13/09/2026
क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले । सावित्रीबाई फुले भारत की महान समाज सुधारक, शिक्षिका और महिला शिक्षा की अग्रदूत थीं।
🌸 सावित्रीबाई फुले की जीवनी
पूरा नाम: सावित्रीबाई ज्योतिराव फुले
जन्म: 3 जनवरी 1831, नायगांव, सतारा, महाराष्ट्र
निधन: 10 मार्च 1897, पुणे, महाराष्ट्र
पति: ज्योतिराव गोविंदराव फुले
📚 शिक्षा के लिए संघर्ष
सावित्रीबाई का विवाह कम उम्र में ज्योतिराव फुले से हुआ। उस समय महिलाओं की शिक्षा को समाज में बहुत हतोत्साहित किया जाता था। ज्योतिराव फुले ने उन्हें पढ़ाया और आगे शिक्षक बनने के लिए प्रशिक्षण दिलाया।
1848 में सावित्रीबाई और ज्योतिराव फुले ने पुणे के भिडे वाड़ा में लड़कियों के लिए स्कूल शुरू किया। सावित्रीबाई ने लड़कियों को पढ़ाने का कार्य किया और महिला शिक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।
👩🏫 महिला शिक्षा की अग्रदूत
सावित्रीबाई ने बालिकाओं और वंचित वर्गों की शिक्षा के लिए लगातार काम किया। सामाजिक विरोध और अपमान के बावजूद उन्होंने अपना कार्य नहीं छोड़ा। उनका उद्देश्य था कि हर लड़की और हर वंचित व्यक्ति को शिक्षा का अधिकार मिले।
⚖️ सामाजिक सुधार
सावित्रीबाई और ज्योतिराव फुले ने बाल विवाह, जातिगत भेदभाव और महिलाओं के शोषण जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने विधवाओं और बेसहारा महिलाओं की सहायता के लिए भी काम किया।
🦠 प्लेग महामारी में सेवा
1897 में पुणे में प्लेग महामारी के दौरान सावित्रीबाई बीमार लोगों की सेवा करने के लिए स्वयं आगे आईं। इसी दौरान उन्हें संक्रमण हुआ और 10 मार्च 1897 को उनका निधन हो गया।
🌺 सावित्रीबाई की विरासत
सावित्रीबाई फुले ने ऐसे समय में महिलाओं की शिक्षा का दीप जलाया जब लड़कियों का स्कूल जाना भी सामाजिक विरोध का कारण बनता था। आज उन्हें भारत की महिला शिक्षा और सामाजिक समानता की महान अग्रदूतों में माना जाता है। भारत सरकार के आजादी का अमृत महोत्सव कार्यक्रम में भी उनकी जयंती पर कार्यक्रम दर्ज किए गए हैं।
उनका जीवन हमें संदेश देता है:
> “शिक्षा ही वह शक्ति है, जो इंसान को अन्याय और अज्ञानता से मुक्त करती है।”