Kahani Apno Ki

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कहानियों और साहित्य पर आधारित (Storytelling & Literature Focus)
विवरण: शब्दों के माध्यम से अपनों के करीब आने का एक मंच। 'कहानी अपनों की' पर हम लेकर आते हैं जीवन के सच्चे अनुभव, प्रेरणादायक किस्से और रिश्तों की गहराई बयां करती कहानियाँ।

यदि आपके पास भी है

29/04/2026

Poora sune

06/04/2026

*लोग कब तक साथ देते हैं?*
A) 👍 हमेशा
B) 🙏 मतलब तक
C) ♥️ जरूरत तक
D) 👌 कभी नहीं
*👇 Answer with Emojis ✅*

30/03/2026

*🌳 अर्जुन और भगवान शिव का युद्ध 🌳*

हिमालय की तराई में एक सघन वन था, वन में तरह-तरह के पशु-पक्षी रहते थे वहीं जगह-जगह ऋषियों की झोंपड़ियां भी बनी हुई थीं ऐसा लगता था मानो प्रकृति ने अपने हाथों से उस वन को संवारा हो।

उन्हीं झोंपड़ियों के पास एक तेजस्वी युवक बहुत दिनों से अंगूठे के बल खड़ा होकर तप में लीन था उसने खाना-पीना सबकुछ छोड़ दिया था वह केवल हवा पीकर ही रहता था उसका शरीर सूख गया था, सिर के बाल बढ़ गए थे पर चेहरे पर तेज बढ़ता जा रहा था लगता था मानो दूसरा सूर्य निकल रहा हो।

वह तपस्वी पांडवों का भाई अर्जुन था भगवान श्री कृष्ण एवं वेदव्यास जी की सलाह से वह दिव्यास्त्र प्राप्त करने के लिए शिवजी को प्रसन्न करने की चेष्टा कर रहा था, क्योंकि छली षड्यंत्रकारी और पापी कौरवों को हराने के लिए शिवजी की शरण में जाने के अतिरिक्त बेसहारा पाण्डवों के पास अब कोई चारा नहीं रह गया था।

अर्जुन के तप के तेज से आसपास की धरती जलने लगी, झोपड़ियों में रहने वाले ऋषि-मुनि घबरा उठे, वे अर्जुन को समझाने लगे कि वह ऐसा कठिन तप न करे, पर अर्जुन ने उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया, ध्यान भी वह कैसे दे सकता था उसे तो अधर्म और अन्याय को मिटाने के लिए शिवजी से दिव्यास्त्र प्राप्त करने थे अत: वह तप में लगा रहा।

अर्जुन ने जब ऋषियों की बात पर ध्यान नहीं दिया तो ऋषिगण सामूहिक रूप से शिवजी से प्रार्थना करने लगे, "प्रभो ! अर्जुन के तप से धरती जल रही है, अगर आप उसे रोकेंगे नहीं तो इस वन में हम लोगों का रहना कठिन हो जाएगा।

उसी समय आकाशवाणी हुई, "ऋषियों ! घबराओ नहीं, अर्जुन पूर्वजन्म का देवता है उसके तप से तुम्हारा अनिष्ट नहीं होगा वह मुझसे दिव्यास्त्र लेना चाहता है मैं उसके तप से प्रसन्न हूं।

यह वाणी स्वयं भगवान आशुतोष की थी अर्जुन बड़ी श्रद्धा से उनकी आराधना में लगा रहा, उन्हें प्रसन्न करने के लिए तप करता रहा दोपहर का समय था अर्जुन अपनी पूजा की माला भगवान के चरणों पर चढ़ रहा था सहसा उसे एक शूकर दिखाई पड़ा, जो कहीं से निकलकर उसी ओर आ रहा था अर्जुन ने झट अपना धनुष-बाण उठाया और धनुष पर बाण चढ़ाकर शूकर पर चला दिया, बाण शूकर की छाती में लगा, वह धरती पर गिरकर कुछ देर तक तड़पकर सदा के लिए सो गया।

अर्जुन के बाण के साथ ही साथ शूकर की छाती में एक और बाण भी लगा था, वह बाण एक किरात का था, जो दूर से शूकर का पीछा करता हुआ आ रहा था।

शूकर जब धरती पर गिरा, तब अर्जुन और किरात दोनों शूकर के पास जा पहुंचे अर्जुन ने कहा, "शूकर की मृत्यु उसके बाण से हुई है" पर किरात ने उसकी बात का विरोध किया उसने कहा "नहीं, शूकर की मृत्यु अर्जुन के बाण से नहीं, उसके बाण से हुई है।"

शूकर की मृत्यु को लेकर अर्जुन और किरात में विवाद होने लगा दोनों ही एक दूसरे की वीरता को ललकारने लगे बातों ही बातों में अर्जुन का क्रोध भड़क उठा वह किरात पर बाण चलाने लगा।

अर्जुन ने किरात पर कई बाण चलाए, पर उसके सभी बाण किरात के शरीर से फूल की तरह लग-लग कर नीचे गिर पड़े, वह विस्मित हो उठा, पर साथ ही और भी अधिक क्रुद्ध हो उठा, वह किरात को युद्ध के लिए ललकार कर उस पर बाणों की वर्षा करने लगा।

फलत: किरात भी युद्ध के लिए तैयार हो गया किरात और अर्जुन दोनों में युद्ध होने लगा अर्जुन के पास युद्ध की जितनी कलाएं थीं, जितने अस्त्र-शस्त्र थे, सबका उसने उपयोग किया, पर किरात का बाल तक बांका नहीं हुआ।

यह पहला अवसर था, जब अर्जुन के बाण विफल हुए थे वह आश्चर्य में डूबकर सोचने लगा - यह किरात कौन है? मेरे बाण क्यों विफल हो गए?

कहीं किरात के रूप में स्वयं भगवान शिव तो नहीं हैं अर्जुन की आंखें बंद हो गईं वह हाथ में धनुष-बाण लेकर खड़ा था वह आंखें बंद करके सोचने लगा - अवश्य किरात के रूप में यह शिवजी ही हैं, मेरे बाण भगवान शंकर को छोड़कर और किसी पर विफल नहीं हो सकते थे।

अर्जुन ने आंखें खोलकर देखो, सामने कोई नहीं था, किरात इधर-उधर कहीं भी दिखाई नहीं पड़ रहा था, अर्जुन के मुख से अपने आप ही निकल पड़ा - भगवान शंकर, भगवान आशुतोष !

सहसा अर्जुन के गले में एक माला आ गई, यह उन्हीं मालाओं में से एक थी, जिन्हें अर्जुन भगवान के चरणों में चढ़ाया करता था, अर्जुन को विश्वास हो गया कि किरात के रूप में भगवान शिव ही उसके शौर्य की परीक्षा ले रहे थे, अर्जुन का मन शक्ति और श्रद्धा से भर गया, वह पुलकित होकर भगवान शंकर की प्रार्थना करने लगा| भगवान आशुतोष प्रसन्न हो उठे, उन्होंने प्रसन्नता भरे स्वर में कहा "अर्जुन" मैं तुम्हारी वीरता की परीक्षा लेकर परम संतुष्ट हुआ हूं, मैं तुम्हारी इच्छा के अनुसार ही तुम्हें पाशुपतास्त्र दे रहा हूं इससे तुम तीनों लोकों को जीत सकोगे।

अर्जुन को उद्देश्य पूर्ण हुआ, महाभारत के पन्नों से प्रकट है कि अर्जुन ने भगवान शंकर के दिए हुए अस्त्रों से ही महाभारत के युद्ध में विजय प्राप्त की थी सृष्टि के इतिहास में शौर्य की नैवेद्य से शिवजी को संतुष्ट करने वाला अकेला अर्जुन ही है अत: उसकी वीरता की कहानी प्रलय की छाती पर भी लिखी रहेगी|

23/03/2026

🔥 23 मार्च – शहीद दिवस 🔥

आज का दिन सिर्फ एक तारीख नहीं…
ये वो दिन है जब भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ने हँसते-हँसते फांसी को गले लगाकर भारत को आज़ादी की राह दिखाई थी। 🇮🇳

लाहौर जेल की वो रात…
चारों तरफ सन्नाटा था, लेकिन इन तीनों के दिलों में एक ही आवाज़ गूंज रही थी —
"इंकलाब ज़िंदाबाद!"

कहते हैं जब उन्हें फांसी पर ले जाया जा रहा था,
तो उनके चेहरे पर डर नहीं… बल्कि मुस्कान थी।
भगत सिंह ने कहा था —
"ज़िंदगी तो अपने दम पर जी जाती है, दूसरों के कंधों पर तो सिर्फ जनाजे उठते हैं।"

उनकी उम्र सिर्फ 23-24 साल थी…
जहाँ आज हम अपने सपनों में खोए रहते हैं,
वहाँ उन्होंने अपने सपनों को देश के लिए कुर्बान कर दिया। 💔

सोचिए…
अगर वो चाहते, तो आराम की जिंदगी जी सकते थे,
लेकिन उन्होंने चुना — देश के लिए मरना।

आज हम आज़ाद हैं…
लेकिन क्या हम उनकी कुर्बानी की कीमत समझते हैं?

👉 शहीद कभी मरते नहीं…
वो हर उस दिल में जिंदा रहते हैं जो अपने देश से प्यार करता है।

🙏 आइए, आज के दिन सिर्फ एक पोस्ट नहीं…
बल्कि दिल से एक वादा करें —
देश के लिए कुछ करने का।

🇮🇳 इंकलाब ज़िंदाबाद | वंदे मातरम् 🇮🇳





22/03/2026

🫖 “चाय से शुरू हुई मोहब्बत – प्रिंसिपल और चपरासी की अनोखी कहानी” ❤️
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के शहर मुल्तान में एक ऐसी कहानी सामने आई, जिसने सोशल मीडिया पर सबको हैरान कर दिया… और कहीं न कहीं दिल को छू भी लिया।
एक सरकारी स्कूल में फरज़ाना नाम की प्रिंसिपल थीं—सख्त, अनुशासित और अपने काम के लिए जानी जाती थीं।
उसी स्कूल में फैयाज़ नाम का एक चपरासी काम करता था—सीधा-सादा, मेहनती और बेहद विनम्र।
हर दिन की तरह…
फैयाज़ स्टाफ के लिए चाय बनाकर लाता था।
लेकिन उसकी चाय देने का अंदाज़ कुछ अलग था—
👉 हमेशा मुस्कुराकर “मैडम” कहना
👉 ट्रे को बड़े सलीके से पकड़ना
👉 हर कप को सम्मान के साथ पेश करना
धीरे-धीरे… प्रिंसिपल फरज़ाना ने ये नोटिस करना शुरू किया।
उन्हें सिर्फ चाय नहीं…
उस इंसान की सादगी, ईमानदारी और इज्जत देने का तरीका पसंद आने लगा।
एक दिन…
फरज़ाना ने खुद मीडिया को बताया—
👉 “मुझे फैयाज़ से प्यार हो गया, उसके काम करने और चाय परोसने के अंदाज़ से…” �
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काफी सोचने के बाद…
उन्होंने एक ऐसा कदम उठाया, जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी।
💥 उन्होंने खुद फैयाज़ को शादी के लिए प्रपोज किया!
पहले तो फैयाज़ को यकीन ही नहीं हुआ…
लेकिन फिर उसने हां कह दी।
और इस तरह…
एक प्रिंसिपल और एक चपरासी की शादी हो गई ❤️
💭 समाज की प्रतिक्रिया
इस शादी ने पूरे इलाके में चर्चा छेड़ दी—
कुछ लोग बोले:
👉 “ये कैसे हो सकता है?”
तो कुछ ने कहा:
👉 “ये सच्चे प्यार की मिसाल है, जहाँ स्टेटस नहीं… इंसानियत देखी जाती है।” �
GNN - Pakistan's Largest News Portal
✨ कहानी की सीख
इस कहानी ने एक बड़ा संदेश दिया—
👉 प्यार पद (position) नहीं देखता… दिल देखता है
👉 इज्जत देने वाला इंसान… सबसे खास होता है
❤️ अगर आप भी मानते हैं कि सच्चा प्यार स्टेटस से बड़ा होता है, तो कमेंट में लिखें — “True Love ❤️”
🔁 इस कहानी को शेयर करें… क्योंकि ऐसी कहानियाँ रोज़ नहीं मिलतीं

🇮🇳 “आज का भारत – बदलते समय की कहानी” 🇮🇳दिल्ली की एक ठंडी सुबह…मेट्रो में भीड़ पहले से ज़्यादा थी, लेकिन हर चेहरे पर एक अ...
22/03/2026

🇮🇳 “आज का भारत – बदलते समय की कहानी” 🇮🇳
दिल्ली की एक ठंडी सुबह…
मेट्रो में भीड़ पहले से ज़्यादा थी, लेकिन हर चेहरे पर एक अलग कहानी लिखी थी।
कोई मोबाइल पर ऑनलाइन क्लास देख रहा था 📱
कोई नौकरी की तलाश में इंटरव्यू देने जा रहा था 💼
और कोई अपने छोटे बिज़नेस को Instagram पर बढ़ाने में लगा था 🚀
यही है आज का भारत…
जहाँ सपने बड़े हैं, लेकिन रास्ते आसान नहीं।
एक तरफ देश डिजिटल बन रहा है…
UPI से चाय वाला भी पेमेंट ले रहा है ☕
गाँव तक इंटरनेट पहुँच रहा है 🌐
तो दूसरी तरफ…
युवा आज भी नौकरी और भविष्य को लेकर परेशान है 😔
महंगाई आम आदमी की जेब पर असर डाल रही है 💸
लेकिन…
इस सबके बीच एक चीज़ नहीं बदली—
भारत का हौसला 💪
मुंबई की एक लड़की… घर से ही स्टार्टअप शुरू कर रही है
बिहार का एक लड़का… YouTube से पढ़कर सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहा है
राजस्थान का किसान… नई तकनीक से खेती बदल रहा है 🌾
ये वही भारत है…
जो हर मुश्किल में भी “कुछ कर दिखाने” का जुनून रखता है।
✨ सच्चाई ये है:
आज का भारत चुनौतियों से भरा है…
लेकिन हर चुनौती के साथ एक नया मौका भी है।
👉 फर्क सिर्फ इतना है—
आप समस्या देखते हो या अवसर?
❤️ अगर आप भी भारत के इस बदलाव का हिस्सा बनना चाहते हैं तो कमेंट में लिखें — “जय हिंद 🇮🇳”
🔁 इस पोस्ट को शेयर करें… ताकि हर युवा तक ये बात पहुँचे
#भारत

🔥 वृंदावन की रहस्यमयी कथा – “मथुरा के बाबा का चमत्कार” 🔥मथुरा की पवित्र भूमि… जहाँ हर गली में भक्ति बसती है, हर कोने में...
22/03/2026

🔥 वृंदावन की रहस्यमयी कथा – “मथुरा के बाबा का चमत्कार” 🔥
मथुरा की पवित्र भूमि… जहाँ हर गली में भक्ति बसती है, हर कोने में राधे-राधे की गूंज सुनाई देती है। उसी मथुरा में एक रहस्यमयी बाबा रहते थे, जिन्हें लोग “बाबा वृंदावन वाले” कहते थे।
कहते हैं, बाबा कभी किसी से कुछ नहीं लेते थे… बस मंदिर के बाहर बैठकर “राधे-राधे” जपते रहते थे।
लेकिन जो भी उनके पास अपनी समस्या लेकर आता… वो खाली हाथ कभी वापस नहीं जाता।
एक दिन एक गरीब किसान बाबा के पास आया। उसकी आँखों में आँसू थे।
“बाबा… मेरी फसल बर्बाद हो गई, घर में खाने को कुछ नहीं…”
बाबा ने मुस्कुराते हुए उसे एक मुट्ठी मिट्टी दी और बोले,
“इसे अपने खेत में डाल देना… और विश्वास रखना।”
किसान को पहले तो अजीब लगा… लेकिन उसने वैसा ही किया।
कुछ ही दिनों में… चमत्कार हुआ 😲
सूखा पड़ा खेत हरियाली से भर गया 🌾
गाँव वाले हैरान थे… और किसान की आँखों में अब खुशी के आँसू थे।
जब वो बाबा को धन्यवाद कहने वापस गया…
तो वहाँ कोई बाबा नहीं था… 😳
बस एक आवाज़ गूँजी—
“विश्वास ही सबसे बड़ा चमत्कार है…”
लोग कहते हैं… वो कोई साधारण बाबा नहीं थे…
वो खुद भगवान का रूप थे… 🙏
✨ सीख:
जब विश्वास और श्रद्धा सच्ची हो… तो चमत्कार अपने आप होते हैं।
❤️ अगर आप भी “राधे-राधे” मानते हैं तो कमेंट में जरूर लिखें
👍 इस कहानी को शेयर करें… शायद किसी की ज़िंदगी बदल जाए

21/03/2026

🔥 क्या सच में कर्मों का फल मिलता है? जानिए इस पौराणिक कथा से… 🔥
एक समय की बात है… महाभारत काल में एक महान राजा थे – राजा परीक्षित।
वे न्यायप्रिय और धर्म का पालन करने वाले राजा थे।
लेकिन एक दिन… थके और प्यासे राजा जंगल में एक ऋषि के आश्रम पहुँचे।
ऋषि ध्यान में लीन थे… और उन्होंने राजा की बात नहीं सुनी।
😡 क्रोधित होकर राजा ने एक मरे हुए साँप को उठाकर ऋषि के गले में डाल दिया…
बस… यही एक गलती उनकी पूरी जिंदगी बदल गई।
ऋषि के पुत्र ने जब यह देखा, तो क्रोधित होकर राजा को श्राप दिया –
👉 “7 दिन के अंदर तुम्हारी मृत्यु एक सर्प के कारण होगी।”
⚡ राजा को जब अपनी गलती का अहसास हुआ…
तो उन्होंने सब कुछ त्याग दिया और गंगा किनारे बैठकर भगवान का स्मरण करने लगे।
इन 7 दिनों में उन्होंने श्रीमद्भागवत कथा सुनी…
और अंत में… मोक्ष प्राप्त किया 🙏
💡 इस कहानी से सीख:
👉 एक छोटी सी गलती भी बड़ा परिणाम दे सकती है
👉 क्रोध में लिया गया निर्णय हमेशा गलत होता है
👉 अंत समय में भी सच्चे मन से भक्ति करने से मोक्ष मिल सकता है
✨ अगर आपको ऐसी पौराणिक प्रेरणादायक कहानियाँ पसंद हैं, तो FOLLOW करें 👍
💬 Comment में लिखें: “जय श्री कृष्ण”
🔁 Share करें ताकि और लोग भी इस सीख को समझ सकें

20/03/2026

कई बार हम अपनी ही ताकत को भूल जाते हैं। हमें लगता है कि हम कुछ बड़ा नहीं कर सकते। लेकिन सच्चाई यह है कि हर इंसान के अंदर अपार शक्ति छुपी होती है।
पौराणिक कथा में इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं — हनुमान जी।

कथा: जब हनुमान जी अपनी शक्ति भूल गए
रामायण काल में, जब माता सीता का हरण हो गया, तब उन्हें खोजने के लिए वानर सेना समुद्र के किनारे पहुंची।
समस्या यह थी कि समुद्र बहुत विशाल था — कोई भी उसे पार नहीं कर पा रहा था।
👉 तब सभी की नजर हनुमान जी पर गई
लेकिन…
हनुमान जी खुद को कमजोर समझ रहे थे।
🔥 असली मोड़
तभी जामवंत जी ने उन्हें उनकी शक्ति याद दिलाई—
👉 “तुम वही हो जो सूर्य को फल समझकर निगलने चले थे”
👉 “तुम्हारे अंदर असीम शक्ति है”
बस यही सुनकर हनुमान जी को अपनी असली ताकत याद आ गई।
🚀 परिणाम
हनुमान जी ने:
समुद्र पार किया 🌊
लंका पहुंच गए 🔥
सीता माता को खोज लिया 🙏
👉 यह सब संभव हुआ क्योंकि उन्होंने खुद पर विश्वास किया।
💡 इस कथा से मिलने वाली सीख
1. 💭 सबसे बड़ी कमजोरी – खुद पर शक करना
आपकी असली हार तब होती है जब आप खुद को कमजोर मान लेते हैं।
2. 🔥 Motivation बाहर से नहीं, अंदर से आता है
जामवंत सिर्फ याद दिला सकते हैं, चलना आपको ही पड़ेगा।
3. 🚀 अपनी क्षमता पहचानो
आप उससे कहीं ज्यादा कर सकते हैं जितना आप सोचते हैं।
4. 🎯 सही समय पर सही action
हनुमान जी ने मौका मिलते ही action लिया — यही सफलता की कुंजी है।

"जब तक आपको कोई आपकी ताकत नहीं बताता,
आप खुद को कमजोर ही समझते रहते हैं…"

*जब हार के बाद भी जीत तय थी*✨ प्रस्तावनाहमारे जीवन में कई बार ऐसा समय आता है जब सब कुछ खत्म सा लगता है—मेहनत के बावजूद स...
20/03/2026

*जब हार के बाद भी जीत तय थी*
✨ प्रस्तावना
हमारे जीवन में कई बार ऐसा समय आता है जब सब कुछ खत्म सा लगता है—मेहनत के बावजूद सफलता नहीं मिलती, लोग साथ छोड़ देते हैं, और आत्मविश्वास डगमगाने लगता है। लेकिन पौराणिक कथाएं हमें सिखाती हैं कि असली जीत वही है जो संघर्ष के बाद मिलती है।

आज हम एक ऐसी ही प्रेरणादायक कथा जानेंगे।
🏹 कहानी: एकलव्य की अटूट लगन
महाभारत काल की बात है। एक बालक था—एकलव्य। वह एक महान धनुर्धर बनना चाहता था। उसकी इच्छा थी कि वह गुरु द्रोणाचार्य से शिक्षा प्राप्त करे।
लेकिन जब वह द्रोणाचार्य के पास गया, तो उसे शिष्य बनाने से मना कर दिया गया, क्योंकि वह राजवंश से नहीं था।
💔 सोचिए, कितना बड़ा झटका था!
लेकिन यहीं से शुरू होती है उसकी असली कहानी…
🔥 संघर्ष की शुरुआत
एकलव्य ने हार नहीं मानी। उसने जंगल में जाकर द्रोणाचार्य की एक मूर्ति बनाई और उसे अपना गुरु मानकर अभ्यास शुरू कर दिया।
न कोई मार्गदर्शन
न कोई सुविधा
न कोई साथ
फिर भी उसने दिन-रात अभ्यास किया।
🎯 परिणाम: अद्भुत सफलता
समय बीता और एकलव्य इतना महान धनुर्धर बन गया कि वह अर्जुन से भी आगे निकल गया।
यह देखकर द्रोणाचार्य भी आश्चर्यचकित रह गए।
💔 सबसे कठिन परीक्षा
जब द्रोणाचार्य ने उससे गुरु दक्षिणा मांगी—तो उन्होंने उसका अंगूठा मांग लिया।
और एकलव्य ने बिना एक पल सोचे अपना अंगूठा काटकर दे दिया।
💡 इस कथा से सीख
1. परिस्थितियाँ नहीं, आपका संकल्प मायने रखता है
अगर एकलव्य हार मान लेता, तो वह कभी महान नहीं बनता।
2. बिना संसाधनों के भी सफलता संभव है
आज हमारे पास मोबाइल, इंटरनेट, कोचिंग—सब कुछ है। फिर भी हम बहाने बनाते हैं।
3. गुरु का सम्मान और समर्पण
एकलव्य ने हमें सिखाया कि समर्पण ही असली ताकत है।
4. असली प्रतियोगिता खुद से होती है
वह अर्जुन से नहीं, खुद को बेहतर बनाने में लगा था।
🚀 आज के समय में इसका उपयोग
अगर आप UP Police, SSC, Railway या किसी भी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं:
अगर resources कम हैं → फिर भी शुरू करो
अगर समय कम है → daily consistency रखो
अगर बार-बार fail हो रहे हो → strategy बदलो, goal नहीं
🔥 निष्कर्ष
एकलव्य की कहानी हमें बताती है कि:
👉 सफलता पाने के लिए परिस्थितियों का नहीं, दृढ़ निश्चय का होना जरूरी है।
👉 जो व्यक्ति खुद पर विश्वास करता है, वही इतिहास बनाता है।
✍️ Final Motivation Line
"अगर ठान लो तो बिना गुरु के भी रास्ता बनता है,
और अगर हार मान लो तो गुरु होते हुए भी मंजिल नहीं मिलती।"

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Greater Noida
201308

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