Sifarzeroshunya

Sifarzeroshunya जिंदा हूँ। सोचने में समर्थ हूँ। तर्क मुझे ताकत देता है और कुतर्क मौका।

कुछ रंग किस्मत में नहीं होते… और कुछ लोग होली में भी धुले के धुले रह जाते हैं! 😜🎭🎨"रंगों की दुनिया में वे ही लोग सबसे सु...
14/03/2025

कुछ रंग किस्मत में नहीं होते… और कुछ लोग होली में भी धुले के धुले रह जाते हैं! 😜🎭🎨

"रंगों की दुनिया में वे ही लोग सबसे सुखी रहते हैं, जो अपने ही रंग में रंगे रहते हैं।" – सूरजप्रकाश, ‘रंगों की बारात’

बचपन की होली कुछ और थी—जब रंगों से ज्यादा रिश्ते गहरे होते थे। जब माँ के हाथों बनीं गुजिया, नमकपारे और मठियाँ सिर्फ़ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि साथ बैठकर बनाने और बाँटने का बहाना थीं। पूरा परिवार जुटता था, और होली का असली रंग अपनापन हुआ करता था। फिर वक़्त बदला, त्यौहार छोटे होते गए, और रंग व्हाट्सएप स्टेटस तक सिमट गए।

इस बार होली पर मैंने सोचा था कि शायद मेरी कहानी भी कुछ फिल्मी हो जाएगी… जैसे चंदर को गुनाहों का देवता की सुधा रंग लगा दे, जैसे राजा और रानी की मोहब्बत किसी गुलाल में घुल जाए, जैसे  Heathclif  की Cathy एक बार फिर लौट आए और कहे – "ये रंग तो बस एक बहाना है, असल में मैं तुम्हारी थी, तुम्हारी रहूंगी।"

लेकिन असल ज़िंदगी में कुछ कहानियों के पन्ने बेरंग ही रह जाते हैं। मैंने भी सोचा था कि कोई अपने हाथों से रंग लगाए… वो लगाए।उम्मीद थी कि इस बार मेरा भी 'होली-फेस' अपडेट होगा, लेकिन हक़ीक़त ये निकली कि मैं पूरा दिन ऐसे घूमता रहा जैसे बोर्ड एग्जाम के बाद का वह बच्चा, जो सफेद स्कूल ड्रेस में होता है और जिसे कोई सीनियर हाथ भी नहीं लगाता! 😆वो हर किसी को रंगों में डुबो रही थी—दोस्त, परिवार, पड़ोसी, बिल्लियाँ, शायद सड़क का कोई पेड़ भी! और मैं? मैं तो इतना 'सेफ' था कि Fair & Lovely वाले भी विज्ञापन में रख लेते! 🤦‍♂️

पर कोई बात नहीं, किसी और साल सही । होली सिर्फ़ रंगों का नहीं, खुशियों का भी त्यौहार है!
चाहे कोई आपको रंगे या नहीं, ज़िंदगी को रंगीन बनाए रखिए।
आप सभी को मेरी तरफ से रंगों और खुशियों से भरी होली की शुभकामनाएँ! 🎉🎨🌸

"कुछ चेहरे यूँ ही बेरंग रह जाते हैं, पर उम्मीद का गुलाल कभी फीका नहीं पड़ता!" ✨

#रंग_जो_दिल_में_हैं  #त्यौहार_की_खुशियाँ 

“गुनाहों का देवता” – कालजयी प्रेम या बस एक और दर्दभरी कहानी?आज इस किताब को कल्ट क्लासिक बना दिया गया है, लेकिन क्या यह व...
07/03/2025

“गुनाहों का देवता” – कालजयी प्रेम या बस एक और दर्दभरी कहानी?

आज इस किताब को कल्ट क्लासिक बना दिया गया है, लेकिन क्या यह वाकई उतनी अच्छी है? चंदर और सुधा की कहानी प्यार से ज्यादा त्याग और दर्द का महिमामंडन करती है। सुधा तकलीफ सहती है, चंदर भावनाओं से भागता है, और दोनों अपने रिश्ते को बचाने की कोशिश तक नहीं करते।

मुझे इसे पूरा करने में चार साल लगे! पढ़ने का मन ही नहीं करता था। लेकिन इंस्टाग्राम की वजह से इसे खत्म किया और महसूस हुआ कि मैंने समय बर्बाद किया। क्या यह किताब सच में महान है या बस toxicity को रोमांटिक बनाने की कोशिश? आजकल लोग toxicity को प्यार मानने लगे हैं। किसी भी रिश्ते में माफी मांगकर आगे बढ़ने की बजाय, misunderstanding को पाला जाता है, ताकि उसमें “romantic दर्द” ढूंढा जा सके। लोग neglect में रोमांस ढूंढते हैं, रोने को cool मानते हैं, और खुद को तकलीफ देकर यह सोचते हैं कि “सच्चा प्यार” तो ऐसा ही होता है। यह कहानी इसी मानसिकता को बढ़ावा देती है।

📌 अगर आपको रोना और दर्द पसंद है, तो यह किताब आपके लिए है।
📌 अगर आप सच्चे प्रेम की तलाश में हैं, तो इससे बेहतर हिंदी किताबें मौजूद हैं।

⭐ मेरी रेटिंग: 1/5

#गुनाहोंकादेवता #हिंदीसाहित्य #हिन्दीकिताबें

4o

‘The Hidden Hindu’ ट्रिलॉजी पढ़ने का अनुभव ऐसा था जैसे आपने एक बार कोई शानदार वेब सीरीज़ देखनी शुरू की हो और फिर बिना रु...
17/01/2025

‘The Hidden Hindu’ ट्रिलॉजी पढ़ने का अनुभव ऐसा था जैसे आपने एक बार कोई शानदार वेब सीरीज़ देखनी शुरू की हो और फिर बिना रुके उसे ख़त्म कर दिया हो। तीनों किताबें मैंने 3 दिनों में 3 बैठकों में पढ़ ली थीं। लेकिन जब मैंने Akshat ki नई किताब ‘The Naga Warriors - Battle of Gokul’ उठाई, तो उम्मीदें आसमान पर थीं, और सच कहूं तो... ये किताब उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाई।

कहानी कहने का अंदाज़ इस बार फीका लगा। ऐसा लगा जैसे लेखक ने पौराणिक संदर्भों का पुलिंदा खोल दिया हो और उन्हें नए रूप में पेश करने की कोशिश की हो। इस किताब में 80% पुरानी कहानियां हैं, जिनसे हम पहले ही परिचित हैं, और सिर्फ 20% नई कहानी, जो बहुत साधारण और पूर्वानुमानित लगती है।

ऐसा महसूस हुआ कि कहानी में गहराई और नवीनता का अभाव है। कई जगहों पर यह किताब बस अतीत को महिमामंडित करने का प्रयास करती है, जो आजकल भारतीय साहित्य का एक ट्रेंड बन गया है। मुझे लगा कि लेखक ने इस बार ज्यादा मेहनत से बचने का रास्ता चुना।

अगर आप पौराणिक कथाओं में बिल्कुल नए हैं और शुरूआत करना चाहते हैं, तो यह किताब आपके लिए ठीक है। लेकिन अगर आप ‘The Hidden Hindu’ जैसी दिलचस्प और मौलिक कहानी की उम्मीद कर रहे हैं, तो यह किताब आपके लिए निराशाजनक हो सकती है।

📚 कौन पढ़े?

जो लोग पौराणिक कहानियों में रुचि रखते हैं और अपनी जड़ों को जानने के लिए एक हल्की-फुल्की किताब चाहते हैं।
जो शुरुआती पाठक हैं और कुछ सरल और आसान पढ़ना चाहते हैं।
📚 कौन न पढ़े?

जो नई और ओरिजनल कहानियों के शौकीन हैं।
जिन्हें पहले से ही पौराणिक कहानियों की गहरी समझ है और वे कुछ नया सीखना चाहते हैं।
रेटिंग: ⭐⭐⭐/5
एक लाइन में: यह किताब पौराणिक प्रेमियों के लिए एक हल्की-फुल्की शुरुआत है, लेकिन कहानी में दमदार मौलिकता की कमी है।

क्या आपने इसे पढ़ा? आपकी क्या राय है? नीचे कमेंट में जरूर बताएं!

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