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आपके मुहल्ले बिहार की राजनीतिक तक, अपराध, भ्रष्टाचार से संस्कृति तक, सिर्फ मीडिया की ही मत सुनिए, आपके बीच की हलचल और आपकी आवाज. . . बिहार कथा
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🇮🇳 आज़ादी का 80वां पड़ाव: आत्ममंथन का समय​क्या आर्थिक प्रगति का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचा? क्या तकनीक और AI के...
15/08/2026

🇮🇳 आज़ादी का 80वां पड़ाव: आत्ममंथन का समय
​क्या आर्थिक प्रगति का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचा? क्या तकनीक और AI के दौर में हमारी जिम्मेदारी बढ़ी है?
​पढ़िए बिहार कथा का विशेष विचार पृष्ठ और जानिए आज़ादी के 8 decades बाद हमारे सपनों की असली तस्वीर।

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इस तस्वीर को आप क्या कैप्शन देंगे?
13/08/2026

इस तस्वीर को आप क्या कैप्शन देंगे?

सावन के दूसरे सोमवार पर देशभर में शिवभक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली. कांवड़िए गंगाजल लेकर हर-हर महादेव और बोल बम के ज...
10/08/2026

सावन के दूसरे सोमवार पर देशभर में शिवभक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली. कांवड़िए गंगाजल लेकर हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारों के साथ अपने गंतव्य की ओर बढ़ते नजर आए.

सावन सोमवारी पर शिवभक्ति में डूबा बिहार। मुजफ्फरपुर के बाबा गरीबनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं पर हेलिकॉप्टर से फूलों की बारि...
10/08/2026

सावन सोमवारी पर शिवभक्ति में डूबा बिहार। मुजफ्फरपुर के बाबा गरीबनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं पर हेलिकॉप्टर से फूलों की बारिश की गई। वहीं देवघर में करीब साढ़े 3 लाख कांवरियों के पहुंचने की उम्मीद है, जबकि बेगूसराय में श्रद्धालुओं की करीब 2 किलोमीटर लंबी कतार देखने को मिली। प्रदेश के शिव मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी है।

#सावनसोमवारी #बोलबम

09/08/2026

मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी (सीजेएम) द्वारा अधिवक्ता अजातशत्रु को जेल भेजे जाने पर जिला विधिक संघ गोपालगंज द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि दिनांक 10 अगस्त 26 को सभी अधिवक्ता सीजेएम कोर्ट का त्याग /बहिष्कार करेंगे।

लोकतंत्र की मजबूती केवल संवैधानिक प्रावधानों के अस्तित्व में नहीं, बल्कि उनके ईमानदार पालन में निहित होती है। विधान परिष...
06/08/2026

लोकतंत्र की मजबूती केवल संवैधानिक प्रावधानों के अस्तित्व में नहीं, बल्कि उनके ईमानदार पालन में निहित होती है। विधान परिषद में मनोनयन की व्यवस्था आज भी उतनी ही उपयोगी और प्रासंगिक है, जितनी संविधान निर्माण के समय थी, बशर्ते उसका उद्देश्य राजनीतिक पुनर्वास नहीं बल्कि समाज की उत्कृष्ट प्रतिभाओं और अनुभवों को विधायिका तक पहुंचाना हो। संविधान की भावना का सम्मान ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी रक्षा है। जब संवैधानिक मूल्यों पर राजनीतिक सुविधा हावी होने लगे, तब केवल कानून नहीं, लोकतांत्रिक नैतिकता भी कमजोर पड़ने लगती है। इसलिए आवश्यक है कि मनोनयन की यह व्यवस्था अपने मूल उद्देश्य की ओर लौटे और वास्तव में उन लोगों के लिए आरक्षित रहे, जिनके ज्ञान, अनुभव और योगदान से लोकतंत्र समृद्ध हो सकता है।

माफिया अतीक अहमद के छोटे बेटे अवान की सड़क हादसे में मौ'त हो गई।
06/08/2026

माफिया अतीक अहमद के छोटे बेटे अवान की सड़क हादसे में मौ'त हो गई।

वाकई पीके ने सीएम साहब को निपटवा दिया है? बांकीपुर की जनता का निर्णय बीजेपी कतई अफोर्ड करने की स्थिति में नहीं है। क्यों...
06/08/2026

वाकई पीके ने सीएम साहब को निपटवा दिया है?

बांकीपुर की जनता का निर्णय बीजेपी कतई अफोर्ड करने की स्थिति में नहीं है। क्योंकि ये बीजेपी का गढ़ है और उसमें सेंधमारी होना अच्छी बात नहीं है।

बीजेपी कोर करेक्शन करेगी?

कोई विकल्प नहीं है, करना ही पड़ेगा….क्योकि बांकीपुर में पहले ही दिन से बीजेपी की फजीहत हो गई थी।

नितिन नबीन ने मंथन की बातें की है। देखते है क्या निकलता है। आज दिल्ली में एनडीए का मंगल मिलन कार्यक्रम था। इसमें कुछ तस्वीर सुर्खियां बटोर रही है।

फोटो-इंटरनेट

#प्रोफ़ेसरलेक्चर

जय माँ अम्बिका भवानी
06/08/2026

जय माँ अम्बिका भवानी

बिहार के राज्यपाल को यह अधिकार है कि वह बिहार विधान परिषद में 12 सदस्यों का मनोनयन कर सकता है. मगर इसके साथ क्लाउज है. भ...
06/08/2026

बिहार के राज्यपाल को यह अधिकार है कि वह बिहार विधान परिषद में 12 सदस्यों का मनोनयन कर सकता है. मगर इसके साथ क्लाउज है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 171(5) के अनुसरा राज्यपाल सिर्फ ऐसे व्यक्तियों को ही मनोनीत कर सकता है, जिनकी साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारिता आंदोलन या समाज सेवा में विशेष ज्ञान या अनुभव हो. मकसद यह था कि विधान परिषद में ऐसे विशेषज्ञों और समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तियों को जगह मिले जो चुनावी राजनीति के इतर(यानी उस दबाव से मुक्त होकर) अपने अनुभव के आधार कानून निर्माण की प्रक्रिया में योगदान दे सके. संविधान में यह भी जिक्र है कि राजनीति या किसी राजनीतिक दल में योगदान को मनोनयन का आधार नहीं माना जायेगा.

अगर कम शब्दों में समझें तो राजनेताओं से इतर समाज के बुद्धिजीवियों, कलाकारों को भी विधान परिषद में जगह देने की बात थी. शर्त यह भी रखी गई थी कि जिनका मनोनयन हो उसके आगे इनमें से किसी योग्यता का जिक्र हो.

कल मैं दीपक प्रकाश के मनोनयन को लेकर जारी गजट देख रहा था. उसमें कहीं इस बात का जिक्र नहीं था कि वे साहित्यकार हैं, कलाकार हैं, वैज्ञानिक हैं, सहकारिता आंदोलन से जुड़े हैं या समाज सेवी. हालांकि समाज सेवी ऐसा टर्म है, जिसके भीतर कोई भी आ जाता है. आपने गरीबों में कभी कंबल बांट दिया तो हो गये समाज सेवी. मगर दीपक प्रकाश समाज सेवी हैं, यह भी नहीं कहा गया.

सच यह है कि मसला सिर्फ दीपक प्रकाश का नहीं है. बिहार विधान परिषद में इस वक्त उन्हें मिलाकर जो 12 सदस्य हैं, उनमें छह जदयू के हैं और अब तक छह भाजपा के थे, मगर अब दीपक प्रकाश अपनी पिता के पार्टी के सदस्य हैं. इनमें अगर बहुत खींच तान कर निकाला जाये तो दो लोग मिलते हैं, जो संविधान की भावना के अनुरूप हैं. उनमें एक रामवचन राय हैं, जो साहित्यकार हैं और दूसरे डॉ. राज्यवर्धन आजाद हैं, जो एक ख्याति प्राप्त आंखों के डॉक्टर हैं. शेष खांटी राजनेता है. कैसे, यह नामों की सूची पढ़कर देख लें.

1. अशोक चौधरी
2. जनक राम
3. राज्यवर्धन आजाद
4. राम वचन राय
5. संजय कुमार सिंह
6. ललन कुमार सर्राफ
7. राजेंद्र प्रसाद गुप्ता
8. संजय सिंह
9. प्रमोद कुमार चंद्रवंशी
10. घनश्याम ठाकुर
11. निवेदिता सिंह
12. दीपक प्रकाश

अब इनमें कोई इन दोनों के अलावा साहित्यकार, वैज्ञानिक हो तो मुझे नहीं मालूम. मगर इतना समझ आता है कि मनोनयन के मामले में राजनीतिक दलों ने मिलकर संविधान की भावना का कचरा कर दिया है. 12 सीटों को सत्ताधारी दलों ने अपने हिसाब से बांट लिया है और अपने लोगों को उपकृत करने का जरिया बना लिया है. इनमें भी ज्यादातर पोलिटिकल लोगों को भरा गया है.

हैरत की बात है कि इसी विधान परिषद में बटुकेश्वर दत्त जैसे स्वतंत्रता सेनानी, बाबूलाल मधुकर जैसे मगही कवि और सियाराम तिवारी जैसे तबला वादक का मनोनयन हुआ था. मगर ये गिने चुने नाम हैं. इस कोटे का ज्यादातर इस्तेमाल सत्ताधारी दल ही करते हैं. अगर ऐसा ही है तो क्यों न इस कोटे को खत्मकर दिया जाये और इसे भी चुनाव के जरिये भरा जाये? अगर नेता ही आयें तो चुन कर आयें. उन्हें मनोनयन की सुविधा क्यों मिले? -पुष्यमित्र

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