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09/01/2026

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वेनेजुएला इन दिनों पूरी दुनिया में चर्चा में है, क्योंकि यहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को लेकर एक बहुत बड़ा और हैरतअं...
04/01/2026

वेनेजुएला इन दिनों पूरी दुनिया में चर्चा में है, क्योंकि यहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को लेकर एक बहुत बड़ा और हैरतअंगेज़ वाक़िआ सामने आया है। खबरों के मुताबिक़ संयुक्त राज्य अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति को पकड़कर अपने क़ब्ज़े में ले लिया, ये वाक़िया अपने आप में बेहद संगीन है, क्योंकि किसी आज़ाद मुल्क़ के मौजूदा राष्ट्रपति को इस तरह उठाया जाना अंतरराष्ट्रीय सियासत में बहुत बड़ा तूफ़ान माना जाता है।
असल में अमेरिका और वेनेजुएला के रिश्ते पिछले कई सालों से बेहद ख़राब चल रहे थे। अमेरिका का आरोप है कि राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने वेनेजुएला में लोकतंत्र को खत्म कर दिया, चुनावों में धांधली करवाई, विरोध करने वालों को जेलों में डलवाया और मुल्क़ की दौलत को अपने क़रीबी लोगों तक सीमित कर दिया। अमेरिका यह भी कहता है कि मादुरो सरकार नशे की तस्करी, करप्शन और इंसानी हुक़ूक़ की सख़्त ख़िलाफ़वर्ज़ियों में शामिल रही है।
इन्हीं इल्ज़ामात की बुनियाद पर अमेरिका ने पहले वेनेजुएला पर कड़ी आर्थिक पाबंदियाँ लगाईं। बैंकिंग सिस्टम बंद किया गया, तेल बेचने पर रोक लगी और सरकारी अफ़सरों की संपत्ति फ्रीज़ कर दी गई। मगर इन सबके बावजूद मादुरो सत्ता में बने रहे। हालात यहाँ तक पहुँच गए कि अमेरिका ने यह कहना शुरू कर दिया कि वेनेजुएला की मौजूदा सरकार अब “जायज़ सरकार” नहीं रही।
इसी तनाव के बीच यह बड़ा क़दम सामने आया कि अमेरिकी एजेंसियों ने कार्रवाई करके राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में ले लिया। अमेरिका का कहना है कि यह क़दम क़ानून के तहत उठाया गया है, ताकि वेनेजुएला में लोकतंत्र बहाल किया जा सके और वहां के अवाम को ज़ुल्म से निजात दिलाई जा सके।

वहीं दूसरी तरफ़ वेनेजुएला के समर्थक और कुछ दूसरे देश इसे खुली गुंडागर्दी और एक आज़ाद मुल्क़ की संप्रभुता पर हमला बता रहे हैं।
वेनेजुएला की सरकार और उसके हिमायती देशों का कहना है कि अमेरिका असल में वेनेजुएला के तेल और संसाधनों पर क़ब्ज़ा चाहता है। उनके मुताबिक़ इंसानी हुक़ूक़ और लोकतंत्र सिर्फ़ बहाना है, असली मक़सद सत्ता बदलना और अपनी पसंद की सरकार बैठाना है। इसी वजह से इस कार्रवाई के बाद वेनेजुएला में ग़ुस्सा, डर और बेयक़ीनी का माहौल पैदा हो गया है।
वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले में अब तक 40 लोगों की मरने की खबर है,
इस पूरे मामले का सबसे बड़ा नुकसान फिर वही आम अवाम उठा रही है। पहले ही ग़रीबी, महंगाई और भुखमरी से जूझ रहे लोगों पर अब सियासी अनिश्चितता और बढ़ गई है। लोग नहीं जानते कि आगे उनका मुल्क़ किस तरफ़ जाएगा हालात सुधरेंगे या और बिगड़ेंगे।

सऊदी अरब ने मशहूर इस्लामिक कमांडर खालिद बिन वालिद (RA) की ज़िंदगी पर आधारित एक बड़े पैमाने पर ऐतिहासिक फ़िल्म की शूटिंग ...
04/01/2026

सऊदी अरब ने मशहूर इस्लामिक कमांडर खालिद बिन वालिद (RA) की ज़िंदगी पर आधारित एक बड़े पैमाने पर ऐतिहासिक फ़िल्म की शूटिंग ऑफिशियली शुरू कर दी है। 🎬⚔️

अरब सिनेमा में सबसे बड़े और सबसे महंगे फ़िल्म प्रोडक्शन के तौर पर पहचाने जाने वाले इस प्रोजेक्ट की तैयारी में एक साल लग गया, जिसमें 7वीं सदी के ऐतिहासिक रूप से सटीक सेट, लड़ाई के कवच, घुड़सवार सेना के गियर और हथियार शामिल हैं।

जनरल एंटरटेनमेंट अथॉरिटी और रियाद सीज़न की देखरेख में, इस फ़िल्म को सेला मैनेज कर रहे हैं, जबकि हॉलीवुड डायरेक्टर एलिक सखारोव और मशहूर प्रोड्यूसर रिचर्ड शार्की प्रोडक्शन को लीड कर रहे हैं। अल हिसन बिग टाइम स्टूडियो और कादियाह स्टूडियो में फ़िल्मिंग चल रही है, जिसमें बड़े सेट, एडवांस्ड VFX और ज़बरदस्त लड़ाई के सीन दिखाए जा रहे हैं।

कहानी खालिद बिन वालिद की मिलिट्री विरासत, खासकर यारमौक की लड़ाई को दिखाती है, जिसमें उस हिम्मत और स्ट्रेटेजी को दिखाया गया है जिसने उन्हें “सैफुल्लाह” का टाइटल दिलाया।

यह लैंडमार्क प्रोजेक्ट सऊदी विज़न 2030 को दिखाता है, जिसका मकसद सऊदी और अरब सिनेमा को ग्लोबल स्टेज पर ऊपर उठाना है।

#खालिदबिनवालिद #ऐतिहासिकफिल्म #सऊदीसिनेमा #विज़न2030

सुन्नी उलेमाओं और आला हज़रत अहमद रज़ा खान की किताबों के अनुसार, मक्का में काबा शरीफ़ के अंदर हज़रत अली इब्न अबी तालिब (र...
03/01/2026

सुन्नी उलेमाओं और आला हज़रत अहमद रज़ा खान की किताबों के अनुसार, मक्का में काबा शरीफ़ के अंदर हज़रत अली इब्न अबी तालिब (र.अ.) की पैदाइश की रिपोर्ट को कई सुन्नी स्रोतों में कमज़ोर, प्रभाव वाली माना जाता है,
जबकि हकीम इब्न हिज़ाम (र.अ.) की पैदाइश को अधिकतर सुन्नी इतिहासकारों ने काबा के अंदर माना है।
आला हज़रत की फतावा रिज़विया में इस मुद्दे पर सीधा ज़िक्र नहीं मिलता, लेकिन बरेलवी उलेमा
(जो आला हज़रत के अनुयायी हैं) जैसे कारी मुहम्मद लुकमान ने किताब "मौलूद काबा कौन" में विस्तार से तर्क दिया है कि हज़रत अली की पैदाइश काबा में नहीं बल्कि शुआब बनी हाशिम में हुई, और काबा में केवल हकीम इब्न हिज़ाम पैदा हुए।

▶️ हकीम इब्न हिज़ाम (र.अ.)
पैदाइश: आमुल फील से 13 साल पहले (लगभग 557 ईस्वी)।
सुन्नी किताबों जैसे सही मुस्लिम, मुस्तदरक अल-हाकिम, और अल-बिदाया वन-निहाया
(इब्न कसीर) में इसका जिक्र है।
इमाम सुयूती और इब्न मुलकिन ने इसे सही माना और कहा कि काबा में पैदा होने वाला केवल यही शख्स है

▶️ हज़रत अली इब्न अबी तालिब (र.अ.)
पैदाइश: 13 रजब, आमुल फील के 30 साल बाद (लगभग 600 ईस्वी)।

कुछ सुन्नी किताबों जैसे मुस्तदरक अल-हाकिम (अल-हाकिम निशापुरी), तज़किरा खवासिल उम्मा (सिब्त इब्न जौज़ी), और फुसूलुल मुहिम्मा (इब्न सब्बाग मालिकी) में इसका जिक्र है, लेकिन बरेलवी उलेमा और कुछ अन्य सुन्नी विद्वान इसे कमज़ोर या शिया मूल की रिपोर्ट मानते हैं, क्योंकि इसमें सनद (चेन ऑफ़ नरेशन) कमज़ोर है या बिना रेफरेंस के। वे तर्क देते हैं कि यह मुतावातिर नहीं है और प्री-इस्लामिक काबा (जिसमें मूर्तियाँ थीं) में पैदाइश सम्मान नहीं बल्कि अपमानजनक होगी।

नोट: सुन्नी स्रोतों में विवाद है; कुछ उलेमा हज़रत अली की पैदाइश को काबा में स्वीकार करते हैं, लेकिन आला हज़रत के अनुयायी बरेलवी उलेमा इसे अस्वीकार करते हैं और केवल हकीम इब्न हिज़ाम को मानते हैं। आला हज़रत की किताबों में सीधा फतवा नहीं मिला, लेकिन उनके स्कूल ऑफ़ थॉट से जुड़ी किताबें इस पर स्पष्ट हैं।

*🌹  यौमे विलादत 🌹*दामाद ए रसूल ﷺ, सोहर ए बतुल, अबुल हसन, बाबुल इल्म, फातेह खैबर, साहिबे जुल्फेकार, शेर ए खुदा, खलीफतूल र...
03/01/2026

*🌹 यौमे विलादत 🌹*

दामाद ए रसूल ﷺ, सोहर ए बतुल, अबुल हसन, बाबुल इल्म, फातेह खैबर, साहिबे जुल्फेकार, शेर ए खुदा, खलीफतूल रसूल ﷺ
*शाहे मर्दान शेरे यज़दान कुव्वते परवर दिगार*
*ला फतह इल्ला अली ला सैफ़ इल्ला ज़ुल्फ़िकार*

सय्यदना अमीरुल मो'मीनीन सय्यदना मौला अली करम वल्लाहुल वज्जहुल करीम

13 रज्जब उल मुरजब

02/01/2026

बांग्लादेशी खिलाड़ी को KKR ने खरीदा तो भाजपा नेता संगीत सोम ने कहा: "शाहरुख देश का गद्दार…"
ब्रेकिंग न्यूज़: बांग्लादेश करेगा मेज़बानी, "टीम इंडिया" करेगी बांग्लादेश का दौरा, बांग्लादेश के खिलाड़ियों के साथ खेलेंगे T20 और वनडे सीरीज!

बंगलादेश में किसी हिन्दू पर आक्रमण पर रोने से अधिक आवश्यक है भारत में किसी हिन्दू पर हो रहे आक्रमण पर रोना..खबर लखनऊ के ...
02/01/2026

बंगलादेश में किसी हिन्दू पर आक्रमण पर रोने से अधिक आवश्यक है भारत में किसी हिन्दू पर हो रहे आक्रमण पर रोना..खबर लखनऊ के तालकटोरा क्षेत्र से है जहां 31 दिसंबर 2025 की रात को राजाजीपुरम (सी-ब्लॉक) के रहने वाले एक 16 वर्षीय नाबालिग लड़के "राजीव दास" का अपहरण किया गया।
और दबंग आरोपी ईशू यादव और अनुज दीक्षित सहित उसके साथियों ने उसे घर के बाहर से चार पहिया वाहन में जबरन डालकर लड़के की कनपटी पर पिस्तौल लगाकर उसे नंगा किया और बेरहमी से पीटा और ₹5लाख रुपये की फिरौती मांगी गई। लड़का हाथ जोड़कर रहम की भीख मांगता रहा, लेकिन हमलावर नहीं माने।
चुंकि यह घटना बंगलादेश की नहीं है , आरोपी मुसलमान नहीं इसलिए सब चंगा सी दोस्तो इंसानियत के नाते गलत को गलत कहो ताकि लोगों के अंदर इंसाफ मिलने की भावना पैदा हो सके पोस्ट को शेयर करते रहे हैं ताकि आप सभी लोगों तक पहुंच सके।

AIMIM official candidates of Chandrapur, Nagpur, Akola, Amravati Municipal corporation.
02/01/2026

AIMIM official candidates of Chandrapur, Nagpur, Akola, Amravati Municipal corporation.

01/01/2026

2026… 🫠

Nayi Umeedein, Nayi Duaein,
Aur Ek Behtar Kal Ka Waada 🤍
Allah Kare Yeh Saal
Sukoon, Khushi Aur Aasaniyan Le Kar Aaye.

Welcome 2026 🌙✨

01/01/2026

रब्बाना आतीना फिद दुन्या हसनतहु व फिल आख़िरती हसनतहु
वकीना आज़बान नार....
वकीना अज़ाबुल क़ब्र
वकीना अज़ाबुल हशर
वकीना अज़ाबुल फ़क़र
वकीना अज़ाबुल मीज़ान
वकीना अज़ाबुल कर्ज़
वकीना अज़ाबुल मर्ज़
वकीना अज़ाबुल आफ़त
वकीना अज़ाबुल सकरात
वकीना अज़ाबुल मौत
वकीना अज़ाबुल फितनातुल मसीहिद दज्जाल
वकीना अजाबन नार....

अजमेर शरीफ़ के उर्स और “रस्म” के नाम पर चल रहा तमाशाअजमेर शरीफ़ में उर्स के मौक़े पर इन दिनों कुछ ऐसी हरकतें देखने को मि...
31/12/2025

अजमेर शरीफ़ के उर्स और “रस्म” के नाम पर चल रहा तमाशा

अजमेर शरीफ़ में उर्स के मौक़े पर इन दिनों कुछ ऐसी हरकतें देखने को मिल रही हैं, जिन्हें बड़े आराम से “चिश्तियों की रस्म” कह दिया जाता है। सवाल यह है कि जिस काम का इस्लाम से कोई ताल्लुक़ नहीं, जिसका ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ से दूर-दूर तक वास्ता नहीं, उसे रस्म कहकर कब से पाक बना दिया गया?

अजमेर शरीफ़ में उर्स के मौके पर अब इबादत नहीं, बल्कि पानी की बोतलों का खेल खेला जा रहा है। लोग बोतलों में पानी भरकर एक-दूसरे पर डाल रहे हैं — मर्द भी, औरतें भी, जैसे यह कोई पिकनिक या वाटर फेस्टिवल हो।

कुछ लोग दुआ और इबादत के लिए नहीं, बल्कि मज़े और तमाशे के लिए दरगाह पहुँच रहे हैं। ऐसे कामों से क्या हासिल होगा, यह कहना मुश्किल है — हाँ, इतना तय है कि इससे न तो रूह पाक होती है और न ही अक़्ल जागती है।

हिंद के सुल्तान ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह के दर पर आज भी सिर्फ़ अदब से झुका हुआ सिर क़बूल होता है, न कि दिखावे से भरा हुआ तमाशा। यहाँ तो सिर्फ़ हाज़िरी ही दुआ बन जाती है, लेकिन अफ़सोस कि कुछ लोग अपनी जहालत को भी नज़राने की तरह पेश कर रहे हैं।

हाल ही में एक वीडियो में देखा गया कि कुछ लोग अजीब-ओ-गरीब जानवरों का चोला पहनकर, चादर के साथ दरगाह की ओर चले आ रहे हैं। सवाल यह है कि क्या ख़्वाजा साहब का पैग़ाम यही था?
अगर ऐसा होता, तो ख़ानक़ाहें इबादतगाह नहीं, सर्कस बन चुकी होतीं।

सच तो यह है कि इस तरह की हरकतों का ख़्वाजा साहब की तालीमात से रत्ती भर भी लेना-देना नहीं। ये सब रस्म के नाम पर चल रही वह जहालत है, जिसे अगर आज नहीं रोका गया, तो कल इसे ही परंपरा बताया जाएगा। आने वोाली नस्ल इसे जरूरी समझेंगी

अब ज़िम्मेदारी वहाँ के ज़िम्मेदारों पर भी बनती है कि वे दरगाह को तमाशागाह बनने से बचाएँ।

ख़्वाजा का पैग़ाम साफ़ है —
दिखावा नहीं, दीवानगी नहीं,
बल्कि अदब, इंसानियत और मोहब्बत।

सिर्फ़ उत्तर भारत की गाय ही माता होती है , बाकी मिथुन... और इसका मिथुन चक्रवर्ती से कोई संबंध नहीं इसलिए उन्हें कुछ ना क...
31/12/2025

सिर्फ़ उत्तर भारत की गाय ही माता होती है , बाकी मिथुन... और इसका मिथुन चक्रवर्ती से कोई संबंध नहीं इसलिए उन्हें कुछ ना किया जाए...

विद्वान प्रवक्ता ने बताया कि शेष गाय "बॉस इंडिकस" होती हैं अर्थात ज़ेबू या कुबड़ वाली , वही गाय ही माता होती है।

शेष गाय जो मिथुन होती हैं वह "बॉस टॉरस" अर्थात बिना कूबड़ वाली गाय होती हैं, वह माता नहीं होतीं , कुछ नहीं होतीं मौसी भी नहीं।

अर्थात उत्तर भारत की कूबड़ वाली गाय माता , और शेष भारत की बिना कूबड़ वाली गाय "मिथुन" अर्थात उन्हें काट कर खा सकते हैं।
यद्यपि मैं सभी गाय को मारकर खाने का विरोध करता हूं और सरकार से पूरे भारत में गौ हत्या प्रतिबंध लगाने की मांग करता हूं
चाहे किसी भी तरह की गाय हो

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