18/06/2026
🌺 सुमिरन ही साधना का सार है। 🌿
परमाराध्य संत सद्गुरुदेव महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज फरमाते हैं कि संसार में धन, पद, प्रतिष्ठा और वैभव से बड़ा वह है जो निरंतर प्रभु का स्मरण करता है। निष्काम भाव से किया गया सुमिरन मन को स्थिर करता है, दुःखों को दूर करता है और अंततः जीव को परमात्मा तक पहुँचा देता है।
संतों ने समझाया कि जैसे पतंगा दीपक पर, मछली जल पर और कुरंग नाद पर अनुरक्त रहता है, वैसे ही साधक का मन ईश्वर-नाम में लगना चाहिए। काम करते हुए भी भीतर प्रभु-स्मरण बना रहे, यही सच्चा भजन है।
कबीर साहब ने कहा—
"जप, तप, संयम, साधना, सब सुमिरन के माहीं।
कबीर जाने भक्तजन, सुमिरन सम कछु नाहीं॥"
जो प्रत्येक क्षण प्रभु को याद करता है, उसका मन धीरे-धीरे संसार से हटकर परम शांति और परम प्रेम में स्थित हो जाता है।
🙏 नाम-सुमिरन ही जीवन का सबसे सरल, सबसे श्रेष्ठ और सबसे कल्याणकारी मार्ग है।
(प्रस्तुति: शिवेन्द्र कुमार मेहता)
🙏🌹जय गुरु महाराज🌹🙏
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