाने के लिए संघर्ष कर रहा है, जबकि नौजवान बेरोजगारी और भविष्य की अनिश्चितता से जूझ रहा है।
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष परिवारवाद और चुनाव में बढ़ते पैसे के प्रभाव पर भी चिंता जताए हैं। वह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के उस विचार का उल्लेख किए हैं, जिसमें राजनीति में बढ़ते धनबल को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया गया था। रामाशीष राय का कहना है कि आज लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक मूल्यों पर लगातार दबाव बढ़ रहा है।
अपने इस्तीफे के आखिर में रामाशीष राय लिखे हैं कि "व्यक्ति से बड़ा दल और दल से बड़ा देश होता है।" वह इन्हीं वैचारिक और नैतिक कारणों से दल छोड़ रहे हैं।
हालांकि, सबसे बड़ा सवाल अब यह है कि क्या यह सिर्फ एक व्यक्तिगत फैसला है या फिर आरएलडी के भीतर किसी बड़े असंतोष का संकेत? क्या विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी में और भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं? और सबसे अहम सवाल... रामाशीष राय का अगला राजनीतिक कदम क्या होगा?
फिलहाल, यह इस्तीफा उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दिया है और अब सभी की नजर जयंत चौधरी और आरएलडी नेतृत्व की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी है।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से लेकर कई स्थानीय नेता और कार्यकर्ता अक्सर 2027 में सरकार बनने पर राजन...
07/08/2026

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से लेकर कई स्थानीय नेता और कार्यकर्ता अक्सर 2027 में सरकार बनने पर राजनीतिक विरोधियों से हिसाब चुकता करने जैसी बातें करते सुनाई पड़ते हैं। इसी बीच गाजीपुर की राजनीति में भाजपा के युवा नेता पीयूष राय का 2022 का एक पुराना भाषण भी फिर चर्चा में है।
2022 के विधानसभा चुनाव में मुहम्मदाबाद सीट पर पीयूष राय की मां और भाजपा प्रत्याशी अलका राय को मुख्तार अंसारी के भतीजे सुहेब अंसारी मन्नू से हार का सामना करना पड़ा था। चुनाव के बाद हरिहरपुर स्थित केंद्रीय चुनाव कार्यालय में आयोजित होली मिलन समारोह में पीयूष राय कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहे थे कि "छाती पर चढ़कर राजनीति होगी और जरूरत पड़ी तो छाती पर चढ़कर गोली भी मारी जाएगी।"
हालांकि उस भाषण में वह किसी व्यक्ति या परिवार का नाम नहीं लिए थे, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे मुख्तार अंसारी परिवार की ओर इशारा मानकर देखा गया था। भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था और विपक्षी दल इसे राजनीतिक भाषा और कानून-व्यवस्था का मुद्दा बनाए थे। कई समाचार पत्र इसे विवादित बयान के रूप में प्रमुखता से प्रकाशित भी किए थे।
अब गाजीपुर में अंसारी परिवार के कुछ समर्थकों के बीच यह चर्चा सुनने को मिलती है कि यदि 2027 में सत्ता परिवर्तन होता है, तो पीयूष राय के उस पुराने बयान पर भी कानूनी कार्रवाई की मांग उठेगी। हालांकि, इस सिलसिले में अंसारी परिवार के किसी जिम्मेदार सदस्य की ओर से सार्वजनिक रूप से ऐसा कोई बयान नहीं आया है और न इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा ही हुई है।
फिलहाल यह मामला राजनीतिक चर्चाओं और अटकलों तक सीमित है। 2027 का चुनाव क्या तस्वीर बदलता है और भविष्य में इस मुद्दे पर कोई कानूनी या राजनीतिक कार्रवाई होती है या नहीं, इसका जवाब आने वाला समय ही देगा। वैसे इन दिनों समाजवादियों की जुबान जिस अंदाज में चल रही है, उससे अंदाजा यही मिल रहा है कि 2027 का चुनाव सिर्फ सरकार नहीं, बल्कि कई पुराने राजनीतिक हिसाब-किताब का भी इम्तिहान बन सकता है। हालांकि सियासत में बयान याद रहते हैं, मगर उनका अंजाम जनता और कानून तय करते हैं।

गाजीपुर में विकास योजनाओं और जनशिकायतों के निस्तारण को लेकर जिला प्रशासन सख्त रुख अपनाया है। पांच अगस्त की देर शाम डीएम ...
06/08/2026

गाजीपुर में विकास योजनाओं और जनशिकायतों के निस्तारण को लेकर जिला प्रशासन सख्त रुख अपनाया है। पांच अगस्त की देर शाम डीएम अनुपम शुक्ल की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में सीएम डैशबोर्ड और आईजीआरएस की समीक्षा बैठक हुई। बैठक में विभिन्न विभागों की योजनाओं की प्रगति का बारीकी से आकलन किया गया।
डीएम विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना, समाज कल्याण विभाग की छात्रवृत्ति और पेंशन योजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों से विस्तृत जानकारी लिए। वह निर्देश दिए कि सभी महाविद्यालयों के साथ समन्वय बैठकें आयोजित की जाएं, ताकि पात्र लोगों तक योजनाओं का लाभ समय पर पहुंच सके। साथ ही तहसील स्तर पर भी बैठकों के जरिए योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने को भी डीएम कहे।
राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना की समीक्षा के दौरान डीएम स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी विभाग अपनी प्रगति समयबद्ध तरीके से पोर्टल पर अपडेट करें। इसके बाद आईजीआरएस की समीक्षा में जिन विभागों को असंतोषजनक फीडबैक मिला, उन पर डीएम नाराजगी जताए। वह सभी विभागाध्यक्षों को चेतावनी देते हुए कहे कि जनशिकायतों का समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और संतोषजनक निस्तारण हर हाल में सुनिश्चित किया जाए, ताकि आम लोगों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।
अब देखना होगा कि डीएम की इस सख्ती का असर जमीनी स्तर पर कितना दिखाई देता है और क्या जनशिकायतों का निस्तारण पहले से बेहतर और तेज़ हो पाता है ?

यूपी में पंचायत चुनाव में हो रही देरी को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच राज्य सरकार के प्रति सख्त रुख अपनाई है। साफ...
06/08/2026

यूपी में पंचायत चुनाव में हो रही देरी को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच राज्य सरकार के प्रति सख्त रुख अपनाई है। साफ कही है कि तय समय के भीतर पंचायत चुनाव कराना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है और इसमें अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जा सकती।
जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की खंडपीठ एसके शर्मा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए चुनाव में देरी से जुड़े सभी रिकॉर्ड तलब की। कोर्ट यह जानना चाहती है कि चुनाव समय पर न होने की वजह सरकार के नियंत्रण से बाहर की परिस्थितियां थीं या फिर सरकार अपने संवैधानिक दायित्व का पालन करने में विफल रही।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार कोर्ट को बताई कि पंचायत चुनाव की प्रक्रिया नवंबर 2026 तक पूरी होने की संभावना है। वहीं कोर्ट कही कि इस मामले में पेश किए गए डिजिटल रिकॉर्ड का अगली सुनवाई में विस्तार से परीक्षण किया जाएगा। साथ ही सरकार को सुप्रीम कोर्ट के सुरेश महाजन मामले के फैसले का भी अध्ययन करने की सलाह दी गई है।
हाईकोर्ट भविष्य के लिए भी अहम टिप्पणी की। कही कि पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने से कम-से-कम दो वर्ष पहले चुनाव प्रक्रिया शुरू कर देनी चाहिए, ताकि संविधान के अनुच्छेद 243-ई के तहत पांच वर्ष की अवधि पूरी होने से पहले ही नए प्रतिनिधियों का चुनाव कराया जा सके। कोर्ट यह भी कही कि वर्तमान मामले में सरकार मई 2025 से प्रक्रिया शुरू कर दी थी, लेकिन इसके बावजूद पंचायत चुनाव समय पर नहीं हो सके। गौरतलब है कि प्रदेश की पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो चुका है।
राज्य सरकार अपने जवाब में चुनाव में देरी के दो प्रमुख कारण बताई है। पहला, प्रदेश राज्य स्थानीय निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन और उसकी सिफारिशों के आधार पर आरक्षण तय करने की प्रक्रिया। दूसरा, राज्य निर्वाचन आयोग की अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन दस जून 2026 को निर्धारित किया जाना। सरकार का कहना है कि इन कारणों से 26 मई 2026 से पहले चुनाव कराना संभव नहीं था।
उधर, एक अन्य जनहित याचिका में यह दलील दी गई है कि पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद निर्वाचित ग्राम प्रधानों की जगह प्रशासक नियुक्त करना संविधान की भावना के विपरीत है। इस मामले पर अगले सप्ताह मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ सुनवाई करेगी। उससे पहले याचिकाकर्ताओं को सरकार के जवाब पर अपना बिंदुवार प्रत्युत्तर दाखिल करना होगा।
अब सबकी नजर 11 अगस्त की अगली सुनवाई पर है। देखना होगा कि हाईकोर्ट रिकॉर्ड की जांच के बाद क्या टिप्पणी करती है और क्या प्रदेश में पंचायत चुनाव की दिशा और समयसीमा को लेकर कोई बड़ा आदेश सामने आता है।

दिवंगत माफिया अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबान अहमद की छह अगस्त की सुबह झांसी-कानपुर नेशनल हाईवे पर एक भीषण सड़क हादसे म...
06/08/2026

दिवंगत माफिया अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबान अहमद की छह अगस्त की सुबह झांसी-कानपुर नेशनल हाईवे पर एक भीषण सड़क हादसे में मौत हो गई। हादसा झांसी के पूंछ थाना क्षेत्र में सुबह करीब साढ़े दस बजे हुआ, जब अबान अपने बड़े भाई अली अहमद से मिलने झांसी जेल जा रहा था।
पुलिस के मुताबिक, क्रेटा कार में कुल पांच लोग सवार थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हाईवे पर अचानक एक जानवर आ जाने के बाद चालक उसे बचाने की कोशिश किया। इसी दौरान तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
दुर्घटना के बाद स्थानीय लोग पुलिस को सूचना दिए। मौके पर पहुंची पुलिस कार में फंसे सभी लोगों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाई। जहां अबान अहमद और उसके दोस्त सोनू को मृत घोषित कर दिया गया। वहीं उमर अहमद, मोहम्मद जैद और असलम गंभीर रूप से घायल हैं और उनका इलाज मेडिकल कॉलेज में चल रहा है। हादसे के कारण कुछ समय तक हाईवे पर यातायात प्रभावित रहा, जिसे बाद में सामान्य करा दिया गया।

यूपी की राजनीति से एक ऐसी खबर आई है, जो बहुजन समाज पार्टी को गहरे सदमे में डाल दिया है। उत्तर प्रदेश के इकलौते बसपा विधा...
06/08/2026

यूपी की राजनीति से एक ऐसी खबर आई है, जो बहुजन समाज पार्टी को गहरे सदमे में डाल दिया है। उत्तर प्रदेश के इकलौते बसपा विधायक और बलिया की रसड़ा विधानसभा सीट से दो बार विधायक रहे उमाशंकर सिंह का 55 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वह लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे। इलाज के लिए उन्हें दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां पांच अगस्त की शाम वह अंतिम सांस लिए।
उमाशंकर सिंह सिर्फ एक विधायक नहीं थे, बल्कि बसपा सुप्रीमो मायावती के सबसे भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते थे। मायावती उन्हें अपना छोटा भाई मानती थीं और हर वर्ष रक्षाबंधन पर उन्हें राखी बांधती थीं। उनकी बीमारी के दौरान मायावती खुद लखनऊ स्थित उनके आवास पहुंचकर हालचाल लेने गई थीं। इससे पहले आयकर विभाग की छापेमारी के समय भी वह उनके घर पहुंची थीं। यह इसलिए भी खास माना गया क्योंकि मायावती बहुत कम नेताओं के घर व्यक्तिगत रूप से जाती हैं।
उमाशंकर सिंह के निधन पर मायावती गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें पार्टी का कर्मठ, ईमानदार और पूरी तरह वफादार नेता बताया। वह कहीं कि उमाशंकर सिंह के निधन से पार्टी को अपूरणीय क्षति हुई है और वह शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उमाशंकर सिंह के निधन को अत्यंत दुखद बताते हुए दिवंगत आत्मा की शांति और परिजनों को इस दुख को सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की है। वहीं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव भी एक्स पर पोस्ट कर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके निधन को अत्यंत दुखद बताए हैं और ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति की कामना की है।
उमाशंकर सिंह लगातार तीन बार रसड़ा विधानसभा से विधायक चुने गए थे। उनकी पहचान एक मजबूत जनाधार वाले नेता के रूप में थी। वह योगी सरकार में राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह के समधी भी थे। आयकर विभाग की कार्रवाई के दौरान भी उनका नाम प्रदेश की राजनीति में काफी चर्चा में रहा था।
अब उनके निधन के साथ बसपा न सिर्फ अपना इकलौता विधायक खो दी है, बल्कि एक ऐसा चेहरा भी खो दी है, जिसे पार्टी में वफादारी और संगठन के प्रति समर्पण की मिसाल माना जाता था। उनके जाने से बलिया ही नहीं, पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा खालीपन महसूस किया जा रहा है।

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