24/05/2026
धुलकोट की ये तस्वीरें सिर्फ जल संकट की नहीं, बल्कि उस दर्द की कहानी हैं जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें, खिलौने और सपने होने चाहिए, उस उम्र में वे तपती धूप में पानी की एक-एक बूंद के लिए भटक रहे हैं।
कोई मासूम गहरे खतरनाक गड्ढों में उतर रहा है, कोई खाली बर्तन लेकर घंटों इंतजार कर रहा है। प्यास इतनी बड़ी हो गई है कि डर भी छोटा पड़ गया है।
सोचिए, जब एक बच्चा अपनी मां से पूछता होगा -"मां... पानी कब मिलेगा?" तो उस मां के दिल पर क्या गुजरती होगी?
ये तस्वीरें सिर्फ धुलकोट की नहीं हैं, बल्कि उन हजारों लोगों की हकीकत हैं जो आज भी हर दिन पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। विकास के दावों के बीच प्यास से जूझता यह बचपन हम सब से एक सवाल पूछ रहा है - क्या एक बूंद साफ पानी भी उनकी किस्मत में नहीं?
उम्मीद है कि इन मासूमों की पुकार जिम्मेदार लोगों तक पहुंचे और जल्द कोई ठोस समाधान निकले।