22/11/2024
मैं लेटा हुआ था, मेरी पत्नी मेरे सिर को सहला रही थी। उसके कोमल हाथों का स्पर्श मेरे थके हुए मन और शरीर को सुकून दे रहा था। उसकी उंगलियों की हरकतें धीरे-धीरे मेरे माथे पर घूम रही थीं, और मैं अनजाने में ही नींद की गोद में समाने लगा। यह अहसास मुझे एक अजीब सी शांति और सुरक्षा का अनुभव दे रहा था।
मुझे लगा जैसे मैं किसी अदृश्य शक्ति की गोद में था।
जब मेरी आंखें खुलीं, तो मैंने उसे देखा। वह मेरी ओर झुककर, मेरे गले पर विक्स लगा रही थी। उसके चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ झलक रही थीं। उसने मुझे जगते देख हल्की मुस्कान के साथ पूछा, "कुछ आराम मिल रहा है?" उसकी आवाज में इतनी कोमलता और प्यार था कि मैं भावुक हो गया। मैंने धीरे से सिर हिलाया, और मेरी आंखों में पानी आ गया।
वह मेरी कमजोरी को तुरंत भांप गई और बोली, "खाना खाओगे?"
मुझे भूख लगी थी, और मैंने कहा, "हां।" वह तुरंत उठ गई और फटाफट रोटी, सब्जी, दाल, चटनी और सलाद तैयार कर लाई। हर बार की तरह, उसने न सिर्फ खाना बनाया, बल्कि मुझे अपने हाथों से खिलाना भी शुरू कर दिया।
मैं आधा लेटा हुआ था, और वह अपने हाथों से मुझे कौर खिलाती रही। मुझे महसूस हो रहा था कि मैं कोई बच्चा हूं और वह मेरी मां है। मैंने बिना कोई शब्द कहे खाना खाया।
उसका चेहरा संतोष और प्यार से भरा हुआ था। खाना खिलाने के बाद वह चुपचाप रसोई में चली गई।
मैं लेटा रहा, लेकिन नींद नहीं आई। मेरी आंखों के सामने उसका चेहरा घूम रहा था। मैं सोच में पड़ गया। कुछ ही दिन पहले जब वह बीमार थी, मैंने उसके लिए कुछ नहीं किया था। ना ही उसे सहलाया, ना उसका हाल पूछा। बस उसे ब्रेड लाकर थमा दी थी और खुद को यह सोचकर गर्वित महसूस कर रहा था कि मैंने कुछ तो किया।
उसे कितना तेज बुखार था,
मैंने जानने की कोशिश भी नहीं की। वह पूरे दिन बिना कुछ खाए पड़ी रही। शायद वह भी चाहती थी कि कोई उसकी देखभाल करे, उसका हाल पूछे, उसे प्यार से खाना खिलाए। लेकिन मैंने ऐसा कुछ नहीं किया।
यह सोचकर मेरा दिल भारी हो गया।
पत्नी के रूप में उसकी ममता, उसका त्याग, उसकी करुणा को मैं अब तक समझ नहीं पाया था। मैं सोचने लगा कि क्या सचमुच महिलाओं के दिल को भगवान ने अलग बनाया है? क्या पुरुषों में वह करुणा और ममता नहीं होती?
जिस दिन मेरी पत्नी बीमार थी, शायद उसने भी चाहा होगा कि उसका पति उसके पास बैठे, उसकी देखभाल करे, उसके माथे पर हाथ रखकर पूछे कि क्या वह ठीक है।
मैं यह महसूस कर रहा था कि हर पुरुष को एक बार औरत बनकर यह अनुभव करना चाहिए कि औरत होना कितना कठिन है।
मां होना, बहन होना, पत्नी होना कितना कठिन है। यह सिर्फ जिम्मेदारियां नहीं हैं, यह जीवन की सबसे बड़ी परीक्षाएं हैं, जिनमें करुणा और ममता से भरे दिल की जरूरत होती है। 🌹🌹🌹🌹