18/01/2026
समय का शाप: अदृश्य टिक-टिक
अर्जुन पुरानी और दुर्लभ वस्तुओं का संग्रह करने का शौकीन था। एक दिन उसे नगर के एक प्राचीन बाज़ार में एक विचित्र पॉकेट वॉच (जेब घड़ी) मिली। वह चांदी की बनी थी, किंतु उस पर रहस्यमयी आकृतियां और चिह्न अंकित थे। दुकानदार ने उसे बहुत कम मूल्य पर बेच दिया, परंतु जाते-जाते एक चेतावनी दी: "वत्स, समय को देखना तो उचित है, किंतु समय के भीतर झांकना अनर्थकारी हो सकता है।"
अर्जुन ने उसकी बात को अनसुना कर दिया।
प्रथम रात्रि: समय का ठहराव
घर आकर अर्जुन ने घड़ी को स्वच्छ किया और जैसे ही उसकी कुंजी (k**b) घुमाई, संपूर्ण कक्ष में एक भयावह सन्नाटा छा गया। उसने अनुभव किया कि:
दीवार पर टंगी घड़ी की सुइयां रुक गई थीं।
खिड़की के बाहर गिरती वर्षा की बूंदें वायु में ही स्थिर हो गई थीं।
सर्वाधिक डरावनी बात: जब उसने दर्पण में देखा, तो उसका अपना प्रतिबिंब जड़वत (स्थिर) था, जबकि अर्जुन स्वयं हिल-डुल रहा था।
भयभीत होकर अर्जुन ने घड़ी की कुंजी को विपरीत दिशा में घुमाया। क्षण भर में सब कुछ सामान्य हो गया। उसे लगा कि संभवतः यह उसकी थकान के कारण उपजा कोई भ्रम है।
द्वितीय रात्रि: एक अज्ञात यात्री
अगली रात्रि, अर्जुन की जिज्ञासा और बढ़ गई और उसने पुनः घड़ी को सक्रिय किया। इस बार समय नहीं रुका, अपितु कक्ष के कोने में एक धुंधली सी छाया प्रकट हुई। वह छाया धीरे-धीरे अर्जुन की ओर बढ़ रही थी।
अर्जुन ने देखा कि उस घड़ी के भीतर एक लघु दर्पण लगा था, जिसमें उसे अपना मुख नहीं, बल्कि सौ वर्ष पुराना वही कक्ष दिखाई दे रहा था। उसने देखा कि अतीत के उस कालखंड में एक व्यक्ति ठीक वैसी ही घड़ी थामे क्रंदन (रोना) कर रहा था और सहायता के लिए पुकार रहा था।
रहस्योद्घाटन: एक चक्र
अब अर्जुन को बोध हुआ कि यह घड़ी कोई बहुमूल्य उपहार नहीं, अपितु एक कारागार थी। जो भी इस घड़ी का स्वामी बनता, वह धीरे-धीरे वर्तमान से कटकर उस प्राचीन समय के जाल में खिंचने लगता।
अचानक, घड़ी की टिक-टिक अत्यंत तीव्र हो गई। अर्जुन का हाथ हिम के समान शीतल होने लगा। उसने अनुभव किया कि उसकी स्मृतियां धुंधली हो रही हैं और उसके वस्त्र स्वतः परिवर्तित होकर उन्नीसवीं सदी के परिधानों में बदल रहे हैं।
परिणाम
अर्जुन ने अपनी संपूर्ण शक्ति एकत्रित की और उस घड़ी को भूमि पर दे मारा। घड़ी तो नहीं टूटी, परंतु उसका ढक्कन तीव्र ध्वनि के साथ बंद हो गया। एक पल में सब कुछ शांत हो गया।
अर्जुन ने राहत की सांस ली और अपना पसीना पोंछा। परंतु जैसे ही उसकी दृष्टि दीवार पर टंगे कैलेंडर पर पड़ी, उसके पैरों तले भूमि खिसक गई। कैलेंडर पर अब 1826 की तिथि अंकित थी। वह उस अभिशप्त घड़ी से तो मुक्त हो गया था, किंतु अब वह सदैव के लिए अतीत के अंधकार में फंस चुका था।
सीख: "कुछ रहस्य दफन ही अच्छे होते हैं, क्योंकि उन्हें उद्घाटित करने का मूल्य प्रायः हमारा 'आज' होता है।"
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