Hum Haryanvi

Hum Haryanvi हरियाणवी संस्कृति की एक झलक

जो स्त्री आक्रामक होती है वह आकर्षक नहीं होती है।अगर कोई स्‍‍त्री तुम्हारे पीछे पड़ जाए और प्रेम का निवेदन करने लगे तो त...
04/06/2026

जो स्त्री आक्रामक होती है वह आकर्षक नहीं होती है।अगर कोई स्‍‍त्री तुम्हारे पीछे पड़ जाए और प्रेम का निवेदन करने लगे तो तुम घबरा जाओगे तुम भागोगे।

क्योंकि वह स्त्री पुरुष जैसा व्यवहार कर रही है, स्त्रैण नहीं है, स्त्री का स्त्रैण होना ही उसका माधुर्य है।वह सिर्फ प्रतीक्षा करती है। तुम्हें उकसाती है, लेकिन आक्रमण नहीं करती। वह तुम्हें बुलाती है, लेकिन चिल्लाती नहीं। उसका बुलाना भी बड़ा मौन है, वह तुम्हें सब तरफ से घेर लेती, लेकिन तुम्हें पता भी नहीं चलता। उसकी जंजीरें बहुत सूक्ष्म हैं, वे दिखाई भी नहीं पड़तीं, वह बड़े पतले धागों से, सूक्ष्म धागों से तुम्हें सब तरफ से बांध लेती है, लेकिन उसका बंधन कहीं दिखाई भी नहीं पड़ता।

स्त्री अपने को नीचे रखती है, लोग गलत सोचते हैं कि पुरुषों ने स्त्रियों को दासी बना लिया। नहीं, स्त्री दासी बनने की कला है, मगर तुम्हें पता नहीं, उसकी कला बड़ी महत्वपूर्ण है। और लाओत्से उसी कला का उद्‍घाटन कर रहा है। कोई पुरुष किसी स्त्री को दासी नहीं बनाता। दुनियाँ के किसी भी कोने में जब भी कोई स्त्री किसी पुरुष के प्रेम में पड़ती है, तत्क्षण अपने को दासी बना लेती है, ‍क्योंकि दासी होना ही गहरी मालकियत है। वह जीवन का राज समझती है।

स्त्री अपने को नीचे रखती है, चरणों में रखती है। और तुमने देखा है कि जब भी कोई स्त्री अपने को तुम्हारे चरणों में रख देती है, तब अचानक तुम्हारे सिर पर ताज की तरह बैठ जाती है। रखती चरणों में है, पहुँच जाती है बहुत गहरे, बहुत ऊपर, तुम चौबीस घंटे उसी का चिंतन करने लगते हो। छोड़ देती है अपने को तुम्हारे चरणों में, तुम्हारी छाया बन जाती है। और तुम्हें पता भी नहीं चलता कि छाया तुम्हें चलाने लगती है, छाया के इशारे से तुम चलने लगते हो।

स्त्री कभी यह भी नहीं कहती सीधा कि यह करो, लेकिन वह जो चाहती है करवा लेती है। वह कभी नहीं कहती कि यह ऐसा ही हो, लेकिन वह जैसा चाहती है वैसा करवा लेती है।लाओत्से यह कह रहा है कि उसकी शक्ति बड़ी है। और उसकी शक्ति क्या है? क्योंकि वह दासी है। शक्ति उसकी यह है कि वह छाया हो गई है। बड़े से बड़े शक्तिशाली पुरुष स्त्री के प्रेम में पड़ जाते हैं, और एकदम अशक्त हो जाते है, और अनजाने में ही बड़ी सहजता से उतर जाते हो उसके प्रेम में ! 💐❤💯🥰😘

31/05/2026
धोखे में पैर छू लिए 😘
21/05/2026

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बिना परेशानी कोई सुसाइड नहीं करता
08/05/2026

बिना परेशानी कोई सुसाइड नहीं करता

कुछ लड़किया ऐसी भी होती है जिन्हे सम्भोग का सुख ना मिले तो वे पागल हो जाती है में भी उन्ही लड़कियों में से एक थी । 24 साल ...
08/05/2026

कुछ लड़किया ऐसी भी होती है जिन्हे सम्भोग का सुख ना मिले तो वे पागल हो जाती है में भी उन्ही लड़कियों में से एक थी । 24 साल की उम्र में मेरी शादी हो गई, और मेरी कॉलेज की सहेली की भी उसी समय शादी हुई। हमारी शादियाँ अच्छे परिवारों में हुईं, लेकिन हमारी स्वभाव में काफी अंतर था। मैं नटखट और चुलबुली थी, जबकि मेरी सहेली शर्मीली और शांत थी।

शादी के बाद शुरूआती समय में सब कुछ सही चल रहा था। लेकिन धीरे-धीरे जिम्मेदारियां बढ़ने लगीं और काम का बोझ भी। इससे थकान हो जाती थी और हम दोनों फ्रस्टेटेड महसूस करते थे। एक साल गुजर गया, लेकिन हमारे बीच प्राइवेसी का अभाव था। घर में इतने लोग होते थे कि हमें एक-दूसरे के साथ समय बिताने का मौका नहीं मिलता था।

मैंने अपने पति से अलग रहने की बात की ताकि हमें प्राइवेसी मिल सके। मेरे पति इसके खिलाफ थे, लेकिन मैंने जिद की और घर में झगड़े होने लगे। आखिरकार, मेरे पति ने दिल्ली से बेंगलुरु ट्रांसफर ले लिया। यह मेरे लिए आजादी का दिन था। पहले कुछ महीनों में पतिदेव का मूड ऑफ रहता था, लेकिन धीरे-धीरे सब ठीक हो गया।

फिर एक दिन मेरा पीरियड्स मिस हो गया और पता चला कि मैं प्रेग्नेंट हूं। यह अनप्लान्ड था और मैं काफी घबरा गई थी। मैंने अपनी सहेली को फोन किया तो उसने खुश होकर बताया कि वह भी एक महीने से प्रेग्नेंट है। उसने मुझे समझाया कि प्रेग्नेंसी नाजुक समय होता है और मुझे अपने ससुराल या मायके जाना चाहिए।

मैंने सास को फोन किया और उन्हें बताया तो वे बहुत खुश हुईं और तुरंत मिलने की इच्छा जताई। लेकिन मैंने कहा कि अभी आना मुमकिन नहीं है। धीरे-धीरे मुझे दिक्कतें होने लगीं और मैंने अपनी सहेली से कम बात करनी शुरू कर दी। पतिदेव सुबह ऑफिस जाते और रात में घर आते। डिलीवरी का समय आया तो सास आ गईं लेकिन दो दिन बाद वापस चली गईं।

समय के साथ मुझे अहसास हुआ कि परिवार की अहमियत क्या होती है। मैंने अपनी सहेली से बात करनी शुरू की और उसने बताया कि कैसे उसका परिवार उसका ख्याल रखता है। मुझे महसूस हुआ कि अलग रहकर मैंने गलती की है। मेरे ससुर ने वीडियो कॉल पर बच्चे को देखा और उनकी आंखों में आंसू आ गए। मेरे पति ने देखा और उदास हो गए।

अगले दिन, उन्होंने कहा कि हम घर चलें। हम बिना बताए घर पहुंचे और सब बहुत खुश हो गए। मेरे ससुर, जो ठीक से चल नहीं पाते थे, दौड़कर आए और बच्चे को गोद में लिया। तीन दिन तक सब कुछ वैसे ही चला जैसे मेरी सहेली के साथ होता था।

चौथे दिन मैंने अपने पति से पूछा कि कब चलना है। उन्होंने जवाब दिया कि अब वहाँ नहीं जाना है। उन्होंने कहा कि मुझे खुद को सुधारने की जरूरत है और हम परिवार से दूर नहीं रह सकते। उस दिन मुझे अहसास हुआ कि परिवार के साथ रहना कितना महत्वपूर्ण है।

आज मैं मानती हूं कि शादी के बाद अलग रहने का विचार मेरे जीवन की सबसे बड़ी भूल थी। परिवार के साथ रहने से मिलने वाले फायदे और प्यार के आगे आजादी की कोई कीमत नहीं है।

एंडी पड़ी है मैडम जी
07/05/2026

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04/05/2026

बंगाल में आज खुलेगी पोल ✍️

वो अफ़साना जिसे अंजाम तक लाना ना हो मुमकिन,उसे एक ख़ूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा ।वो अफ़साना जिसे अंजाम तक लाना ना हो म...
02/05/2026

वो अफ़साना जिसे अंजाम तक लाना ना हो मुमकिन,
उसे एक ख़ूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा ।वो अफ़साना जिसे अंजाम तक लाना ना हो मुमकिन,
उसे एक ख़ूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा ।

पुरुष का वीर्य और औरत का गर्भ.!!!🌸 "औरत — शक्ति का दूसरा नाम" 🌸पुरुष का वीर्य और स्त्री का गर्भ…लेकिन ठहरिए — क्या सिर्फ...
29/04/2026

पुरुष का वीर्य और औरत का गर्भ.!!!

🌸 "औरत — शक्ति का दूसरा नाम" 🌸

पुरुष का वीर्य और स्त्री का गर्भ…
लेकिन ठहरिए — क्या सिर्फ गर्भ ही पर्याप्त है?
नहीं… एक ऐसा शरीर भी चाहिए जो इस सृष्टि की प्रक्रिया के लिए पूरी तरह तैयार हो।

जहाँ पुरुष का वीर्य 13 साल के किशोर से लेकर 70 वर्ष के वृद्ध तक में सक्षम हो सकता है,
वहीं स्त्री का गर्भाशय मजबूत, स्वस्थ और प्राकृतिक रूप से संतुलित होना आवश्यक है।

और उस संतुलन की पहचान है — मासिक धर्म (Period)।
वही माहवारी, जिसे हर स्त्री हर महीने झेलती है।
वह उसका चुनाव नहीं — यह प्रकृति का नियम है, जीवन का चक्र है।

वही समय जब शरीर अकड़ जाता है,
कमर टूटने लगती है,
पिण्डलियाँ और पेट दर्द से सिहर उठते हैं,
फिर भी वह मुस्कुराकर जीवन को साधती है।

और इसके ऊपर समाज की वह घटिया सोच,
जो इसे छुपाने की चीज़ समझता है —
वह दर्द शायद कोई माप भी नहीं सकता।

गर्भधारण के बाद जो स्त्री बीस हड्डियाँ एक साथ टूटने जैसा दर्द सहने की क्षमता रखती है,
वह सिर्फ शरीर नहीं — जीवित शक्ति का प्रतीक है।

पहले तीन महीने उल्टियाँ, थकान, अवसाद;
फिर बढ़ता शरीर, इंजेक्शन, कड़वी दवाइयाँ, अनिद्रा —
फिर भी वह हर सुबह मुस्कुरा कर दिन की शुरुआत करती है।

प्रसव पीड़ा के दौरान घंटे नहीं, कभी-कभी दिनों तक दर्द सहती है,
फिर भी बच्चे के लिए सब कुछ त्याग देती है।
यदि प्रसव स्वाभाविक न हो, तो अपना पेट चीरकर भी
नवजीवन को जन्म देने से पीछे नहीं हटती।

Stretch Marks हों या ऑपरेशन के निशान —
वह उन्हें दर्द नहीं, माँ होने का सम्मान मानती है।
अपनी नींद, शरीर और समय — सब भूलकर
तीन साल तक बच्चे के लिए ही जीती है।

और इन सबके बाद भी…
वह तुम्हारे अच्छे-बुरे, पसंद-नापसंद का ख्याल रखती है।

ऐसी शक्ति को, जो सृजन करती है,
कुछ लोग अब भी “उपभोग की वस्तु” समझते हैं।
जो अपने आप को मर्द समझते हैं,
उन्हें चाहिए —
एक दिन खुद को उसकी जगह रखकर देखें।
फिर जानें कि सच्ची मर्दानगी सम्मान में है, अधिकार में नहीं।

याद रखिए —
👉 जो औरत की इज़्ज़त नहीं करता, वह खुद इंसान कहलाने लायक नहीं।

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