Journalist Sunny Sharma

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8वां वेतन आयोग: कर्मचारियों के एरियर और सैलरी बढ़ोतरी पर बड़ी अपडेटकेंद्र सरकार द्वारा 8वें वेतन आयोग के गठन की प्रक्रिय...
31/05/2026

8वां वेतन आयोग: कर्मचारियों के एरियर और सैलरी बढ़ोतरी पर बड़ी अपडेट

केंद्र सरकार द्वारा 8वें वेतन आयोग के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। आयोग नवंबर 2025 से अपनी सिफारिशों पर काम कर रहा है और विभिन्न कर्मचारी संगठनों, पेंशनर्स तथा अन्य हितधारकों से सुझाव लिए जा रहे हैं। आयोग को अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए लगभग 18 महीने का समय दिया गया है।

रिपोर्ट लागू होने के बाद केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन तथा पेंशन में संशोधन किया जाएगा। कर्मचारियों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा एरियर (Arrear) को लेकर हो रही है। यदि नया वेतनमान लागू होने में देरी होती है, तो लागू होने की निर्धारित तारीख से वास्तविक लागू होने तक का अंतर एरियर के रूप में दिया जा सकता है।

एरियर कैसे होगा कैलकुलेट?

एरियर की गणना इस आधार पर होगी:

(नया वेतन – पुराना वेतन) × देरी के महीनों की संख्या

मीडिया रिपोर्टों में विभिन्न संभावित फिटमेंट फैक्टर के आधार पर अनुमान लगाए जा रहे हैं। हालांकि सरकार या आयोग ने अभी तक किसी फिटमेंट फैक्टर को अंतिम रूप नहीं दिया है।

लेवल-6 कर्मचारी का उदाहरण

7वें वेतन आयोग में लेवल-6 कर्मचारी का बेसिक वेतन 35,400 रुपये माना गया है।

संभावित फिटमेंट फैक्टर के अनुसार नया बेसिक वेतन:

फिटमेंट फैक्टर संभावित नया बेसिक वेतन

2.00 ₹70,800
2.15 ₹76,110
2.28 ₹80,712
2.57 ₹90,978

हर महीने कितनी बढ़ सकती है सैलरी?

फिटमेंट फैक्टर मासिक बढ़ोतरी

2.00 ₹35,400
2.15 ₹40,710
2.28 ₹45,312
2.57 ₹55,578

संभावित एरियर का अनुमान

यदि जनवरी 2026 से लाभ देय माना जाए और बाद में भुगतान किया जाए, तो अनुमानित एरियर इस प्रकार हो सकता है:

फिटमेंट फैक्टर संभावित एरियर

2.00 ₹7,08,000
2.15 ₹8,14,200
2.28 ₹9,06,240
2.57 ₹11,11,560

महत्वपूर्ण बात

अभी तक केंद्र सरकार या 8वें वेतन आयोग ने फिटमेंट फैक्टर, वेतन वृद्धि या एरियर की कोई अंतिम घोषणा नहीं की है। ऊपर दिए गए सभी आंकड़े संभावित गणनाओं और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित अनुमान हैं। अंतिम लाभ आयोग की सिफारिशों और सरकार के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।

कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजर अब 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट और सरकार के अगले बड़े फैसले पर टिकी हुई है। 🚨💰

65 हजार कर्मचारियों को बड़ी खुशखबरी, सरकार ने खोला नियमितीकरण का रास्तापंजाब के हजारों कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत भरी ...
31/05/2026

65 हजार कर्मचारियों को बड़ी खुशखबरी, सरकार ने खोला नियमितीकरण का रास्ता

पंजाब के हजारों कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अगुवाई वाली पंजाब सरकार ने 65 हजार से अधिक आउटसोर्स और ठेका कर्मचारियों के हित में एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। मंत्रिमंडल ने 51 सरकारी विभागों में कार्यरत 65,048 कर्मचारियों को सरकारी रोजगार व्यवस्था के दायरे में लाने की मंजूरी दे दी है।

सरकार के इस फैसले को कर्मचारियों के लिए एक बड़ी सौगात माना जा रहा है। लंबे समय से नौकरी की सुरक्षा और नियमितीकरण की मांग कर रहे कर्मचारियों को अब नई उम्मीद मिली है। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से ठेकेदारी प्रथा को समाप्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है और कर्मचारियों को सीधे सरकारी व्यवस्था से जोड़ा जाएगा।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि वर्षों तक राज्य की सेवा करने वाले कर्मचारियों को उनका अधिकार मिलना चाहिए। अब सरकार और कर्मचारियों के बीच किसी निजी एजेंसी या ठेकेदार की भूमिका नहीं रहेगी। इससे कर्मचारियों को रोजगार सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य का रास्ता मिलेगा।

सरकार द्वारा लाए जा रहे नए प्रावधानों के अनुसार, लगातार 5 वर्ष सेवा पूरी करने वाले आउटसोर्स ग्रुप-सी और ग्रुप-डी कर्मचारियों को सरकारी रोजगार व्यवस्था के अंतर्गत लाया जाएगा। वहीं जोखिम वाले कार्यों में लगे कर्मचारियों के लिए यह अवधि केवल 3 वर्ष रखी गई है।

इस योजना के तहत बिजली विभाग, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, परिवहन विभाग, स्थानीय निकाय विभाग, कृषि विभाग, जल आपूर्ति विभाग और कई अन्य विभागों के हजारों कर्मचारी लाभान्वित होंगे। सरकार के अनुसार पहले चरण में 26 हजार से अधिक कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलने की संभावना है।

फैसले के तहत कर्मचारियों का वेतन सीधे उनके बैंक खातों में जमा होगा। किसी एजेंसी या ठेकेदार द्वारा कमीशन या कटौती नहीं की जाएगी। इसके अलावा कर्मचारियों को छुट्टियों और अन्य कानूनी सुविधाओं का भी लाभ मिलेगा।

कर्मचारी संगठनों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे ऐतिहासिक बताया है। उनका कहना है कि लंबे समय बाद सरकार ने ठेका कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से समझते हुए बड़ा कदम उठाया है।

कुल मिलाकर पंजाब सरकार का यह फैसला हजारों परिवारों के लिए राहत और उम्मीद लेकर आया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार इस योजना को कितनी तेजी से लागू करती है और कर्मचारियों को इसका वास्तविक लाभ कब तक मिलना शुरू होता है।

कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी: पंजाब सरकार का ऐतिहासिक फैसला अभी सभी कर्मचारी लाइक करे खबर पंजाब की भगवंत मान सरकार ने...
31/05/2026

कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी: पंजाब सरकार का ऐतिहासिक फैसला अभी सभी कर्मचारी लाइक करे खबर

पंजाब की भगवंत मान सरकार ने राज्य के हजारों आउटसोर्स और ठेका कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। पंजाब मंत्रिमंडल ने 51 सरकारी विभागों में कार्यरत 65,048 आउटसोर्स कर्मचारियों को सरकारी रोजगार व्यवस्था के दायरे में लाने की मंजूरी दे दी है। इसके लिए नए कानून और व्यवस्था लागू की जाएगी, जिससे ठेकेदारी प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जाएगा।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि वर्षों से सरकारी विभागों में सेवा दे रहे कर्मचारियों को उनका अधिकार दिया जाएगा। सरकार और कर्मचारी के बीच अब कोई निजी ठेकेदार या एजेंसी नहीं होगी। कर्मचारियों को सीधे सरकारी रोजगार व्यवस्था के तहत लाया जाएगा।

किसे मिलेगा लाभ?

राज्य के 51 विभागों में कुल 65,048 आउटसोर्स कर्मचारी इस योजना के दायरे में आते हैं। इनमें से 26,000 से अधिक कर्मचारियों को पहले चरण में लाभ मिलने की संभावना है।

सरकार के अनुसार:

बिजली विभाग के 15,753 कर्मचारी

स्थानीय निकाय विभाग के 8,436 कर्मचारी

सहकारी संस्थाओं के 8,373 कर्मचारी

स्कूल शिक्षा विभाग के 7,704 कर्मचारी

परिवहन विभाग के 4,746 कर्मचारी

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के 2,688 कर्मचारी

जल आपूर्ति एवं स्वच्छता विभाग के 1,575 कर्मचारी

कृषि विभाग के 1,533 कर्मचारी

जेल विभाग के 1,311 कर्मचारी

तकनीकी शिक्षा विभाग के 1,251 कर्मचारी

पीडब्ल्यूडी (बी एंड आर) के 1,570 कर्मचारी

सामान्य प्रशासन विभाग के 1,322 कर्मचारी

मेडिकल शिक्षा विभाग के 1,231 कर्मचारी

इस फैसले का लाभ प्राप्त करेंगे।

नियमितीकरण का रास्ता कैसे खुलेगा?

सरकार द्वारा लाए जा रहे नए कानून के अनुसार:

आउटसोर्स ग्रुप-सी और ग्रुप-डी कर्मचारी, जिन्होंने 5 वर्ष की लगातार सेवा पूरी कर ली है, उन्हें सीधे राज्य सरकार की रोजगार व्यवस्था के तहत लाया जाएगा।

जोखिम वाले कार्यों में लगे कर्मचारियों के लिए यह अवधि 3 वर्ष होगी।

सरकारी रोजगार व्यवस्था में आने के बाद 10 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को स्वीकृत रिक्त पदों के विरुद्ध नियमित करने पर विचार किया जाएगा।

पूरी प्रक्रिया शुरू होने के 45 दिनों के भीतर पात्र कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से अधिसूचित किया जाएगा।

कर्मचारियों को क्या-क्या लाभ मिलेंगे?

सरकार ने कर्मचारियों के लिए कई महत्वपूर्ण सुविधाओं की भी घोषणा की है:

✅ वेतन सीधे कर्मचारियों के बैंक खातों में जमा होगा।

✅ किसी एजेंसी या ठेकेदार द्वारा कमीशन या कटौती नहीं की जाएगी।

✅ हर वर्ष कानूनी प्रसूति लाभ उपलब्ध होगा।

✅ 10 दिनों की कैजुअल छुट्टी मिलेगी।

✅ कर्मचारी बायोमेट्रिक उपस्थिति और HRMS प्रणाली के अंतर्गत कवर होंगे।

✅ किसी कर्मचारी को बिना लिखित कारण और बिना सुनवाई का अवसर दिए सेवा से नहीं हटाया जाएगा।

डीए और पेंशन बकाया पर भी बड़ा कदम

पंजाब मंत्रिमंडल ने संशोधित वेतन, महंगाई भत्ता (DA), महंगाई राहत और पेंशन बकाया मामलों की समीक्षा के लिए एक कैबिनेट सब-कमेटी के पुनर्गठन को मंजूरी दी है।

यह समिति:

1 जनवरी 2016 से 30 जून 2021 तक के संशोधित वेतन और पेंशन बकायों की समीक्षा करेगी।

1 जुलाई 2021 से 31 मार्च 2024 तक के डीए और महंगाई राहत बकायों का अध्ययन करेगी।

कर्मचारियों और पेंशनरों से जुड़े लंबित मामलों पर सरकार को सुझाव देगी।

7 विशेष अदालतों को मंजूरी

मंत्रिमंडल ने भ्रष्टाचार निवारण कानून के मामलों के त्वरित निपटारे के लिए पंजाब में 7 विशेष अदालतों की स्थापना को भी मंजूरी दी है।

एसएएस नगर (मोहाली) में 3 अदालतें

जालंधर, लुधियाना, अमृतसर और पटियाला में 1-1 अदालत

स्थापित की जाएंगी।

मुख्यमंत्री का संदेश

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पंजाब के 65 हजार से अधिक कर्मचारियों ने वर्षों तक राज्य की सेवा की है। सरकार का यह फैसला उन्हें सम्मान, रोजगार सुरक्षा और भविष्य में नियमित रोजगार का स्पष्ट रास्ता प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि अब कर्मचारी और सरकार के बीच कोई बिचौलिया नहीं रहेगा तथा ठेकेदारी व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है।

Meta का बड़ा ऐलान 📱💥Instagram, Facebook और WhatsApp के लिए लॉन्च हुए नए Plus प्लान, फ्री वर्जन रहेगा जारीनई दिल्ली। सोशल...
30/05/2026

Meta का बड़ा ऐलान 📱💥

Instagram, Facebook और WhatsApp के लिए लॉन्च हुए नए Plus प्लान, फ्री वर्जन रहेगा जारी

नई दिल्ली। सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी Meta ने Instagram, Facebook और WhatsApp के लिए नए पेड सब्सक्रिप्शन प्लान लॉन्च करने की घोषणा की है। कंपनी ने इन योजनाओं को Instagram Plus, Facebook Plus और WhatsApp Plus नाम दिया है। Meta का कहना है कि इन प्लान्स के जरिए यूजर्स को अतिरिक्त फीचर्स, बेहतर कस्टमाइजेशन और एडवांस टूल्स का लाभ मिलेगा।

Meta की हेड ऑफ प्रोडक्ट Naomi Gleit ने बताया कि ये Plus प्लान धीरे-धीरे दुनियाभर में रोलआउट किए जाएंगे। हालांकि कंपनी ने साफ किया है कि Instagram, Facebook और WhatsApp के सामान्य फ्री वर्जन पहले की तरह चलते रहेंगे। यानी ऐप इस्तेमाल करने के लिए किसी यूजर को अनिवार्य रूप से पैसे नहीं देने होंगे।

रिपोर्ट्स के अनुसार Instagram Plus और Facebook Plus की कीमत लगभग 3.99 डॉलर प्रति माह रखी गई है, जबकि WhatsApp Plus की कीमत 2.99 डॉलर प्रति माह बताई जा रही है। भारतीय मुद्रा में यह राशि करीब 250 से 400 रुपये के बीच हो सकती है, लेकिन Meta ने अभी तक भारत के लिए आधिकारिक कीमतों की घोषणा नहीं की है।

Instagram Plus और Facebook Plus में यूजर्स को स्टोरी इनसाइट्स, प्रोफाइल कस्टमाइजेशन, अतिरिक्त रीच टूल्स, सुपर रिएक्शन, स्टोरी री-वॉच डेटा और कई प्रीमियम फीचर्स मिल सकते हैं। वहीं WhatsApp Plus में कस्टम थीम, प्रीमियम स्टिकर्स, अतिरिक्त पिन चैट्स, कस्टम रिंगटोन और एडवांस पर्सनलाइजेशन फीचर्स दिए जाने की संभावना है।

Meta ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में Meta One नाम से एक बड़ा सब्सक्रिप्शन प्लेटफॉर्म लाया जा सकता है, जिसमें AI, क्रिएटर्स और बिजनेस यूजर्स के लिए विशेष सुविधाएं शामिल होंगी। कंपनी का लक्ष्य विज्ञापनों पर निर्भरता कम कर नए राजस्व स्रोत विकसित करना है।

फिलहाल Meta ने स्पष्ट किया है कि सामान्य यूजर्स के लिए मैसेजिंग, कॉलिंग और सोशल मीडिया का बेसिक उपयोग पूरी तरह मुफ्त रहेगा। नए Plus प्लान केवल उन लोगों के लिए हैं जो अतिरिक्त फीचर्स और प्रीमियम अनुभव चाहते हैं।

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डिस्क्लेमर: यह खबर Meta की आधिकारिक घोषणा और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार की गई है। भारत में कीमतों और फीचर्स को लेकर अंतिम जानकारी Meta द्वारा आधिकारिक लॉन्च के समय जारी की जाएगी।

स्रोत: TechCrunch / India Today / Gadgets 360 / Economic Times 📄

कर्मचारी हित में बड़ा फैसला ⚖️नौकरी से निकालने मात्र से ग्रेच्युटी अपने-आप जब्त नहीं होगी : मध्य प्रदेश हाईकोर्टभोपाल। म...
29/05/2026

कर्मचारी हित में बड़ा फैसला ⚖️

नौकरी से निकालने मात्र से ग्रेच्युटी अपने-आप जब्त नहीं होगी : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

भोपाल। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के ग्रेच्युटी अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी कर्मचारी को विभागीय जांच के बाद नौकरी से निकाल देने मात्र से उसकी ग्रेच्युटी अपने-आप जब्त नहीं की जा सकती। ग्रेच्युटी जब्त करने के लिए Payment of Gratuity Act, 1972 में निर्धारित कानूनी शर्तों का पूरा होना आवश्यक है।

यह फैसला केंद्रीय मध्य प्रदेश ग्रामीण बैंक द्वारा दायर एक अपील को खारिज करते हुए दिया गया। बैंक ने उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें एक मृत कर्मचारी की विधवा को ग्रेच्युटी का भुगतान करने के निर्देश दिए गए थे।

मामले के अनुसार बैंक कर्मचारी पर शाखा के कैश बॉक्स से लगभग एक लाख रुपये के गबन का आरोप लगा था, जिसके चलते उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। बाद में कर्मचारी की मृत्यु हो गई। इसके बाद उसकी विधवा ने ग्रेच्युटी भुगतान की मांग की, लेकिन बैंक ने आवेदन यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि बर्खास्तगी की स्थिति में ग्रेच्युटी देय नहीं है।

मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा कि ग्रेच्युटी जब्त करने का अधिकार Payment of Gratuity Act द्वारा नियंत्रित होता है और यह एक कल्याणकारी कानून है। अदालत ने कहा कि अधिनियम की धारा 4(6) के तहत केवल सीमित परिस्थितियों में ही ग्रेच्युटी पूरी या आंशिक रूप से जब्त की जा सकती है।

कोर्ट ने पाया कि बैंक यह साबित करने में असफल रहा कि अधिनियम की धारा 4(6) के तहत आवश्यक सभी कानूनी शर्तें पूरी हुई थीं। रिकॉर्ड से यह भी सामने आया कि कथित गबन की राशि पहले ही जमा कर दी गई थी, इसलिए बैंक को वास्तविक आर्थिक नुकसान नहीं हुआ था।

अदालत ने यह भी कहा कि कर्मचारी के खिलाफ किसी सक्षम आपराधिक अदालत द्वारा नैतिक अधमता (Moral Turpitude) से जुड़े अपराध में दोषसिद्धि नहीं हुई थी और न ही कोई आपराधिक मुकदमा लंबित था। ऐसी स्थिति में केवल विभागीय कार्रवाई के आधार पर ग्रेच्युटी जब्त नहीं की जा सकती।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि बैंक के सेवा नियम Payment of Gratuity Act से ऊपर नहीं हो सकते। अधिनियम की धारा 14 के अनुसार इस कानून का प्रभाव अन्य नियमों पर प्रधानता रखता है। इसलिए कर्मचारी या उसके आश्रितों के वैधानिक अधिकारों को केवल सेवा नियमों के आधार पर समाप्त नहीं किया जा सकता।

अंततः अदालत ने विधवा के पक्ष में दिए गए आदेश को सही ठहराया और बैंक की अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि निर्धारित सेवा पूरी करने के बाद कर्मचारी ग्रेच्युटी का हकदार होता है और उसे केवल कानून में बताई गई विशेष परिस्थितियों में ही रोका या जब्त किया जा सकता है।

केस: Central MP Gramin Bank vs Babita Mor (Writ Appeal No. 3160/2025)

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डिस्क्लेमर: यह खबर LiveLaw में प्रकाशित न्यायिक रिपोर्ट के आधार पर तैयार की गई है। विस्तृत कानूनी जानकारी और आधिकारिक तथ्यों के लिए संबंधित न्यायालय के आदेश तथा मूल रिपोर्ट का अवलोकन करें।

स्रोत: LiveLaw 📄⚖️

🚨 हिमाचल कर्मचारियों के डीए मामले में हाईकोर्ट का रुख सख्त होता दिख रहा है। कर्मचारियों ने अदालत में मांग रखी है कि उन्ह...
29/05/2026

🚨 हिमाचल कर्मचारियों के डीए मामले में हाईकोर्ट का रुख सख्त होता दिख रहा है। कर्मचारियों ने अदालत में मांग रखी है कि उन्हें भी केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बराबर महंगाई भत्ता (DA) दिया जाए। याचिका के अनुसार केंद्र कर्मचारियों को 60% डीए मिल रहा है, जबकि हिमाचल के कर्मचारियों को 45% डीए दिया जा रहा है, जिससे 15% का अंतर बना हुआ है। कर्मचारियों का कहना है कि इस अंतर के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है और पूछा है कि लंबित डीए किस्तों का भुगतान कब किया जाएगा। कर्मचारियों ने जुलाई 2024 से लंबित डीए और बकाया राशि जारी करने की मांग भी की है। अब कर्मचारियों और पेंशनरों की नजर जून में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हुई है। 👍 अगर आप भी डीए समानता का समर्थन करते हैं तो पोस्ट को लाइक और शेयर जरूर करें।

⚠️ डिस्क्लेमर: यह जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स और न्यायालयीय कार्यवाही के आधार पर तैयार की गई है। अंतिम जानकारी के लिए आधिकारिक कोर्ट आदेश और सरकारी रिकॉर्ड को ही मान्य माना जाए।

हिमाचल कर्मचारियों के डीए मामले पर हाईकोर्ट सख्त ⚖️केंद्र के बराबर महंगाई भत्ता देने की मांग, सरकार से मांगा जवाबशिमला।ह...
29/05/2026

हिमाचल कर्मचारियों के डीए मामले पर हाईकोर्ट सख्त ⚖️

केंद्र के बराबर महंगाई भत्ता देने की मांग, सरकार से मांगा जवाब

शिमला।

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में राज्य कर्मचारियों के महंगाई भत्ता (DA) समानता मामले की सुनवाई के दौरान बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। कर्मचारियों ने अदालत में मांग रखी है कि उन्हें भी केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बराबर महंगाई भत्ता दिया जाए। फिलहाल केंद्र सरकार के कर्मचारियों को 60 प्रतिशत डीए मिल रहा है, जबकि हिमाचल प्रदेश के कर्मचारियों को केवल 45 प्रतिशत डीए दिया जा रहा है।

याचिका में कहा गया है कि डीए में 15 प्रतिशत का अंतर होने से राज्य कर्मचारियों को हर महीने हजारों रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच डीए राहत का सबसे बड़ा माध्यम होता है, लेकिन लंबे समय से लंबित किस्तों का भुगतान नहीं किया गया है।

मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने सरकार से पूछा है कि केंद्र के मुकाबले डीए में इतना अंतर क्यों बना हुआ है और लंबित किस्तों का भुगतान कब किया जाएगा।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की है कि जुलाई 2024 से लंबित डीए की किस्तें और बकाया राशि जल्द जारी करने के आदेश दिए जाएं। उनका कहना है कि राज्य सरकार परंपरागत रूप से वेतन और भत्तों के मामलों में अन्य पैटर्न का अनुसरण करती रही है, ऐसे में कर्मचारियों को महंगाई भत्ते से वंचित रखना उचित नहीं है।

हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए सरकार को निर्धारित समय में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई जून महीने में तय की गई है। कर्मचारियों और पेंशनरों की निगाहें अब अदालत के अगले फैसले पर टिकी हुई हैं।

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डिस्क्लेमर: यह खबर विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और न्यायालयीय कार्यवाही से प्राप्त जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। विस्तृत एवं आधिकारिक जानकारी के लिए संबंधित न्यायालयी दस्तावेज और सरकारी रिकॉर्ड देखें।

स्रोत: अमर उजाला / दैनिक जागरण / मीडिया रिपोर्ट्स
तारीख: 29 मई 2026 📅

बिजली चोरी पकड़ने गई टीम पर हमला, कुत्ता छोड़कर दौड़ाया, पांच कर्मचारी घायललखनऊ, 28 मई 2026: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखन...
29/05/2026

बिजली चोरी पकड़ने गई टीम पर हमला, कुत्ता छोड़कर दौड़ाया, पांच कर्मचारी घायल

लखनऊ, 28 मई 2026: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के जानकीपुरम क्षेत्र में बिजली चोरी की जांच करने पहुंची विद्युत विभाग की टीम पर हमला किए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना में विभाग के पांच कर्मचारी घायल हो गए, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार, विद्युत विभाग को जानकीपुरम इलाके में लंबे समय से अवैध बिजली उपयोग और बिजली चोरी की शिकायतें मिल रही थीं। इन्हीं शिकायतों की जांच के लिए बुधवार शाम करीब छह बजे विभाग की एक टीम मौके पर पहुंची थी। जांच के दौरान उपभोक्ता पक्ष और विभागीय कर्मचारियों के बीच कहासुनी हो गई, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई।

कर्मचारियों का आरोप है कि आरोपियों ने उन पर बेलचे और अन्य हथियारों से हमला कर दिया। हमलावरों ने कर्मचारियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। इतना ही नहीं, टीम पर एक पालतू कुत्ता भी छोड़ दिया गया, जिससे विभाग के एक कर्मचारी को चोटें आईं। मारपीट के दौरान एक कर्मचारी का मोबाइल फोन भी छीन लिया गया।

घटना के बाद किसी तरह टीम वहां से निकलने में सफल रही और तत्काल पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका उपचार जारी है। पुलिस ने विभागीय अधिकारी की तहरीर के आधार पर नामजद आरोपियों सहित कई अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। आरोपियों की तलाश की जा रही है।

बताया गया है कि इसी दिन सआदतगंज क्षेत्र में बिजली चोरी रोकने गई एक अन्य टीम के साथ भी अभद्रता और मारपीट की घटना हुई। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं से विद्युत विभाग के कर्मचारियों में भारी रोष है। कर्मचारियों का कहना है कि बिजली चोरी के खिलाफ कार्रवाई करने वाली टीमों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि वे बिना किसी भय के अपना कार्य कर सकें।

डिस्क्लेमर: यह समाचार Live Hindustan में प्रकाशित रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया है। जानकारी का स्रोत: Live Hindustan, दिनांक 28 मई 2026।

शिमला: स्वास्थ्य, शिक्षा समेत कई विभागों में नियमित भर्तियों की तैयारी तेज होने की खबरें सामने आ रही हैं। लंबे समय से खा...
27/05/2026

शिमला: स्वास्थ्य, शिक्षा समेत कई विभागों में नियमित भर्तियों की तैयारी तेज होने की खबरें सामने आ रही हैं। लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने के लिए सरकार स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है, जिससे हजारों बेरोजगार युवाओं और वर्षों से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

सूत्रों के अनुसार स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग और अन्य सरकारी संस्थानों में रिक्त पदों का ब्यौरा जुटाया जा रहा है। हाल ही में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने भी आउटसोर्स और बैक डोर भर्तियों पर सख्त टिप्पणी करते हुए सरकार से नियमित भर्ती प्रक्रिया को प्राथमिकता देने को कहा था।

स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों, स्टाफ नर्सों और अन्य कर्मचारियों के पद लंबे समय से खाली चल रहे हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा में कहा था कि सभी पीएचसी में डॉक्टरों की तैनाती सुनिश्चित करने के लिए भर्ती प्रक्रिया तेज की जा रही है। सरकार ने 162 डॉक्टरों की भर्ती पूरी होने और 236 अन्य पदों के लिए इंटरव्यू प्रक्रिया जारी होने की जानकारी भी दी थी।

शिक्षा विभाग में भी विभिन्न श्रेणियों के पदों को भरने की दिशा में गतिविधियां बढ़ी हैं। विभागीय नोटिसों और भर्ती नियमों में नई नियुक्तियों और नियमितीकरण से जुड़ी प्रक्रियाओं का उल्लेख किया गया है।

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यदि नियमित भर्ती प्रक्रिया तेज होती है तो वर्षों से अनुबंध, आउटसोर्स और अस्थायी आधार पर काम कर रहे कर्मचारियों को भी भविष्य में बड़ा लाभ मिल सकता है। वहीं बेरोजगार युवाओं को भी सरकारी नौकरी के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।

हालांकि सरकार की ओर से अभी सभी विभागों के लिए आधिकारिक भर्ती कैलेंडर जारी नहीं किया गया है, लेकिन विभिन्न विभागों में खाली पदों का डेटा तैयार होने और भर्ती प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की चर्चाएं तेज हैं।


स्रोत: The Times of India एवं विभागीय सूचनाएं | मई 2026

Shimla: आउटसोर्स भर्तियों पर हाईकोर्ट सख्त, स्वास्थ्य और प्रधान सचिव वित्त तलब, 16 जून को होगी अगली सुनवाईसंवाद न्यूज एज...
27/05/2026

Shimla: आउटसोर्स भर्तियों पर हाईकोर्ट सख्त, स्वास्थ्य और प्रधान सचिव वित्त तलब, 16 जून को होगी अगली सुनवाई

संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के विभिन्न विभागों, बोर्डों और निगमों में बड़े पैमाने पर हो रही आउटसोर्स भर्तियों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने कहा कि खाली पदों को नियमित रूप से भरने के बजाय बैक डोर एंट्री के जरिए नियुक्तियां की जा रही हैं, जो युवाओं के वैधानिक अधिकारों का हनन और उनका शोषण है।

मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश विपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य सचिव और प्रधान सचिव (वित्त) को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के आदेश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 16 जून को होगी।

अदालत में वित्त विभाग के विशेष सचिव की ओर से दायर हलफनामे में कहा गया कि आउटसोर्स कर्मचारियों का डेटा बहुत बड़ा है और केंद्रीकृत रूप से उपलब्ध नहीं है, इसलिए इसे एकत्र करने में समय लग रहा है।

अब तक के अधूरे आंकड़ों के अनुसार 42 सरकारी संस्थानों में कुल 17,114 कर्मचारी आउटसोर्स आधार पर कार्यरत हैं। इनमें हाईकोर्ट, न्यायिक अकादमी और एडवोकेट जनरल कार्यालय भी शामिल हैं। चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय में 2,578, पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड में 1,473, कृषि निदेशालय में 803, हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर में 793, ग्रामीण विकास विभाग में 632, पुलिस महानिदेशक कार्यालय में 630 और जल शक्ति विभाग में 542 कर्मचारी आउटसोर्स पर कार्यरत बताए गए हैं।

हाईकोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि वर्ष 2017 की नीति के अनुसार वित्त विभाग की अनुमति के बिना आउटसोर्स पर नियुक्तियां संभव नहीं हैं, फिर भी सरकार के पास इसका केंद्रीकृत डेटा उपलब्ध नहीं है। कोर्ट ने कहा कि मुख्य सचिव को इस केस में पक्षकार बनाए जाने के बावजूद विभागों का अदालत के आदेशों के प्रति उदासीन रहना गंभीर लापरवाही है।

कोर्ट ने कहा कि सरकार व्यावहारिक डेटा के बिना नीतिगत फैसले ले रही है, जो गलत परंपरा है। अदालत ने स्वास्थ्य विभाग का उदाहरण देते हुए कहा कि 31 जुलाई 2024 तक स्टाफ नर्सों के 750 पद खाली थे, लेकिन 17 दिसंबर 2025 में केवल 28 पदों पर नियमित भर्ती निकाली गई।

कोर्ट ने पहले आदेश दिया था कि सरकार हलफनामा देकर बताए कि उसके बाद कितने नियमित पद भरे गए, लेकिन छह महीने बीत जाने के बाद भी सरकार ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।

सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि पहले युवाओं को आउटसोर्स पर रखा जाता है और बाद में रोगी कल्याण समिति के माध्यम से नियमित किया जाता है। अदालत ने इसे बैक डोर एंट्री का सुनियोजित तरीका बताया।

याचिकाकर्ताओं ने पूरे मामले में 110 कथित फर्जी सर्विस प्रोवाइडर (आउटसोर्सिंग) कंपनियों की जांच सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में एसआईटी से कराने की मांग की है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया बिना किसी पारदर्शी प्रक्रिया के 17,114 लोगों को नौकरी देना और इसका सीधा फायदा आउटसोर्स एजेंसियों को पहुंचाना एक बड़ा मामला बनता है।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों के चलते हाईकोर्ट पहले मामले की मेरिट पर सुनवाई पूरी करेगा।


स्रोत: अमर उजाला | प्रकाशित: 22 मई 2026

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