11/04/2026
प्रगतिशील किसान मोहन मिश्र ने 150 बीघा में गेहूं की बंपर पैदावार कर रचा इतिहास
खेती को आधुनिक बनाकर किसानों की आय बढ़ाना ही मेरा लक्ष्य: मोहन मिश्र
हरदोई के सुरसा
क्षेत्र के प्रतिष्ठित परिवार और आधुनिक खेती के पर्याय माने जाने वाले स्वर्गीय श्याम जी मिश्र की विरासत को उनके पुत्र मोहन मिश्र नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं। मोहन मिश्र ने इस वर्ष श्री राम सुपर 303 गेहूं की किस्म को 150 बीघा खेत में बोकर प्रति बीघा 5.5 क्विंटल की रिकॉर्ड पैदावार हासिल की है। यह सफलता क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनी हुई है।
पिता की विरासत और आधुनिक सोच
मोहन मिश्र, पूर्व ब्लॉक प्रमुख स्वर्गीय संजय कुमार मिश्र और धनंजय मिश्र के छोटे भाई स्वर्गीय श्याम जी मिश्र के पुत्र हैं। उनके पिता स्वर्गीय श्याम जी मिश्र वर्षों से अपने क्षेत्र में खेती के नए प्रयोगों के लिए विख्यात रहे थे। उन्होंने न केवल पारंपरिक खेती की, बल्कि पतंजलि के साथ अनुबंध (Contract) पर मूली की खेती, बड़े स्तर पर केले की खेती और गेहूं की विभिन्न उन्नत किस्मों पर काम किया था। पिछले वर्ष ही उन्होंने 2000 वर्ष प्राचीन एवं विलुप्त हो रही गेहूं की एक उन्नति किस्म को जीवंत करने की एक साकार कोशिश कर "सोना मोती" कर उनकी रिकॉर्ड पैदावार की थी।
पिता के पदचिह्नों पर बढ़ते कदम
अपने पिता की कृषि पद्धति और आधुनिक सोच को आगे बढ़ाते हुए मोहन मिश्र ने खेती को घाटे का सौदा मानने वाली धारणा को बदला है। उनका मानना है कि यदि तकनीक और सही बीज का चुनाव किया जाए, तो किसान कम भूमि में भी अधिक लाभ कमा सकते हैं।
मोहन मिश्र ने कहा:
"मेरा उद्देश्य केवल पैदावार बढ़ाना नहीं, बल्कि खेती को इतना आधुनिक बनाना है कि हमारे क्षेत्र का हर किसान जागरूक और समृद्ध हो सके। पिता जी हमेशा नए प्रयोगों पर जोर देते थे, मैं बस उन्हीं के सपनों को हकीकत में बदलने का प्रयास कर रहा हूँ।"
किसानों के लिए नई राह
150 बीघा जैसे विशाल क्षेत्रफल पर प्रति बीघा 5.5 क्विंटल की औसत पैदावार गेहूं के उत्पादन में एक बड़ा कीर्तिमान है। मोहन मिश्र की इस उपलब्धि पर स्थानीय किसानों और कृषि विशेषज्ञों ने उन्हें बधाई दी है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि जिस तरह मोहन मिश्र आधुनिक तरीकों को अपना रहे हैं, उससे निश्चित रूप से अन्य किसानों को भी कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमाने की प्रेरणा मिलेगी।