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Axis Bank के ग्राहकों के लिए बड़ी खुशखबरी, बैंक ने FD पर ब्याज दरों में किया इजाफा, जानिए नई दरेंएक्सिस बैंक में 7 दिनों...
05/11/2022

Axis Bank के ग्राहकों के लिए बड़ी खुशखबरी, बैंक ने FD पर ब्याज दरों में किया इजाफा, जानिए नई दरें

एक्सिस बैंक में 7 दिनों से 10 वर्षों में मैच्योर होने वाली जमा पर आम नागरिक को 3.50% से 6.50% तक और सीनियर सिटीजन्स को 3.50% से 7.25% तक का ब्याज मिल सकता है। इससे लंबे समय के लिए एफडी करानेवाले ग्राहकों और सिनियर सिटीजन्स को विशेष फायदा होगा।FD Interest Rate: प्राइवेट सेक्टर के जाने-माने बैंक एक्सिस बैंक (Axis Bank) के ग्राहकों के लिए खुशखबरी है। बैंक ने अपने फिक्स्ड डिपॉजिट (Fixed Deposit) पर ब्याज दर में 115 बेसिस प्वाइंट्स तक की बढ़ोतरी की है। ये बढ़ोतरी 2 करोड़ रुपए से कम की एफडी के लिए है और नई ब्याज दरें 5 नवंबर 2022 से प्रभावी हैं। बैंक ने 46 दिनों से लेकर 10 वर्ष तक की मैच्योरिटी पर ब्याज दरों में 115 बीपीएस तक का इजाफा किया है। इससे लंबे समय के लिए एफडी करानेवाले ग्राहकों और सिनियर सिटीजन्स को विशेष फायदा होगा। इस बैंक में 7 दिनों से 10 वर्षों में मैच्योर होने वाली जमा पर आम नागरिक को 3.50% से 6.50% तक और सीनियर सिटीजन्स को 3.50% से 7.25% तक का ब्याज मिल सकता है। वहीं, 3 से 10 साल के बीच मैच्योरिटी वाली जमाओं पर अब आम नागरिक को 6.50% और सीनियर सिटीजन्स को अधिकतम 7.25% की दर से ब्याज मिलेगा।दिनों से 45 दिनों में मैच्योर होने वाली FD – 3.50% ब्याज



46 दिनों से 60 दिनों में मैच्योर होने वाली FD – 4% ब्याज (पहले 3.50%)



61 दिनों से 3 महीने की FD – 4.50% ब्याज (पहले 4%)

3 से 6 महीने की FD – 4.50% ब्याज (पहले 4.25

Umaria News : जंगल में छिपे लकड़ी चोरों ने की फायरिंग तो वन विभाग ने भी दिया जवाबउमरिया पुष्पा के रूप में लाल चंदन चोर क...
05/11/2022

Umaria News : जंगल में छिपे लकड़ी चोरों ने की फायरिंग तो वन विभाग ने भी दिया जवाब

उमरिया पुष्पा के रूप में लाल चंदन चोर को सिनेमा में महिमा मंडित किया।्उस फिल्म की ही स्टाइल में उमरिया जिले में सक्रिय लकड़ी चोरअपना कारनामा दिखाने लगे हैं। बीती रात जंगल से सागौन की लकड़ी चोरी करके ले जा रहे मफिया को जब वन विभाग ने घेर लिया।

पुष्पा के रूप में लाल चंदन चोर को सिनेमा मे महिमा मंडित किया गया था। उस फिल्म की ही स्टाइल में उमरिया जिले में सक्रिय लकड़ी चोर अपना कारनामा दिखाने लगे हैं। बीती रात जंगल से सागौन की लकड़ी चोरी करके ले जा रहे मफिया को जब वन विभाग ने घेर लिया तो उन्होंने सारी लकड़ी नहर में डाल दी और खुद जंगल में छिप गए। अंधेरे का फायदा उठाकर जंगल में छिपे लकड़ी चोरों ने फायरिंग भी कर दी। जवाब में वन विभाग के अधिकारियों ने भी फायर किया। हालांकि इस घटना में किसी के भी घायल होने की कोई जानकारी सामने नहीं आई है। इतना कुछ होने के बावजूद लकड़ी चोरों को पकड़ा नहीं जा सका और वे अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफल हो गए।

ददरी नहर में मिली लकड़ी

रात को लकड़ी चोरों के मौके से भाग जाने के बाद मुख्यालय से सटे ग्राम ददरी स्थित नहर में लाखों की इमारती लकड़ी जब्त की गई है। बताया गया है कि पानी के बहाव के कारण नहर में फेंकी गई सागौन की लकड़ी काफी दूर तक बह गई

थी। वन विभाग के अमले ने शनिवार की सुबह से लकडि़यों को एकत्र करना शुरू किया और दोपहर एक बजे के करीब इस काम को खत्म किया। रेग्युलर फारेस्ट और वन विकास निगम की संयुक्त कार्रवाई में दो घन मीटर से ज्यादा सागौन कीलकड़ी जब्त होने की जानकारी सामने आई है।



ट्रेक्टर से बांधकर निकाली लकड़ी

वन अमले को नहर से लकडि़यां निकालने में खासीमशक्कत का सामना करना पड़ा।सागौन की मोटी-मोटी लकडि़यों को नहर से निकालने के लिए उन्हें रस्सियों से बांधकर ट्रैक्टर से खींचना पड़ा तब कहीं वन विभाग के कर्मचारियों को

सफलता मिल सकी। इस काम में वन विभाग के अमले को लगभग छह घंटे का समय

खपाना पड़ा। हालांकि वन अमले ने चोरों की कोशिश को नाकाम कर दिया थाजिससे टीम में उत्साह था।अमले के पहुंचते ही फायरिंगबताया जाता है कि मुखबिर की सूचना पर जैसे ही वन अमला घटना स्थल पर पहुंचा औरकार्रवाई करने लगा इसी दौरान जंगल में छिपे लकड़ी चोरोंने फायरिंग कर दी। संयोग से इस घटना में किसी को भी गोली नहीं लगी अन्यथा में कुछ भी होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता था। लकड़ी चोरों की तरफ से फायरिंग होते ही वन अमले ने भी हवा में एक गोली चलाई।जैसे ही लकड़ी चोरों को इस बात का अहसास हुआ कि वन अमला भी हथियारबंद हैतो वे वहां से भाग गए।

MP News: बीएलओ ड्यूटी को लेकर शिक्षकों ने जताया विरोध, स्‍कूल शिक्षा मंत्री ने कही यह बातभोपाल के जिला शिक्षाधिकारी (डीई...
05/11/2022

MP News: बीएलओ ड्यूटी को लेकर शिक्षकों ने जताया विरोध, स्‍कूल शिक्षा मंत्री ने कही यह बात

भोपाल के जिला शिक्षाधिकारी (डीईओ) डीईओ ने संकुल प्राचार्यों को आदेश जारी किया था कि बीएलओ ड्यूटी के साथ स्कूलों में भी पढ़ाएं शिक्षक। शिक्षकों का तर्क, इससे शिक्षा की गुणवत्‍ता प्रभावित होगी। मंत्री बोलें- शिक्षकों को धीरे-धीरे गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त किया जाएगा।

सरकारी स्कूलों में शिक्षकों को बीएलओ कार्य के साथ शैक्षणिक कार्य करने के आदेश दिए गए हैं। बीएलओ कार्य के साथ स्कूलों में उपस्थित होना भी जरूरी है। इस संबंध में भोपाल के जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) नितिन सक्सेना ने संकुल प्राचार्यों को आदेश जारी किया था। इस आदेश के बाद शिक्षक विरोध में उतर आए थे। उनक कहना था कि पढ़ाई के साथ-साथ बीएलओ ड्यूटी संभव नहीं है। इस पर स्कूल शिक्षा मंत्री ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिक्षकों का उपलब्ध होना जरूरी है। इसके लिए उन्हें गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त रखा जाएगा। जैसे-जैसे शिक्षकों की व्यवस्था होती जाएगी, शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त कर दिया जाएगा। बहुत जरूरी होगा तो ही ड्यूटी लगाई जाएगी।

बता दें, कि डीईओ ने आदेश में लिखा था कि जिले में संचालित स्कूलों के निरीक्षण के दौरान यह पाया गया है कि विद्यार्थियों के मान से अधिक शिक्षक कार्यरत हैं, जो मात्र एक-एक कालखंडों का अध्यापन करा रहे हैं। वहीं कुछ स्कूलों में शिक्षकों को बीएलओ कार्य के लिए ड्यूटी लगाई गई है। इस कारण स्कूल से शिक्षक अनुपस्थित हैं। ऐसे में शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। डीईओ ने निर्देश दिया कि बीएलओ नियुक्त शिक्षकों को निर्वाचन आयोग द्वारा अलग से मानदेय दिया जाता है। इस कारण वे शिक्षण कार्य करने से इंकार नहीं कर सकते हैं। बीएलओ कार्य के साथ शिक्षण कार्य भी किया जाना एवं स्कूल में समय पर उपस्थित होना अनिवार्य है। साथ ही जिन स्कूलों में शिक्षक बीएलओ नियुक्त हैं या छात्र संख्या के मान से शिक्षकों की कमी है, ऐसे स्कूलों में अतिशेष शिक्षकों से अध्यापन कार्य कराया जाए। इस आदेश का शिक्षक संगठनों ने विरोध करते हुए काहा कि स्कूल में पढ़ाने के साथ बीएलओ कार्य करना संभव नहीं है, जबकि अन्य विभाग के कर्मचारियों को बीएलओ होने पर उन्हें अन्‍य कार्यों से मुक्त रखा गया है। शिक्षकों को भी बीएलओ कार्य से मुक्त रखा जाए।

Chhindwara News : छिंदवाड़ा महापौर ने लगाया आरोप, आदिवासी और गरीब वर्ग से हूं इसलिए कर रहे अपमानितChhindwara News : महाप...
05/11/2022

Chhindwara News : छिंदवाड़ा महापौर ने लगाया आरोप, आदिवासी और गरीब वर्ग से हूं इसलिए कर रहे अपमानित

Chhindwara News : महापौर विक्रम अहके ने कहा कि छिंदवाड़ा की जनता ने चुनाव के जरिए नगर सरकार से भाजपा को सत्ता से बेदखल किया है, पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ, सांसद नकुल नाथ के नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए मुझे महापौर चुना है।

आदिवासी वर्ग से आता हूं, गरीब परिवार से आता हूं, यही वजह है कि प्रदेश की भाजपा सरकार लगातार मेरा अपमान कर रही है। उक्त आरोप शनिवार को पत्रकारों से चर्चा के दौरान महापौर विक्रम अहके ने व्यक्त किए। महापौर विक्रम अहके ने कहा कि छिंदवाड़ा की जनता ने चुनाव के जरिए नगर सरकार से भाजपा को सत्ता से बेदखल किया है, पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ, सांसद नकुल नाथ के नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए मुझे महापौर चुना है। महापौर ने बताया कि जब बीते दिनों नगर निगम द्वारा स्वच्छता कर्मियों के सम्मान में कार्यक्रम आयोजित किया गया तो, उस कार्यक्रम में महापौर, नगर निगम अध्यक्ष यहां तक कि महिला पार्षदों के लिए तक मंच पर बैठने की जगह नहीं थी, जबकि हारे हुए भाजपा प्रत्याशी, ठेकेदार और पार्षद पति मंच पर विराजमान थे, भाजपा नेताओं के दबाव में प्रशासन लगातार उपेक्षित कर रहा है। मैं भाजपा नेताओं से अपील करता हूं कि जनता ने पांच साल के लिए नगर निगम में कांग्रेस में सरकार बनाई है, इसे निर्बाध रूप से चलने दें। महापौर ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम में जो प्रमाण पत्र बंटने थे, उसमें मेरी और कमिश्नर की साइन कराई गई थी, एक हजार प्रमाण पत्र पर कार्यक्रम से एक दिन पहले दस्तखत भी कर दिए थे, लेकिन एन मौके पर कलेक्टर के दस्तखत वाले प्रमाण पत्र वितरित कर दिए गए।

घोटालों की है लंबी फेहरिस्त

महापौर विक्रम अहके ने बताया कि भाजपा के कार्याकल में बड़े पैमाने पर घोटाले हुए हैं, 18 साल तक भाजपा शहर सरकार में काबिज रही, जिसके कारण 55 करोड़ रुपये के घाटे में नगर निगम है, निगम की संपत्ति बिकने की कगार पर है, सभी घोटालों की सूची बनाई जा रही है, जिस पर बाद में विस्तार से जानकारी दी जाएगी, लेकिन वर्तमान में नगर निगम कर्मियों को वेतन देने की चुनौती है

Indore News: धार का फड़के स्टुडियो, जहां प्रतिमाएं ऐसी जो सजीव होने का कराती हैं आभासIndore News: होलकर राजपरिवार के सदस...
05/11/2022

Indore News: धार का फड़के स्टुडियो, जहां प्रतिमाएं ऐसी जो सजीव होने का कराती हैं आभास

Indore News: होलकर राजपरिवार के सदस्य हों या धार रियासत के महाराज, स्वामी विवेकानंद, गुरुनानकदेव हों या नाना साहेब तराणेकर। इन सबकी बनी प्रतिमाएं जो सजीव होने का आभास करवाती हों ऐसा हुनर था रघुनाथ फड़के के हाथों में।

धार रियासत के महाराज आनंदराव पंवार अपने पिता तुल्य राजपुरोहित केशवराव पुराणिक के निधन से इतने दुखी हुए कि एक सप्ताह तक राजसभा नहीं गए। राजा को दुखी देखकर ख्यात मूर्तिकार रघुनाथ कृष्ण फड़के ने राजपुरोहित की ऐसी मूर्ति बनाकर राजसभा में रख दी जो पहली नजर में देखने पर असली होने का आभास करवा रही थी। आनंदराव जब सभा में पहुंचे तो अपने गुरु की ऐसी सजीव प्रतिमा देखकर चौंक गए।



सजीव मूर्तिकला से चमत्कृत होने वाली दूसरी शख्सियत थे इंदौर के सर सेठ हुकुमचंद। फड़के ने उनकी जो प्रतिमा बनाई थी वह तत्कालीन समय से दस वर्ष पूर्व की उम्र की थी। होलकर राजपरिवार के सदस्य हों या धार रियासत के महाराज, स्वामी विवेकानंद, गुरुनानकदेव हों या नाना साहेब तराणेकर। इन सबकी बनी प्रतिमाएं जो सजीव होने का आभास करवाती हों ऐसा हुनर था रघुनाथ फड़के के हाथों में। 89 साल बाद भी उनके द्वारा तैयार प्रतिमाएं आज भी लोगों को दांतों तले अंगुली दबाने पर विवश कर देती हैं।

इन प्रतिमाओं को देखना हो तो धार का फड़के स्टूडियो एकमात्र स्थान है। 1930 में मुुंबई के वसई से फड़के को धार के महाराज उदाजीराव ने अपनी मां लक्ष्मीबाई की प्रतिमा बनाने के लिए बुलाया था। धार की आबोहवा फड़के को इतनी पसंद आई कि वह लौटकर वसई नहीं गए और 1933 में धार में स्टूडियो बनाकर मूर्तिकला का प्रशिक्षण दूसरों को देने लगे। उनके शिष्य शंकर राव दवे, दिनकर राव दवे, राजाभाऊ मेहुणकर और श्रीधर मेहुणकर ने फड़के की परंपरा को आगे बढ़ाया। आज भी उसी परंपरा का निर्वाहन करते हुए प्रतिमाएं गढ़ी जा रही हैं।

वर्तमान में फड़के स्टूडियो के संचालन की जिम्मेदारी युवाओं के हाथ में है। इससे जुड़े मंगेश दवे बताते हैं कि यहां बनी प्रतिमाओं की एक खासियत यह भी है कि उनकी प्रतिकृति देश के विभिन्न् स्थानों पर लगी हैं। चाहे इंदौर के रीगल तिराहे पर लगी महात्मा गांधी की प्रतिमा हो या शास्त्री ब्रिज के समीप लगी लालबहादुर शास्त्री की प्रतिमा या फिर मुबंई की चौपाटी पर स्थापित बालगंगाधर तिलक की प्रतिमा ही क्यों न हो। इन्हें बनाते समय आंखो के साथ चेहरे की बारीक से बारीक मांसपेशियों को भी इतनी सफाई से उकेरा जाता है कि प्रतिमा असली होने का आभास कराती है। प्रतिमा की आंख में कंचे या रंग नहीं लगाया गया बावजूद वे उसके असल होने का प्रभाव छोड़ती है।

त्वचा पर झुर्रियां, कपडों की सिलवटें, शरीर की नसें इस तरह प्रतिमा पर बनाई जाती हैं कि यह देखने वाले को असल का आभास कराती है। मंगेश बताते हैं कि यहां वर्कशाप बनाने की भी योजना है ताकि दर्शक इन मूर्तियों को बनता हुआ देख सकें। कुछ मूर्तियां कल्पना के आधार पर भी बनाई गई है। इन्हें बनाने का उद्देश्य विद्यार्थियों को सिखाना था। यहां सिर्फ विशेष लोगों या महापुरुषों की ही नहीं बल्कि आम लोगों की भी प्रतिमाए हैं। दर्शक यहां प्रतिमाओं को देखने के साथ ही उनके जरिए इतिहास और कला से भी रूबरू हो सकते हैं।

Gwalior Crime News: ग्वालियर में घर में रखे 125 जिंदा कारतूस और लाखों के गहने चोरीग्वालियर के सिरोल इलाके में चोरी का सन...
05/11/2022

Gwalior Crime News: ग्वालियर में घर में रखे 125 जिंदा कारतूस और लाखों के गहने चोरी

ग्वालियर के सिरोल इलाके में चोरी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जिसमें चोर एक घर में घुसे, घर के अंदर रखे 125 जिंदा कारतूस और लाखों रुपए के सोना-चांदी के गहने समेट ले गए। जो कारतूस चोर ले गए, वह अलग-अलग बोर के हथियार के हैं।ग्वालियर के सिरोल इलाके में चोरी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जिसमें चोर एक घर में घुसे, घर के अंदर रखे 125 जिंदा कारतूस और लाखों रुपए के सोना-चांदी के गहने समेट ले गए। जो कारतूस चोर ले गए, वह अलग-अलग बोर के हथियार के हैं। मकान मालिक के यहां लाइसेंसी हथियार हैं, जिनके यह कारतूस एक जगह रखे हुए थे। चोरी होने का पता जब लगा तब खलबली मच गई। आनन-फानन में पुलिस को बुलाया गया। एकसाथ इतने कारतूस चोरी होने की घटना से पुलिस अधिकारी भी सकते में आ गए हैं।

सिरोल स्थित हुरावली के सी ब्लाक में रहने वाले विजय पुत्र भौरी सिंह सिकरवार उम्र 36 वर्ष परिवार के साथ घर से बाहर गए हुए थे। उनके सूने घर का ताला तोड़कर चोर अंदर घुस गए। चाेर अंदर घुसकर पिस्टल के 50 कारतूस, 12 बोर के 100 कारतूस और 315 बोर की रायफल के 50 कारतूस चोरी कर ले गए। इसके अलावा सोना-चांदी के गहने भी चोर समेट ले गए। चोरी होने का पता तब लगा जब वह घर लौटकर आए। जब लौटकर आए और घर के अंदर सामान बिखरा देखा तब चोरी होने का पता लगा। अंदर से गहने और कारतूस गायब थे।

उन्होंने पुलिस को सूचना दी। सिरोल थाने का फोर्स फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट के साथ पहुंचा। पुलिस ने पड़ताल की कुछ फिंगरप्रिंट यहां से टीम को मिले हैं। जिनके चांस प्रिंट लेकर मिलान किया जारहा है। आसपास के सीसीटीवी कैमरे भी खंगाले जा रहे हैं, जिससे कुछ सुराग मिल सके। एक जगह कुछ संदेही नजर आए हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि वह चोर ही है या नहीं। पुलिस को यह भी आशंका है कि हो सकता है कोई ऐसा व्यक्ति चोर हो जिसे पता था कि यह लोग घर से बाहर गए हैं। इसलिए हर एंगल पर पपड़ताल हो रही है।

Uma Bharti: उमा भारती ने संन्‍यास दीक्षा के 30 वर्ष पूरे होने पर पारिवारिक बंधन से मुक्‍त होने का लिया संकल्‍प, कहलाएंगी...
05/11/2022

Uma Bharti: उमा भारती ने संन्‍यास दीक्षा के 30 वर्ष पूरे होने पर पारिवारिक बंधन से मुक्‍त होने का लिया संकल्‍प, कहलाएंगी ‘दीदी मां’

उमा भारती का ट्वीट- मेरे गुरु ने आदेश दिया था कि मैं समस्त निजी संबंधों का परित्याग करके मात्र दीदी मां कहलाऊं और समस्‍त विश्‍व समुदाय मेरा परिवार बने। मैं अपने सन्यास दीक्षा के 30वें वर्ष के दिन ऐसा करने लग जाऊंगी। उमा ने 17-नवंबर 1992 में ली थी संन्‍यास-दीक्षा।मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती आजकल अपनी जुबान से कम और इंटरनेट मीडिया के जरिए ज्‍यादा मुखर हैं। वह अक्‍सर ट्वीट कर अपने आगामी कार्यक्रमों और योजनाओं के बारे में जानकारी देती रहती हैं। अब उन्‍होंने अपने आध्‍यात्मिक जीवन को लेकर अहम बात कही है। उन्‍होंने एक के बाद एक 17 ट्वीट करते हुए कहा कि वह परिवारजनों को सभी बंधनों से मुक्‍त करती हैं और खुद भी पारिवारिक बंधनों से मुक्‍त हो रही हैं। इसके साथ ही उन्‍होंने घोषणा की कि अब वह ‘दीदी मां’ कहलाएंगी। मेरे गुरु ने आदेश दिया था कि मैं समस्त निजी संबंधों एवं संबोधनों का परित्याग करके मैं मात्र दीदी मां कहलाऊं और समस्‍त विश्‍व समुदाय मेरा परिवार बने। मैंने भी निश्चय किया था कि अपने सन्यास दीक्षा के 30वें वर्ष के दिन मैं उनकी आज्ञा का पालन करने लग जाऊंगी। उमा भारती ने 17 नवम्बर 1992 को उडुपी, कर्नाटक के कृष्ण भक्ति संप्रदाय के महान संत- श्री विश्वेश तीर्थ महाराज (पेजावर स्वामी) से अमरकंटक में नर्मदा के तट पर संन्यास की दीक्षा ली थी। उमा ने कहा, जैन मुनि आचार्य विद्यासागर जी महाराज ही अब वही मेरे लिए गुरुवर हैं।

उमा भारती ने अपने ट्वीट्स में यह कहा.

मेरी संन्यास दीक्षा के समय पर मेरे गुरु ने मुझसे एवं मैंने अपने गुरु से 3 प्रश्न किए, उसके बाद ही संन्यास की दीक्षा हुई। मेरे गुरु के 3 प्रश्न थे- (1) 1977 में आनंदमयी मां के द्वारा प्रयाग के कुंभ में ली गई ब्रह्मचर्य दीक्षा का क्या मैंने अनुशरण किया है? (2) क्या प्रत्येक गुरु पूर्णिमा को मैं उनके पास पहुंच सकूंगी? (3) मठ की परंपराओं का आगे अनुशरण कर सकूंगी? तीनों प्रश्न के उत्तर में मेरी स्वीकारोक्ति के बाद मैंने उनसे जो तीन प्रश्न किए- (1) क्या उन्होंने ईश्वर को देखा है? (2) मठ की परंपराओं के अनुशरण में मुझसे भूल हो गई, तो क्या मुझे उनका क्षमादान मिलेगा? (3) क्या मुझे आज से राजनीति त्याग देना चाहिए?

उमा ने आगे कहा कि पहले दो प्रश्नों के अनुकूल उत्तर गुरुजी द्वारा मिलने के बाद तीसरे प्रश्न का उनका उत्तर जटिल था। मेरे परिवार से संबंध रह सकते हैं, किंतु करुणा एवं दया। मोह या आसक्ति नहीं। साथ ही, देश के लिए राजनीति करनी पड़ेगी। राजनीति में मैं जिस भी पद पर रहूं, मुझे एवं मेरी जानकारी में सहयोगियों को रिश्वतखोरी व भ्रष्टाचार से दूर रहना होगा। इसके बाद मेरी संन्यास दीक्षा हुई। मेरा मुंडन हुआ, मैंने स्वयं का पिंडदान किया। मेरा नया नामकरण संस्कार हुआ, मैं उमा भारती की जगह उमाश्री भारती हो गई।

पारिवारिक पृष्‍ठभूमि का जिक्र

उमा ने ट्वीट्स के जरिए अपनी जाति और पारिवारिक पृष्‍ठभूमि के बारे में भी खुलकर बात की। उन्‍होंने लिखा- मैं जिस जाति, कुल व परिवार में पैदा हुई, उस पर मुझे गर्व है। मेरे निजी जीवन व राजनीति में वह मेरा आधार व सहयोगी बने रहे। हम चार भाई दो बहन थे, जिसमें से 3 का स्वर्गारोहण हुआ है। पिता गुलाब सिंह लोधी खुशहाल किसान थे। मां बेटी बाई कृष्ण भक्त सात्विक जीवन जीने वाली थीं। मैं घर में सबसे छोटी हूं। यद्यपि पिता के अधिकतर मित्र कम्युनिस्ट थे, किंतु मुझसे ठीक बड़े भाई अमृत सिंह लोधी, हर्बल सिंह जी लोधी, स्वामी प्रसाद जी लोधी और कन्हैयालाल जी लोधी सभी जनसंघ व भाजपा से मेरे राजनीति में आने से पहले ही जुड़ गए थे।

राजनीति के कारण परिजनों ने भी उठाए कष्‍ट, झूठे केस बने

उमा भारती ने लिखा- मेरे अधिकतर भतीजे बाल स्वयं सेवक हैं। मुझे गर्व है कि मेरे परिवार ने ऐसा काम नहीं किया, जिससे मेरा लज्जा से सिर झुके। इसके उल्टे उन्होंने मेरी राजनीति के कारण कष्ट उठाए। उन लोगों पर झूठे केस बने, उन्हें जेल भेजा गया। भतीजे हमेशा सहमे से व चिंतित रहे कि उनके किसी कृत्य से मेरी राजनीति ना प्रभावित हो जाए। वह मेरे लिए सहारा बने रहे। मैं उन पर बोझ बनी रही।

राज्यपाल मंगुभाई पटेल में पुंजापुरा पहुंचे, हितग्राही के घर किया भोजन, बालिकाओं से किया संवादमध्य प्रदेश के राज्यपाल मंग...
05/11/2022

राज्यपाल मंगुभाई पटेल में पुंजापुरा पहुंचे, हितग्राही के घर किया भोजन, बालिकाओं से किया संवाद

मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल शनिवार को देवास जिले के दो गांव बरझाई व पुंजापुरा पहुंचे। राज्यपाल मंगुभाई पटेल सुबह 10 बजे बागली के गांव बरझाई पहुंचे। जहां आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने स्व सहायता समूह की महिलाओं और आम लोगों से चर्चा की।मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल शनिवार को देवास जिले के दो गांव बरझाई व पुंजापुरा पहुंचे। राज्यपाल मंगुभाई पटेल सुबह 10 बजे बागली के गांव बरझाई पहुंचे। जहां आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने स्व सहायता समूह की महिलाओं और आम लोगों से चर्चा की। इस दौरान राज्यपाल ने महिलाओं से चर्चा उनके बच्चों की शिक्षा को लेकर जानकारी ली। पूछा कि बताइए कौन-कौन ऐसी महिलाएं हैं, जिनके बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं।

समूह की सदस्य ममता मेढ़ा से भी संवाद कर पूछा कि समूह से जुड़ने के बाद वो कैसे आत्मनिर्भर बनी। राज्यपाल पटेल ने सिकल सेल एनीमिया को लेकर स्वास्थ्य शिविर का अवलोकन भी किया। इस दौरान राज्यपाल ने एक बालिका से संवाद कर उसका नाम पूछा। उसका हाथ देखा और सीएमएचओ से कहा कि बालिका को एनीमिया की वजह से कमजोरी लग रही है, सिकल सेल एनीमिया को लेकर बालिका का क्या-क्या दवाइयां चल रही है। इसके बाद राज्यपाल पुंजापुरा पहुंचे।

जहां उन्होंने बालिका छात्रावास का अवलोकन कर छात्राओं से चर्चा की। कुछ सवाल पूछे। पुंजापुरा के बयड़ीपुरा में राज्यपाल प्रधानमंत्री आवास योजना कार्यक्रम में शामिल हुए। जहां उन्होंने हितग्राही को गृह प्रवेश करवाया। इसके साथ हितग्राही के घर भोजन किया। अपने दौरे के दौरान राज्यपाल पेटल पलासी में पुष्कर तालाब का निरीक्षण करने गए, जहां मछली पालन को लेकर जानकारी ली। इस दौरान कलेक्टर चंद्रमौली शुक्ला सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

Shajapur Road Accident: शाजापुर जिले में ट्रैक्टर और कार की टक्कर में तीन लोगों की मौतShajapur Road Accident: शाजापुर जि...
05/11/2022

Shajapur Road Accident: शाजापुर जिले में ट्रैक्टर और कार की टक्कर में तीन लोगों की मौत

Shajapur Road Accident: शाजापुर जिले के शुजालपुर आष्टा रोड पर बीती देर रात तेज रफ्तार ट्रैक्टर और कार की आमने-सामने जोरदार भिड़ंत हो गई। इस भीषण सड़क हादसे में 3 लोगों की मौत हो गई 2 लोग घायल हो गए।शाजापुर जिले के शुजालपुर आष्टा रोड पर बीती देर रात तेज रफ्तार ट्रैक्टर और कार की आमने-सामने जोरदार भिड़ंत हो गई। इस भीषण सड़क हादसे में 3 लोगों की मौत हो गई 2 लोग घायल हो गए। हादसा इतना जबरदस्त था कि ट्रैक्टर और कार दोनों के परखच्चे उड़ गए। मौके पर पहुंची पुलिस ने तुरंत लोगों को गाड़ी से निकालकर अस्पताल पहुंचाया। जानकारी के अनुसार ये इंदौर में एक विवाह समारोह में शामिल होकर वापस कार से घर लौट रहे थे, तभी पत्थर अमलाय के पास सामने से आ रहे ट्रैक्टर से जोरदार टक्कर हो गई। मृतको में एक व्यक्ति रायपुर गांव का था जबकि दो लोग शुजालपुर के रहने वाले हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है, मृतकों के शव को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया है।हादसे में माधो सिंह पिता मोहनलाल चौहान उम्र 65 वर्ष निवासी, नरेंद्र पिता पन्नालाल माहेश्वरी उम्र 50 वर्ष निवासी डाबरीपूरा शुजालपुर सिटी वार्ड क्रमांक-सात, हरि सिंह पिता भवरलाल पुष्पद उम्र 62 वर्ष निवासी रायकनपुरा शुजालपुर सिटी की मौत हो गई। जबकि राजू पिता हरि सिंह पुष्पक उम्र 32 वर्ष निवासी रायकनपुरा शुजालपुर सिटी, लखन नानूराम चौहान उम्र 52 वर्ष निवासी रायपुर एवं ट्रैक्टर पर सवार धीरज पिता बागमल जैन निवासी चाकरोद गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घायलों को उपचार के लिए शुजालपुर अस्पताल में भर्ती कराया गया।

Indore Weather Update: इंदौर में पश्चिमी विक्षोभ के असर से दिन व रात के तापमान में हुआ इजाफाIndore Weather Update: शनिवा...
05/11/2022

Indore Weather Update: इंदौर में पश्चिमी विक्षोभ के असर से दिन व रात के तापमान में हुआ इजाफा

Indore Weather Update: शनिवार को भी शहर में तापमान में इजाफा देखने को मिलेगा। अगले दो से तीन दिन तापमान में इसी तरह की बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। पश्चिमी विक्षोभ के गुजरने के बाद ठंड का असर बढ़ेगा।

हिमालय व पंजाब क्षेत्र में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का मध्य प्रदेश में आंशिक असर दिख रहा है। इसके कारण इंदौर में दिन व रात के तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। शनिवार सुबह हल्की ठंडक का अहसास हुआ और धूप भी खिली। आज दिन और रात के तापमान में इजाफा हुआ। शुक्रवार को मौसम शुष्क रहा और अधिकतम तापमान सामान्य से दो डिग्री अधिक 33 डिग्री दर्ज किया। वहीं न्यूनतम तापमान सामान्य से तीन डिग्री अधिक 17.9 डिग्री दर्ज किया गया।

मौसम विज्ञानियों के मुताबिक इंदौर में अगले दो से तीन दिन तापमान में इसी तरह की बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। पश्चिमी विक्षोभ के गुजरने के बाद ठंड का असर बढ़ेगा। अभी अल सुबह व रात के समय ही गुलाबी ठंड का अहसास हो रहा है। प्रदेश में शुक्रवार को न्यूनतम तापमान मंडला में 11.6 डिग्री दर्ज किया गया। प्रदेश में भोपाल में अधिकतम तापमान सामान्य से 3.4 डिग्री अधिक 34 डिग्री दर्ज किया गया।

शुक्रवार को दिन में धूप व गर्मी के कारण तापमान में इजाफा देखने को मिला। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक शनिवार को भी शहर में तापमान में इजाफा देखने को मिलेगा। शुक्रवार को अधिकांश समय हवाएं शांत रही और मौसम शुष्क रहा। दोपहर 12.30 बजे कुछ समय के लिए उत्तर पूर्वी हवाएं 8 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से चली।

शुक्रवार को सुबह शहर में हल्की ठंडक का अहसास रहा। वहीं दिन में धूप व गर्मी के कारण तापमान में इजाफा देखने को मिला। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक शनिवार को भी शहर में तापमान में इजाफा देखने को मिलेगा। शुक्रवार को अधिकांश समय हवा शांत रही और मौसम शुष्क रहा। दोपहर 12.30 बजे कुछ समय के लिए उत्तर पूर्वी हवाएं आठ किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से चली।

Trolla fell from the bridge in Bhind: भिंड में फूप के पास क्वारी नदी के पुल से गिरा ट्राॅला, 2 के दबने की आशंकाभिंड में ...
04/11/2022

Trolla fell from the bridge in Bhind: भिंड में फूप के पास क्वारी नदी के पुल से गिरा ट्राॅला, 2 के दबने की आशंका

भिंड में फूप के पास क्वारी नदी के पुल से 22 चक्का ट्राेला नीचे गिर गया। ट्रोला में गिट्टी भरी हुई थी। ट्रोला गिरने से उसके नीचे दो लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है।भिंड में फूप के पास क्वारी नदी के पुल से 22 चक्का ट्राेला नीचे गिर गया। ट्रोला में गिट्टी भरी हुई थी। ट्रोला गिरने से उसके नीचे दो लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही अटेर एसडीओपी सहित पुलिस बल व रेस्क्यू टीम भी मौके पर पहुंच गई है। ट्रोला के नीचे दबे हुए लोगों को बचाने का प्रयास कर रही है। हालांकि खबर लिखने तक रेस्क्यू टीम को सफलता नहीं मिली थी।घटनाक्रम के मुताबिक ट्रोला क्रमांक यपी 78 एटी 5576 सुबह करीब साढ़े सात बजे गिट्टी लेकर ग्वालियर की तरफ से इटावा जा रहा था। फूप के पास क्वारी नदी के पुल पर बस को बचाने के चक्कर में ट्रोला के ड्रायवर ने नियंत्रण खो दिया। जिससे ट्रोला पुल की रैलिंग को तोड़ते हुए नीचे नदी में जा गिरा। बताया जाता है कि ट्रोला के नीचे ड्रायवर व क्लीनर दबे हुए हैं। ट्रोला के नदी के नीचे जाने की सूचना लोगों ने पुलिस को दी। सूचना मिलने पर एसडीओपी अटेर पुलिस बल व रेस्क्यू टीम के साथ मौके पर पहुंच गए और राहत कार्य शुरू कर दिए। खबर लिखे जाने तक नदी में रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा था।

Shajapur News : रात 12 बजे श्रीकृष्ण के प्रहार से धराशायी हुआ कंस, शाजापुर में 269 वर्ष पुरानी परंपरा निभाई गईशाजापुर मे...
04/11/2022

Shajapur News : रात 12 बजे श्रीकृष्ण के प्रहार से धराशायी हुआ कंस, शाजापुर में 269 वर्ष पुरानी परंपरा निभाई गई

शाजापुर में इस परंपरा का सैकड़ों सालों से इस परपंरा का निर्वहन किया जा रहा है। मथुरा के बाद शाजापुर में करीब 269 वर्षों से यह आयोजन लगातार हो रहा है। आयोजन समिति के संयोजक तुलसीराम भावसार, पदाधिकारी अजय उदासी बताते हैं कि आयोजन का यह 270 वां वर्ष है।मथुरा के बाद शाजापुर में निभाई जाने वाली प्राचीन कंस वध्ाोत्सव की परंपरा का निर्वहन उत्साह से किया गया। देव व दानव बने कलाकारों में हुए वाक् युद्ध को सुनने हजारों लोग उपस्थित थे। पारंपरिक वेषभूषा में आए कलाकारों ने चुटीले संवादों से लोगों को मंत्रमुग्ध्ा कर दिया। रात 12 बजे कंस के पुतले का भगवान श्रीकृष्ण बने कलाकार ने किया। इसके बाद पुतले को सिंहासन से नीचे गिराया गया। यहां पहले से तैयार खड़े गवली समाजजन पुतले को लाठी और डंडे से पीटते हुए घसीटकर ले गए व नई सड़क पर एक भवन की छत पर पुतले के अवशेष बुराई के अंत के संदेश के रूप टांग दिए। इसके पूर्व देव व दानवों का जुलूस भी निकाला गया।

आयोजन का 270वां वर्ष रहा : करीब एक किलोमीटर क्षेत्र में हुए इस लोक नाटय रंग मंच के कार्यक्रम के दौरान लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा था। आजाद चौक व कंस चौराहा के अलावा इस बार गवली मोहल्ला में भी वाक्युद्ध का आयोजन दिलचस्प रहा। परंपरा का यह 270 वां वर्ष रहा।

इस आयोजन को देखने के लिए बड़ी संख्या में जिले सहित आसपास के क्षेत्र के लोग भी पहुंचे। घमंड व अत्याचार के प्रतीक कंस के पुतले को एक सप्‍ताह पहले से ही कंस चौराहे पर बैठा दिया गया था। कंस के इस दरबार का विनाश आज दशमी के दिन किया गया।

उल्‍लेखनीय है कि शाजापुर शहर के सोमवारिया में कंस के पुतले को बैठा दिया जाता है। देश के मथुरा के बाद शाजापुर में इस परंपरा का सैकड़ों सालों से इस परपंरा का निर्वहन किया जा रहा है। मथुरा के बाद शाजापुर में करीब 269 वर्षों से यह आयोजन लगातार हो रहा है। आयोजन समिति के संयोजक तुलसीराम भावसार, पदाधिकारी अजय उदासी बताते हैं कि आयोजन का यह 270 वां वर्ष है।

दशमी की शाम को देव व दानव की वेशभूषा में कलाकार तैयार हुए। इसके पश्चात देव व दानवों का जुलूस निकाला गया। यह जुलूस बालवीर हनुमान मंदिर से, धानमंड़ी चौराहा, किलारोड, छोटा चौक होते हुए आजाद चौक में पहुंचा। यहां पर रात में देव व दानवों में चुटीले संवादों का वाक युद्ध हुआ। पारंपरिक वेशभूषा में सजे धजे कलाकार देर तक वाक युद्ध करते रहे।

चुटीले संवादों का लोगों ने लुत्फ लिया। रात को कलाकार आजाद चौक से सोमवारिया बाजार में कंस चौराहा पर पहुंचे। कंस चौराहा पर भी वाक युद्ध हुआ। गवली समाजजनों के पहुंचने पर वरिष्ठों का सम्मान किया गया। इसके पश्चात रात 12 बजते ही कंस वध किया गया। पांरपरिक वेषभूषा में श्रीकृष्ण बने कलाकार द्वारा कंस के पुतले का वध किया गया। सिंहासन से नीचे गिरते हुए पुतले को गवली समाजजन लाठियां भांजते हुए पीटते हुए घसीटते हुए ले गए।

ढाल व तलवार लिए कंस का पुतला

आयोजन समिति द्वारा चौराहे पर जो कंस का पुतला तैयार किया गया था उसके एक हाथ में तलवार तो दूसरे हाथ में ढाल थी।

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