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20/10/2026

कुंजापुरी मेले में गायक दलेर मेहंदी का शो रुकवाने वाले मंत्री सुबोध उनियाल अब सवालों के घेरे में हैं। सोशल मीडिया पर दलेर मेहंदी के नशे में होने की चर्चाओं के बीच गायक मीका सिंह सामने आए हैं। मीका ने दावा किया कि दलेर मेहंदी ने अपने 30 साल के करियर में कभी शराब को हाथ नहीं लगाया। उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर कोई इसे गलत साबित कर दे, तो वह गायकी छोड़ देंगे।

दरअसल, टिहरी के नरेंद्रनगर में दलेर मेहंदी की प्रस्तुति के दौरान मंत्री सुबोध उनियाल मंच पर पहुंचे और कड़े लहजे में कहा— “आपसे बोला तो जा नहीं रहा, गाना क्या गाएंगे?” इसके बाद कार्यक्रम रोकने को कहा गया। वीडियो वायरल हुआ, तो सोशल मीडिया पर सिंगर की हालत को लेकर तरह-तरह के दावे होने लगे। हालांकि, नशे में होने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

अब सवाल मंत्री सुबोध उनियाल के रवैये पर भी उठ रहे हैं। अगर प्रस्तुति में कोई समस्या थी, तो क्या उसे सम्मानजनक तरीके से नहीं सुलझाया जा सकता था? क्या सार्वजनिक मंच पर किसी कलाकार को इस तरह फटकारना उचित है? और बिना पुष्टि के किसी कलाकार के बारे में नशे की बातें फैलाना कितना सही है?

पद की गरिमा सिर्फ आदेश देने में नहीं, बल्कि अपने व्यवहार में भी दिखनी चाहिए। आखिर कलाकार का सम्मान और सार्वजनिक मर्यादा भी किसी मेले की प्रतिष्ठा का हिस्सा हैं। अब देखना होगा कि इस विवाद पर मंत्री सुबोध उनियाल और दलेर मेहंदी की ओर से आगे क्या प्रतिक्रिया आती है।

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20/10/2026

उत्तर प्रदेश के कासगंज से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां महज 45 दिन के मासूम की कथित खरीद-फरोख्त का पुलिस ने खुलासा किया है। आरोप है कि बच्चे की मां ने डॉक्टर दंपती की मदद से अपने बेटे को दूसरे दंपती को बेच दिया और फिर उसके गायब होने की कहानी गढ़ दी।

मामला सोरों कोतवाली क्षेत्र का है। जानकारी के मुताबिक, बच्चे के पिता अरविंद फरीदाबाद में काम करते हैं। 16 अक्टूबर को उनकी पत्नी क्रांति बच्चे को दवा दिलाने के लिए कासगंज आई थी। आरोप है कि बस स्टैंड पर बच्चे को गायब बताकर उसने परिवार को गुमराह किया। शक होने पर पिता ने 17 अक्टूबर को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस ने मामले की जांच शुरू की, तो बच्चे की कथित खरीद-फरोख्त का मामला सामने आया। पुलिस के मुताबिक, सोरों क्षेत्र में क्लीनिक चलाने वाले अरुण कुमार और उनकी पत्नी ने कथित तौर पर बिचौलिए की भूमिका निभाई। बच्चे को हाथरस के सिकंदराराऊ क्षेत्र के रहने वाले एक दंपती को सौंपे जाने की बात सामने आई।

जांच में सामने आया कि कथित सौदे में कुल दो लाख रुपये दिए गए थे। इसमें से बच्चे की मां को एक लाख 30 हजार रुपये मिले, जबकि बाकी 70 हजार रुपये डॉक्टर दंपती ने अपने पास रखे। मां के खाते में जमा एक लाख 20 हजार रुपये की रकम पर पुलिस ने रोक लगाई है। आरोपियों के पास से भी 80 हजार रुपये बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है।

पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए बच्चे की मां, डॉक्टर दंपती और बच्चे को खरीदने के आरोपी दंपती समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने मासूम को भी बरामद कर लिया। हालांकि, कुछ मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, बच्चे की तबीयत खराब होने के कारण उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। सवाल यह है कि आखिर एक मासूम की कथित खरीद-फरोख्त की साजिश कैसे रची गई और इसमें शामिल लोगों की भूमिका क्या रही? जांच के बाद ही मामले से जुड़े सभी तथ्यों की पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।

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20/10/2026

आज की बड़ी खबर मुंबई के जुहू इलाके से, जहां बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग की घटना के बाद अब एक कथित वायरल ऑडियो ने मामले को और चर्चा में ला दिया है। इस ऑडियो में अनिल पंडित नाम का व्यक्ति फायरिंग की जिम्मेदारी लेने का दावा करता बताया जा रहा है। हालांकि, ऑडियो की प्रामाणिकता और घटना से इसके सीधे संबंध की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार देर रात टाइगर श्रॉफ की BMW कार को निशाना बनाकर गोलीबारी की गई। शुरुआती रिपोर्टों में पांच राउंड फायरिंग की बात कही गई है। घटना के दौरान अभिनेता के सुरक्षित रहने, जबकि उनके साथ मौजूद दो लोगों के घायल होने की खबरें सामने आई हैं। पुलिस इस मामले में हमलावरों की पहचान और वारदात के पीछे की वजह का पता लगाने में जुटी है।

लेकिन इस मामले में नया मोड़ वायरल ऑडियो से आया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ऑडियो में अभिनेता सलमान खान को संबोधित करते हुए चेतावनी दी गई है। संदेश में लॉरेंस बिश्नोई और बिश्नोई समाज से माफी मांगने की बात भी कही गई है। सलमान खान और उनके परिवार से जुड़े लोगों को लेकर धमकी भरे शब्द इस्तेमाल किए जाने का दावा है।

हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे किसी ऑडियो में किया गया दावा अपने आप में उसकी सत्यता का प्रमाण नहीं है। यह भी अभी स्पष्ट नहीं है कि ऑडियो भेजने वाले व्यक्ति का जुहू फायरिंग की घटना से कोई सीधा संबंध है या नहीं।

उधर, महाराष्ट्र सरकार ने फायरिंग की घटना को गंभीरता से लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने टाइगर श्रॉफ से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना और सुरक्षा को लेकर भरोसा दिया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी मामले में पुलिस अधिकारियों से बातचीत कर कार्रवाई के निर्देश दिए।

अब पुलिस के सामने दो अहम सवाल हैं—पहला, फायरिंग करने वाले आरोपी कौन हैं और दूसरा, वायरल ऑडियो में किए गए दावों की सच्चाई क्या है? जांच एजेंसियां घटना से जुड़े सबूतों और ऑडियो की प्रामाणिकता की पड़ताल कर रही हैं।

फिलहाल, किसी गिरोह की संलिप्तता या वायरल ऑडियो में किए गए दावों को आधिकारिक पुष्टि से पहले अंतिम सच नहीं माना जा सकता। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी।

मुंबई से जुड़ी इस बड़ी खबर पर हमारी नजर बनी हुई है।

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20/10/2026

जंतर-मंतर हिंसा से जुड़ी जांच को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित हाई पावर इन्क्वायरी कमेटी ने शिकायतों और गवाहों के बयान दर्ज कराने के लिए एक विशेष वेब पोर्टल लॉन्च किया है। इस पोर्टल के जरिए हिंसा से प्रभावित आम नागरिकों के साथ-साथ पुलिसकर्मी भी अपना पक्ष सीधे जांच समिति के सामने रख सकेंगे।

जानकारी के मुताबिक, जुलाई 2026 में जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों की जांच के लिए यह कदम उठाया गया है। कमेटी ने प्रभावित लोगों और संबंधित पक्षों से अपील की है कि वे hpec.nic.in पर जाकर उपलब्ध फॉर्मेट के जरिए अपनी शिकायत, जानकारी या बयान दर्ज कराएं।

अब सवाल है कि जांच में किन मुद्दों पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जाएगा?

कमेटी के सामने पैलेट गन के इस्तेमाल से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देने का निर्देश है। इसके अलावा महिला प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित हिंसा और उत्पीड़न की भी गंभीरता से जांच की जाएगी। पुलिस और प्रदर्शनकारियों, दोनों पक्षों की ओर से अत्यधिक बल प्रयोग किए जाने और सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से जुड़े मामलों की भी पड़ताल की जाएगी।

इस पूरी प्रक्रिया में शिकायतकर्ताओं और गवाहों की सुरक्षा को अहम माना गया है। अक्सर संवेदनशील मामलों में लोग दबाव या संभावित खतरे के कारण सामने आने से हिचकते हैं। ऐसे में कमेटी ने आश्वासन दिया है कि खतरे का सामना कर रहे गवाहों की सुरक्षा पर ध्यान दिया जाएगा। पहचान गोपनीय रखने का अनुरोध करने वाले लोगों की जानकारी को भी गोपनीय रखने की व्यवस्था की गई है।

पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने के लिए तय फॉर्मेट उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि प्रभावित लोग अपनी बात सीधे कमेटी तक पहुंचा सकें। इसका उद्देश्य जांच प्रक्रिया को ज्यादा सुलभ बनाना और सभी संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर देना है।

फिलहाल, इस मामले में पोर्टल के जरिए मिलने वाली शिकायतों और जानकारियों के आधार पर जांच आगे बढ़ेगी। अब देखना होगा कि कमेटी की पड़ताल में क्या तथ्य सामने आते हैं और हिंसा से जुड़े मामलों में आगे क्या कार्रवाई होती है।

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20/10/2026

नोएडा के सेक्टर-18 से एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसे देखकर सड़क पर चलने वाले किसी भी इंसान की रूह कांप जाए! सड़क पर तेज रफ्तार से दौड़ती एक कार… और उसके बोनट पर लटके दो युवक! हैरानी की बात ये है कि कार रुकने के बजाय आगे बढ़ती रही। इस खतरनाक घटनाक्रम का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

आखिर बीच सड़क पर ऐसा क्या हुआ कि दो युवकों की जान जोखिम में पड़ गई?

मामला नोएडा के सेक्टर-18 इलाके का बताया जा रहा है, जो थाना सेक्टर-20 के अंतर्गत आता है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, कैब चालक और दो युवकों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और दोनों युवक कार के बोनट पर पहुंच गए।

इसके बाद जो हुआ, उसने सड़क पर मौजूद लोगों को हैरान कर दिया। वायरल वीडियो में कार आगे बढ़ती दिखाई देती है, जबकि दोनों युवक बोनट पर लटके नजर आते हैं। बताया जा रहा है कि चालक ने गाड़ी रोकने के बजाय उसे आगे बढ़ा दिया। इस दौरान किसी राहगीर ने पूरे घटनाक्रम को अपने मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया।

कुछ सेकंड की लापरवाही बन सकती थी बड़े हादसे की वजह!

जरा सोचिए, तेज रफ्तार में दौड़ती कार के बोनट पर लटके लोगों के लिए यह कितना खतरनाक हो सकता था। अचानक ब्रेक लगने, कार मुड़ने या किसी दूसरी गाड़ी से टक्कर होने पर गंभीर हादसा हो सकता था। इतना ही नहीं, सड़क पर चल रहे दूसरे वाहन चालकों और राहगीरों की जान भी खतरे में पड़ सकती थी।

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग इस घटना को लेकर चिंता जता रहे हैं और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। हालांकि, विवाद की शुरुआत कैसे हुई, युवक बोनट पर किन परिस्थितियों में पहुंचे और कार चालक ने गाड़ी क्यों नहीं रोकी—इन सवालों के जवाब अभी जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे।

अब पुलिस की कार्रवाई पर नजर!

नोएडा पुलिस के मुताबिक, थाना सेक्टर-20 पुलिस वायरल वीडियो की जांच कर रही है। पुलिस कार और उसके चालक की पहचान करने के साथ-साथ घटना के पीछे की वजह का पता लगाने में जुटी है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल, इस घटना ने एक बार फिर सड़क पर होने वाले विवादों और गुस्से में उठाए गए खतरनाक कदमों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामूली कहासुनी भी अगर इस तरह के जोखिम में बदल जाए, तो इसका अंजाम बेहद गंभीर हो सकता है।

अब देखना होगा कि पुलिस की जांच में क्या सामने आता है और इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

नोएडा के सेक्टर-18 से सामने आए इस वायरल वीडियो से जुड़ी हर अपडेट के लिए बने रहिए हमारे साथ।

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19/10/2026

हरिद्वार के सिडकुल में अगर किसी कंपनी को अपनी एक्सपायरी दवाइयों का निस्तारण करना है, तो उसके लिए नियम-कानून बने हुए हैं। लेकिन अगर यही दवाइयां नदी में फेंक दी जाएं, तो सवाल सिर्फ एक कंपनी पर नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर खड़े होते हैं।

जी हां, हरिद्वार में पेंटागन मॉल के पीछे सूखी रोह नदी में भारी मात्रा में एक्सपायरी दवाइयां फेंके जाने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि मौके पर एक ट्रक से भी ज्यादा दवाइयां मिलीं है जो इतनी बुरी हालत में थी कि वह दवाइयां धूप और पानी के संपर्क में आने से एक जैली के रूप में जमीन पर इधर-उधर बह रही थी जिसको आसपास चरने वाले मवेशी भी खा सकते थे।

आपको बता दे की जब बरसात का पानी इस सुखी रोह नदी में आता है तो यह पानी आगे जाकर सीधे गंगा जी में मिलता है यानी जो कूड़ा कचरा और एक्सपायरी दवाइयां यहां फेंकी जाती है वह सीधे आगे जाकर गंगा को प्रदूषित करती हैं।

मामले की सूचना ड्रग्स इंस्पेक्टर और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दी गई, लेकिन आरोप है कि करीब चार घंटे तक कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। इसके बाद एक स्थानीय पत्रकार के द्वारा जिलाधिकारी को सूचना दी गई और उन्होंने संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई, तब जाकर विभागीय अमला हरकत में आया।

संबंधित विभागों के अधिकारी मौके पर पहुंचे और बरामद दवाइयों की जांच-पड़ताल की गई।
ईस्ट्रन हेल्थकेयर कंपनी के अधिकारियो को मौके पर बुलाया गया और दवाइयों का नियमानुसार निस्तारण करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने कहा कि दवाइयों को यहां से सीधे लक्सर स्थित भारत पेट्रोलियम प्लांट ले जाकर निस्तारित किया जाएगा।

इसके साथ ही ईस्ट्रन हेल्थकेयर कंपनी से फॉर्म नंबर 10 भी मांगा गया है, ताकि यह जांच की जा सके कि कंपनी ने पहले अपनी एक्सपायरी दवाइयों का निस्तारण किस तरह और कितनी बार कराया है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक, अगर दस्तावेजों में खामियां मिलती हैं, तो ईस्ट्रन हेल्थकेयर कंपनी पर जुर्माना लगाने और लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की जायेगी ।

लेकिन यहां एक बड़ा सवाल खडा होता है कि आखिर शिकायत मिलने के बाद भी अधिकारी चार घंटे तक मौके पर क्यों नहीं पहुंचे?

जबकि अधिकारियों को फोन करने के बाद ईस्ट्रन हेल्थकेयर कंपनी के कर्मचारी अपनी फेंकी हुई दवाइयो को देखने पहुंच जाते हैं।

क्या नदी में एक्सपायरी दवाइयां फेंके जाने जैसे गंभीर मामले में कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी के हस्तक्षेप का इंतजार करना जरूरी है?

अगर एक स्थानीय पत्रकार को जिलाधिकारी तक बात पहुंचानी पड़े और उसके बाद ही विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंचें, तो फिर संबंधित विभागों की जवाबदेही कहां है?

वहीं, भीम आर्मी कांशीराम दल उत्तराखंड के विधानसभा प्रभारी मोनू ने चेतावनी दी है कि अगर भविष्य में भी इस तरह नदी में दवाइयां फेंकी गईं, तो संगठन इन दवाइयों को उठाकर संबंधित विभाग और जिला कार्यालय में डालकर धरना-प्रदर्शन करेगा।

संगठन का कहना है कि यह कोई पहला मामला नहीं है, जब खुले में दवाइयां फेंके जाने की बात सामने आई है।

अब सवाल यह है कि क्या इस मामले में सिर्फ दवाइयों को हटाकर जिम्मेदारी पूरी मान ली जाएगी, या फिर में एक्सपायरी दवाइयां को नदी में फेंकने वाली ईस्ट्रन हेल्थकेयर कंपनी पर जुर्माना और लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्यवाही की जाएगी

हरिद्वार एक धार्मिक और पर्यटन नगरी है। यहां पर्यावरण की सुरक्षा और प्रदूषण पर नियंत्रण बेहद जरूरी है। ऐसे में नदी में भारी मात्रा में एक्सपायरी दवाइयां फेंके जाने का मामला गंभीर है जिसकी जांच होनी जरुरी है। फिलहाल नजर इस बात पर रहेगी कि जांच में क्या सामने आता है और संबंधित कंपनी ईस्ट्रन हेल्थकेयर के खिलाफ कार्रवाई होती है या नहीं।

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18/10/2026

हरिद्वार में गंगा घाटों की सफाई और कुंभ-2027 की तैयारियों को गति देने के लिए नियमित गंगा बंदी की तारीखों का ऐलान हो गया है।

उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के मुताबिक, 20 अक्टूबर से 7 नवंबर तक अपर गंगा नहर में गंगा की धारा बंद रहेगी। इस दौरान घाटों की सफाई के साथ कुंभ के लिए निर्माणाधीन घाटों के कार्यों में भी तेजी लाई जाएगी।

दशहरे से दीपावली के बीच होने वाली गंगा बंदी के दौरान हरिद्वार के गंगा घाटों की साफ-सफाई और अन्य आवश्यक कार्य किए जाएंगे। इसके साथ ही कुंभ-2027 को लेकर निर्माणाधीन घाटों के काम को भी आगे बढ़ाया जाएगा।

गंगा बंदी की अवधि में सिंचाई विभाग और संबंधित एजेंसियां निर्धारित कार्यों को पूरा करने पर जोर देंगी। गंगा बंदी की जानकारी देते हुए उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के एसडीओ ने बताया कि गंगा बंदी के दौरान हर की पैड़ी पर श्रद्धालुओं की आस्था के लिए सीमित मात्रा में गंगा की धारा का प्रवाह जारी रहेगा।

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18/10/2026

नवरात्र के पावन दिनों में मां भगवती के दरबार पर आग का कहर! देखते ही देखते आग की लपटों ने लकड़ी से बने मंदिर को अपनी चपेट में ले लिया। आस्था के इस केंद्र में आग लगने की खबर से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। आखिर मंदिर में आग कैसे लगी? फिलहाल वजह साफ नहीं है।

उत्तराखंड के बागेश्वर जिले से बड़ी खबर सामने आई है। कपकोट तहसील के दूरस्थ बदियाकोट गांव में स्थित मां भगवती मंदिर में भीषण आग लगने से भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है। लकड़ी से बने मंदिर में आग तेजी से फैली और मंदिर के ढांचे को काफी क्षति पहुंचने की सूचना है।

जिस मंदिर से लोगों की आस्था जुड़ी थी, वहां आग ने सबको झकझोर दिया। बदियाकोट का मां भगवती मंदिर अपनी पारंपरिक बनावट और लकड़ी पर की गई खूबसूरत नक्काशी के लिए जाना जाता था। यह सिर्फ पूजा का स्थान नहीं, बल्कि इलाके की सांस्कृतिक विरासत का भी अहम हिस्सा था।

नवरात्र के दौरान यहां श्रद्धालु मां भगवती के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में पावन पर्व के बीच मंदिर में आग लगने की घटना ने लोगों को गहरे दुख में डाल दिया है।

स्थानीय निवासी आन सिंह के मुताबिक, मंदिर मुख्य रूप से लकड़ी से बना था। वहां बिजली की व्यवस्था भी थी और पूजा के दौरान दीपक जलाए जाते थे। ऐसे में शॉर्ट सर्किट या दीपक से आग लगने की आशंका जताई जा रही है। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि आग लगने की असली वजह अभी सामने नहीं आई है। इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

घटना के बाद मंदिर में आग लगने के कारणों की जांच कराने की मांग उठ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस घटना की गंभीरता से जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

बदियाकोट गांव कपकोट से करीब 50 किलोमीटर दूर दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है। ऐसे इलाकों में आग लगने की घटनाओं पर तुरंत काबू पाना बड़ी चुनौती बन सकता है। क्षेत्र में अग्निशमन सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

फिलहाल, मंदिर को हुए वास्तविक नुकसान का आकलन और आग लगने के कारणों की पुष्टि होना बाकी है। लेकिन नवरात्र के बीच मां भगवती के मंदिर में आग लगने की इस घटना ने श्रद्धालुओं को झकझोर दिया है। अब सभी की नजर जांच पर है, जिससे आग की असली वजह सामने आ सके।

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18/10/2026

उत्तराखंड की सियासत में ऐसा धमाका… जिसने सबको चौंका दिया!

एक तरफ मंत्री रेखा आर्य के गंभीर आरोप… तो दूसरी तरफ उनके पति का ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसमें 200 करोड़ के कथित घोटाले का जिक्र है!

आखिर इस वीडियो में ऐसा क्या कहा गया, और इन आरोपों के पीछे सच्चाई क्या है? देखिए पूरी खबर…

रेखा आर्य और पति गिरधारी लाल साहू के बीच विवाद: 200 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के आरोपों पर जांच की मांग

मंत्री ने पति पर आरोप लगाए थे अब गिरधारी लाल साहू ने वीडियो जारी कर सवाल उठाए दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी

उत्तराखंड की राजनीति में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य और उनके पति गिरधारी लाल साहू के बीच सार्वजनिक विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। उपलब्ध बयानों के अनुसार, रेखा आर्य की ओर से अपने पति पर आरोप लगाए गए हैं।

इसके जवाब में गिरधारी लाल साहू का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें उन्होंने पलटवार करते हुए करीब 200 करोड़ रुपये के कथित घोटाले से जुड़े आरोप लगाए हैं।

यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये आरोप संबंधित पक्षों के दावों पर आधारित हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी ठहराने से पहले सक्षम जांच एजेंसी या अदालत की पुष्टि आवश्यक होगी। संबंधित पक्षों का आधिकारिक जवाब और उपलब्ध दस्तावेज सामने आने पर ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

गिरधारी लाल साहू ने बच्चों के राशन और टेक होम राशन योजना से जुड़े मामलों पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने एक कथित ऑडियो को AI से तैयार किए जाने का दावा करते हुए इसकी जांच की मांग की है। हालांकि, ऑडियो की प्रामाणिकता, स्रोत और उसमें मौजूद आवाजों की पहचान की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। केवल ऑडियो या वीडियो के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

इस विवाद में प्रमुख सवाल यह है कि 200 करोड़ रुपये से जुड़े आरोपों के समर्थन में क्या दस्तावेज या अन्य प्रमाण मौजूद हैं, क्या सक्षम एजेंसी इन दावों की जांच करेगी, और कथित ऑडियो की तकनीकी जांच में क्या सामने आएगा।

इन सवालों के जवाब आधिकारिक जांच और संबंधित पक्षों के प्रमाणों के आधार पर ही मिल सकेंगे।
फिलहाल, दोनों पक्षों की ओर से गंभीर आरोप और दावे सामने आए हैं, लेकिन किसी भी आरोप को जांच या न्यायिक प्रक्रिया में साबित नहीं किया गया है।

यह रिपोर्ट किसी पक्ष को दोषी ठहराने का दावा नहीं करती। संबंधित पक्षों का पक्ष, जांच के निष्कर्ष और अदालत के निर्णय आने तक सभी आरोपों को कथित और अपुष्ट माना जाना चाहिए। अब नजर पुलिस की कार्रवाई, संभावित जांच और सरकार के अगले कदम पर है।

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