Rang दे Zindagi

Rang दे Zindagi कहीं दर्द तो कहीं खुशियां, कहीं आसमान ?

आपके जीवन में शांति, खुशहाली और बरकत बनी रहे, इसी कामना के साथ आप सभी को ईद-उल-फितर की हार्दिक शुभकामनाएँ... 🙏💞🙏
21/03/2026

आपके जीवन में शांति, खुशहाली और बरकत बनी रहे, इसी कामना के साथ आप सभी को ईद-उल-फितर की हार्दिक शुभकामनाएँ... 🙏💞🙏

यूपी के पीलीभीत में एक महिला को डॉक्टर ब्रेन डेड घोषित कर देते हैं। उसे सांस नहीं आ रही होती। पति घर पर फोन कर कहता है क...
12/03/2026

यूपी के पीलीभीत में एक महिला को डॉक्टर ब्रेन डेड घोषित कर देते हैं। उसे सांस नहीं आ रही होती। पति घर पर फोन कर कहता है कि अंतिम संस्कार की तैयारी करो। तभी घर के रास्ते में एंबुलेंस के छुपेरुस्तम गड्ढे में उछल पड़ती है। झटका इतना ज़ोरदार होता है कि महिला होश में आ जाती है। ये देख घरवाले खुशी से उछल पड़ते हैं और महिला को लेने आया यमराज का भैंसा वहीं गश खाकर बेहोश हो जाता है।

गड्ढों के ज्ञात इतिहास में शायद यह पहला गड्ढा होगा जिसने किसी की जान बचाई है। मेरी गुज़ारिश है कि इस गड्ढे को आज ही यूनेस्को हेरिटेज साइट घोषित करके उसके चारों तरफ बाउंड्री वॉल बना दी जाए। उस ठेकेदार के घर पर अशर्फियों के मटके भिजवाए जाएं जिसने कभी गड्ढे को भरकर उसकी प्राइवेसी भंग नहीं की।

और गड्ढाकरी साहब की तारीफ में तो क्या ही कहें… दुनिया वाले शहर के अंदर ऐसे योग्य गड्ढे नहीं बना पा रहे जो किसी की मदद कर पाएं, और भारत में नेशनल हाईवे पर ऐसे सेवाभावी गड्ढे हैं जो लोगों को नई ज़िंदगी दे रहे हैं। चियर्स सर, एक-एक इथनॉल का शॉट हो जाए।

और इसरो वालों, चेक करो… अगर सच में गड्ढा बड़ा है तो तुम वहां से रॉकेट भी लॉन्च कर सकते हो।

पीलीभीत: कहते हैं, जब तक सांस है तब तक आस है। दुर्घटना भी कभी-कभी जीवन दे जाती है। कुछ ऐसा ही मामला पीलीभीत से सामने आया...
12/03/2026

पीलीभीत: कहते हैं, जब तक सांस है तब तक आस है। दुर्घटना भी कभी-कभी जीवन दे जाती है। कुछ ऐसा ही मामला पीलीभीत से सामने आया है। बरेली-हरिद्वार एनएच-74 पर एक गड्ढा 50 साल की महिला के लिए वरदान साबित हुआ। इस गड्‌ढ़े ने महिला को सचमुच जिंदा कर दिया। दरअसल, महिला में क्लिनिकली जिंदगी का कोई निशान नहीं था। डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए थे। अस्पताल से छुट्‌टी दे दी गई। परिजन निराश होकर महिला को लेकर घर के लिए निकले। लेकिन, रास्ते हुए हादसे ने चमत्कार कर दिया। अब इस मामले की चर्चा हो रही है।

दरअसल, डॉक्टरों ने पीलीभीत जिले की निवासी विनीता शुक्ला को 'ब्रेन-डेड' घोषित कर दिया था। बरेली के एक हॉस्पिटल से उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया था। डॉक्टरों ने कहा कि महिला की अब बचने की कोई उम्मीद नहीं है। डिस्चार्ज किए जाने के बाद 24 फरवरी को उनके पति कुलदीप कुमार शुक्ला एम्बुलेंस से उन्हें लेकर घर को निकले। वे काफी दुखी थे। रास्ते में एनएच के गड्ढों वाले हिस्से से उनकी एंबुलेंस टकराया गई। एंबुलेंस को अचानक जोर का झटका लगा। इस जोरदार झटके ने वह कर दिया, जिसके बारे में सोचा भी नहीं जा सकता था।
NH74 HumanLife ViralNews IndiaNews

Vineeta Shukla, 50, from Pilibhit, who was declared brain-dead by doctors in Bareilly after collapsing at home on Februa...
12/03/2026

Vineeta Shukla, 50, from Pilibhit, who was declared brain-dead by doctors in Bareilly after collapsing at home on February 22, reportedly began breathing again after an ambulance hit a pothole on NH-74 while her family was taking her home.

Further treatment later revealed the presence of neurotoxins, suggesting she was in a deep toxin-induced coma rather than brain-dead. She eventually made a full recovery by Monday, as reported by Times News Network.

"धन्यवाद"  मेरे जन्मदिन को इतना स्पेशल बनाने के लिए... 🎉💞🎉
10/03/2026

"धन्यवाद" मेरे जन्मदिन को इतना स्पेशल बनाने के लिए... 🎉💞🎉

01/01/2026

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