22/01/2026
हरियाणा के रोहतास खिलेरी बिश्नोई बने भारत के नए ‘माउंटेन आयरनमैन’**
राहुल हिंदुस्तानी | संपादक, राजधानी चौपाल
हरियाणा के हिसार जिले के गांव मलापुर से निकला एक युवा आज भारत के पर्वतारोहण इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज हो चुका है।
रोहतास खिलेरी बिश्नोई—वह नाम जो अब दुनिया के सबसे कठिन पर्वत अभियानों में ‘असंभव’ को ‘संभव’ में बदलने का प्रतीक बन गया है।
माउंट एल्ब्रुस को समर व विंटर दोनों सीजन में फतह करने वाले पहले भारतीय
जहां दुनिया के अनुभवी पर्वतारोही भी यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस (18,510 फीट) को एक बार चढ़ने में महीनों की तैयारी करते हैं, वहीं रोहतास ने इसे समर और विंटर—दोनों सीजन में फतेह कर भारत का परचम बुलंद किया है।
यह उपलब्धि उन्हें उन चुनिंदा पर्वतारोहियों की श्रेणी में लाती है, जो मौसम की चरम कठिनाइयों को चुनौती देकर चोटी पर खड़े होते हैं।
और यही नहीं—रोहतास वह दुनिया के पहले इंसान बने जिन्होंने इस चोटी पर 24 घंटे तक बिना किसी ऑक्सीजन सपोर्ट के ठहरकर इतिहास रचा।
21 मार्च 2021 — जब दुनिया ने पहली बार रोहतास का नाम सुना
यह जज़्बा नया नहीं।
पहले ही रोहतास बिश्नोई 21 मार्च 2021 को माउंट किलिमंजारो पर 24 घंटे लगातार ठहरने वाले दुनिया के पहले पर्वतारोही बन चुके हैं।
उस समय भी वैज्ञानिकों और पर्वत विशेषज्ञों ने उनके धैर्य, फिटनेस और मानसिक मजबूती को “अविश्वसनीय” बताया था।
बिश्नोई समाज की सौंधी मिट्टी से उभरा लौह-इच्छाशक्ति वाला युवा
रोहतास बिश्नोई समाज से संबंध रखते हैं—एक ऐसा समाज जो प्रकृति, जीव-जंतुओं और पर्यावरण की रक्षा को जीवन का धर्म मानता है।
यही वजह है कि रोहतास न सिर्फ एक पर्वतारोही हैं, बल्कि पूरी तरह शुद्ध शाकाहारी एथलीट भी हैं।
साहस, संयम और अनुशासन—ये तीनों गुण उनके हर अभियान में साफ दिखाई देते हैं।
8 साल का संघर्ष, तपस्या और आत्मविश्वास
रोहतास बताते हैं कि यह सफलता एक दिन में नहीं मिली।
इसमें लगी है—
• बरसों की कड़ी मेहनत
• बर्फ, हवा और अकेलेपन से लड़ाई
• और अपने ऊपर अटूट विश्वास
वे कहते हैं—
“कभी मत सोचो कि आपका गांव छोटा है या शुरुआत कमजोर। सिर्फ सपने बड़े रखो और खुद को आज़माने की हिम्मत रखो।”
हरियाणा का गौरव—भारत का गर्व
मलापुर गांव के लोग आज गर्व से कहते हैं—
“रोहतास ने हरियाणा के युवा की क्षमता दुनिया को दिखा दी।”
भारतीय पर्वतारोहण जगत में रोहतास अब सिर्फ एक नाम नहीं—एक मिसाल हैं, एक प्रेरणा हैं।
राजधानी चौपाल की ओर से सलाम
हमारा अखबार ऐसे युवाओं को सलाम करता है, जो देश का नाम रोशन करने के लिए अपनी जान की बाज़ी तक लगा देते हैं।
रोहतास खिलेरी बिश्नोई—आपकी इस उपलब्धि ने हर भारतीय सीना चौड़ा कर दिया है।
आपने साबित कर दिया—
“हवा चाहे कितनी भी तेज़ हो, हौसले उससे हमेशा ऊंचे होते हैं।”