saas Bahu aur Tv

saas Bahu aur Tv tv reviews

23/01/2026

23/01/2026

वास्तव में आज   है भी या नहीं आज विश्व के अधिकांश देशों में 1 जनवरी को नववर्ष मनाया जाता है, जो ग्रेगोरियन कैलेंडर पर आध...
01/01/2026

वास्तव में आज है भी या नहीं
आज विश्व के अधिकांश देशों में 1 जनवरी को नववर्ष मनाया जाता है, जो ग्रेगोरियन कैलेंडर पर आधारित है। यह कैलेंडर मूलतः रोमन और ईसाई धार्मिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है। वैज्ञानिक दृष्टि से यदि इसका विश्लेषण किया जाए तो यह स्पष्ट होता है कि 1 जनवरी को न तो कोई खगोलीय घटना घटती है और न ही प्रकृति में कोई विशेष परिवर्तन दिखाई देता है।
1 जनवरी को न होने वाले परिवर्तन
सूर्य की गति में कोई नया चरण प्रारंभ नहीं होता
ऋतु परिवर्तन नहीं होता
दिन-रात की अवधि में कोई विशिष्ट बदलाव नहीं
फसल चक्र, वनस्पति या जीव-जंतुओं पर कोई प्रभाव नहीं
पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा की स्थिति में कोई निर्णायक परिवर्तन नहीं
अर्थात 1 जनवरी केवल एक प्रशासनिक तिथि है, जिसका निर्धारण मानव-निर्मित कैलेंडर द्वारा किया गया है, न कि प्रकृति या खगोल विज्ञान द्वारा।
भारतीय नववर्ष (गुड़ी पड़वा): एक वैज्ञानिक और प्राकृतिक नववर्ष
भारतीय नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है, जिसे महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा, आंध्र-तेलंगाना में उगादी, कर्नाटक में युगादि, और उत्तर भारत में नवसंवत्सर कहा जाता है। यह नववर्ष चंद्र-सौर पंचांग पर आधारित है, जो सूर्य और चंद्रमा दोनों की गति को ध्यान में रखता है।
गुड़ी पड़वा के समय प्रकृति में होने वाले प्रमुख परिवर्तन
1. वसंत ऋतु का आगमन
शीत ऋतु की समाप्ति और वसंत ऋतु का आरंभ
मौसम न अधिक ठंडा, न अधिक गर्म – स्वास्थ्य के लिए अनुकूल
शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का समय
2. वनस्पतियों में नवजीवन
वृक्षों में नई कोपलें और पत्तियाँ
आम में बौर, फूलों की संकेतक सुगंध
खेतों में नई फसल की तैयारी
यह प्रकृति का स्पष्ट संकेत है कि नया चक्र प्रारंभ हो चुका है।
3. खगोलीय दृष्टि से विशेष महत्व
सूर्य मीन राशि से मेष राशि की ओर गति करता है
यह सृष्टि के नए ऊर्जा चक्र का प्रतीक माना गया है
चंद्रमा का नया मास और नया पक्ष प्रारंभ होता है
4. जीव-जंतुओं में परिवर्तन
पक्षियों का कलरव बढ़ता है
कीट-पतंगों की सक्रियता
प्रजनन और नवजीवन की प्रक्रिया प्रारंभ
5. मानव शरीर पर प्रभाव
आयुर्वेद के अनुसार कफ दोष का संतुलन
ऋतु परिवर्तन के अनुसार खान-पान में बदलाव
नीम और गुड़ का सेवन – शरीर शुद्धि और रोग निवारण
सांस्कृतिक नहीं, वैज्ञानिक परंपरा
गुड़ी पड़वा केवल धार्मिक या सांस्कृतिक पर्व नहीं है, बल्कि यह:
कृषि चक्र से जुड़ा है
ऋतु परिवर्तन को दर्शाता है
मानव स्वास्थ्य के अनुरूप है
खगोलीय गणनाओं पर आधारित है
जबकि ग्रेगोरियन नववर्ष में:
प्रकृति मौन रहती है
न ऋतु बदलती है
न जीवन चक्र में कोई नया आरंभ दिखता है
निष्कर्ष
स्पष्ट है कि 1 जनवरी का नववर्ष एक कृत्रिम और प्रशासनिक व्यवस्था है, जबकि भारतीय नववर्ष प्रकृति, खगोल और जीवन के वास्तविक चक्र से जुड़ा हुआ है।
भारतीय नववर्ष वह समय है जब:
प्रकृति मुस्कुराती है
सृष्टि नवजीवन से भर उठती है
मानव और पर्यावरण में सामंजस्य स्थापित होता है
अतः भारतीय नववर्ष न केवल परंपरागत, बल्कि पूर्णतः वैज्ञानिक और प्रकृति-सम्मत है।

25/12/2025

01/10/2025
01/10/2025

Learn English with story

26/09/2025

26/09/2025

Address

Gwalior Police Line Area
474001

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when saas Bahu aur Tv posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to saas Bahu aur Tv:

Share

Category