30/05/2026
लक्सर: हरिद्वार जनपद के लक्सर क्षेत्र में प्रस्तावित राष्ट्रीय राजमार्ग (ग्रीनफील्ड हाईवे) परियोजना को लेकर प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है. जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के आदेश पर तहसील लक्सर के 12 गांवों में भूमि की खरीद-फरोख्त, रजिस्ट्री-बैनामा और भूमि उपयोग परिवर्तन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है. वहीं पानीपत-गोरखपुर ग्रीनफील्ड हाईवे हरिद्वार के 12 गांवों से होकर गुजरेगा.
गौर हो कि इन 12 गांवों में जमीन की खरीद फरोख्त, रजिस्ट्री और लैंड यूज चेंज पर तत्काल प्रभाव से रोक का फैसला प्रस्तावित राष्ट्रीय राजमार्ग यानी ग्रीनफील्ड हाईवे परियोजना को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. जिला प्रशासन के अनुसार पानीपत से गोरखपुर तक बनने वाले ग्रीनफील्ड हाईवे के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जानी है, इसलिए प्रभावित क्षेत्र में अस्थायी प्रतिबंध लगाए गए हैं.
प्रशासन के अनुसार मदारपुर, मिर्जापुर उर्फ मोहनवाला, पौडोवाली, टांडा जलालपुर, प्रहलादपुर, रघुनाथपुर उर्फ बालावाली, बालचन्दवाला, अलामपुर, हस्तमौली, शाहपुर, गिद्धावाली और कलसिया गांव इस दायरे में शामिल किए गए हैं. इन क्षेत्रों में अब न तो जमीन की खरीद बिक्री हो सकेगी, न रजिस्ट्री या बैनामा कराया जा सकेगा और न ही कृषि भूमि को गैर कृषि भूमि में बदला जा सकेगा. इसके साथ ही किसी भी तरह के नए निर्माण कार्यों पर भी रोक रहेगी.
विशेष भूमि अध्यापन अधिकारी आकाश जोशी ने जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण रुड़की द्वारा पानीपत से गोरखपुर तक प्रस्तावित ग्रीनफील्ड हाईवे (शामली-पुवायां फेज-1) परियोजना के अंतर्गत किलोमीटर 20 से 32 तक भूमि अर्जन (Land Acquisition) की प्रक्रिया शुरू की जा रही है. इस संबंध में राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम 1956 की धारा-3ए के तहत कार्रवाई प्रस्तावित है.
इन क्षेत्रों में अब किसी भी प्रकार की जमीन की खरीद-बिक्री, रजिस्ट्री या कृषि भूमि को गैर-कृषि भूमि में परिवर्तित करने की अनुमति नहीं होगी. इसके अलावा प्रशासन ने संबंधित गांवों में किसी भी प्रकार के अनाधिकृत निर्माण कार्यों पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है. अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए ताकि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना का कार्य बिना किसी बाधा के आगे बढ़ सके. प्रशासन का कहना है कि यह प्रतिबंध राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम के तहत धारा-3ए की प्रक्रिया पूर्ण होने तक प्रभावी रहेगा.
अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम 1956 की धारा 3ए के तहत सरकार किसी प्रस्तावित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रारंभिक अधिसूचना जारी करती है. इस अधिसूचना के बाद संबंधित भूमि को चिन्हित किया जाता है और प्रशासन यह सुनिश्चित करता है कि जमीन की स्थिति में कोई बड़ा बदलाव न हो. इसका मकसद यह होता है कि परियोजना के लिए तय जमीन में बाद में विवाद न हो. क्योंकि भूमि अधिग्रहण से पहले अक्सर यह देखा जाता है कि कुछ लोग जानकारी मिलते ही बड़ी मात्रा में जमीन खरीद लेते हैं.
कई बार कृषि भूमि पर तेजी से निर्माण शुरू कर दिया जाता है या उसका भू उपयोग यानी लैंड यूज बदल दिया जाता है ताकि मुआवजा अधिक मिल सके. इससे सरकार को अधिक आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है और परियोजनाएं विवादों में फंस जाती हैं. यदि हाईवे का जल्द निर्माण हो जाता है तो स्थानीय किसानों को भी इसका फायदा मिलेगा. क्षेत्र का विकास भी होगा.