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16/02/2026

Ek ajeeb raja jo aadha tha… lekin uska hausla poora tha! 👑✨
Yeh kahani sikhati hai ki kami sharir me ho sakti hai, par himmat aur vishwas kabhi aadhe nahi hote 💪❤️
Bachchon aur family ke liye ek zabardast moral story jo dil ko chhoo jaayegi.
Agar aapko kahani pasand aaye to Like 👍 Share 🔁 aur Follow jarur kare Rangin Duniya ko aur bhi mazedaar kahaniyon ke liye!



04/02/2026

04/02/2026

23/12/2025

क्या आप जानते हैं उस राजा के बारे में
जिसने कभी झुकना नहीं सीखा?
यह है वीर महाराणा प्रताप की प्रेरणादायक कहानी।
👨‍👩‍👧‍👦 बच्चों और परिवार के लिए विशेष वीडियो
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🙏🙏🚩
18/09/2025

🙏🙏🚩

Jay_Mataji❤️🚩Jay_Bhawani❤️🙏
15/09/2025

Jay_Mataji❤️🚩
Jay_Bhawani❤️🙏

🙏❤️🦁🚩
15/09/2025

🙏❤️🦁🚩

Shivaji Maharaj
05/06/2024

Shivaji Maharaj



Jay Bhawani
27/05/2024

Jay Bhawani

16वीं सदी में जिनसे डरता अफगान था,जिनके आगे सिर झुकाता पूरा जहान था,जिनके गम के साथ लगता महान था,राजपूताना का जो शान थाव...
25/05/2024

16वीं सदी में जिनसे डरता अफगान था,
जिनके आगे सिर झुकाता पूरा जहान था,
जिनके गम के साथ लगता महान था,
राजपूताना का जो शान था
वो कोई और नहीं महाराणा प्रताप थे.
जय राजपूताना 🏹

#पृथ्वीराज_चौहान #महाराणा_प्रताप



कुआ छोड़िए अब बताएं हिंद किसका?⚔  #ठाकुर का है कुँआ खेत, खलिहान,बैल ही नहीं बल्कि 565  #रियासते, 43  #गढ़, 18700  #किले,...
24/05/2024

कुआ छोड़िए अब बताएं हिंद किसका?⚔ #ठाकुर का है
कुँआ खेत, खलिहान,बैल ही नहीं बल्कि 565 #रियासते,
43 #गढ़, 18700 #किले, 40 लाख एकड #जमीन
देकर भारत देश बनाने वाला भी #राजपूत #ठाकुर है
⚔️⚔️⚔️💪💪🚩🚩🚩🚩🚩🗡🗡🗡🗡🗡
क्या यही सुनने के लिए हमने दान और बलिदान दिया था

मैंने भारत की उत्तर दिशा के किवाड़ों को देखा जो पहली बार गजनी के किले में लगाये गये। फिर स्यालकोट और भटनेर में लगाए गए। ...
17/05/2024

मैंने भारत की उत्तर दिशा के किवाड़ों को देखा जो पहली बार गजनी के किले में लगाये गये। फिर स्यालकोट और भटनेर में लगाए गए। फिर केहरोर और तन्नोट गढ़ में लगाये गये। फिर देरावर और भटिंडा में लगाये गये। फिर लुद्रवा और अन्त में जैसलमेर में लगाये गये। मैंने उन किवाड़ों को देखा, उनके तालों को देखा, अर्गला और शूलों को देखा। पराक्रमी विजयराज चूंडाला को देखा, साहसी देवराज को देखा, भोज और जेसल को देखा। मूलराज और रतनसी के चरण कदमों को बालू रेत पर उभरते देखा। जैसलमेर के किले में मूलराज और रतनसी को केसरिया बाना पहने देखा, जौहर की ज्वालाओं को देखा। ज्योंही वे बुझने लगी दूदा और तिलोकसी ने फिर प्रज्वलित की। तीसरी बार लूणकरण ने उसी अग्नि को अतःकरण में समेट कर तीसरा शाका किया। बारह-बारह वर्षों तक चलने वाले संसार के अद्वितीय घेरों को देखा। यमराज से युद्ध करने के लिये वृद्ध चाचकदेव की रणयात्रा देखी। मैंने महारावल घड़सी को देखा। किले को उजड़ते और आबाद होते देखा। सूखी भूमि में नरनाहरों के पुरुषार्थ के पानी को लहराते देखा। मैंने सतियों को देखा, मानिनी ऊमादे भटियाणी को देखा जिसने जीवनपर्यन्त पतिमुख न देखकर अन्त में पतिव्रत धर्म के लिये पति के शव के साथ अग्नि प्रवेश किया। मैंने महारावल अमरसिंह को रोहड़ी के पास लोमहर्षक युद्ध करते देखा और उसी गाँव के पास सतियों की पहाड़ी देखी जिस पर अब भी बुझी हुई ज्वाला धधक रही है और मेरे मुँह से बरबस निकल पड़ा - वाह जैसलमेर ! वाह !!

~ पूज्य श्री तनसिंह जी।



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