19/11/2025
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📍 पैकोलिया में पुलिस मौजूदगी के बीच भी नहीं रुका अवैध विवाह, पहली पत्नी ने स्टेज पर पहुंचकर लगाया गंभीर आरोप
पैकोलिया थाना क्षेत्र के एक गांव में आयोजित शादी समारोह उस समय बड़ा हंगामे में बदल गया जब दूल्हे की पहली पत्नी अचानक जयमाल के स्टेज पर पहुंच गई। गुजरात निवासी रेशमा नाम की महिला ने अपने पति पर बिना तलाक लिए दूसरी शादी करने का आरोप लगाते हुए जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया। हैरानी की बात यह रही कि पुलिस मौके पर मौजूद होने के बावजूद विवाह समारोह नहीं रुका और रस्में जारी रहीं।
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💥 स्टेज पर पहुंची पहली पत्नी, मचा हड़कंप
मिली जानकारी के अनुसार, रेशमा को किसी तरह पता चला कि उसका पति बस्ती के पैकोलिया थाना क्षेत्र में दूसरी शादी कर रहा है। जैसे ही बरात पहुंची और जयमाल का कार्यक्रम शुरू हुआ, रेशमा स्टेज पर चढ़ गई।
उसने दूल्हे पर आरोप लगाते हुए कहा—
“हमारी कोर्ट मैरिज हुए 3 साल हो गए हैं। तलाक नहीं हुआ है। इसके बावजूद दूसरी शादी करना अपराध है।”
इस दौरान मौके पर अफरा-तफरी मच गई और समारोह में भगदड़ जैसा माहौल बन गया।
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👮 पुलिस प्रशासन मौके पर, लेकिन ‘दर्शक’ बना रहा
घटना की जानकारी एसपी बस्ती, एएसपी और सीओ हरैया तक पहुंची। निर्देश पर पैकोलिया थाना पुलिस मौके पर पहुंची।
लेकिन रेशमा और उसके समर्थकों के हंगामे के बावजूद पुलिस ने विवाह रुकवाने की कोई कार्रवाई नहीं की।
थानाध्यक्ष कृष्ण कुमार साहू ने स्पष्ट कहा—
“पुलिस के पास दूसरी शादी रोकने का कोई अधिकार नहीं है। यह मामला कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है। विवाह वैध है या अवैध, इसका फैसला न्यायालय ही करेगा।”
यह बयान सुनकर रेशमा सहित कई लोग पुलिस के रवैये से नाराज़ हो उठे।
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💔 पीड़िता की व्यथा: “कोर्ट मैरिज के बाद पति बदल गया”
रेशमा ने बताया—
👉तीन साल पहले गुजरात में कोर्ट मैरिज हुई थी
👉कुछ महीनों बाद पति का व्यवहार बदल गया
👉पति ने तलाक की अर्जी दी है, लेकिन अभी फैसला नहीं हुआ
👉तलाक के बिना दूसरी शादी करना अपराध, फिर भी पुलिस चुप रही
उसने दावा किया कि दूल्हे और उसके परिवार ने योजनाबद्ध तरीके से उसे धोखा दिया और दूसरी शादी की तैयारी कर ली।
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⚖️ कानूनी पहलू: क्या दूसरी शादी रोकना पुलिस का अधिकार है?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार—
👉हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 494 के तहत तलाक के बिना दूसरी शादी करना दंडनीय अपराध है
👉सज़ा: 7 साल तक की जेल
👉लेकिन कार्रवाई तभी होती है जब पीड़ित लिखित शिकायत देकर कोर्ट में केस दायर करे
👉पुलिस स्वतः संज्ञान लेकर शादी नहीं रोक सकती
इस आधार पर पुलिस ने स्वयं को कार्रवाई से अलग रखा।
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❓ सवालों के घेरे में पुलिस का रवैया
स्थानीय लोगों का कहना है:
पुलिस ने चाहे तो धोखाधड़ी, दहेज उत्पीड़न या महिला उत्पीड़न की धाराओं में केस दर्ज कर सकती थी
👉लेकिन पूरे मामले को “पारिवारिक विवाद” बताकर छोड़ दिया
👉रेशमा दूल्हे के सामने रोती और न्याय की मांग करती रही, लेकिन शादी के सभी कार्यक्रम सामान्य रूप से चलते रहे।
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⚡ रेशमा अब लड़ेंगी कानूनी लड़ाई
रेशमा ने कहा—
“मैं उच्चाधिकारियों से मिलूंगी, कोर्ट जाऊंगी। मेरे साथ बड़ा अन्याय हुआ है। जब तक कानून मेरा साथ देगा, मैं लड़ती रहूंगी।”
वहीं पुलिस का कहना है कि मामला अब कोर्ट के विवेक पर छोड़ दिया गया है।
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🔍 सामाजिक और कानूनी स्तर पर खड़े हुए बड़े सवाल
यह घटना सिर्फ एक परिवार का विवाद नहीं, बल्कि कई गंभीर सवाल उठाती है—
👉 पुलिस मौजूद होने के बावजूद क्या अवैध विवाह जारी रह सकता है?
👉 क्या तलाकशुदा न होने के बावजूद दूसरी शादी रोकना इतना मुश्किल है?
👉 क्या महिलाओं की कानूनी आवाज़ व्यवस्था के सामने इतनी कमजोर है?
फिलहाल, रेशमा गुजरात लौटकर अपने पति और उसके परिवार के खिलाफ कानूनी लड़ाई शुरू करने की तैयारी कर रही है।