Azahar Equbal Danish

Azahar Equbal Danish जिला प्रधान महासचिव पंचायती राज प्रकोष्ठ राजद मधुबनी MLC प्रतिनिधि

15/09/2026
मधुबनी जिला में नगर पंचायत प्रखंड बाइज
15/09/2026

मधुबनी जिला में नगर पंचायत प्रखंड बाइज

हरलाखी में ग्राम रक्षा दल के सदस्यों के बिच प्रशिक्षण प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम, युवाओं को मिला सम्मान...
14/09/2026

हरलाखी में ग्राम रक्षा दल के सदस्यों के बिच प्रशिक्षण प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम, युवाओं को मिला सम्मान...

संघर्ष मजबूत, इरादे बुलंद।संघर्ष जारी है, जीत तय है।संघर्ष से बदलाव, बदलाव से विकास।जनता के हक़ के लिए संघर्ष मजबूत।संघर...
13/09/2026

संघर्ष मजबूत, इरादे बुलंद।

संघर्ष जारी है, जीत तय है।

संघर्ष से बदलाव, बदलाव से विकास।

जनता के हक़ के लिए संघर्ष मजबूत।

संघर्ष मजबूत हो, आवाज़ बुलंद हो।

हर कदम संघर्ष का, हर लक्ष्य विकास का।

क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले । सावित्रीबाई फुले भारत की महान समाज सुधारक, शिक्षिका और महिला शिक्षा की अग्रदूत थीं।🌸 सा...
13/09/2026

क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले । सावित्रीबाई फुले भारत की महान समाज सुधारक, शिक्षिका और महिला शिक्षा की अग्रदूत थीं।

🌸 सावित्रीबाई फुले की जीवनी

पूरा नाम: सावित्रीबाई ज्योतिराव फुले
जन्म: 3 जनवरी 1831, नायगांव, सतारा, महाराष्ट्र
निधन: 10 मार्च 1897, पुणे, महाराष्ट्र
पति: ज्योतिराव गोविंदराव फुले

📚 शिक्षा के लिए संघर्ष

सावित्रीबाई का विवाह कम उम्र में ज्योतिराव फुले से हुआ। उस समय महिलाओं की शिक्षा को समाज में बहुत हतोत्साहित किया जाता था। ज्योतिराव फुले ने उन्हें पढ़ाया और आगे शिक्षक बनने के लिए प्रशिक्षण दिलाया।

1848 में सावित्रीबाई और ज्योतिराव फुले ने पुणे के भिडे वाड़ा में लड़कियों के लिए स्कूल शुरू किया। सावित्रीबाई ने लड़कियों को पढ़ाने का कार्य किया और महिला शिक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।

👩‍🏫 महिला शिक्षा की अग्रदूत

सावित्रीबाई ने बालिकाओं और वंचित वर्गों की शिक्षा के लिए लगातार काम किया। सामाजिक विरोध और अपमान के बावजूद उन्होंने अपना कार्य नहीं छोड़ा। उनका उद्देश्य था कि हर लड़की और हर वंचित व्यक्ति को शिक्षा का अधिकार मिले।

⚖️ सामाजिक सुधार

सावित्रीबाई और ज्योतिराव फुले ने बाल विवाह, जातिगत भेदभाव और महिलाओं के शोषण जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने विधवाओं और बेसहारा महिलाओं की सहायता के लिए भी काम किया।

🦠 प्लेग महामारी में सेवा

1897 में पुणे में प्लेग महामारी के दौरान सावित्रीबाई बीमार लोगों की सेवा करने के लिए स्वयं आगे आईं। इसी दौरान उन्हें संक्रमण हुआ और 10 मार्च 1897 को उनका निधन हो गया।

🌺 सावित्रीबाई की विरासत

सावित्रीबाई फुले ने ऐसे समय में महिलाओं की शिक्षा का दीप जलाया जब लड़कियों का स्कूल जाना भी सामाजिक विरोध का कारण बनता था। आज उन्हें भारत की महिला शिक्षा और सामाजिक समानता की महान अग्रदूतों में माना जाता है। भारत सरकार के आजादी का अमृत महोत्सव कार्यक्रम में भी उनकी जयंती पर कार्यक्रम दर्ज किए गए हैं।

उनका जीवन हमें संदेश देता है:

> “शिक्षा ही वह शक्ति है, जो इंसान को अन्याय और अज्ञानता से मुक्त करती है।”

अमर शहीद जुब्बा सहनी की जीवनीजुब्बा सहनी (1906–1944) बिहार के महान स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी थे। उनका जन्म 1906 म...
12/09/2026

अमर शहीद जुब्बा सहनी की जीवनी

जुब्बा सहनी (1906–1944) बिहार के महान स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी थे। उनका जन्म 1906 में मुजफ्फरपुर जिले के मीनापुर थाना क्षेत्र के चैनपुर बस्ती में एक अत्यंत गरीब मल्लाह परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम पाचू सहनी बताया जाता है। आर्थिक कठिनाइयों के कारण उनकी औपचारिक शिक्षा बहुत सीमित रही और उन्होंने कम उम्र में ही मजदूरी तथा अन्य काम करना शुरू कर दिया।

स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान

महात्मा गांधी के आह्वान से प्रभावित होकर जुब्बा सहनी 1930 के नमक सत्याग्रह में शामिल हुए। उन्होंने विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार, शराब की दुकानों के विरोध और अंग्रेजी शासन द्वारा लगाए गए चौकीदारी कर के विरोध जैसे आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई। स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रहने के कारण उन्हें 1932, 1934 और 1942 में जेल भी जाना पड़ा।

1932 में शराब की दुकान के विरोध के दौरान ब्रिटिश पुलिस ने उनके साथ बर्बर मारपीट की, जिसमें उनकी पसलियों की कई हड्डियां टूट गईं। इसके बावजूद उनका हौसला नहीं टूटा।

भारत छोड़ो आंदोलन और मीनापुर की घटना

1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में जुब्बा सहनी ने बिहार में अंग्रेजी शासन के विरुद्ध आंदोलन को आगे बढ़ाया। 16 अगस्त 1942 को मीनापुर थाना क्षेत्र में अंग्रेजी शासन के खिलाफ हुए विद्रोह में वे प्रमुख भूमिका में थे। इस घटना में तत्कालीन अंग्रेज थानेदार लुईस वॉलर (L. Waller) की मृत्यु हुई।

ब्रिटिश सरकार ने इस घटना के बाद बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार किया। मुकदमे के दौरान जुब्बा सहनी ने अपने साथियों को बचाने की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली। इसके बाद उन्हें मृत्युदंड सुनाया गया।

शहादत

11 मार्च 1944 को केवल 38 वर्ष की आयु में जुब्बा सहनी को भागलपुर सेंट्रल जेल में फांसी दे दी गई। देश की स्वतंत्रता के लिए उनका सर्वोच्च बलिदान उन्हें बिहार के अमर शहीदों की पंक्ति में स्थापित करता है।

जुब्बा सहनी की विरासत

आज भी बिहार में उनके नाम पर जुब्बा सहनी पार्क, रेलवे स्टेशन और अन्य संस्थान हैं। भागलपुर की जिस जेल में उन्हें फांसी दी गई थी, उसका नाम भी बाद में जुब्बा सहनी केंद्रीय कारा रखा गया।

संक्षेप में:

> *“जुब्बा सहनी का जीवन साहस, देशभक्ति और त्याग की ऐसी मिसाल है, जिसमें एक साधारण गरीब परिवार का युवक देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर अमर शहीद बन गया।”*
Er. I P Gupta Pan R.J.D - राष्ट्रीय जनता दल

कोसी स्नातक से नीतेश कुमार जी को राजद के उम्मीदवार बनने पे ढेरों बधाई और शुभकामनाएं !!!
12/09/2026

कोसी स्नातक से नीतेश कुमार जी को राजद के उम्मीदवार बनने पे ढेरों बधाई और शुभकामनाएं !!!

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