Insaaf Ki Pukar News

Insaaf Ki Pukar News आप सभी साथियों से निवेदन है कि अपने इस पेज को लाइक और शेयर जरूर करें।

02/06/2026

मनोज तिवारी ढोलक: राहुल गांधी देशद्रोही हैं क्योंकि उन्होंने शुभम शुक्ला के अंतरिक्ष से लौटने के बाद ताली नहीं बजाई थी।

सच: शुभम शुक्ला नाम का कोई आदमी अंतरिक्ष गया ही नहीं। शुभांशु शुक्ला गए थे।
̇nstagram

01/06/2026

*हांसी के लिए दबाई गई स्पेशल पाइपलाइन में चैनत गांव को कनेक्शन नहीं देने से नाराज ग्रामीणों ने आज पाइपलाइन को उखाड़ दिया*

31/05/2026

इसी दरिंदे ने की मासूम की हत्या।
रुह कंपाने वाली वारदात: एकतरफा प्यार में हैवान बनें रिश्तेदार ने डेढ़ साल के मासूम को 8 बार पटका। पुलिस मुठभेड़ के बाद पैर में गोली मारकर दबोचा।😡👆

*भारत में अब चलेंगे प्लास्टिक के नोट? RBI कर रहा तैयारी; जानें इसके बारे में सबकुछ* भारतीय करेंसी नोट पर बड़ा अपडेट आया ...
30/05/2026

*भारत में अब चलेंगे प्लास्टिक के नोट? RBI कर रहा तैयारी; जानें इसके बारे में सबकुछ*

भारतीय करेंसी नोट पर बड़ा अपडेट आया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में करेंसी नोटों की लगातार बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए प्लास्टिक या पॉलीमर नोट छापने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पटना और मुंबई में हुई केंद्रीय बैंक की पिछली दो बोर्ड बैठकों में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई है।

पॉलिमर नोटों की टिकाऊपन और कम उत्पादन लागत के कारण यह निर्णय लिया जा रहा है। ऐसी संभावना है कि आम जनता के लिए प्लास्टिक नोटों के इस्तेमाल का पायलट प्रोजेक्ट जल्द ही शुरू किया जा सकता है।

*प्लास्टिक के नोट कागज के नोटों की जगह क्यों लाए जा रहे?*

इस निर्णय के पीछे मुख्य कारण लागत और नोटों का टिकाऊपन है। RBI सूत्रों के अनुसार, पॉलिमर नोटों की उत्पादन लागत वर्तमान में चल रहे कागज के नोटों की तुलना में काफी कम है। इसके अलावा, भारत तकनीकी रूप से आधुनिक हो चुका है और देश के एटीएम को इन प्लास्टिक नोटों को आसानी से निकालने के लिए अपग्रेड किया जाएगा।

*पुराने और गंदे नोटों को नष्ट करने में क्या दिक्कतें आ रही हैं?*

कागजी नोट ज्यादा साल तक नहीं चल पाते हैं, जिससे वे मूल कागज और गंदे नोटों की तुलना में निम्न गुणवत्ता के होते हैं। आरबीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 (FY25) में ही लगभग ₹23.8 अरब मूल्य के नोट नष्ट किए गए, जो पिछले वर्ष ₹21.24 अरब की तुलना में 12.3 प्रतिशत अधिक है। इनमें सबसे अधिक संख्या ₹500 और ₹100 के नोटो की थी।

इतनी बड़ी मात्रा में करेंसी नोटों को नष्ट करना और नए नोट छापना सरकारी खर्च पर भारी बोझ डालता है। वित्त वर्ष 2024-25 में नोट छापने की लागत ₹6,372.8 करोड़ थी, जो पिछले वर्ष ₹5,101.4 करोड़ की तुलना में काफी अधिक है। प्लास्टिक नोटों की शुरुआत से इस खर्च में काफी कमी आएगी।

*डिजिटल पेमेंट के युग में भी कैश की मांग क्यों बढ़ी?*

देश में यूपीआई और डिजिटल लेनदेन तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन नकदी (कैश) की मांग में कोई बदलाव नहीं आया है। 15 मई तक, बाजार में कुल नकदी (सीआईसी) 11.5 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड ₹42.86 लाख करोड़ के उच्च स्तर पर पहुंच गई। छोटे नोटों (10 और 20 रुपये) की मांग अधिक होने के बावजूद, कुल सीआईसी में उनकी हिस्सेदारी क्रमशः 0.7% और 0.8% है। सरकार ने सिक्कों को बढ़ावा देने का प्रयास किया, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई है।

*2012 का ट्रायल फेल, अब क्या नया बदलाव?*

भारत में प्लास्टिक नोटों पर चर्चा पहली बार नहीं हो रही है। 2012 में, तत्कालीन यूपीए सरकार ने पांच शहरों में परीक्षण के तौर पर 1 अरब प्लास्टिक के 10 रुपये के नोट जारी करने का फैसला किया था। हालांकि, एटीएम और बैंकों में तकनीकी समस्याओं के कारण परियोजना को रोक दिया गया था।

हालांकि, पिछले एक दशक में तकनीक में काफी बदलाव आया है। रिपोर्ट्स का कहना है कि अब एटीएम इन टूल्स से आसानी से पुराने और पुराने तकनीकी छात्रों को आसानी से पहचाना जा सकता है।

*दुनिया में किन देशों में चलते हैं प्लास्टिक नोट?*

पॉलिमर या प्लास्टिक के नोट वर्तमान में लगभग 60 देशों में चल रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया 1988 में प्लास्टिक का 10 डॉलर का नोट जारी करने वाला पहला देश था। सिंगापुर, इंडोनेशिया, थाईलैंड, मलेशिया, रोमानिया और कनाडा जैसे देशों ने भी बाद में इन्हें अपना लिया। वहीं, अमेरिकी डॉलर अभी भी कपास और लिनन के विशेष मिश्रण से बनाया जाता है।

29/05/2026

यहीं पर अभिनय सर ने पूरे नैरेटिव की पोल खोल दी 🔥

शालिनी: क्या भारत सच में ताकतवर बन रहा है?

अभिनय सर: हमारे ज़माने का सबसे बड़ा पाखंड। हम कहते हैं कि हम भगवान राम को ले आए, लेकिन ट्रंप की इजाज़त के बिना रूस से तेल भी नहीं ला सकते।

शालिनी: सरकार कहती है कि पहले के प्रधानमंत्रियों पर भी इस बात का दबाव था कि भारत क्या खरीद सकता है।

अभिनय सर: मेरे पिता मुझे नए कपड़े देने से सिर्फ इसलिए मना नहीं कर सकते, क्योंकि उनके पिता को कभी वे कपड़े नहीं मिले थे।

शालिनी: लेकिन मनमोहन सिंह को तो 'खामोश प्रधानमंत्री' कहा जाता था।

अभिनय सर: उस आदमी ने 170 प्रेस कॉन्फ्रेंस की थीं। हमारे प्रधानमंत्री ने तो एक भी नहीं की। लोग इस पर नाराज़ भी क्यों नहीं हैं?

*ताइवान ने स्टॉक मार्केट वैल्युएशन के मामले में भारत को पीछे छोड़ दिया है. अब ताइवान का शेयर बाज़ार दुनिया का पाँचवाँ सब...
29/05/2026

*ताइवान ने स्टॉक मार्केट वैल्युएशन के मामले में भारत को पीछे छोड़ दिया है. अब ताइवान का शेयर बाज़ार दुनिया का पाँचवाँ सबसे बड़ा बाज़ार बन गया है. इसे ऐसे भी देखा जा सकता है कि 4.15 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था वाले भारत को 977 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था वाले ताइवान ने पीछे छोड़ दिया है*

*खाद का संकट सामने है, समझदार देश प्रबंध करने में जुटे हैं**चौथी फेल सरेंडर मोदी ने किसानों को कम खाद प्रयोग करने की सला...
29/05/2026

*खाद का संकट सामने है, समझदार देश प्रबंध करने में जुटे हैं*

*चौथी फेल सरेंडर मोदी ने किसानों को कम खाद प्रयोग करने की सलाह देकर झोला उठा लिया है*

27/05/2026

मैं 35-40 रुपए में पूरे ह‍िंदुस्‍तान को डीजल पेट्रोल दे दूंगा, अगर मोदी सरकार मुझे पेट्रोल पंप लगाने की अनुमत‍ि दे। reelsviralfb short shorts shortsvideos viral viralreelsシ

26/05/2026

ॐ गणानां त्वा गणपतिं हवामहे प्रियाणां त्वा प्रियपतिं हवामहे निधीनां त्वा निधिपतिं हवामहे वसो मम।आहमजानि गर्भधमा त्वमजासि गर्भधम्॥"मंत्र का अर्थइस मंत्र में भगवान गणेश (गणपति) के विभिन्न रूपों की स्तुति की गई है:गणानां त्वा गणपतिं हवामहे: हे गणपति! हम सभी गणों (देवताओं, भूतों और मनुष्यों के समूह) के स्वामी का आह्वान करते हैं।प्रियाणां त्वा प्रियपतिं हवामहे: हम सभी प्रिय वस्तुओं और प्रियजनों के रक्षक/स्वामी का आह्वान करते हैं।निधीनां त्वा निधिपतिं हवामहे: हम सभी निधियों (संपदा, ज्ञान और सुखों) के स्वामी का आह्वान करते हैं।वसो मम आहमजानि गर्भधमा त्वमजासि गर्भधम्: आप हमें बुद्धि, ज्ञान, और श्रेष्ठ संतान (गर्भधम) प्रदान करें, जिससे हमारे ज्ञान और जीवन का विस्तार हो।

26/05/2026

मोदी सरकार तेल कंपनियों के घाटे का रोना रो रही है, लेकिन सच क्या है जान लीजिए 👇

अमेर‍िका-ईरान युद्ध के बीच तेल कंपनियों ने जमकर मुनाफा कमाया है। जनवरी से मार्च 2026 में देश की तीन बड़ी तेल कंपनियों का कुल मुनाफा 41% रहा।

• IOC: 11,377.51 करोड़ रुपए
• HPCL: 4,901.50 करोड़ रुपए
• BPCL: 3,191 करोड़ रुपए
--------------------------
कुल मुनाफा: 19,470 करोड़ रुपए
--------------------------

मतलब साफ है - मोदी सरकार चाहे तो आपको महंगाई से राहत दे सकती है, तेल के दाम घटा सकती है।

लेकिन वो आज भी बड़ी बेशर्मी के साथ वैश्विक संकट का बहाना दे रही है.. तेल की कीमतें बढ़ा रही है.. आपकी जेब काट रही है।

नरेंद्र मोदी ने ठान लिया है- कुछ भी हो जाए जनता पर महंगाई का हंटर चलाते रहना है और उनके पैसों पर मौज उड़ाते रहना है।

Address

Hisar
125052

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Insaaf Ki Pukar News posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share