01/09/2026
*न चादर बड़ी* कीजिये,
*न ख्वाहिशें दफन* कीजिये,
*चार दिन* की *ज़िन्दगी है,*
बस *चैन से बसर* कीजिये।
*न परेशान* किसी को कीजिये,
*न हैरान* किसी को *कीजिये,*
कोई *लाख गलत* भी *बोले,*
बस *मुस्कुरा कर छोड़* दीजिये।
*न रूठा* किसी से कीजिये,
*न झूठा वादा* किसी से *कीजिये,*
कुछ *फुरसत के पल* निकालिये,
कभी *खुद से भी मिला कीजिये।*