Shivendra

Shivendra जब मन अशांत हो और भीतर रिक्तता महसूस हो, तब अध्यात्म अनिवार्य हो जाता है।
Spirituality beyond religion — a journey towards inner peace, balance & truth.

🌺 सुमिरन ही साधना का सार है। 🌿परमाराध्य संत सद्गुरुदेव महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज फरमाते हैं कि संसार में धन, पद, प्...
18/06/2026

🌺 सुमिरन ही साधना का सार है। 🌿

परमाराध्य संत सद्गुरुदेव महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज फरमाते हैं कि संसार में धन, पद, प्रतिष्ठा और वैभव से बड़ा वह है जो निरंतर प्रभु का स्मरण करता है। निष्काम भाव से किया गया सुमिरन मन को स्थिर करता है, दुःखों को दूर करता है और अंततः जीव को परमात्मा तक पहुँचा देता है।

संतों ने समझाया कि जैसे पतंगा दीपक पर, मछली जल पर और कुरंग नाद पर अनुरक्त रहता है, वैसे ही साधक का मन ईश्वर-नाम में लगना चाहिए। काम करते हुए भी भीतर प्रभु-स्मरण बना रहे, यही सच्चा भजन है।

कबीर साहब ने कहा—

"जप, तप, संयम, साधना, सब सुमिरन के माहीं।
कबीर जाने भक्तजन, सुमिरन सम कछु नाहीं॥"

जो प्रत्येक क्षण प्रभु को याद करता है, उसका मन धीरे-धीरे संसार से हटकर परम शांति और परम प्रेम में स्थित हो जाता है।

🙏 नाम-सुमिरन ही जीवन का सबसे सरल, सबसे श्रेष्ठ और सबसे कल्याणकारी मार्ग है।

(प्रस्तुति: शिवेन्द्र कुमार मेहता)
🙏🌹जय गुरु महाराज🌹🙏

फाॅलो संतमत-सत्संग वट्सएप चैनल:
https://whatsapp.com/channel/0029Va5HwS0BvvsgkvhY411H

यूट्यूब चैनल:
www.youtube.com/SANTMATSADGURUMEHI


#महर्षिमेँही #संतमत #नामसुमिरन #भजन #ध्यान #कबीरवाणी #आध्यात्मिकता

18/06/2026
🌺 परमाराध्य संत सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज की वाणी 🌿सच्ची शिक्षा केवल जीविका कमाने की कला नहीं, बल्कि जीवन क...
16/06/2026

🌺 परमाराध्य संत सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज की वाणी 🌿

सच्ची शिक्षा केवल जीविका कमाने की कला नहीं, बल्कि जीवन को श्रेष्ठ बनाने की साधना है। विद्या तभी सार्थक है जब उसके साथ सदाचार, विनम्रता, संयम और ईश्वर-भक्ति जुड़ी हो।

महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज कहते हैं कि समाज और राष्ट्र में स्थायी शांति केवल आध्यात्मिकता से ही आ सकती है। जो विद्यार्थी अपने जीवन में शील, ब्रह्मचर्य, अनुशासन और बड़ों के प्रति सम्मान का भाव रखते हैं, वही वास्तविक अर्थों में शिक्षित कहलाते हैं।

जप, स्तुति, प्रार्थना और ध्यान मन को एकाग्र करते हैं, जबकि झूठ, चोरी, नशा, हिंसा और व्यभिचार मनुष्य के पतन का कारण बनते हैं।

विद्या के साथ संस्कार, ज्ञान के साथ चरित्र और कर्म के साथ ईश्वर-स्मरण जुड़ जाए, तो जीवन सफल हो जाता है।

🙏 पढ़ो अवश्य, पर साथ ही अपने भीतर के मनुष्य को भी जगाओ। यही संतमत की शिक्षा है।

(प्रस्तुति: शिवेन्द्र कुमार मेहता)
🙏🌹जय गुरु महाराज🌹🙏


#महर्षिमेहीं #संतमत #आध्यात्मिकशिक्षा #सदाचार #विद्यार्थीजीवन #ईश्वरभक्ति

🌺 परमाराध्य संत सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज कहते हैं कि- संतमत का सार केवल इतना नहीं कि ईश्वर है, बल्कि यह है...
14/06/2026

🌺 परमाराध्य संत सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज कहते हैं कि- संतमत का सार केवल इतना नहीं कि ईश्वर है, बल्कि यह है कि उसे जाना और पाया भी जा सकता है।

महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज बताते हैं कि साधना के प्रारम्भ में गुरु-रूप का ध्यान मन और दृष्टि को एकाग्र करता है। जब चित्त सिमटता है, तब साधक सूक्ष्म ध्यान की ओर बढ़ता है और अंतर्मुख होकर दिव्य प्रकाश तथा शब्द की अनुभूति के योग्य बनता है।

संतमत सगुण और निर्गुण दोनों का समन्वय है। सगुण साधन है, निर्गुण साध्य। परन्तु इस मार्ग की सफलता का आधार है—सदाचार, सत्संग और नियमित ध्यान।

झूठ, चोरी, नशा, हिंसा और व्यभिचार से बचकर जो संतों की बताई साधना करता है, वही अपने भीतर छिपे परम सत्य का अनुभव कर सकता है।

मन को बाहर से हटाकर भीतर लगाओ; वहीं प्रकाश है, वहीं शब्द है और वहीं परमात्मा का साक्षात्कार है। 🙏

(प्रस्तुति: शिवेन्द्र कुमार मेहता)
🙏🌹जय गुरु महाराज🌹🙏

फाॅलो संतमत-सत्संग वट्सएप चैनल:
https://whatsapp.com/channel/0029Va5HwS0BvvsgkvhY411H

यूट्यूब चैनल:
www.youtube.com/SANTMATSADGURUMEHI

🌼🌿 धनवान होना और कल्याणवान होना दोनों अलग-अलग बातें हैं। 🌿🌼पुण्य कर्मों से धन, यश, प्रतिष्ठा और सुख-सुविधाएँ मिल सकती है...
14/06/2026

🌼🌿 धनवान होना और कल्याणवान होना दोनों अलग-अलग बातें हैं। 🌿🌼

पुण्य कर्मों से धन, यश, प्रतिष्ठा और सुख-सुविधाएँ मिल सकती हैं, लेकिन भक्ति से आत्मकल्याण, शांति और मोक्ष प्राप्त होता है।

संसार का धन और वैभव यहीं छूट जाता है, पर ईश्वर-भक्ति से अर्जित आध्यात्मिक संपत्ति जीव के साथ रहती है। इसलिए किसी व्यक्ति की बाहरी सफलता देखकर यह नहीं समझ लेना चाहिए कि उसने जीवन का परम लक्ष्य पा लिया है।

संतों का संदेश धन कमाने के विरुद्ध नहीं है। वे केवल इतना कहते हैं कि जीवन के वास्तविक उद्देश्य को मत भूलो। मनुष्य जन्म दुर्लभ है, इसे ईश्वर-स्मरण, सत्संग और साधना से सार्थक बनाओ।

धन जीवन को आराम दे सकता है,
पर भक्ति जीवन को अर्थ देती है।

🙏 जिसने संसार पाया, उसने कुछ पाया;
जिसने प्रभु को पाया, उसने सब कुछ पा लिया। 🌹

🌿OneTruth
-Shivendra Mehta

🙏🌹 जय गुरुदेव 🌹🙏

#संतमत #ईश्वरभक्ति #सत्संग #आत्मकल्याण #महर्षि_मेँहीँ_परमहंस #गुरुवचन #आध्यात्मिकता 🙏🏻🪷

🌺 समाज को भौतिक प्रगति के साथ-साथ शुद्ध आध्यात्मिकता की भी आवश्यकता है। 🌺विज्ञान हमें सुविधाएँ दे सकता है, परंतु मन की श...
13/06/2026

🌺 समाज को भौतिक प्रगति के साथ-साथ शुद्ध आध्यात्मिकता की भी आवश्यकता है। 🌺

विज्ञान हमें सुविधाएँ दे सकता है, परंतु मन की शांति नहीं। धन साधन दे सकता है, पर संतोष नहीं। आज मानवता को जिस प्रकाश की सबसे अधिक आवश्यकता है, वह है सत्य का प्रकाश, वह है सत्संग, सदाचार और ईश्वर-भक्ति का प्रकाश।

संतमत-सत्संग मनुष्य को भीतर से बदलता है, उसे सत्य, प्रेम, अहिंसा और आत्मकल्याण की राह दिखाता है। जब व्यक्ति सुधरेगा, तब परिवार सुधरेगा; परिवार सुधरेगा, तब समाज और राष्ट्र भी उन्नति करेगा।

🙏 सत्संग ही जीवन का सच्चा मार्गदर्शक है।🙏
Dr Swami Satyaprakash Shivendra Kumar Mehta

(प्रस्तुति: शिवेन्द्र कुमार मेहता)
🙏🌹जय गुरु महाराज🌹🙏

🌺 संतमत का भेद — परमात्मा की प्राप्ति का वास्तविक मार्ग 🌺परमाराध्य संत सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज फरमाते हैं...
12/06/2026

🌺 संतमत का भेद — परमात्मा की प्राप्ति का वास्तविक मार्ग 🌺

परमाराध्य संत सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज फरमाते हैं कि परमात्मा की प्राप्ति केवल चर्चा, वाद-विवाद या बाहरी दिखावे से नहीं होती, बल्कि आत्मा को उसके मूल स्रोत से जोड़ने वाली साधना से होती है।

मनुष्य अपने को शरीर, इन्द्रियों और मन तक सीमित मान बैठा है, जबकि संतों की दृष्टि में वह परमात्मा का अंश है। जिस प्रकार आँख स्वयं को देखने के लिए दर्पण का सहारा लेती है, उसी प्रकार जीवात्मा को अपने वास्तविक स्वरूप और परमात्मा के दर्शन के लिए संतों द्वारा बताए गए साधन-पथ का आश्रय लेना पड़ता है।

संतों ने बार-बार कहा कि परमात्मा का अनुभव पुस्तकों के शब्दों में नहीं, बल्कि साधना के प्रत्यक्ष अनुभव में है। वेद, शास्त्र और धर्मग्रंथ मार्ग दिखाते हैं, किन्तु मंज़िल तक पहुँचने के लिए स्वयं चलना पड़ता है। इसलिए संतमत केवल मान्यता नहीं, बल्कि अनुभूति का विज्ञान है।

महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज स्पष्ट करते हैं कि जीव और परमात्मा स्वजातीय हैं। उनके बीच दूरी नहीं, केवल अज्ञान, काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार के आवरण हैं। जब साधक सत्संग, सदाचार, नाम-जप और ध्यान के द्वारा इन आवरणों को हटाता है, तब उसे उस परम आनन्द का अनुभव होता है जिसका वर्णन शब्दों में संभव नहीं।

संतों का भेद किसी ग्रंथ के पन्नों में नहीं, बल्कि अनुभूत सत्य में छिपा है। यही कारण है कि कबीर साहब ने कहा—
"भेद यह गुप्त पाना किसी ग्रंथ से,
है असंभव समझ लो किसी संत से।"

सच्चा संत केवल वेशभूषा से नहीं बनता। संत वह है जिसने अपने भीतर की चंचल वृत्तियों को शांत कर परम सत्य का साक्षात्कार किया हो। इसलिए संतमत का सार है—

सत्संग से ज्ञान लो, सदाचार से जीवन शुद्ध करो और ध्यान-भजन द्वारा अपने भीतर उस परम प्रकाश और परम शब्द का अनुभव करो।

यही मानव जीवन की सफलता है, यही जन्म-मरण के दुःखों से मुक्ति का मार्ग है।

🙏 सत्संग • सदाचार • साधना — यही संतमत का त्रिवेणी संगम है।

(प्रस्तुति: शिवेन्द्र कुमार मेहता)
🙏🌹जय गुरु महाराज🌹🙏


#महर्षिमेहीं #संतमत #आत्मज्ञान #परमात्माप्राप्ति #सदाचार #सत्संग #ध्यानयोग #संतवाणी

Address

DLF City
Gurugram
122009

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Shivendra posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Shivendra:

Share