21/08/2026
कांग्रेस नेता सज्जन कुमार की मृत्यु हो गई है, वो पहले से ही जेल में थे। सज्जन कुमार, यानी सिख नरसंहार का वो बदनाम चेहरा जो अंत तक गाँधी परिवार के दुलारे रहे।
राज नगर में एक ही सिख परिवार के 5 लोगों की हत्या करके गुरुद्वारा जला दिया गया था। उसी रात उन्होंने राज नगर पहुँचकर अपने कार्यकर्ताओं को डाँटा था, क्योंकि उनकी नज़र में काम ठीक से पूरा नहीं हुआ था। उनका स्पष्ट आदेश था कि उन हिन्दुओं को भी न छोड़ा जाए, जो सिखों को अपने घरों में शरण दे रहे हैं।
सरस्वती विहार में एक सिख पिता-पुत्र को घर से खींचकर पिटाई करने के बाद पेट्रोल डालकर ज़िंदा जला दिया गया। उस भीड़ का नेतृत्व सज्जन कुमार ही कर रहे थे। फिर घर का सामान लूटा गया और घर को भी आग के हवाले कर दिया गया। कुछ महिलाओं ने पिता-पुत्र को बचाने की कोशिश की, उनकी हड्डियाँ तोड़ डाली गई थीं। मंगोलपुरी में एक भाषण में उन्होंने कहा कि एक भी सिख जीवित नहीं बचना चाहिए। इसी तरह, चाँद नगर में भारतीय सेना के एक कैप्टन को ज़िंदा जला दिया गया। उसी क्षेत्र में स्थित गुरुद्वारे में गुरुग्रंथसाहिब जलाया गया, फिर गुरुद्वारे को आग के हवाले कर दिया गया।
सज्जन कुमार ये सब इसीलिए कर रहे थे, क्योंकि उनके अनुसार सिखों ने उनकी 'माता' को मार डाला था। मंगोलपुरी में ही एक जगह तीन अन्य सिखों को ज़िंदा जलाया गया था। एक महिला के पति, बेटे और भतीजे की हत्या करके शव जला दिए गए। इतना ही नहीं, सज्जन कुमार सिखों की हत्या पर हजारों रुपए के इनाम भी जारी कर रहे थे। एक 22 युवक को पीटा गया, उसके गले में मिट्टी के तेल से भीगा टायर डाला गया और उसे जिंदा जला दिया गया। फिर उसका घर नष्ट कर दिया गया। तेल के कनस्तर, लोहे की छड़ें और टायर लेकर आई इस भीड़ के नेतृत्वकर्ता सज्जन कुमार ही थे। एक महिला के 21 और 18 वर्ष के दो जवान बेटों को उसके सामने घर से घसीटकर ज़िंदा जला दिया गया।
सज्जन कुमार का ध्येयवाक्य था - "केवल लूटपाट में समय न गँवाओ, सिखों को मारो।" एक अन्य व्यक्ति को उसकी पत्नी के सामने घर से घसीटकर सड़क पर लाठियों से पीटा गया, फिर जीवित जला दिया गया। उसके बाद जमकर घर की डकैती हुई, फिर घर भी फूँक डाला गया।
मटियाला और नवादा में तो बाज़ाब्ता कांग्रेस के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं की बैठक ली उन्होंने, ताकि सिख नरसंहार का आदेश दे सकें। कई शिकायतें तो पुलिस में दर्ज ही नहीं हो सकीं। सुल्तानपुरी में तो उन्होंने सिखों को मारने के लिए 72 घंटे का समय दिया था कांग्रेसियों को, वहाँ भी एक व्यक्ति को ज़िंदा जलाया गया उनकी देखरेख में।