Current Affairs & Job Alert

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- that do not require subject specialization and Climate Change - that do not require subject specialization.

02/08/2019

1857 के विद्रोह के बाद भारत में और भी अनेक विद्रोह हुए जिनमें कुछ नागरिक विद्रोह थे कुछ आदिवासी तथा कुछ कृषक विद्रोह थ...

02/08/2019

  मुहीउद्दीन मोहम्मद औरंगजेब का जन्म 24 अक्टूबर 1618 ई. को उज्जैन के पास दोहद नामक स्थान पर हुआ था | 1633 ई. में सुधाकर नामक ह....

02/08/2019

02 अगस्त 2019

अर्थव्यवस्था--->

* डाक विभाग ने इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक को इस रूप में बदलने का फैसला किया है - ------- लघु वित्त बैंक

* विश्व बैंक के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारत 2018 में 2.73 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनी है और अब वैश्विक स्तर पर यह इस क्रमांक की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गई है -------- सातवीं

अंतरराष्ट्रीय------>

* दक्षिण पूर्व एशियाई देशों का संघ (आसियान) के सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की शिखर परिषद 2019 का आयोजन जहाँ किया गया वह जगह --------- बैंकॉक (थाईलैंड)

* यह देश जुलाई 2020 में मंगल ग्रह पर अरब दुनिया का पहला अंतरिक्ष यान ‘होप प्रोब’ भेजेगा –------ संयुक्त अरब अमीरात

* इस पश्चिम अफ्रीकी देश में कौशल विकास और कुटीर उद्योग परियोजनाओं के समर्थन में भारत ने 31 जुलाई को 500,000 अमरीकी डौलर की सहायता प्रदान की ------ गाम्बिया

* क्यूएस संस्थान की विश्व की बेस्ट स्टूडेंट सिटीज रैंकिंग 2019 में पहला स्थान -------- लंदन (ब्रिटेन)
राष्ट्रीय

* 1 नवंबर से 4 नवंबर 2019 तक दिल्ली में आयोजित विश्व खाद्य भारत (डब्ल्यूएफआई) 2019 के कार्यक्रम में भागीदार राज्य - --------- जम्मू और कश्मीर

* 31 जुलाई को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए अन्तरिक्ष में खोज और उपयोग में सहयोग पर भारत और इस देश के बीच समझौता ज्ञापन को मंजूरी दी –------&& बहरीन

* क्यूएस संस्थान की भारत की बेस्ट स्टूडेंट सिटीज रैंकिंग 2019 में पहला स्थान -------- बैंगलोर (81 वां)
व्यक्ति विशेष

* हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, बेंगलुरु के नए निदेशक (संचालन) ---------- एम एस वेपारी

* अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) में भारत के लिए कार्यकारी निदेशक रहे व्यक्ति का निधन 30 जुलाई 2019 को अमेरिका में हुआ - ------डॉ सुबीर विट्ठल गोकर्ण

* वित्त मंत्रालय के नए सचिव - ------राजीव कुमार
क्रीड़ा

* अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने 2019-20 सत्र के लिए नामित किए गए अंपायरों के अमीरात आईसीसी एलीट पैनल के दो नए अंपायरों के नाम -------- माइकल गफ (इंग्लैंड) और जोएल विल्सन (वेस्टइंडीज)

सामान्य ज्ञान-------->

* गाम्बिया - राजधानी: बंजुल; मुद्रा: डलासी

* बहरीन - राजधानी: मनामा; मुद्रा: बहरीन दीनार

* अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) – स्थापना वर्ष: 1945; मुख्यालय: वाशिंगटन डी.सी. (अमरीका)

* अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) - स्थापना वर्ष: 1909; मुख्यालय: दुबई, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई)

* विश्व बैंक - स्थापना वर्ष: 1944; मुख्यालय: वाशिंगटन डीसी (अमरीका)

* दक्षिण पूर्व एशियाई देशों का संघ (आसियान) - स्थापना वर्ष: 1967; मुख्यालय: जकार्ता, इंडोनेशिया

01/08/2019

1. कलिंग का युद्ध (261 ईसा पूर्व) कलिंग की और से 60000 सिपाही की सेना लड़ाई के मैदान में थी, तथा मौर्य सेना में 1 लाख से अधिक सिप...

कामागतामारू कोयला ढोने वाला भाप चालित जापानी समुद्री जहाज था जिसे हांगकांग में रहने वाले व्यापारी बाबा गुरदित्त सिंह ने ...
01/08/2019

कामागतामारू कोयला ढोने वाला भाप चालित जापानी समुद्री जहाज था जिसे हांगकांग में रहने वाले व्यापारी बाबा गुरदित्त सिंह ने खरीदा था। वर्ष 1908 में कनाडा सरकार ने प्रवासियों को रोकने के लिए एक आदेश पारित किया था जिसके तहत वे लोग ही कनाडा आ सकते थे जिनका जन्म कनाडा में हुआ हो या वहाँ के नागरिक हो।

यह आदेश विशेष रूप से भारतीयों को रोकने के लिए दिया गया था।
इस आदेश को व्यक्तिगत चुनौती मान कर गुरदित्त कामागतामारू में 340 सिखों , 24 मुस्लिमों और 12 हिंदुओं को लेकर 23 मई 1914 को कनाडा के वैंकूवर पोर्ट पर पहुंचे।

वहाँ पर जहाज को घेर लिया गया और नस्लीय आव्रजन क़ानूनों के तहत 20 कनाडाई नागरिकों के अलावा बाक़ियों को उतरने ही नहीं दिया गया और जहाज पर खाने पीने की आपूर्ति बंद कर दी गयी।

यह पूरा मामला कोर्ट में गया किन्तु फैसला कनाडा सरकार के पक्ष में गया। इसके दो महीने बाद 23 जुलाई 1914 को जहाज भारत लौट गया।
जब जहाज कलकत्ता के बजबज घाट पर पहुंचा तो 27 सितम्बर 1914 को अंग्रेजों द्वारा की गई फायरिंग में 19 लोगों की मौत हो गयी। इस घटना ने आजादी की लहर को गति प्रदान की।

इस घटना की स्मृति में भारत सरकार ने 2014 में 100 रुपये का एक सिक्का जारी किया था और वर्ष 2016 में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो ने कामागतामारू की अमानवीय त्रासदी के लिए संसद में क्षमा मांगी।

कामागतामारू कोयला ढोने वाला भाप चालित जापानी समुद्री जहाज था जिसे हांगकांग में रहने वाले व्यापारी बाबा गुरदित्त ...

7  ऐसे युद्ध जिन्होंने भारत का इतिहास बदल दिया1. कलिंग का युद्ध (261 ईसा पूर्व)कलिंग की और से 60000 सिपाही की सेना लड़ाई ...
01/08/2019

7 ऐसे युद्ध जिन्होंने भारत का इतिहास बदल दिया

1. कलिंग का युद्ध (261 ईसा पूर्व)

कलिंग की और से 60000 सिपाही की सेना लड़ाई के मैदान में थी, तथा मौर्य सेना में 1 लाख से अधिक सिपाही थे।
इस युद्ध में महा-नरसंहार हुआ, लगभग समस्त कलिंग सेना मारी गयी और मौर्य सेना को भी विजय की भारी कीमत चुकानी पड़ी।
युद्ध की विभीषिका देख कर सम्राट अशोक के ह्रदय-परिवर्तन के बाद बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया और भविष्य में युद्ध नहीं करने की प्रतिज्ञा भी की।

परिणाम
भारत के सबसे शक्तिशाली सम्राट के बौद्ध धर्म ग्रहण कर अहिंसा के पथ पर चले जाने का प्रभाव भारत के इतिहास पर हमेशा के लिये रह गया।
बौद्ध धर्म का प्रभाव बढ़ता गया और फिर एक समय संसार के सबसे आक्रामक साम्राज्य के अधिकाँश राजा अहिंसा पथ पर चल पड़े।
परिणामस्वरूप सैन्य बल में कम होते हुए भी विदेशी हमलावर अपनी आक्रमक रणनीति के बल पर यहां के राजाओं को परास्त करने में सफल रहे।

2. तराइन की दूसरी लड़ाई (1192)

सन 1191 तक भारत मुख्य रूप से हिन्दू राजपूत राजाओं के अनेक साम्राज्यों में बंटा हुआ था।
इससे पहले कुछ पश्चिमी हमलावर यहाँ आये जरूर लेकिन वो भारत के पश्चिमी भू-भाग तक लूट-पाट करने तक सीमित रहे और वापस लौट गए।
सन 1191 में पहली बार अफगानिस्तान के गौर प्रान्त के मुहम्मद गौरी ने भारत पर आक्रमण किया। उसका मुकाबला दिल्ली के उत्तर-पश्चिम में स्थित तराइन के के मैदान में राजा पृथ्वीराज चौहान से हुआ। गौरी की हार हुई लेकिन अगले वर्ष वह फिर और अधिक तैयारी और सेना के साथ वापस लौटा।
सन 1192 के इस तराइन के युद्ध में अपनी आक्रामक घुड़सेना और रणनीति से उसने चौहान की भारी-भरकम सेना को हरा दिया।
पृथ्वीराज चौहान इस लड़ाई में मारा गया। इस युद्ध के बाद भारत में राजपूत राजाओं के राज का धीरे-धीरे अंत हो गया।

परिणाम
भारत के इतिहास पर इस युद्ध से ज्यादा राजनीतिक-सामाजिक प्रभाव किसी और युद्ध का नहीं पड़ा। भारत में इस्लामिक शासन की शुरुआत इसी युद्ध से मानी जा सकती है।

3. पानीपत का युद्ध (1526)

उस समय दिल्ली पर लोदी सल्तनत के इब्राहिम लोदी का राज था।
दिल्ली के पास स्थित पानीपत में काबुल के शासक बाबर और इब्राहिम लोदी की सेनाओं के बीच भयंकर युद्ध हुआ।
लोदी की सेना संख्या में अधिक और ज्यादा शक्तिशाली थी किन्तु उस समय के सामरिक हथियारों से कहीं उन्नत हथियार – अपनी 24 तोपों – के दम पर बाबर ने लोदी की सेना को हरा दिया और इस लड़ाई में इब्राहिम लोदी की मौत हुई।
इस प्रकार संसार के सबसे शक्तिशाली और लम्बे समय तक चलने वाले साम्राज्यों में से एक – मुग़ल शासन – की भारत में स्थापना हुई।

परिणाम
मुग़ल शासन ने भारत के राजनीतिक, आर्थिक एवं सामजिक इतिहास को हमेशा के लिए बदल कर रख दिया।
आज जो भारत, विशेषकर उत्तर भारत, का ताना – बाना है, उसकी नींव मुग़ल शासन की स्थापना के साथ ही रख दी गई थी।

4. प्लासी का युद्ध (1757)

उस समय भारत में फ्रांसीसियों और अंग्रेजों के बीच व्यापारिक और भविष्य के सामरिक आधिपत्य को लेकर संघर्ष चल रहा था।
सिराज-उद -दौला फ्रांसीसियों के समर्थन में था। सन 1756 में उसने अंग्रेजों के कलकत्ता स्थित व्यापार केंद्र पर हमला कर वहां मौजूद ब्रिटिश फ़ौज का नर-संहार कर दिया था।
प्लासी की लड़ाई में में मीर जाफर ने सिराजुद्दौला से गद्दारी कर ब्रिटिश फौजों का साथ दिया।
इस लड़ाई के बाद कुछ समय बंगाल की कमान मीरजाफ़र के हाथ रही किन्तु जल्दी ही उन्होंने वहां का शासन अपने हाथ में लेकर खुद ही बंगाल में राज करना आरम्भ कर दिया।

परिणाम
प्लासी की लड़ाई ने भारत में अंग्रेजों के पांव मजबूती से जमा दिए। लार्ड क्लाइव के नेतृत्व में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना ने नवाब सिराजुद्दौला की सेना को प्लासी की लड़ाई में पूरी तरह से तहस-नहस कर के बंगाल में ब्रिटिश शासन स्थापित कर दिया।
यहाँ से कमाई हुई दौलत के बल उन्होंने अपनी सेना को और मजबूत किया और धीरे धीरे पूरे भारत में अपने साम्राज्य की स्थापना कर डाली।


5. कोहिमा का युद्ध (1944)
कोहिमा भारत में बर्मा की सीमा के निकट नागालैंड में स्थित है। कोहिमा का यह युद्ध इतिहास में “पूरब के स्टालिनग्राद‘ के नाम से प्रसिद्ध है।
बर्मा पर जापानियों का आधिपत्य था जिन्होंने भारत में आधिपत्य की महत्वाकांक्षी योजना बनाई ताकि यहाँ सम्पदा का इस्तेमाल युद्ध में किया जा सके और अंग्रेजों की ताकत को कमजोर किया जा सके क्यूंकि अंग्रेज भी उस समय सेना और संसाधनों के लिए भारत पर ही निर्भर थे।

परिणाम
यहां पर मिली पराजय द्वितीय विश्व-युद्ध के दौरान जापानी फौजों को मिलने वाली सबसे महत्वपूर्ण शिकस्त थी जिसने भारतीय उपमहाद्वीप और संभवतया सारे संसार में जापानियों को बढ़ने से रोक दिया।
इस भयानक युद्ध में जापानियों की हार हुई और भारत का इतिहास नए सिरे से लिखते-लिखते रह गया।
यदि भारत या इसके बड़े भू-भाग पर जापानी अपना कब्ज़ा ज़माने में कामयाब हो जाते तो यह मित्र देशों के लिए बड़ा सामरिक नुक्सान होता।
साथ ही भारत का इतिहास भी हमेशा के लिए बदल जाता क्यूंकि संभव है कि मात्र तीन वर्ष बाद भारत को मिलने वाली स्वतंत्रता जापानी शासन के तले संभव न हो पाती।

6. तालीकोटा की लड़ाई
तालीकोटा की लड़ाई 26 जनवरी 1565 ईस्वी को दक्कन की सल्तनतों और विजयनगर साम्राज्य के बीच लड़ा गया था
विजयनगर साम्राज्य की यह लडाई राक्षस-टंगडी नामक गावं के नजदीक लड़ी गयी थी. इस युद्ध में विजय नगर साम्राज्य को हार का सामना करना पड़ा.
तालीकोटा की लड़ाई के समय, सदाशिव राय विजयनगर साम्राज्य का शासक था. लेकिन वह एक कठपुतली शासक था.
वास्तविक शक्ति उसके मंत्री राम राय द्वारा प्रयोग किया जाता था. सदाशिव राय नें दक्कन की इन सल्तनतों के बीच अंतर पैदा करके उन्हें पूरी तरह से कुचलने की कोशिश की थी.
हालाकि बाद में इन सल्तनतों को विजयनगर के इस मंसूबे के बारे में पता चल गया था और उन्होंने एकजुट होकर एक गठबंधन का निर्माण किया.
और विजयनगर साम्राज्य पर हमला बोल दिया था. दक्कन की सल्तनतों ने विजयनगर की राजधानी में प्रवेश करके उनको बुरी तरह से लूटा और सब कुछ नष्ट कर दिया.

परिणाम
तालीकोटा की लड़ाई के पश्चात् दक्षिण भारतीय राजनीति में विजयनगर राज्य की प्रमुखता समाप्त हो गयी.
मैसूर के राज्य, वेल्लोर के नायकों और शिमोगा में केलादी के नायकों नें विजयनगर से अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की.
यद्यपि दक्कन की इन सल्तनतों नें विजयनगर की इस पराजय का लाभ नहीं उठाया और पुनः पहले की तरह एक दुसरे से लड़ने में व्यस्त हो गए और अंततः मुगलों के आक्रमण के शिकार हुए.

7. करनाल का युद्ध
करनाल का युद्ध 24 फ़रवरी, 1739 ई. को नादिरशाह और मुहम्मदशाह के मध्य लड़ा गया
नादिरशाह के आक्रमण से भयभीत होकर मुहम्मदशाह 80 हज़ार सेना लेकर ‘निज़ामुलमुल्क’, ‘कमरुद्दीन’ तथा ‘ख़ान-ए-दौराँ’ के साथ आक्रमणकारी का मुकाबला करने के लिए चल पड़ा था।
शीघ्र ही अवध का नवाब सआदत ख़ाँ भी उससे आ मिला। करनाल युद्ध तीन घण्टे तक चला था।

परिणाम-
इस युद्ध में ख़ान-ए-दौराँ युद्ध में लड़ते हुए मारा गया, जबकि सआदत ख़ाँ बन्दी बना लिया गया।
सम्राट मुहम्मदशाह, निज़ामुलमुल्क की इस सेवा से बहुत प्रसन्न हुआ और उसे ‘मीर बख़्शी’ के पद पर नियुक्त कर दिया
सआदत ख़ाँ ने मीर बख़्शी के इस पद से वंचित रहने के कारण नादिरशाह को धन का लालच देकर दिल्ली पर आक्रमण करने को कहा।
नादिरशाह ने दिल्ली की ओर प्रस्थान कर दिया, तथा वह 20 मार्च, 1739 को दिल्ली पहुँचा। दिल्ली में नादिरशाह के नाम का ‘खुतबा’ पढ़ा गया तथा सिक्के जारी किए गए।
नादिरशाह दिल्ली में 57 दिन तक रहा और वापस जाते समय वह अपार धन के साथ ‘तख़्त-ए-ताऊस’ तथा कोहिनूर हीरा भी ले गया

1. कलिंग का युद्ध (261 ईसा पूर्व) कलिंग की और से 60000 सिपाही की सेना लड़ाई के मैदान में थी, तथा मौर्य सेना में 1 लाख से अधिक सिप...

01/08/2019

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01/08/2019

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