23/05/2021
यह कैसा न्याय है यह कैसी सोच है : रणदीप लोहचब
हिसार ( रणदीप रोड़ / बातों बातों में )
हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा कि हमने करोना में ड्यूटी पर काम करते समय मरने वाले डॉक्टरों के परिजनों को 50 लाख रुपए तथा पुलिसकर्मियों के परिजनों को 30 लाख रुपए देने की घोषणा की हुई है ।
यदि सफाई कर्मचारी की करोना ड्यूटी पर काम करते समय मृत्यु हो जाती है तो उसके परिजनों को 20 लाख रुपए मुआवजा दिया जाएगा। मृत्यु उपरांत मृतक के परिजनों के साथ यह भेदभाव क्यों है ?
यह कैसा न्याय है? करोना मैं ड्यूटी पर काम करते समय मृत्यु होने पर कोई कर्मचारी चाहे वह डॉक्टर है नर्स है पुलिसकर्मी है चपरासी है चौकीदार है सफाई कर्मी है उसके परिजनों को एक समान राशि देना ही न्याय है ।
मृत्यु उपरांत उन सब के बच्चों को सच्ची सांत्वना उनके दर्द पर मरहम तो तभी होगी जब आप उनकी संतानों से समान व्यवहार करोगे ।
आप भूल रहे हैं कि यह आजाद भारत है यहां लोकतांत्रिक व्यवस्था है, आप अंग्रेज काल के ढर्रे पर चल रहे हैं, अंग्रेज को भारतीयों के प्रति संवेदना नहीं होकर अपनी व्यवस्था बनाए रखने में रुचि थी, इसके लिए उन्होंने सर्विस रूल बनाए थे। आज करोना की बीमारी में काम करते समय अपना जीवन दाव पर लगा रहे कर्मी की मृत्यु उपरांत राशि में कम ज्यादा का भेदभाव कैसा न्याय है ?आपको संवेदनशील होकर सोचना चाहिए कि सबसे कठोर काम सफाई कर्मचारी का है जो मृतक की लाश तक जलाता है उसके परिजनों को आप सबसे कम सहायता राशि दे रहे हैं, यह कैसी सोच है ? यह समय अंग्रेज कालीन बनाए गए सीएसआर पर चलने का नहीं है । नौकरशाही के कहने पर चलने का नहीं है, यह समय अपने मन से उदारता दिखाकर मृतक के परिवार के साथ एक समान व्यवहार करने का है ,जो आप कर सकते हैं, आपको ऐसा करना चाहिए । डॉक्टर हो या पुलिसकर्मी सफाई कर्मचारी हो या नर्स चपरासी हो या चौकीदार करोना बीमारी में काम करते समय मरने वाले सभी कर्मचारियों के परिजनों को आप एक समान राशि दें। यदि आप सफाई कर्मचारी के परिजनों को अतिरिक्त राहत देते हो तो यह एक सराहनीय कदम होगा, क्योंकि सफाई करने का कार्य सबसे मुश्किल काम है ।