Shivendra Mehta

Shivendra Mehta जब मन अशांत हो और भीतर रिक्तता महसूस हो, तब अध्यात्म अनिवार्य हो जाता है।
Spirituality beyond religion — a journey towards inner peace, balance & truth.

🌼🌿 विचार बदलें, जीवन की दिशा बदल जाएगीमन में जैसे विचार रहते हैं, वैसी ही हमारी दृष्टि और व्यवहार धीरे-धीरे बनने लगते है...
20/08/2026

🌼🌿 विचार बदलें, जीवन की दिशा बदल जाएगी

मन में जैसे विचार रहते हैं, वैसी ही हमारी दृष्टि और व्यवहार धीरे-धीरे बनने लगते हैं। लेकिन केवल सकारात्मक सोच लेना ही पर्याप्त नहीं है। विचारों के साथ नियत भी निर्मल होनी चाहिए और कर्म भी उसी के अनुरूप होने चाहिए।

संतमत हमें बाहर की परिस्थितियों को बदलने से पहले अपने मन को देखने और सँवारने की शिक्षा देता है। मन शांत और अंतर्मुख होगा, तो जीवन में विवेक, संयम और सद्भाव अपने-आप बढ़ने लगेंगे।

दोहा:🌹
मन निर्मल, विचार शुभ, कर्म रहें निष्काम।
अंतर में उजियारा हो, मिटे विकार तमाम।।

सच्ची प्रार्थना केवल शब्दों में नहीं, बल्कि शुद्ध आचरण और आत्मिक जागृति में दिखाई देती है।
अपने भीतर प्रकाश जगाइए—यही जीवन को सकारात्मक और सार्थक बनाने का वास्तविक मार्ग है।🙏

🌿 ONE TRUTH
सत्य की ओर • आत्मा की ओर • परमात्मा की ओर

❖ One Truth • One Humanity • One Consciousness ❖
❖ एक सत्य • एक मानवता • एक चेतना ❖

— Shivendra Mehta

🙏🌹 जय गुरुदेव 🌹🙏

फाॅलो संतमत-सत्संग वट्सएप चैनल:
https://whatsapp.com/channel/0029Va5HwS0BvvsgkvhY411H

यूट्यूब चैनल:
www.youtube.com/SANTMATSADGURUMEHI

🌿 ONE TRUTHसत्य की ओर • आत्मा की ओर • परमात्मा की ओर❖ One Truth • One Humanity • One Consciousness ❖❖ एक सत्य • एक मानवत...
19/08/2026

🌿 ONE TRUTH
सत्य की ओर • आत्मा की ओर • परमात्मा की ओर

❖ One Truth • One Humanity • One Consciousness ❖
❖ एक सत्य • एक मानवता • एक चेतना ❖

— Shivendra Mehta

🙏🌹 जय गुरुदेव 🌹🙏

फाॅलो संतमत-सत्संग वट्सएप चैनल:
https://whatsapp.com/channel/0029Va5HwS0BvvsgkvhY411H

यूट्यूब चैनल:
www.youtube.com/SANTMATSADGURUMEHI

🌿 सबसे बड़ा पुण्य—किसी के काम आना 🌿भूखे को भोजन देना और प्यासे को पानी पिलाना केवल दान नहीं, मानवता की सहज अभिव्यक्ति है...
19/08/2026

🌿 सबसे बड़ा पुण्य—किसी के काम आना 🌿

भूखे को भोजन देना और प्यासे को पानी पिलाना केवल दान नहीं, मानवता की सहज अभिव्यक्ति है।
लेकिन सेवा का सच्चा मूल्य वस्तु से अधिक भावना में है।

संतमत की दृष्टि से परोपकार तभी सार्थक है, जब उसके पीछे दिखावा, अहंकार या स्वार्थ न हो। किसी जरूरतमंद की आवश्यकता को समझकर, अपनी सामर्थ्य के अनुसार उसकी सहायता करना मन को भी निर्मल बनाता है।

जिससे किसी जीव का दुःख थोड़ा कम हो जाए,
वही सेवा वास्तव में सार्थक है।

दोहा:🌹
भूखे को भोजन मिले, प्यासे को जलदान।
निष्काम सेवा से खिले, मानवता की शान।।

🙏 सेवा छोटी हो या बड़ी—भाव सच्चा हो, यही उसकी सबसे बड़ी कीमत है।

🌿 ONE TRUTH
सत्य की ओर • आत्मा की ओर • परमात्मा की ओर

❖ One Truth • One Humanity • One Consciousness ❖
❖ एक सत्य • एक मानवता • एक चेतना ❖

— Shivendra Mehta

🙏🌹 जय गुरुदेव 🌹🙏

फाॅलो संतमत-सत्संग वट्सएप चैनल:
https://whatsapp.com/channel/0029Va5HwS0BvvsgkvhY411H

यूट्यूब चैनल:
www.youtube.com/SANTMATSADGURUMEHI

#सेवा

19/08/2026
संतमत-सत्संग के अनुसार जीवन में अनावश्यक बातों और आदतों से बचना चाहिए।संतमत की मूल शिक्षा है—आत्मनिरीक्षण, सदाचार और अंत...
18/08/2026

संतमत-सत्संग के अनुसार जीवन में अनावश्यक बातों और आदतों से बचना चाहिए।
संतमत की मूल शिक्षा है—आत्मनिरीक्षण, सदाचार और अंतर्मुखता।

🌿 दूसरे क्या कर रहे हैं, कौन कहाँ जा रहा है, किसके पास कितना है, कौन क्या कह रहा है—इन सब पर अनावश्यक नज़र रखने में हमारा बहुत-सा समय और मन की शांति चली जाती है।

इसके बजाय हमें अपने भीतर झाँककर देखना चाहिए—

मैं क्या कर रहा हूँ?
मेरा मन किस दिशा में जा रहा है?
मेरे विचार कैसे हैं?
मेरे व्यवहार से किसी को दुःख तो नहीं हो रहा?

संतमत हमें संसार से भागने की शिक्षा नहीं देता, बल्कि संसार में रहते हुए अपने मन को सँभालने, सदाचारपूर्वक जीवन जीने और आत्मनिरीक्षण करने की शिक्षा देता है।

हाँ, इसका अर्थ यह भी नहीं कि गलत को गलत न कहें या अन्याय को देखकर आँखें बंद कर लें। जहाँ परिवार, समाज, देश, किसी व्यक्ति के हित, सुरक्षा या अपने कर्तव्य का प्रश्न हो, वहाँ सजग रहना और उचित कदम उठाना आवश्यक है।

लेकिन बिना आवश्यकता दूसरों के जीवन में झाँकना, उनकी निंदा करना या उनकी कमियों में आनंद लेना—हमारे अपने मन को ही अशांत करता है।

सच्ची प्रगति यह नहीं कि हमें दुनिया की कितनी खबर है;
सच्ची प्रगति यह है कि हमें अपने मन की कितनी खबर है।

दृष्टि संसार में रहे, लेकिन मन सत्य से न हटे।
संसार में रहते हुए ही अपनी दृष्टि को धीरे-धीरे अंतर की ओर मोड़ते रहिए।

यही आत्मनिरीक्षण धीरे-धीरे विवेक जगाता है और साधक को सत्य के मार्ग पर आगे बढ़ाता है।

🌿 ONE TRUTH
सत्य की ओर • आत्मा की ओर • परमात्मा की ओर

❖ One Truth • One Humanity • One Consciousness ❖
❖ एक सत्य • एक मानवता • एक चेतना ❖

— Shivendra Mehta

🙏🌹 जय गुरुदेव 🌹🙏

फाॅलो संतमत-सत्संग वट्सएप चैनल:
https://whatsapp.com/channel/0029Va5HwS0BvvsgkvhY411H

यूट्यूब चैनल:
www.youtube.com/SANTMATSADGURUMEHI

🌿 नीयत बदलते ही नज़र बदल जाती हैमनुष्य जैसा भीतर से होता है, संसार को भी अक्सर वैसा ही देखने लगता है।यदि हमारी नीयत में ...
18/08/2026

🌿 नीयत बदलते ही नज़र बदल जाती है

मनुष्य जैसा भीतर से होता है, संसार को भी अक्सर वैसा ही देखने लगता है।
यदि हमारी नीयत में भलाई, करुणा और सद्भाव हो, तो दूसरों में भी अच्छाई दिखाई देने लगती है।

संतमत की दृष्टि से वास्तविक परिवर्तन बाहर की दुनिया को बदलने से नहीं, अपने मन को निर्मल करने से शुरू होता है।
दूसरों में दोष खोजने से पहले अपने भीतर झाँकना अधिक उपयोगी है।

अच्छाई देखने की आदत डालिए—
धीरे-धीरे दृष्टि बदलेगी,
दृष्टि बदलेगी तो व्यवहार बदलेगा,
और व्यवहार बदलेगा तो जीवन का अनुभव भी बदल जाएगा।

दोहा:🌹
जैसी नीयत मन रखे, वैसी दिखे जहान।
निर्मल हो अंतर अगर, हर जन में भगवान।।

🌿 ONE TRUTH
सत्य की ओर • आत्मा की ओर • परमात्मा की ओर

❖ One Truth • One Humanity • One Consciousness ❖
❖ एक सत्य • एक मानवता • एक चेतना ❖

— Shivendra Mehta

🙏🌹 जय गुरुदेव 🌹🙏

फाॅलो संतमत-सत्संग वट्सएप चैनल:
https://whatsapp.com/channel/0029Va5HwS0BvvsgkvhY411H

यूट्यूब चैनल:
www.youtube.com/SANTMATSADGURUMEHI

🌼🌿 परमाराध्य सद्गुरुदेव की सार-वाणी 🌿🌼संत सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज की वाणी हमें एक अत्यंत सरल, लेकिन गहरी ...
17/08/2026

🌼🌿 परमाराध्य सद्गुरुदेव की सार-वाणी 🌿🌼

संत सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज की वाणी हमें एक अत्यंत सरल, लेकिन गहरी बात समझाती है—सत्संग केवल सुनने की चीज नहीं, जीवन को बदलने का मार्ग है।

सत्संग से विवेक जागता है, गुरु की पहचान होती है और ईश्वर-भक्ति की सच्ची दिशा मिलती है। संसार में रहते हुए भी मन को संसार में पूरी तरह लिप्त न होने देना ही साधक की सावधानी है।

गुरुदेव बताते हैं कि परमात्मा कहीं दूर नहीं हैं; वे हमारे अत्यंत निकट, हमारे अंदर हैं। परंतु मन और इन्द्रियों की चंचलता के कारण हमारा ध्यान बाहर भटकता रहता है। जब साधना, सत्संग और गुरु-ज्ञान के द्वारा मन अंतर्मुख होता है, तब भीतर के सत्य का अनुभव होने लगता है।

सच्चे गुरु की पहचान केवल शब्दों से नहीं, उनके बताए हुए साधन और जीवन-मार्ग पर चलने से होती है।

मुक्ति मार्ग जानने साधन करते नित।
साधन करते नित सत्त चित जग में रहते॥

अर्थात् मुक्ति का मार्ग जानने के लिए निरंतर साधना आवश्यक है। केवल ज्ञान सुन लेना पर्याप्त नहीं—ज्ञान को जीवन में उतारना ही साधना की सार्थकता है।

🌿 सत्संग से ज्ञान, गुरु से दिशा और साधना से आत्मानुभूति का मार्ग प्रशस्त होता है।

🙏🌹 परमाराध्य सद्गुरुदेव के श्रीचरणों में कोटिशः नमन। 🌹🙏

🌿 ONE TRUTH
सत्य की ओर • आत्मा की ओर • परमात्मा की ओर

❖ One Truth • One Humanity • One Consciousness ❖
❖ एक सत्य • एक मानवता • एक चेतना ❖

— Shivendra Mehta

🙏🌹 जय गुरुदेव 🌹🙏

फाॅलो संतमत-सत्संग वट्सएप चैनल:
https://whatsapp.com/channel/0029Va5HwS0BvvsgkvhY411H

यूट्यूब चैनल:
www.youtube.com/SANTMATSADGURUMEHI

#महर्षिमेँही #संतमत #सत्संग #गुरुज्ञान #साधना #ईश्वरभक्ति #आत्मज्ञान #गुरुकृपा

16/08/2026

दुःख दबाने से न मिटे, बढ़ता मन में भार।
मन को भीतर देखिए, शांति मिले अपार।।
🙏🌹 जय गुरु🌹🙏

Address

DLF City
Gurugram
122009

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Shivendra Mehta posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Shivendra Mehta:

Shortcuts

Share