Shyam Bahadur yadav

Shyam Bahadur yadav HELLO FRIENDS
ONLY ENTERTANMENT

15/04/2026

दोस्त की शादी में यही DJ बजेगा

15/04/2026

पहली बार ऐसा देखा है

12/04/2026

वीडियो को देखकर बताए कैसा लगा

10/04/2026
भूख निगोड़ी निर्दयी, दूर बसे हैं कन्त।सरसों फूली खेत में, आया मुआ बसन्त।।कोयल कूके बाग में, हिय आया उल्लास।कन्त बसे परदे...
01/03/2025

भूख निगोड़ी निर्दयी, दूर बसे हैं कन्त।
सरसों फूली खेत में, आया मुआ बसन्त।।

कोयल कूके बाग में, हिय आया उल्लास।
कन्त बसे परदेश में, यह कैसा मधुमास।।

ननदें करतीं मसखरी, गाती हैं वे फाग।
जानें कहाँ कुँआरियाँ, क्या विरहिन की आग?

भूखे पेटों ने किया,आंतों से संवाद।
परदेशी फिर ठिठककर,भूल गया सब याद।।

अरहर फूली खेत में, है आया मधुमास।
जिनको होना पास था,आज नहीं वे पास।।



#बसंत

GONDA की बेटी रुचि यादव ने UGC - NET की परीक्षा में पहले प्रयास में ही सफलता प्राप्त की है , रुचि यादव ने 96.69 प्रतिशत ...
24/02/2025

GONDA की बेटी रुचि यादव ने UGC - NET की परीक्षा में पहले प्रयास में ही सफलता प्राप्त की है , रुचि यादव ने 96.69 प्रतिशत अंक हासिल करते हुए जिले का नाम भी रौशन किया है

किसी ज़माने में वॉल्व वाले रेडियो हुआ करते थे। उन्हें गरम होने में वक्त लगता। और फिर किसी अजूबे की तरह वो स्टार्ट हो जात...
14/02/2025

किसी ज़माने में वॉल्व वाले रेडियो हुआ करते थे। उन्हें गरम होने में वक्त लगता। और फिर किसी अजूबे की तरह वो स्टार्ट हो जाते। कैसी भरी–भरी और शानदार आवाज़ आती थी उनमें। शॉर्ट वेव पर रेडियो सीलोन की आवाज़ गूंजती, "ये श्रीलंका ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन का विदेश विभाग है"...और फिर बह उठती पुराने गानों की धारा। देश के कोने कोने में लोग सुनते और उनकी नसों में सुकून घुलता।

विविध भारती जीवन की अनिवार्य उपस्थिति था। "आकाशवाणी का ये पंचरंगी कार्यक्रम है विविध भारती"। और फिर कभी हवामहल तो कभी संगीत सरिता और मनचाहे गीत गूंजते। लोगों को लगता, कितनी सुरीली है ये दुनिया। नाम पढ़े जाते, भाटापारा, झुमरी तिलैया, इटारसी, मजनू का टीला। अद्भुत दुनिया थी ये हमारे बचपन की। गायक, गीतकारों और संगीतकारों से परिचय का सिलसिला यहीं से शुरू हुआ।

दोपहरों को ऑल इंडिया रेडियो की उर्दू सर्विस गुलज़ार रहती। हम नए नए उर्दू शब्द सीखते। अज़रा आपा की आवाज़ पर उनका काल्पनिक चेहरा फिट करते। और जब "हालात ए हाज़रा का तफ़सरा" आता तो खीझ उठते कि गाने क्यों रोक दिए। उर्दू सर्विस ने हमारे अवचेतन मन में ज़बान गढ़ी। ये तब हमें अहसास तक नहीं था।

देर रात गूंजता नेशनल चैनल। जो आधी रात के बाद तक साथ निभाता। और हम पढ़ पाते। रेडियो पर हॉकी और क्रिकेट की कमेंट्री आती। ट्रांजिस्टर के ज़माने में सड़क चलते लोग पूछते, "भाई साहब स्कोर क्या हुआ है"?
और गणतंत्र दिवस पास जसदेव सिंह की आवाज़ में आंखों देखा हाल, कितने सटीक शब्दों में तस्वीर गढ़ते थे वो। बीबीसी सुबह सुबह सुनते "सुबह सवेरे"। दुनिया भर की ख़बर मिलती। Pervaiz Alam और Achala Sharma और Qurban Ali हमारे सितारे होते।

रेडियो गुज़रे ज़माने की ही उपस्थिति नहीं है। रेडियो आज भी आपके आसपास मौजूद है। वो सिर्फ गाड़ी में अनिवार्य उपस्थिति नहीं है। सिर्फ़ एक क़दम आगे बढ़ाने की ज़रूरत है। विविध भारती और आकाशवाणी के सभी चैनल आपको एंड्रॉयड और IOS पर NEWS ON AIR नामक एप के ज़रिए उपलब्ध हैं। यहां तक कि शास्त्रीय संगीत को समर्पित चैनल रागम भी वहां उपलब्ध है। बहुत सारे ऐप हैं रेडियो सुनने के लिए। दिक्कत ये है कि आपकी निगाहें reels पर टिकी हैं। आप स्क्रॉल कर रहे हैं। यक़ीन मानिए रेडियो सुनेंगे तो आपकी जिंदगी में वक्त भी ज़्यादा होगा। आप पढ़ भी सकेंगे। टहल सकेंगे। बेहतर जी पाएंगे।

आज विश्व रेडियो दिवस है और इस बार की थीम है "रेडियो और जलवायु परिवर्तन"। रेडियो आपको लगातार चेता रहा है कि ध्रुवों की बर्फ़ तेजी से पिघल रही है। धरती का तापमान बढ़ रहा है। यही हाल रहा तो तटीय शहर डूबने के कगार पर आ जाएंगे। आखिरी मौका है जलवायु परिवर्तन को रोकने का। ये बातें रील आपको नहीं बताएगी। बहुधा मनोरंजन और ब्रेकिंग न्यूज परोस रहा टीवी भी नहीं।
विश्व रेडियो दिवस की शुभकामनाएं।



स्नान करने के लिए 3 बार कपड़े बदले, परिधान मंत्री जी ने।स्नान भी खास गीली न होने वाली वॉटरप्रूफ जैकेट पहन कर किया, सिर्फ...
05/02/2025

स्नान करने के लिए 3 बार कपड़े बदले, परिधान मंत्री जी ने।
स्नान भी खास गीली न होने वाली वॉटरप्रूफ जैकेट पहन कर किया, सिर्फ गले तक डुबकी लगाई मुंह और सिर पर जल को नहीं जाने दिया क्योंकि उनकी नज़र में गंगा का जल प्रदूषित है, कथित हिंदू हृदय सम्राट ने

दैनिक उपयोग पूर्ण रूप से पता होना चाहिए 👍
27/01/2025

दैनिक उपयोग पूर्ण रूप से पता होना चाहिए 👍

मैं बेचना चाहती हूँ,बस माला के मनके ,पर यहाँ आये हैं ,सब लोग अलग-अलग मन के ,इन्हें कहाँ खरीदने हैं ,मेरी माला के मनके ,य...
22/01/2025

मैं बेचना चाहती हूँ,
बस माला के मनके ,
पर यहाँ आये हैं ,
सब लोग अलग-अलग मन के ,
इन्हें कहाँ खरीदने हैं ,
मेरी माला के मनके ,
ये निहारना चाहते हैं ,
मेरे नयनों के मनके ,
कोई बस मेरी ,
तस्वीर लेना चाहता है ,
कोई मुझ से अपनी ,
दिल की बातें कहना चाहता है ,
पर जो मैं बेच रही हूँ ,
उसके ख़रीददार कम हैं ,
अब इस दुनियां में ,
इज्जतदार कम हैं !

✍️

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