India Mantra

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तीन भाईयों ने बचाए 45 हजार पेड़
05/09/2019

तीन भाईयों ने बचाए 45 हजार पेड़

एक भाई सिविल इंजीनियर तो दूसरा एनालिटिक्स डोमेन में गुरु और तीसरा भाई बिजनेस मैंनेजमेंट का खिलाड़ी। अपने-अपने क्.....

शहीदों की दास्तां ‘ऑनर प्वाइंट'
23/07/2019

शहीदों की दास्तां ‘ऑनर प्वाइंट'

Honourpoint is an online memorial for every Indian soldier and creating awareness among the people of martyrs and families of martyrs.

23/07/2019

शहीदों की दास्तां ‘ऑनर प्वाइंट’ ( )
हिम्मत और हौसले की मिसाल देखनी हो तो भारतीय सेना से बड़ा कोई दूसरा उदाहरण नहीं हो सकता। भारतीय सेना ( Army) के ये रणबांकुर प्रेरणा देते हैं कि देश पहले है और परिवार बाद में, लेकिन जब ये हमारे खातिर शहीद ( ) होते हैं तो समाज में गिनती के लोग ही इनके बलिदान को जानते और समझते हैं। देश के खातिर शहीद होने वाले सैनिकों के बारे में लोग ज्यादा से ज्यादा जान सकें इसकी कोशिश कर रहे हैं बेंगलुरु (Bengaluru – also called Bangalore) में रहने वाले रिटार्यड विंग कमांडर एम ए अफराज़ (Retired Wing Commander M A Afraz)।

भारतीय शास्त्रीय संगीत किसी पीढ़ी तक सीमित नहीं है। ये साल दर साल चलती हुई परंपरा है, जिसे लोग आज भी उतने ही आदर से अपना...
23/03/2018

भारतीय शास्त्रीय संगीत किसी पीढ़ी तक सीमित नहीं है। ये साल दर साल चलती हुई परंपरा है, जिसे लोग आज भी उतने ही आदर से अपनाते हैं। महाराष्ट्र के पुणे में रहने वाले दाक्षायणी आठल्ये ( ) और मंदार कारंजकर ( ) ऐसे दंपत्ति हैं जो भारतीय शास्त्रीय संगीत ( ) को उन लोगों तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं जो इसे पसंद तो करते हैं, लेकिन वो ये नहीं जानते की इसे कैसे सीखा जाए। कानून की पढ़ाई करने वाली दाक्षायणी आठल्ये और इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके...
Baithak Foundation National Institute of Indian Classical Dance (NIICD) Indian classical dance Indian Classical Music Ministry of Culture, Government of India

भारतीय शास्त्रीय संगीत किसी पीढ़ी तक सीमित नहीं है। ये साल दर साल चलती हुई परंपरा है, जिसे लोग आज भी उतने ही आदर से अ....

पुरुष प्रधान समाज (patriarchal society) में महिलाओं को मौके भले ही आसानी से ना मिले, लेकिन वो अपनी प्रतिभा के बलबूते आगे...
08/03/2018

पुरुष प्रधान समाज (patriarchal society) में महिलाओं को मौके भले ही आसानी से ना मिले, लेकिन वो अपनी प्रतिभा के बलबूते आगे बढ़ना जानती है और अपना अलग मुकाम बना रही हैं। यकीन ना हो तो मिलिए देश की फास्टेस्ट कार रेसर स्नेहा शर्मा (Sneha Sharma) से। मुंबई (Mumbai) में रहने वाली स्नेहा को कार रेसिंग का शौक रखने वाले लोग अच्छी तरह जानते हैं। पेशे से कमर्शियल पायलट स्नेहा शर्मा (Commercial Pilot Sneha Sharma) अब दूसरी महिलाओं को आगे लाने का काम कर रही हैं, ताकि वो भी उनकी तरह अपनी अलग राह चुन सकें। स्नेहा ने महिला दिवस के मौके पर एक वीडियो जारी किया है जिसमें महिलाओं जरूरत पड़ने पर कार कैसे ठीक की जा सकती है, कैसे उसका रखरखाव करना चाहिए इस तरह की कई टिप्स दी हैं। यही नहीं स्नेहा कार रेसिंग की नेशनल टीम शौर्या रेसिंग को मेंटर कर रही है। इस टीम के सदस्य चैन्नई वीआईटी कॉलेज के छात्र और छात्राएं हैं। साथ ही वो ‘शुप्रा साइन इंडिया’ कार रेसिंग की टीम को भी मेंटर कर रही हैं।

पुरुष प्रधान समाज (patriarchal society) में महिलाओं को मौके भले ही आसानी से ना मिले, लेकिन वो अपनी प्रतिभा के बलबूते आगे बढ़ना जा....

समलैंगिकता (Homosexuality) को लेकर समाज दो धड़ों में बंटा हुआ है, लेकिन सही गलत की इस लड़ाई में पिस रहे हैं एलजीबीटी यान...
07/03/2018

समलैंगिकता (Homosexuality) को लेकर समाज दो धड़ों में बंटा हुआ है, लेकिन सही गलत की इस लड़ाई में पिस रहे हैं एलजीबीटी यानी लेस्बियन, गे, बाईसेक्शुअल और ट्रांसजेंडर लोग। ये मुद्दा ऐसा है जिस पर कोई भी खुलकर बात नहीं करना चाहता और समाज इसे बीमारी से जोड़कर देखता है। इस हकीकत को ज्यादा करीब से देखा मुंबई में रहने वाली और मलेशियन टाइम्स (Malaysian Times) जैसे अंतरराष्ट्रीय अखबार के लिए काम कर चुकी शुभम मेहरोत्रा (Shubham Mehrotra) ने। आज शुभम मेहरोत्रा एलजीबीटी कम्युनिटी (LGBT Community) के हक की ना केवल लड़ाई लड़ रही हैं, बल्कि जरूरत पड़ने पर उनकी तकलीफों को दूर करने की कोशिश भी करती हैं। इसके लिए शुभम मेहरोत्रा (Shubham Mehrotra) ने ‘फिफ्टी शेड्स ऑफ गे’ (Fifty Shades of Gay) नाम से ना केवल मुहिम शुरू की है, बल्कि इसी नाम से वेबसाइट भी चला रही हैं। ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग एलजीबीटी लोगों को करीब से जान सकें।

समलैंगिकता (Homosexuality) को लेकर समाज दो धड़ों में बंटा हुआ है, लेकिन सही गलत की इस लड़ाई में पिस रहे हैं एलजीबीटी यानी लेस्...

हर किसी की जिंदगी एक इम्तिहान की तरह है। इस इम्तिहान से जो डर जाता है उसे कुछ नहीं मिलता और जो इसका सामना करते हैं उनके ...
14/02/2018

हर किसी की जिंदगी एक इम्तिहान की तरह है। इस इम्तिहान से जो डर जाता है उसे कुछ नहीं मिलता और जो इसका सामना करते हैं उनके कदमों में जहां होता है। दलित समाज से आने वाले उस शख्स के पिता बुनकर रहे। स्कूली दिनों में उसने खेती का काम किया और सब्जियां बेच किसी तरह पढ़ाई की। मुश्किल हालात के आगे कोई दूसरा होता तो वो हार मान जाता, लेकिन उस शख्स में जुनून था कुछ कर गुजरने का। यही वजह है कि आज उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में रहने वाले ब्रजेश सरोज (Brijesh Saroj) मुंबई आईआईटी (Mumbai IIT) से पढ़ाई कर रहे हैं। वो जानते हैं कि हर जंग जीतने के लिए शिक्षा से बेहतर कोई हथियार नहीं है। इसलिए वो अपनी पढ़ाई के साथ ऐसे बच्चों की शिक्षा का स्तर उठाने का काम कर रहे हैं जिनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है। इसके लिए उन्होने ‘समदर्शी फाउंडेशन’ (Samdarshi Foundation) नाम से एक संगठन खड़ा किया है। जो यूपी के प्रतापगढ़ (Pratapgarh of Uttar Pradesh) और मुंबई के कल्याण इलाके (Kalyan area of Mumbai) में काम कर रहा है।....

हर किसी की जिंदगी एक इम्तिहान की तरह है। इस इम्तिहान से जो डर जाता है उसे कुछ नहीं मिलता और जो इसका सामना करते हैं उन....

वो भले आज मुंबई ( ) में रहते हों, लेकिन कभी अमेरिका (USA) उनका पहला घर होता था। काम के सिलसिले में जब वो भारत (India) आए...
13/02/2018

वो भले आज मुंबई ( ) में रहते हों, लेकिन कभी अमेरिका (USA) उनका पहला घर होता था। काम के सिलसिले में जब वो भारत (India) आए तो वो यहीं के होकर रह गए। आज फिल्म निर्माता नवनीत रंजन (Nawneet Ranjan) धारावी ( ) में रहने वाले बच्चों के लिए काम कर रहे हैं। वो ना केवल उनको आधुनिक शिक्षा (modern education) से जोड़ रहे हैं बल्कि...

Dharavi Diary Shah Rukh Khan TED Talks India: नई सोच

वो भले आज मुंबई (Mumbai) में रहते हों, लेकिन कभी अमेरिका (USA) उनका पहला घर होता था। काम के सिलसिले में जब वो भारत (India) आए तो वो .....

कहते हैं कि आवश्यकता ही अविष्कार की जननी है। शिक्षा के क्षेत्र में कुछ ऐसी ही आवश्यकता हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) ...
12/02/2018

कहते हैं कि आवश्यकता ही अविष्कार की जननी है। शिक्षा के क्षेत्र में कुछ ऐसी ही आवश्यकता हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में रहने वाले एक दंपत्ति ने भी देखी थी। इसलिए वो अमेरिका (USA) में पढ़ाई पूरी कर वापस लौट आए और अपने संगठन ‘अविष्कार’ (Aavishkaar) के जरिए सैकड़ों बच्चों को खास तरीके से शिक्षित करने का काम कर रहे हैं। आज उनकी कोशिशों की वजह से...
Aavishkaar PMO India Ministry of Human Resource Development, Government of India Smriti Zubin Irani

कहते हैं कि आवश्यकता ही अविष्कार की जननी है। शिक्षा के क्षेत्र में कुछ ऐसी ही आवश्यकता हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में रह...

जिंदगी में रंगों की ताकत देखनी हो, तो मुंबई के स्लम असल्फा (Asalpha slum in Mumbai) से बेहतर शायद कोई दूसरी जगह नहीं हो ...
08/02/2018

जिंदगी में रंगों की ताकत देखनी हो, तो मुंबई के स्लम असल्फा (Asalpha slum in Mumbai) से बेहतर शायद कोई दूसरी जगह नहीं हो सकती। दूसरे स्लम इलाकों की तरह यहां पर कभी कोई बाहरी इंसान जाना पसंद नहीं करता था। अपराध, गंदगी, तंग गलिया, बेतरतीब मकान और बदबूदार घर यही इस स्लम की पहचान बन कर रह गई थी। इस पहचान को बदलने और उसे खूबसूरत रंगों से रंग कर उसकी सूरत निखारने का काम किया है मुंबई ( ) के संगठन ‘चल रंग दे’ (Chal Rang De) ने। इस संगठन ने पिछले साल दिसम्बर में 5 दिनों के अंदर इस स्लम का पूरी तरह से मेकओवर कर दिया। रंगों से भरपूर इस स्लम को देखने के लिए आज दूसरे जगह से लोग यहां आने लगे हैं। बदलाव की इस मुहिम में बड़ी भूमिका रही है ...

Chal Rang De

जिंदगी में रंगों की ताकत देखनी हो, तो मुंबई के स्लम असल्फा (Asalpha slum in Mumbai) से बेहतर शायद कोई दूसरी जगह नहीं हो सकती। दूसरे ...

शिक्षा में असमानता (inequality in education) को लेकर अक्सर काफी बहस होती है, उसकी कमियों को बार-बार उजागर किया जाता है, ...
07/02/2018

शिक्षा में असमानता (inequality in education) को लेकर अक्सर काफी बहस होती है, उसकी कमियों को बार-बार उजागर किया जाता है, लेकिन चंद लोग उन कमियों पर काम करते हैं और अपनी काबिलियत से उन कमियों को दूर करने की कोशिश में जुटे रहते हैं। विनायक माली (Vinayak Mali) उन्ही चंद लोगों में से एक हैं जिनकी स्कूली शिक्षा गांव से हुई लेकिन जब उनको शहर में पढ़ने का मौका मिला तो वो जान पाए कि दोनों जगहों में शिक्षा के स्तर में कितनी असमानता है। इसलिए उन्होने तय किया कि वो इस कमी को अपने अंदाज में दूर करने की कोशिश

शिक्षा में असमानता (inequality in education) को लेकर अक्सर काफी बहस होती है, उसकी कमियों को बार-बार उजागर किया जाता है, लेकिन चंद लो.....

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