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यूपी के 3.50 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए बड़ी पहल, मानदेय में करीब दोगुनी बढ़ोतरी; कंपनी नहीं काट सकेगी वेतनलखनऊ | 2...
02/09/2026

यूपी के 3.50 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए बड़ी पहल, मानदेय में करीब दोगुनी बढ़ोतरी; कंपनी नहीं काट सकेगी वेतन

लखनऊ | 2 सितंबर 2026

उत्तर प्रदेश में आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवा व्यवस्था को लेकर योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। दैनिक जागरण की 2 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के करीब 3.50 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए नई व्यवस्था तैयार की गई है। इसका उद्देश्य कर्मचारियों को बेहतर मानदेय, सामाजिक सुरक्षा और पारदर्शी सेवा व्यवस्था उपलब्ध कराना है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को लखनऊ स्थित लोक भवन में उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (यूपीकास/UPCOS) का शुभारंभ किया। इस दौरान निगम के लोगो का अनावरण करने के साथ ही पोर्टल और वेबसाइट भी शुरू की गई।

कंपनी कर्मचारी के वेतन से नहीं काट सकेगी पैसा

नई व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आउटसोर्स कंपनी कर्मचारी के वेतन से कोई पैसा नहीं काट सकेगी। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी को मिलने वाला सर्विस चार्ज सरकार अलग से देगी।

इस व्यवस्था का उद्देश्य बिचौलियों या एजेंसियों द्वारा कर्मचारियों के वेतन में कटौती की शिकायतों को रोकना बताया गया है।

मानदेय में करीब दोगुनी बढ़ोतरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि आउटसोर्स कर्मचारियों को उनकी मेहनत के अनुरूप उचित मानदेय मिलना चाहिए। रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकार ने आउटसोर्स कर्मियों का मानदेय लगभग दोगुना किया है।

कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी कहा कि मानदेय में 100 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

मनमाने तरीके से नौकरी से नहीं निकाला जा सकेगा

नई व्यवस्था में आउटसोर्स कर्मचारियों को नौकरी से हटाने को लेकर भी नियम कड़े किए जाने की बात कही गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, किसी कर्मचारी को मनमाने तरीके से नौकरी से निकालना आसान नहीं होगा। कंपनी को पहले सरकार को इसकी सूचना देनी होगी और मामले की जांच के बाद ही आगे का निर्णय होगा।

इसके अलावा ‘पिक एंड चूज’ की व्यवस्था खत्म करने और कर्मचारियों के अनावश्यक उत्पीड़न पर रोक लगाने की बात भी कही गई है।

20 लाख लोगों को सुरक्षा कवर देने की दिशा में कदम

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार करीब साढ़े तीन लाख आउटसोर्स कर्मचारियों के परिवारों से जुड़े लगभग 20 लाख लोगों को सुरक्षा कवर देने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि दुर्घटना जैसी स्थिति में कर्मचारी को सामाजिक सुरक्षा और सुरक्षा कवच मिलना चाहिए।

EPF का पैसा कर्मचारी के नाम पर सुरक्षित रहेगा

रिपोर्ट के मुताबिक, आउटसोर्स कर्मचारियों की भविष्य निधि यानी EPF की राशि उनके नाम पर ही सुरक्षित रहेगी। कर्मचारियों को ESI के तहत इलाज की सुविधा भी मिलेगी।

अगर किसी कर्मचारी को उचित इलाज स्थानीय स्तर पर उपलब्ध नहीं होता है, तो उसे आयुष्मान योजना के तहत पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा दिए जाने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है।

SBI के साथ हुआ समझौता

कार्यक्रम के दौरान भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के साथ भी एक समझौता हुआ।

रिपोर्ट के अनुसार, दुर्घटना में कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिवार को ₹20 लाख से ₹50 लाख तक की राशि मिलने की व्यवस्था बताई गई है। वहीं, अग्निकांड की स्थिति में ₹10 लाख तक की सहायता का उल्लेख किया गया है।

कर्मचारियों के पुत्र-पुत्रियों की शिक्षा के लिए बैंक की ओर से ₹8 लाख से ₹10 लाख तक के ऋण की सुविधा का भी उल्लेख रिपोर्ट में किया गया है।

हर पांच साल में मानदेय संशोधन

आउटसोर्स कर्मचारियों की व्यवस्था में हर पांच साल में मानदेय के पुनरीक्षण की बात भी सामने आई है। इसका उद्देश्य कर्मचारियों के मानदेय को समय के साथ बेहतर करना और उनकी मेहनत के अनुरूप भुगतान सुनिश्चित करना है।

कर्मचारियों के काम का रिकॉर्ड रखा जाएगा

मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्मचारी का समय केवल कागजों में नहीं गुजरना चाहिए। उसके काम का मूल्यांकन और रिकॉर्ड व्यवस्थित तरीके से रखा जाना चाहिए।

नई व्यवस्था में कर्मचारियों की जानकारी और सेवाओं से जुड़ी जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए पोर्टल भी रहेगा। इससे सेवा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने का प्रयास किया जाएगा।

सरकार और कर्मचारी के रिश्ते को बताया विश्वास का रिश्ता

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार और कर्मचारी का रिश्ता केवल वेतन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विश्वास का रिश्ता है। कर्मचारी को यह भरोसा होना चाहिए कि उसके बेहतर कार्य का रिकॉर्ड रखा जा रहा है और उसकी समस्या सुनने के लिए प्रभावी तंत्र मौजूद है।

उन्होंने कहा कि समय पर वेतन और मेहनत के अनुरूप मानदेय मिलना कर्मचारी का अधिकार है।

आर्थिक भेदभाव खत्म करने पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि सामाजिक भेदभाव को दूर करने के लिए आर्थिक भेदभाव को भी खत्म करना जरूरी है। जो व्यक्ति काम करता है, उसे उसकी मेहनत का उचित मानदेय मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रदेश की विकास यात्रा में स्थायी कर्मचारियों के साथ-साथ आउटसोर्स कर्मचारियों का भी महत्वपूर्ण योगदान है। नगर निकायों में काम करने वाले सफाईकर्मियों से लेकर शासन व्यवस्था के अलग-अलग कार्यों में लगे आउटसोर्स कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण है।

2017 से पहले की व्यवस्था पर भी बोले योगी

मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि 2017 से पहले आउटसोर्स कर्मचारियों को बोझ माना जाता था। उन्होंने उस समय की आउटसोर्स कंपनियों को लेकर राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों के रिश्तेदारों के शामिल होने का आरोप भी लगाया।

योगी ने कहा कि उस समय भर्ती और यूनिफार्म के नाम पर कर्मचारियों का शोषण किया जाता था। नई व्यवस्था के जरिए ऐसी मनमानी पर अंकुश लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, UPCOS के शुभारंभ के साथ उत्तर प्रदेश में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती, मानदेय, वेतन भुगतान, सामाजिक सुरक्षा और नौकरी से संबंधित व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने की पहल की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, मानदेय में करीब दोगुनी बढ़ोतरी, वेतन से कटौती पर रोक, EPF-ESI, बीमा/सुरक्षा कवर और नौकरी से हटाने की प्रक्रिया में जांच जैसे प्रावधान कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

स्रोत: दैनिक जागरण की 2 सितंबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के आधार पर।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट में दी गई जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। बीमा, मानदेय, ऋण, स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य लाभों की वास्तविक पात्रता एवं शर्तें संबंधित सरकारी आदेश, नियम और लागू प्रक्रिया के अनुसार निर्धारित होंगी।

केंद्रीय कर्मचारियों के DA में 3% बढ़ोतरी की चर्चा, जुलाई 2026 से 63% होने का अनुमाननई दिल्ली | 2 सितंबर 2026केंद्रीय कर...
02/09/2026

केंद्रीय कर्मचारियों के DA में 3% बढ़ोतरी की चर्चा, जुलाई 2026 से 63% होने का अनुमान

नई दिल्ली | 2 सितंबर 2026

केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए जुलाई 2026 के महंगाई भत्ते (DA) संशोधन को लेकर चर्चा तेज है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2026 के लिए DA में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने का अनुमान लगाया जा रहा है। अगर यह बढ़ोतरी मंजूर होती है तो केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का DA/DR 60 प्रतिशत से बढ़कर 63 प्रतिशत हो सकता है।

हालांकि, अभी इस बढ़ोतरी पर केंद्र सरकार की ओर से अंतिम आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसलिए 3 प्रतिशत बढ़ोतरी को फिलहाल अनुमान के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

जनवरी में 2% बढ़ा था DA

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2026 में केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी। इसके बाद DA 58 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो गया था।

अब जुलाई 2026 के संशोधन पर कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजर है। रिपोर्ट में 60 प्रतिशत से 63 प्रतिशत तक DA बढ़ने का अनुमान बताया गया है।

कब हो सकता है ऐलान?

DA में संशोधन की घोषणा आम तौर पर जुलाई के बाद कुछ समय में की जाती है। मीडिया रिपोर्ट में इस बार अक्टूबर के आखिरी सप्ताह या नवंबर की शुरुआत में कैबिनेट से मंजूरी मिलने की संभावना जताई गई है।

अगर जुलाई 2026 के लिए DA बढ़ोतरी की घोषणा बाद में होती है, तो बढ़ोतरी की प्रभावी तारीख 1 जुलाई 2026 रखे जाने की स्थिति में कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को जुलाई से घोषणा वाले महीने तक का अंतर एरियर के रूप में मिल सकता है।

AICPI-IW से कैसे तय होता है DA?

DA संशोधन के लिए AICPI-IW यानी All-India Consumer Price Index for Industrial Workers के आंकड़ों को आधार बनाया जाता है। यह आंकड़े श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अधीन श्रम ब्यूरो की ओर से जारी किए जाते हैं।

इस इंडेक्स के जरिए औद्योगिक श्रमिकों के लिए जरूरी वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में होने वाले बदलाव को मापा जाता है। महंगाई के आंकड़ों में बदलाव के आधार पर केंद्रीय कर्मचारियों के DA संशोधन की गणना की जाती है।

8वें वेतन आयोग पर भी जारी है काम

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 8वें वेतन आयोग से संबंधित प्रक्रिया भी जारी है। आयोग विभिन्न राज्यों और स्थानों पर सरकारी कर्मचारियों, पेंशनभोगियों, कर्मचारी संगठनों और अन्य हितधारकों से बातचीत कर रहा है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि 1 सितंबर 2026 को जयपुर में 8वें वेतन आयोग की दो दिवसीय बैठक संपन्न हुई। बैठक में केंद्र सरकार के कर्मचारी संघों, पेंशनभोगी संगठनों और अन्य हितधारकों से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।

आने वाले समय में आयोग की बैठकें 9 सितंबर को पुडुचेरी, 16 से 18 सितंबर को चंडीगढ़ और 7-8 अक्टूबर को बेंगलुरु में प्रस्तावित बताई गई हैं।

कर्मचारियों को अभी किस बात का इंतजार?

फिलहाल कर्मचारियों की नजर जुलाई 2026 के DA संशोधन की आधिकारिक घोषणा पर है। 3 प्रतिशत बढ़ोतरी होने पर DA 60 से 63 प्रतिशत हो सकता है, लेकिन अंतिम प्रतिशत और भुगतान की तारीख सरकार की घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यह खबर उपलब्ध जानकारी और अनुमान पर आधारित है। DA में 3 प्रतिशत बढ़ोतरी को अभी अंतिम सरकारी फैसला नहीं माना जाना चाहिए।

यूपी के आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए बड़ी पहल, हर 5 साल में मानदेय संशोधन की व्यवस्थालखनऊ, 2 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश मे...
02/09/2026

यूपी के आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए बड़ी पहल, हर 5 साल में मानदेय संशोधन की व्यवस्था

लखनऊ, 2 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश में आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवा व्यवस्था को लेकर योगी सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। खासखबर की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (UPCOS) के शुभारंभ के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आउटसोर्स कर्मियों के हितों और मानदेय व्यवस्था को लेकर कई बातें कहीं।

हर पांच साल में मानदेय संशोधन

रिपोर्ट के मुताबिक, नई व्यवस्था के तहत आउटसोर्स कर्मचारियों के मानदेय के पुनरीक्षण की व्यवस्था हर पांच साल में किए जाने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य कर्मचारियों को उनकी मेहनत के अनुरूप सम्मानजनक मानदेय दिलाना और लंबे समय तक मानदेय में होने वाली अनिश्चितता को कम करना है।

समय पर वेतन और शोषण रोकने पर जोर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम में कहा कि आउटसोर्स कर्मचारियों को समय से वेतन मिलना चाहिए और उनके श्रम का शोषण नहीं होना चाहिए। सरकार का लक्ष्य ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें कर्मचारियों की सेवा शर्तों में पारदर्शिता रहे और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी तंत्र उपलब्ध हो।

सामाजिक सुरक्षा पर भी जोर

रिपोर्ट में बताया गया है कि UPCOS के माध्यम से आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा और सुरक्षा कवच को संस्थागत रूप देने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है। दुर्घटना जैसी परिस्थितियों में कर्मचारियों को सुरक्षा उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है।

नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता

नई व्यवस्था का एक अहम उद्देश्य आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया में मनमानी को कम करना और व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना बताया गया है। कर्मचारियों के काम और सेवा से संबंधित रिकॉर्ड को व्यवस्थित तरीके से रखने की बात भी सामने आई है।

कितने कर्मचारियों को लाभ?

खासखबर की 2 सितंबर 2026 की रिपोर्ट में UPCOS के दायरे में आने वाले आउटसोर्स कर्मियों की संख्या करीब 3.5 से 5 लाख बताई गई है। वहीं, कुछ अन्य मीडिया रिपोर्टों में इससे अधिक संख्या का उल्लेख किया गया है। इसलिए कर्मचारियों की सटीक संख्या और मानदेय में वास्तविक बढ़ोतरी की राशि को संबंधित सरकारी आदेश/अधिसूचना के आधार पर ही अंतिम माना जाना चाहिए।

महत्वपूर्ण: इस रिपोर्ट में उपलब्ध जानकारी मीडिया रिपोर्ट के आधार पर दी गई है। इसे किसी कर्मचारी के वेतन में निश्चित ₹7,000 बढ़ोतरी या तत्काल भुगतान का सरकारी आदेश न माना जाए, जब तक संबंधित विभाग की आधिकारिक अधिसूचना जारी न हो।

स्रोत: खासखबर/आईएएनएस, 2 सितंबर 2026।
रिपोर्टर: सन्नी शर्मा
हमारा उद्देश्य केवल सूचना देना है, कोई दावा करना नहीं।

यूपी के 7.5 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर, मानदेय में बढ़ोतरी का ऐलान; बनी नई व्यवस्थालखनऊ | 2 सितंबर 2026उत्...
02/09/2026

यूपी के 7.5 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर, मानदेय में बढ़ोतरी का ऐलान; बनी नई व्यवस्था

लखनऊ | 2 सितंबर 2026

उत्तर प्रदेश के करीब 7.5 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। Zee UP-UK की 2 सितंबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार ने विभिन्न सरकारी विभागों में काम कर रहे आउटसोर्स कर्मचारियों के मानदेय में बढ़ोतरी की घोषणा की है। सरकार के इस कदम से लाखों कर्मचारियों और उनसे जुड़े परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद जताई गई है।

मानदेय में बढ़ोतरी की घोषणा

रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आउटसोर्स कर्मचारियों के मानदेय में बढ़ोतरी की घोषणा की है। लंबे समय से विभिन्न सरकारी विभागों में सेवाएं दे रहे इन कर्मचारियों के लिए इसे महत्वपूर्ण कदम बताया गया है।

आउटसोर्स कर्मचारी अलग-अलग सरकारी विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सरकार की इस पहल का लाभ ऐसे कर्मचारियों को मिलने की बात रिपोर्ट में कही गई है।

भर्ती और वेतन भुगतान में पारदर्शिता पर जोर

आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती और उन्हें समय पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने ‘उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम’ के गठन की व्यवस्था की है।

इस नई व्यवस्था का उद्देश्य आउटसोर्स कर्मचारियों से संबंधित प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और भर्ती से लेकर भुगतान तक की व्यवस्था को बेहतर तरीके से संचालित करना है।

स्वास्थ्य, नगर निकाय और परिवहन समेत कई विभाग

रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के अलग-अलग सरकारी विभागों में बड़ी संख्या में आउटसोर्स कर्मचारी काम कर रहे हैं। इनमें स्वास्थ्य, नगर निकाय और परिवहन समेत विभिन्न विभाग शामिल हैं।

नई व्यवस्था से इन विभागों में काम करने वाले आउटसोर्स कर्मचारियों को सीधे लाभ मिलने की बात रिपोर्ट में कही गई है।

लाखों परिवारों को राहत की उम्मीद

Zee की रिपोर्ट में कहा गया है कि मानदेय में बढ़ोतरी से आउटसोर्स कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है। लंबे समय से अपेक्षाकृत कम मानदेय पर काम कर रहे कर्मचारियों के लिए इसे राहत के तौर पर देखा जा रहा है।

सरकार की ओर से आउटसोर्स कर्मचारियों से जुड़ी भर्ती और भुगतान व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम की पहल भी की गई है।

क्या है उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम?

उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम का गठन आउटसोर्स कर्मचारियों से जुड़ी व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इसके जरिए कर्मचारियों की भर्ती और समय पर वेतन भुगतान से संबंधित प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित किया जाएगा।

इस पहल से विभिन्न विभागों में काम कर रहे आउटसोर्स कर्मचारियों को एक बेहतर और पारदर्शी व्यवस्था मिलने की उम्मीद है।

स्रोत: Zee UP-UK, रिपोर्ट प्रकाशित 2 सितंबर 2026, दोपहर 12:55 बजे,

महत्वपूर्ण नोट: उपलब्ध रिपोर्ट में 7.5 लाख कर्मचारियों के मानदेय में बढ़ोतरी की घोषणा का उल्लेख है, लेकिन इस रिपोर्ट के दिए गए हिस्से में मानदेय कितने रुपये बढ़ाया गया है, इसकी सटीक राशि नहीं बताई गई है। इसलिए यहां कोई अलग रकम नहीं जोड़ी गई है।

🛡️ यूपी के साढ़े 3 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए बड़ी पहल, ₹50 लाख तक बीमा कवर समेत कई सुविधाएंलखनऊ | 2 सितंबर 2026उत्...
02/09/2026

🛡️ यूपी के साढ़े 3 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए बड़ी पहल, ₹50 लाख तक बीमा कवर समेत कई सुविधाएं

लखनऊ | 2 सितंबर 2026

उत्तर प्रदेश के करीब साढ़े तीन लाख आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए सरकार की ओर से नई व्यवस्था शुरू की गई है। अमर उजाला की 2 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, आउटसोर्स कर्मचारियों को वेतन में बढ़ोतरी के साथ सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी कई सुविधाएं देने की व्यवस्था की गई है। इनमें ₹50 लाख तक का बीमा कवर, आकस्मिक दवा के लिए सहायता और एयर एंबुलेंस से जुड़ी सहायता शामिल है।

₹50 लाख तक का बीमा कवर

रिपोर्ट के मुताबिक, आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए ₹50 लाख तक के बीमा कवर की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य आउटसोर्स कर्मचारियों और उनके परिवारों को कठिन परिस्थितियों में आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है।

इसके अलावा आकस्मिक दवा के लिए ₹5 लाख तक की सहायता का भी उल्लेख किया गया है।

एयर एंबुलेंस के लिए ₹10 लाख तक की सहायता

रिपोर्ट में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए एयर एंबुलेंस के लिए ₹10 लाख तक की सहायता का भी प्रावधान बताया गया है। यानी गंभीर परिस्थितियों में एयर एंबुलेंस से संबंधित खर्च के लिए निर्धारित व्यवस्था के तहत सहायता उपलब्ध कराने की बात कही गई है।

यूपीकोस के जरिए लागू होगी नई व्यवस्था

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (यूपीकोस) की वेबसाइट और पोर्टल लॉन्च किया। इसी अवसर पर निगम के लोगो का अनावरण किया गया और आउटसोर्स कर्मचारियों को चेक भी वितरित किए गए।

कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक भी मौजूद रहे।

कर्मचारियों का बनेगा एकीकृत डिजिटल रिकॉर्ड

यूपीकोस के माध्यम से प्रदेश के अलग-अलग सरकारी विभागों में आउटसोर्स के जरिए काम कर रहे कर्मचारियों का एकीकृत रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। अभी कर्मचारियों से संबंधित जानकारी अलग-अलग विभागों और आउटसोर्स एजेंसियों के स्तर पर रखी जाती है।

नई व्यवस्था में कर्मचारी की भर्ती, तैनाती, उपस्थिति और भुगतान से संबंधित जानकारी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दर्ज की जाएगी। इससे यह जानकारी एक जगह उपलब्ध हो सकेगी कि कौन कर्मचारी किस विभाग में काम कर रहा है और उसे कितना भुगतान किया जा रहा है।

भुगतान और तैनाती की निगरानी होगी आसान

रिपोर्ट के अनुसार, नई डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद आउटसोर्स कर्मचारियों के भुगतान और तैनाती की प्रक्रिया पर निगरानी आसान होगी। किसी कर्मचारी के रिकॉर्ड, भुगतान या तैनाती से जुड़ी जानकारी की जरूरत होने पर उसे एक ही प्लेटफॉर्म से देखा जा सकेगा।

इससे अलग-अलग एजेंसियों के माध्यम से होने वाली प्रक्रिया में गड़बड़ी की संभावना कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

सैलरी में भी ₹7 हजार तक बढ़ोतरी

इस पूरी पहल के साथ आउटसोर्स कर्मचारियों की सैलरी में ₹7 हजार तक की बढ़ोतरी की जानकारी भी रिपोर्ट में दी गई है। यानी नई व्यवस्था में केवल डिजिटल रिकॉर्ड ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों के वेतन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को भी शामिल किया गया है।

स्रोत: अमर उजाला, लखनऊ ब्यूरो की 2 सितंबर 2026 की रिपोर्ट।

डिस्क्लेमर: बीमा, दवा और एयर एंबुलेंस सहायता से संबंधित विवरण उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट के आधार पर दिए गए हैं। वास्तविक पात्रता, कवरेज, शर्तें और भुगतान की प्रक्रिया संबंधित सरकारी नियमों/आदेशों के अनुसार निर्धारित होगी।

EPFO Pension Calculation: ₹20,000 बेसिक सैलरी पर 10 और 20 साल की नौकरी के बाद कितनी पेंशन? जानिए पूरा हिसाबनई दिल्ली | 2...
02/09/2026

EPFO Pension Calculation: ₹20,000 बेसिक सैलरी पर 10 और 20 साल की नौकरी के बाद कितनी पेंशन? जानिए पूरा हिसाब

नई दिल्ली | 2 सितंबर 2026

प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए EPS के तहत पेंशन की गणना को लेकर अक्सर सवाल रहता है कि तय सेवा अवधि और वेतन के आधार पर रिटायरमेंट के बाद कितनी मासिक पेंशन मिल सकती है। Zee Business की रिपोर्ट में ₹20,000 की पेंशन योग्य सैलरी को उदाहरण मानकर इसका गणित समझाया गया है।

10 साल की सेवा पर कितना बनेगा?

रिपोर्ट में दिए गए उदाहरण के अनुसार, यदि पेंशन योग्य वेतन ₹20,000 और पेंशन योग्य सेवा 10 साल मानी जाए, तो फॉर्मूले के आधार पर:

₹20,000 × 10 ÷ 70 = करीब ₹2,857 प्रति माह

वहीं, 20 साल की पेंशन योग्य सेवा पर:

₹20,000 × 20 ÷ 70 = करीब ₹5,714 प्रति माह

हालांकि, यह केवल उदाहरण आधारित गणना है। वास्तविक पेंशन पेंशन योग्य वेतन, सेवा अवधि और लागू EPS नियमों के आधार पर तय होती है।

पेंशन का फॉर्मूला क्या है?

रिपोर्ट में EPS के लिए यह फॉर्मूला बताया गया है:

मासिक पेंशन = (पेंशन योग्य वेतन × पेंशन योग्य सेवा) ÷ 70

यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि सामान्य EPS व्यवस्था में पेंशन योग्य वेतन की सीमा और उच्च वेतन पर पेंशन के नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए ₹20,000 की पूरी राशि को हर कर्मचारी के मामले में सीधे पेंशन योग्य वेतन मान लेना सही नहीं होगा।

कितने साल की सेवा जरूरी?

नियमों के अनुसार नियमित मासिक EPS पेंशन के लिए आम तौर पर कम से कम 10 साल की पेंशन योग्य सेवा जरूरी होती है। 58 वर्ष की आयु पर सामान्य पेंशन शुरू होती है, जबकि निर्धारित शर्तों के तहत 50 वर्ष के बाद कम पेंशन के साथ शुरुआती पेंशन का विकल्प हो सकता है।

अगर सेवा अवधि 10 साल से कम है, तो सामान्यतः मासिक पेंशन का अधिकार नहीं बनता और परिस्थितियों के अनुसार स्कीम सर्टिफिकेट या निकासी लाभ जैसे विकल्प लागू हो सकते हैं।

₹1,000 न्यूनतम पेंशन का क्या मतलब?

EPS में पात्र पेंशनभोगियों के लिए न्यूनतम मासिक पेंशन का प्रावधान भी है। इसलिए केवल फॉर्मूले से कम राशि आने पर भी लागू न्यूनतम पेंशन नियम महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

कर्मचारियों के लिए जरूरी सावधानी

₹20,000 बेसिक पर ₹2,857 या ₹5,714 पेंशन मिलने का दावा सभी कर्मचारियों पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता। पेंशन की वास्तविक गणना में पेंशन योग्य वेतन की सीमा, सेवा अवधि और कर्मचारी की EPS पात्रता जैसे नियम महत्वपूर्ण हैं।

स्रोत: Zee Business की 1 सितंबर 2026 की रिपोर्ट।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट के आधार पर दी गई है। वास्तविक पेंशन की राशि के लिए EPFO के लागू नियम और कर्मचारी का रिकॉर्ड ही अंतिम आधार होगा।

8वां वेतन आयोग: ₹14.10 लाख तक एरियर का अनुमान, Level-4 से Level-7 कर्मचारियों को मिल सकता है बड़ा फायदानई दिल्ली | 2 सित...
02/09/2026

8वां वेतन आयोग: ₹14.10 लाख तक एरियर का अनुमान, Level-4 से Level-7 कर्मचारियों को मिल सकता है बड़ा फायदा

नई दिल्ली | 2 सितंबर 2026

केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स को 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट का बेसब्री से इंतजार है। अभी आयोग की रिपोर्ट सामने नहीं आई है और इसके बाद ही वेतन संशोधन को लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। ऐसे में कर्मचारियों को वास्तविक लाभ और एरियर की राशि के लिए सरकार के आधिकारिक फैसले का इंतजार करना होगा।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यदि 2.57 के फिटमेंट फैक्टर और वेतन आयोग के लागू होने में करीब 20 महीने की संभावित देरी को आधार माना जाए, तो Level-4 से Level-7 तक के कुछ केंद्रीय कर्मचारियों के लिए एरियर लाखों रुपये तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है।

₹14.10 लाख एरियर का कैसे निकाला गया अनुमान?

रिपोर्ट में दिए गए उदाहरण के अनुसार, यदि किसी कर्मचारी की 7वें वेतन आयोग के तहत बेसिक पे ₹44,900 है और 8वें वेतन आयोग में यह अनुमानित रूप से ₹1,15,393 हो जाती है, तो दोनों के बीच अंतर होगा—

₹1,15,393 - ₹44,900 = ₹70,493 प्रति माह

यदि 20 महीने का एरियर मान लिया जाए तो—

₹70,493 × 20 = ₹14,09,860

यानी करीब ₹14.10 लाख का एरियर बन सकता है।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ₹14.10 लाख कोई घोषित या स्वीकृत एरियर राशि नहीं है, बल्कि रिपोर्ट में दिए गए अनुमान और संभावित गणना पर आधारित आंकड़ा है।

किन कर्मचारियों को कितना एरियर?

रिपोर्ट में 2.57 फिटमेंट फैक्टर और 20 महीने की संभावित देरी के आधार पर अनुमान इस प्रकार बताया गया है:

Level-7: करीब ₹14.10 लाख तक

Level-6: करीब ₹11.11 लाख

Level-5: करीब ₹9.13 लाख

Level-4: करीब ₹8 लाख

एरियर में HRA और TA भी शामिल होंगे?

एरियर की गणना को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वेतन संशोधन के एरियर में बेसिक पे के अंतर को आधार माना जाता है। कुल ग्रॉस सैलरी में शामिल HRA, TA और अन्य भत्तों को उसी तरह जोड़कर एरियर निकालना जरूरी नहीं है।

इसलिए किसी कर्मचारी का वास्तविक एरियर उसके पे लेवल, संशोधित बेसिक पे, फिटमेंट फैक्टर, प्रभावी तारीख और सरकार द्वारा तय किए गए एरियर के भुगतान की अवधि पर निर्भर करेगा।

अभी क्या स्थिति है?

फिलहाल 8वें वेतन आयोग की अंतिम रिपोर्ट सामने नहीं आई है। इसलिए फिटमेंट फैक्टर, नई बेसिक पे, एरियर की अवधि और वास्तविक भुगतान को लेकर अंतिम तस्वीर सरकार और आयोग के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी।

साफ शब्दों में कहें तो ₹14.10 लाख तक एरियर का आंकड़ा अभी एक अनुमान है, सरकारी घोषणा नहीं। कर्मचारियों को किसी भी वायरल दावे को अंतिम फैसला मानने से पहले आधिकारिक आदेश का इंतजार करना चाहिए।

स्रोत: 1 सितंबर 2026 को प्रकाशित ABP नेटवर्क की रिपोर्ट के आधार पर।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट और उसमें दिए गए अनुमान पर आधारित है। एरियर की वास्तविक राशि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों और केंद्र सरकार के अंतिम निर्णय के बाद ही तय होगी।

यूपी के साढ़े तीन लाख आउटसोर्स कर्मचारियों को बड़ी सौगात, सैलरी में ₹7 हजार तक की बढ़ोतरी; बीमा और डिजिटल रिकॉर्ड की भी ...
02/09/2026

यूपी के साढ़े तीन लाख आउटसोर्स कर्मचारियों को बड़ी सौगात, सैलरी में ₹7 हजार तक की बढ़ोतरी; बीमा और डिजिटल रिकॉर्ड की भी व्यवस्था

लखनऊ | 2 सितंबर 2026

उत्तर प्रदेश के करीब साढ़े तीन लाख आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए योगी सरकार ने बड़ी पहल की है। रिपोर्ट के अनुसार, आउटसोर्स कर्मचारियों की सैलरी में 7 हजार रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है। इसके साथ ही कर्मचारियों की भर्ती, तैनाती, उपस्थिति और भुगतान से जुड़ी पूरी व्यवस्था को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की तैयारी की गई है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (यूपीकोस) की वेबसाइट और पोर्टल लॉन्च किया। इसी कार्यक्रम में निगम के लोगो का भी अनावरण किया गया और आउटसोर्स कर्मचारियों को चेक वितरित किए गए। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक भी मौजूद रहे।

सैलरी में ₹7 हजार तक बढ़ोतरी

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश के साढ़े तीन लाख आउटसोर्स कर्मचारियों की सैलरी में ₹7,000 तक की बढ़ोतरी की गई है। इसके अलावा कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सुविधाओं को भी मजबूत करने की बात सामने आई है।

कर्मचारियों को ₹50 लाख तक का बीमा कवर देने की व्यवस्था बताई गई है। इसके अलावा आकस्मिक दवा के लिए ₹5 लाख और एयर एंबुलेंस के लिए ₹10 लाख तक की सहायता का भी उल्लेख रिपोर्ट में किया गया है।

यूपीकोस के जरिए बनेगा एकीकृत रिकॉर्ड

नई व्यवस्था में प्रदेश के अलग-अलग सरकारी विभागों में आउटसोर्स के माध्यम से काम कर रहे कर्मचारियों का एकीकृत रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।

अभी कर्मचारियों से जुड़ी जानकारी अलग-अलग विभागों और आउटसोर्स एजेंसियों के स्तर पर रखी जाती है। नई व्यवस्था में इस जानकारी को एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा।

यूपीकोस के पोर्टल पर कर्मचारी की भर्ती, तैनाती, उपस्थिति और भुगतान से जुड़ी जानकारी दर्ज की जाएगी। इससे यह पता लगाना आसान होगा कि किस विभाग में कितने आउटसोर्स कर्मचारी काम कर रहे हैं और उन्हें कितना भुगतान किया जा रहा है।

सेवा से जुड़ा रिकॉर्ड भी रहेगा डिजिटल

नई व्यवस्था में कर्मचारियों की सेवा से संबंधित रिकॉर्ड भी डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेगा। इससे किसी कर्मचारी के रिकॉर्ड, भुगतान या तैनाती से जुड़ी जानकारी की जरूरत पड़ने पर उसे एक ही जगह से देखा जा सकेगा।

रिपोर्ट के अनुसार, व्यवस्था लागू होने के बाद आउटसोर्स कर्मचारियों के भुगतान और तैनाती की प्रक्रिया पर निगरानी आसान होगी। अलग-अलग एजेंसियों के माध्यम से होने वाली प्रक्रिया में गड़बड़ी की गुंजाइश कम करने में भी इससे मदद मिलने की उम्मीद है।

भर्ती और भुगतान की प्रक्रिया पर पड़ेगा सीधा असर

प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में बड़ी संख्या में कर्मचारी आउटसोर्स के माध्यम से काम कर रहे हैं। नई व्यवस्था का सीधा असर इन कर्मचारियों की भर्ती, सेवा और भुगतान से जुड़ी प्रक्रिया पर पड़ेगा।

यूपीकोस के माध्यम से कर्मचारियों का रिकॉर्ड एक जगह उपलब्ध होने से सरकार के लिए यह देखना आसान होगा कि कौन कर्मचारी किस विभाग में तैनात है, उसकी उपस्थिति क्या है और उसके भुगतान से जुड़ी स्थिति क्या है।

क्या है इस पूरी पहल का उद्देश्य?

इस व्यवस्था के जरिए आउटसोर्स कर्मचारियों से जुड़ी जानकारी को अलग-अलग विभागों और एजेंसियों में बिखरे रहने के बजाय एकीकृत डिजिटल सिस्टम में लाने की कोशिश की गई है। इससे कर्मचारियों की सेवा और भुगतान संबंधी जानकारी को व्यवस्थित करने तथा निगरानी को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

स्रोत: अमर उजाला, लखनऊ ब्यूरो की 2 सितंबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के आधार पर।

डिस्क्लेमर: इस खबर में वेतन बढ़ोतरी, बीमा और अन्य सुविधाओं से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई गई मीडिया रिपोर्ट के अनुसार लिखी गई है। वास्तविक लाभ और पात्रता संबंधित सरकारी आदेश/नियमों के अनुसार निर्धारित होंगे।

हिमाचल में सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति फाइलें अब नहीं अटकेंगी, सरकार ने कसा शिकंजा; नियमों की होगी समीक्षाहिमाचल प्रद...
02/09/2026

हिमाचल में सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति फाइलें अब नहीं अटकेंगी, सरकार ने कसा शिकंजा; नियमों की होगी समीक्षा

हिमाचल प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया को तेज और व्यवस्थित करने के लिए सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। पदोन्नति के लिए भेजी जाने वाली अधूरी विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) फाइलों और बार-बार सामने आने वाली कमियों को देखते हुए कार्मिक विभाग ने सभी प्रशासनिक सचिवों को प्रक्रिया में सुधार के निर्देश दिए हैं। अब DPC के प्रस्ताव पूरी तैयारी और निर्धारित चेकलिस्ट के साथ ही हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग (HPPSC) को भेजने होंगे। यह जानकारी [दैनिक जागरण की रिपोर्ट]() के आधार पर है।

नियमों की समीक्षा के निर्देश

सरकार ने पदोन्नति की पात्रता में एकरूपता लाने के लिए केंद्र सरकार के कार्मिक विभाग की व्यवस्था के अनुरूप प्रत्येक भर्ती वर्ष के लिए 1 जनवरी को क्रुशियल डेट मानने के निर्देश दिए हैं।

इसके साथ ही 1980 और 1990 के दशक से चले आ रहे भर्ती एवं पदोन्नति (R&P) नियमों की भी समीक्षा की जाएगी। जो नियम वर्तमान समय में अप्रासंगिक हो चुके हैं, उनमें संशोधन करने या उन्हें समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।

अधूरी DPC फाइलों से बढ़ रही थी देरी

सरकार के संज्ञान में आया है कि कई विभाग निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार DPC प्रस्ताव नहीं भेज रहे हैं। आयोग के पास पहुंचने वाली कई फाइलों में APAR सहित जरूरी दस्तावेजों की कमियां पाई जाती हैं।

इन कमियों के कारण फाइलें बार-बार विभागों को वापस भेजनी पड़ती हैं और पदोन्नति की प्रक्रिया लंबी खिंच जाती है। कई मामलों में पात्र अधिकारी और कर्मचारी पदोन्नति का लाभ लिए बिना ही सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इससे कर्मचारियों में असंतोष के साथ मुकदमेबाजी भी बढ़ रही है।

मौके पर ही होगी फाइलों की जांच

नई व्यवस्था के तहत संबंधित प्रशासनिक विभाग का अनुभाग अधिकारी या उससे वरिष्ठ अधिकारी DPC प्रस्ताव को आयोग के सर्विस सेक्शन में हाथोंहाथ जमा कराएगा।

आयोग में प्रस्ताव की मौके पर ही जांच की जाएगी। यदि चेकलिस्ट के अनुसार जरूरी दस्तावेज पूरे नहीं पाए गए तो फाइल वहीं वापस की जा सकेगी। इसका उद्देश्य अधूरी फाइलों को बार-बार विभाग और आयोग के बीच भेजे जाने में लगने वाला समय बचाना है।

एक साल की रिक्तियों का एक ही प्रस्ताव

सरकार ने एक ही कैलेंडर वर्ष की रिक्तियों के लिए अलग-अलग DPC प्रस्ताव भेजने की प्रवृत्ति पर भी रोक लगाने की तैयारी की है। अब संबंधित वर्ष की सभी रिक्तियों का एक समेकित प्रस्ताव भेजने पर जोर रहेगा।

सरकार का उद्देश्य पदोन्नति प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है, ताकि पात्र कर्मचारियों को पदोन्नति के लिए लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े।

स्रोत: दैनिक जागरण की 30 अगस्त 2026 की रिपोर्ट।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट में दी गई जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। इसमें किसी नए सरकारी आदेश या अंतिम निर्णय का दावा नहीं किया जा रहा है। अंतिम स्थिति संबंधित विभाग के आधिकारिक आदेश/अधिसूचना से ही स्पष्ट होगी।

हिमाचल के पेंशनरों के मुद्दे पर बोले राजीव बिंदल—“30-40 साल सेवा करने वालों को उम्र के इस पड़ाव पर तरसाना सही नहीं”शिमला...
02/09/2026

हिमाचल के पेंशनरों के मुद्दे पर बोले राजीव बिंदल—“30-40 साल सेवा करने वालों को उम्र के इस पड़ाव पर तरसाना सही नहीं”

शिमला | दिव्य हिमाचल ब्यूरो अनुसार

हिमाचल प्रदेश में पेंशनरों के लंबित वित्तीय लाभों को लेकर सियासत तेज हो गई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों की स्थिति को लेकर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जिन कर्मचारियों ने अपने जीवन के 30 से 40 वर्ष हिमाचल प्रदेश की सेवा में लगाए, उन्हें उम्र के इस पड़ाव पर अपने अधिकारों और लंबित वित्तीय लाभों के लिए आंदोलन करने को मजबूर होना दुर्भाग्यपूर्ण है।

डॉ. बिंदल ने कहा कि 70, 75, 80 और यहां तक कि 90 वर्ष की उम्र के बुजुर्ग पेंशनरों को अपने पेंशनरी लाभों के लिए घरों से निकलकर धरने-प्रदर्शन करने पड़ रहे हैं। उनके अनुसार, यह स्थिति सरकार के लिए चिंता का विषय है।

विधानसभा घेराव और शिमला में प्रदर्शन का जिक्र

उन्होंने दावा किया कि धर्मशाला में करीब 8,000 सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने विधानसभा का घेराव किया था। इसके अलावा प्रदेश के अलग-अलग जिलों में भी लगातार धरने-प्रदर्शन किए गए हैं। अब हजारों सेवानिवृत्त कर्मचारी शिमला पहुंचकर विधानसभा के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं।

बिंदल के मुताबिक, लाहौल-स्पीति, किन्नौर, चंबा और कांगड़ा सहित प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों से भी बुजुर्ग कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर शिमला पहुंच रहे हैं।

इन वित्तीय लाभों के लंबित होने का दावा

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पेंशनरों के कई वित्तीय लाभ लंबित हैं। इनमें प्रमुख रूप से—

15 प्रतिशत एरियर

डीए

ग्रेच्युटी

लीव एनकैशमेंट

कम्यूटेशन

पे एरियर

पेंशनरी लाभ

मेडिकल बिलों की रिइम्बर्समेंट

जैसे मुद्दे शामिल हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि इन देनदारियों के लंबित रहने से प्रभावित सेवानिवृत्त कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। साथ ही मेडिकल बिलों की प्रतिपूर्ति को लेकर भी पेंशनरों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

डॉ. बिंदल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार पेंशनरों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय बयानबाजी में लगी हुई है। उन्होंने कहा कि दशकों तक प्रदेश की सेवा करने वाले कर्मचारियों को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ना उचित नहीं है।

हालांकि, ये आरोप भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल द्वारा लगाए गए हैं। सरकार की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया या प्रत्येक लंबित लाभ के भुगतान को लेकर स्थिति अलग-अलग हो सकती है।

स्रोत: दिव्य हिमाचल की प्रकाशित रिपोर्ट।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट के आधार पर तैयार की गई है। इसमें दिए गए राजनीतिक आरोप संबंधित नेता के बयान पर आधारित हैं; इन्हें सरकार का आधिकारिक पक्ष न माना जाए।

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