28/02/2026
ग़ज़ा में जब मासूमों की चीखें गूंज रही हैं…
घर मलबे में बदल रहे हैं…
बच्चे, औरतें, बेगुनाह लोग अपनी जान बचाने की कोशिश कर रहे हैं…
ऐसे वक़्त में जब पूरी दुनिया इंसानियत की बात कर रही है,
तस्वीर सामने आती है — भारत के प्रधानमंत्री का Narendra Modi इज़राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu से गले मिलना।
सवाल उठना लाज़मी है।
प्रधानमंत्री जी,
क्या भारत की विदेश नीति अब इंसानियत से ऊपर हो गई है?
क्या ग़ज़ा में हो रही तबाही पर हमारी कोई नैतिक जिम्मेदारी नहीं?
क्या हम सिर्फ रणनीतिक दोस्ती देखेंगे, या इंसानी जज़्बात भी मायने रखते हैं?
भारत हमेशा से शांति, संवाद और न्याय की बात करने वाला देश रहा है।
हमारी पहचान महात्मा गांधी की अहिंसा से है,
न कि युद्ध और खामोशी से।
आज देश जानना चाहता है —
क्या हम पीड़ितों के साथ खड़े हैं
या सिर्फ ताकतवरों के साथ तस्वीरें खिंचवा रहे हैं?
ये सवाल किसी एक दल का नहीं,
ये सवाल इंसानियत का है।
अगर आप भी मानते हैं कि इंसाफ़ और शांति पर खुलकर बात होनी चाहिए,