16/10/2026
शिंजिनी मजूमदार की रिपोर्ट
"बहुत हो गया तेरा, बहुत देर से जर्नलिस्ट-जर्नलिस्ट कर रही है."
“कोई मीडिया वीडिया नहीं है”: दिल्ली में पत्रकारों को घसीटा गया, हिरासत में लिया गया और अपमानित किया गया।
भारत में इमरजेंसी के बाद प्रेस की आज़ादी पर हुए शायद सबसे क्रूर हमले में, 10 अक्टूबर को दिल्ली में कई पत्रकारों को अपना काम करने से रोका गया और हिरासत में ले लिया गया. पुलिस की ये ज़्यादती पागलपन की हद तक थी.
पत्रकारों के कपड़े खींचकर उन्हें धक्का दिया गया और उनके साथ बदसलूकी की गई; उनके फ़ोन छीन लिए गए और पुलिस की कार्रवाई का फ़ुटेज डिलीट करने के लिए उन पर दबाव डाला गया. कुछ पत्रकारों को विरोध-प्रदर्शन वाली जगह से कई किलोमीटर दूर से उठा गया, वहीं कुछ को तब भी हिरासत में ले लिया गया जब उनके पास प्रेस ID कार्ड थे और वे बार-बार खुद को पत्रकार बता रहे थे. दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में स्वतंत्र और मेनस्ट्रीम मीडिया आउटलेट्स के पत्रकारों के ख़िलाफ़ ये सख़्त कार्रवाई एक ऐसी सरकार के दौर में हुई, जिसके प्रधानमंत्री ने पिछले 12 सालों में एक भी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की है।
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) ने वामपंथी विचारधारा वाले छात्र समूहों और संगठनों के साथ मिलकर 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया था. वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग कर रहे थे और आरोप लगा रहे थे कि मतदाता सूची के ‘विशेष गहन संशोधन’ (SIR) में गड़बड़ी की गई है. उन्होंने चुनाव आयोग पर वोटर लिस्ट में हेरफेर करने का आरोप लगाया और इस प्रक्रिया को वापस लेने की मांग की.
सुबह-सुबह ही, कई स्वतंत्र मीडिया आउटलेट्स के पत्रकारों को जंतर-मंतर पहुंचने से पहले ही हिरासत में ले लिया गया. ‘स्क्रॉल’ के रिपोर्टर आयुष तिवारी सुबह करीब 10: 45 बजे दीन दयाल उपाध्याय रोड पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) दफ़्तर के बाहर लगभग 50-60 प्रदर्शनकारियों के समूह की कवरेज कर रहे थे, तभी दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया.
आयुष तिवारी ने बताया, “पुलिस मौके पर पहुंची और कुछ देर तक इन लोगों का पीछा करती रही. पुलिस लगातार उनके पीछे-पीछे चल रही थी. वहां लगभग 50 से 60 प्रदर्शनकारी और उतने ही पुलिसकर्मी थे. फिर एक सीनियर पुलिस अधिकारी आया और बोला, ‘तुम लोग इन्हें हिरासत में क्यों नहीं ले रहे? इन्हें उठा लो। इसके कुछ ही मिनटों बाद उन्होंने उन्हें हिरासत में लेना शुरू कर दिया और उनमें से करीब 20-30 लोगों को एक बस में बिठाया गया, जिसमें ‘इंडिया टुडे’ का एक पत्रकार भी शामिल था. मैंने देखा कि उसने पुलिस वाले को अपना प्रेस कार्ड दिखाया, लेकिन इससे पहले कि वो बाहर निकल पाता, बस चल पड़ी।
बिज़नेस स्टैंडर्ड’ की पत्रकार अनुष्का भारद्वाज ने जब हिरासत में लिए जाने का विरोध किया, तो उन्हें उनके बैग और कपड़ों से खींचकर ले जाया गया. बाद में मिली जानकारी के मुताबिक, पत्रकार के तौर पर अपनी पहचान बताने के बाद पुलिस ने उन्हें पहले तो जाने दिया था. लेकिन वही पुलिसकर्मी बाद में वापस आए और उनसे कहा, “बहुत हो गया तेरा, बहुत देर से पत्रकार-पत्रकार कर रही है,” और फिर उन्हें खींचकर ले गए. उन्होंने बताया, “मेरी शर्ट ऊपर खिंचती जा रही थी. उन्हें इसकी कोई परवाह नहीं थी.”
दोपहर करीब 1 बजकर 14 मिनट पर, ‘स्क्रॉल’ की एडिटर सुप्रिया शर्मा ने X पर पोस्ट किया कि उनके साथी पत्रकार दानियाल को दक्षिण दिल्ली के एक इलाके में हिरासत में ले लिया गया है, जो जंतर-मंतर से लगभग 20 किलोमीटर दूर है.
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