31/03/2026
*हनुमान चालीसा** 🙏
(हनुमान जी की स्तुति)
*॥ श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मन मुकुर सुधारि ॥**
**बरनऊँ रघुवर बिमल जसु, जो दायक फल चारि ॥**
**बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार ॥**
**बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार ॥**
**जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।**
**जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥**
**राम दूत अतुलित बल धामा ।**
**अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा ॥**
**महाबीर बिक्रम बजरंगी ।**
**कुमति निवार सुमति के संगी ॥**
**कंचन बरन बिराज सुबेसा ।**
**कानन कुंडल कुंचित केसा ॥**
**हाथ वज्र और ध्वजा बिराजे ।**
**काँधे मूँज जनेऊ साजे ॥**
**शंकर सुवन केसरी नंदन ।**
**तेज प्रताप महा जग वंदन ॥**
**विद्यावान गुनी अति चातुर ।**
**राम काज करिबे को आतुर ॥**
**प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया ।**
**राम लखन सीता मन बसिया ॥**
**सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा ।**
**विकट रूप धरि लंक जरावा ॥**
**भीम रूप धरि असुर संहारे ।**
**रामचंद्र के काज सवारे ॥**
**लाय सजीवन लखन जियाए ।**
**श्रीरघुबीर हरषि उर लाए ॥**
**रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई ।**
**तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥*
**सहस बदन तुम्हरो जस गावैं ।**
**अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं ॥**
**सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा ।**
**नारद सारद सहित अहीसा ॥**
**जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते ।**
**कवि कोविद कहि सके कहाँ ते ॥*
**तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा ।**
**राम मिलाय राज पद दीन्हा ॥**
**तुम्हरो मंत्र विभीषण माना ।**
**लंकेश्वर भए सब जग जाना ॥**
**युग सहस्र योजन पर भानू ।**
**लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥**
**प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं ।**
**जलधि लाँघि गए अचरज नाहीं ॥**
**दुर्गम काज जगत के जेते ।**
**सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥**
**राम दुआरे तुम रखवारे ।**
**होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥*
सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डरना॥
आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हाँक तें काँपै॥
भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महावीर जब नाम सुनावैं॥२४॥
नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥
संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम वचन ध्यान जो लावै॥
सब पर राम तपस्वीं राजा। तिन के काज सकल तुम साज़े ll
और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै॥२८॥
चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा॥
साधु संत के तुम रखबारे। असुर निकंदन राम दुलारे॥
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता॥
राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा॥३२॥
तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै॥
अंत काल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई॥
और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्ब सुख करई॥
संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरैं हनुमत बलबीरा॥३६॥
जै जै जै हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरू देव की नाईं॥
जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बन्दि महासुख होई॥
जो यह पढै हनुमान चलीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा॥
तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥
दोहा॥
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रुप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥
सियावर रामचंद्र की जय। पवन सुत हनुमान की जय॥ उमापति महादेव की जय॥
श्री राम जय राम जय जय राम। श्री राम जय राम जय जय राम॥