14/03/2026
पंजाब के मोगा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रैली को सिर्फ एक सामान्य राजनीतिक कार्यक्रम के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे राज्य में BJP Punjab की बदलती रणनीति के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में पंजाब में लगभग 19 प्रतिशत वोट हासिल करने के बाद भाजपा अब राज्य में अपने संगठन को मजबूत करने और स्वतंत्र राजनीतिक ताकत के रूप में उभरने की कोशिश करती दिखाई दे रही है। मोगा की यह रैली खास तौर पर मालवा क्षेत्र पर फोकस को दर्शाती है, क्योंकि पंजाब की राजनीति में मालवा क्षेत्र को निर्णायक माना जाता है।
इस रैली के जरिए भाजपा ने यह संदेश देने की कोशिश की कि पार्टी अब सिर्फ शहरी इलाकों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि ग्रामीण पंजाब और सिख समाज के बीच भी अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। लंबे समय तक पंजाब में भाजपा की राजनीति शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन पर आधारित रही, लेकिन गठबंधन टूटने के बाद पार्टी अब अपने दम पर राजनीतिक आधार बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। यही वजह है कि पार्टी बड़े जनसम्पर्क कार्यक्रमों और रैलियों के माध्यम से राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश कर रही है।
राजनीतिक दृष्टि से मोगा रैली का एक संदेश विपक्षी दलों के लिए भी माना जा रहा है। पंजाब में इस समय सत्ता में Aam Aadmi Party - Punjab है, जबकि Indian National Congress - Punjab और Shiromani Akali Dal भी अपने-अपने राजनीतिक आधार को मजबूत करने की कोशिश में लगे हैं। ऐसे माहौल में भाजपा की यह रैली यह संकेत देती है कि पार्टी आने वाले समय में पंजाब की राजनीति में अपनी भूमिका को और अधिक सक्रिय बनाना चाहती है।
कुल मिलाकर मोगा की यह रैली सिर्फ एक राजनीतिक सभा नहीं, बल्कि पंजाब में भाजपा की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है, जिसमें पार्टी अपने वोट प्रतिशत को बढ़ाने, नए सामाजिक समूहों तक पहुंच बनाने और आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए मजबूत राजनीतिक जमीन तैयार करने की कोशिश कर रही है।
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