30/05/2026
परतंत्र भारत में उदंत मार्तंड ने हिंदी पत्रकारिता की नींव रखी - प्रो० गोविंद सिंह
आने वाले समय में दक्षिण भारत में भी उदयमान होगी हिंदी पत्रकारिता - कोशियारी
पत्रकारिता ही नहीं बल्कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आचार संहिता जरूरी - कैलाशानंद महाराज
हरिद्वार। 30 मई। ( सचिन पालीवाल ) आज ही के दिन 30 मई 1826 को परतंत्र भारत में पं० जुगल किशोर शुक्ल द्वारा आरम्भ किये गये हिंदी के प्रथम साप्ताहिक समाचार पत्र उदंत मार्तंड से शुरू हुआ हिंदी पत्रकारिता का सफ़र आज अपनी 200 वर्ष की गौरवपूर्ण यात्रा पूरी कर रहा है।
इसी उपलक्ष्य में हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर प्रेस क्लब सभागार में द्विशताब्दी समारोह का आयोजन किया गया। निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल पद्मभूषण से सम्मानित भगत सिंह कोश्यारी एवं मुख्य वक्ता मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर गोविंद सिंह, प्रेस क्लब अध्यक्ष धर्मेंद्र चौधरी एवं महामंत्री सूर्यकांत बेलवाल ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में विशेष कार्य करने वाले पत्रकारों को सम्मानित किया गया। वरिष्ठ पत्रकार गोपाल रावत को स्व.मधुकांत प्रेमी एवं राहुल वर्मा को स्व.पीएस चौहान स्मृति पुरस्कार प्रदान किया गया साथ ही पत्रकारिता की पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र - छात्राओं को गोल्ड मेडल के साथ सचिन कुमार को हरिश्चंद्र भाटी स्मृति सम्मान, आफरीन बानो को शोभानाथ स्मृति सम्मान एवं खुशी जायसवाल को बाबा राम स्वरूप फलिया स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर हिंदी पत्रकारिता के गौरवशाली 200 वर्ष एवं मीडिया कांउसिल की अपरिहार्यता पर आयोजित गोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर गोविंद सिंह ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने पर कार्यक्रमों की श्रंखला आयोजित करने पर प्रेस क्लब हरिद्वार बधाई का पात्र है। उन्होंने कहा कि हिंदी पत्रकारिता का इतिहास संघर्षपूर्ण रहा है। उस समय अंग्रेजी के अखबार चलते थे जिसमें सभी कर्मचारी और पाठक भी अंग्रेज ही होते थे। उसके बाद बांग्ला, फारसी और उर्दू के अखबार शुरू हुए। कोलकाता को अखबारों की जननी कहा जाता था, वहां से जुगल किशोर शुक्ल ने आज ही के दिन 30 मई 1826 को उदंत मार्तंड नाम से पहला हिंदी भाषी साप्ताहिक अखबार शुरू किया। डेढ़ साल चलने वाले इस अखबार ने अपने मापदंड और छाप छोड़ दी। उसके बाद 1857 की क्रांति में भी हिंदी पत्रकारिता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1935 के बाद अखबारों ने आजादी की लड़ाई में ऐतिहासिक कार्य किए थे। इसके बाद बड़ी संख्या में हिंदी के अखबार शुरू हुए क्योंकि लोगो को उम्मीद थी कि हिंदी भारत की राजभाषा बन जाएगी।
आजादी के बाद इमरजेंसी लगी और उसके बाद हिंदी पत्रकारिता का सुधार हुआ। नब्बे के दशक के बाद टीवी और डिजिटल मीडिया का युग आ गया। डिजिटल युग ने लोगों को लिखने की स्वतंत्रता प्रदान की। लेकिन इसमें कई खामियां भी हैं। लेकिन इस सब के बीच प्रिंट मीडिया ने आज भी अपनी विश्वनीयता कायम रखी है।
पूर्व राज्यपाल पद्मभूषित भगत सिंह कोश्यारी ने सभी आयोजकों को शुभकानाएं दी और प्रेस क्लब हरिद्वार को उत्तराखंड का आदर्श प्रेस क्लब बताया। उन्होंने कहा कि मां गंगा के पावन तट पर वर्नाकुलर और भाषायी प्रेस जैसे शब्द विलुप्त हो जाएंगे। अब समय आ गया है कि अपने अस्तित्व के लिए भारतीय भाषाओं को आगे बढ़ाएं और ऐसे शब्दों का प्रयोग करें ताकि नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक बन सकें। कहा कि उदंत मार्तंड पहला साप्ताहिक अखबार कोलकाता में आज से दो सौ साल पहले शुरू हुआ था, यह प्रकट करता है कि एक दिन ऐसा भी आएगा कि चेन्नई से भी हिंदी अखबारों का उदय होगा। देश के पहले प्रधानमंत्री अंग्रेजी माहौल में पढ़े थे। इसलिए जनता भी उसी माहौल का अनुसरण करने लगी थी। आज देश के प्रधानमंत्री ट्रंप जैसे वैश्विक नेताओं से हिंदी में बात करते हैं। इसलिए अब उन लोगों को भी हिंदी की आवश्यकता आन पड़ी है। आज देश के महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में बेहतर हिंदी बोली जा रही है। एआई के युग में भी हम प्रिंट मीडिया के बिना रह नहीं सकते हैं। भारत के अंदर आज भी आध्यात्मिक इंटेलिजेंस का कोई जवाब ही नहीं है और उसकी पहुंच बहुत आगे है। आज देश का मुखिया जिस दिशा में चल रहा है, जनता भी उसी दिशा में चल रही है। देश विकास और विरासत की दिशा में आगे बढ़ रहा है। वो मायानगरी मुंबई को छोड़कर मायापुरी हरिद्वार में आए हैं। वो दिन भी आएगा, जब भारत अखंड भारत बनेगा और उसमें मायापुरी का भी महत्वपूर्ण योगदान होगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज ने आशीर्वाद प्रदान करते हुए कहा कि पत्रकारिता समाज को आईना दिखाने का काम करती है। समाज में घट रही घटनाओं को विश्वसनीयता से रखना ही सच्ची पत्रकारिता कहलाती है। निर्भीक होकर अपने मिशन को पूरा करना चाहिए। सच्चाई समाज के आगे आएगी तो देश मजबूत होगा। प्रेस क्लब से जुड़े पत्रकार समाज के सजग प्रहरी के रूप में अपना योगदान दे रहे हैं। हिंदी पत्रकारिता के दो सौ वर्ष गौरव पूर्ण रहे हैं। अगली पीढ़ी का दायित्व है कि इस गौरव को और आगे ले जाए। प्रेस क्लब अध्यक्ष धर्मेद्र चौधरी, महामंत्री सूर्यकांत बेलवाल ने कहा कि श्रंखलाबद्ध कार्यक्रम हिंदी पत्रकारिता के गौरवपूर्ण कार्यक्रमों के आयोजन लगातार संचालित हैं। समाज को हिंदी के महत्व को समझने की आवश्यकता है। मीडिया जगत लगातार हिंदी भाषा को प्रसिद्धि दिलाने में निर्णायक भूमिका निभा रहा है। उन्होंने सभी अतिथियों को शॉल ओढ़ाकर व स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया और आभार जताया। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार दीपक नौटियाल ने वरिष्ठ पत्रकार द्वय सुनील दत्त पांडे एवं आदेश त्यागी के संयोजन में सफलता पूर्वक किया।
हिंदी पत्रकारिता के द्विशताब्दी गौरवशाली क्षण के इस अवसर पर समाज के अनेक पत्रकार, बुद्धिजीवी एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।