27/09/2026
*सावधान बिहार! आपके जिले में आ रहे सबसे सख्त IPS अफसर, आधी रात में लेंगे थानों की क्लास*
बिहार में कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पुलिस मुख्यालय ने बड़ा कदम उठाया है। एडीजी से लेकर डीआईजी स्तर के 36 वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को 40 पुलिस जिलों का प्रभारी और नोडल अधिकारी बनाया गया है। सभी अफसरों को 27 सितंबर तक आवंटित जिलों का निरीक्षण कर डीजीपी प्रीता वर्मा को रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
पटना: बिहार में अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए पुलिस मुख्यालय ने नई रणनीति तैयार की है। राज्य के पुलिस प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से एडीजी से लेकर डीआईजी स्तर तक के 36 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को 40 पुलिस जिलों की कमान सौंपी गई है। नई व्यवस्था के तहत एडीजी (विधि व्यवस्था) केएस अनुपम को पटना और एडीजी (बी-सैप) नैय्यर हसनैन खान को मुजफ्फरपुर का नोडल अधिकारी नामित किया गया है। इन अधिकारियों को धरातल पर उतरकर थानों की कार्यप्रणाली, गश्त और मामलों के निष्पादन की निगरानी करनी होगी ताकि पुलिसिंग को बेहतर बनाया जा सके।
*वरिष्ठ अधिकारियों को आवंटित की गईं प्रमुख जिम्मेदारियां*
मुख्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार एडीजी आर मलार विझि को नालंदा, एडीजी ईओयू डॉ. अमित कुमार जैन को वैशाली और एडीजी एसवीयू सुधांशु कुमार को दरभंगा जिले की कमान सौंपी गई है। इसके अतिरिक्त चार अधिकारियों को दो-दो जिलों की जिम्मेदारी दी गई है। उच्च अधिकारियों की सीधे मैदान में मौजूदगी से जिला पुलिस प्रशासन की जवाबदेही तय की जाएगी।
*किस जिले की जिम्मेदारी किस पुलिस अधिकारी को मिली?*
एडीजी स्तर: डॉ. कमल किशोर सिंह (समस्तीपुर), पारसनाथ (मुंगेर), अजिताभ कुमार (गोपालगंज), अमित लोढ़ा (लखीसराय व शेखपुरा), और अमृत राज (भोजपुर)।
आईजी स्तर: राजेश कुमार (पूर्णिया), पी कन्नन (सारण), अनुसूया रणसिंह साहू (औरंगाबाद), पंकज कुमार राज (भागलपुर/नवगछिया), प्रेमलता (जहानाबाद), रंजीत कुमार मिश्रा (मधुबनी), मनोज कुमार (गया जी) और संजय कुमार (बेतिया/बगहा)।
डीआईजी स्तर (भाग 1): जयंत कांत (कटिहार), मानवजीत सिंह ढिल्लन (रोहतास), हरप्रीत कौर (कैमूर), मीनू कुमारी (बेगूसराय), सुधीर पोरिका (खगड़िया), तौहिद परवेज (किशनगंज), सुशील कुमार (शिवहर), और अनिल कुमार (सहरसा)।
*डीआईजी स्तर (भाग 2):*
राजेंद्र कुमार भील (मधेपुरा), आनंद कुमार (मोतिहारी), अवकाश कुमार (सीतामढ़ी), दीपक रंजन (बक्सर), इनामुल हक मेंगनू (जमुई), आमिर जावेद (सीवान), राजीव रंजन 1 (बांका), अजय कुमार पांडेय (अरवल/नवादा), नीरज कुमार सिंह (अररिया) और सुशांत कुमार सरोज (सुपौल)।
*27 सितंबर तक निरीक्षण पूरा कर डीजीपी को रिपोर्ट*
मुख्यालय ने जिलों का आवंटन करने के साथ ही सभी नामित पुलिस पदाधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं। अफसरों को 27 सितंबर तक अपने-अपने आवंटित जिलों का निरीक्षण कार्य पूरा करना36 होगा। इसके तुरंत बाद उन्हें जिले की विधि व्यवस्था से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करके डीजीपी प्रीता वर्मा को सौंपनी होगी।
*मुकदमों के निष्पादन, गश्ती और पॉक्सो मामलों की जांच*
जिलों में जाने वाले नोडल अधिकारी केवल औपचारिक बैठकें नहीं करेंगे, बल्कि जमीनी स्तर पर पुलिसिंग का जायजा लेंगे। समीक्षा के दौरान मामलों के अनुसंधान, केसों के निष्पादन की स्थिति, अदालती ट्रायल, थानों की कार्यप्रणाली, पुलिस गश्त व्यवस्था और महिला अपराध और पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के क्रियान्वयन की बारीकी से जांच की जाएगी।
*25 से 28 सितंबर तक जिलों में रात्रि विश्राम करेंगे अधिकारी*
विधि व्यवस्था को और पुख्ता करने के लिए क्षेत्रीय आईजी और डीआईजी अधिकारियों को विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इन अधिकारियों को 25 से 28 सितंबर तक अपने-अपने क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले जिलों में ही रात्रि विश्राम करना होगा। इस दौरान वे पुलिस व्यवस्था और सुरक्षा तैयारियों का सीधे मुआयना करेंगे।
*लंबित कांडों और वारंट की समीक्षा के बाद 29 सितंबर को अंतिम रिपोर्ट*
रात्रि विश्राम के दौरान पुलिस अफसर लंबित कांडों, फरार अपराधियों के खिलाफ जारी वारंट, इश्तिहार, कुर्की-जब्ती की कार्रवाई और रात में गश्त की वास्तविक स्थिति का आकलन करेंगे। सभी क्षेत्रीय आईजी और डीआईजी पूरी समीक्षा करने के बाद 29 सितंबर तक अपनी अंतिम रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेजेंगे।क्या आपको लगता है कि आधी रात को थानों की कार्यप्रणाली की समीक्षा करने से कानून व्यवस्था में सुधार होगा? इस विषय पर अपने विचार कमेंट में बताएं