29/10/2025
_आखिरकार 'सुमति' से ही आई 'टीम सुमित', पहली बार बना ऐसा सामंजस्य_
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*_स्वाति काशिद को पद देने का फैसला साहसिक, नारी स्मिता को मिला मान_*
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*'सबका साथ-सबका विकास'*
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_पद नही मिलने पर पार्टी दफ्तर पर जिराती-चौधरी समर्थकों की हरक़त से शर्मसार हुई पार्टी_
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*_दीप्ति हाड़ा का नाम महिला नेताओ को ही नही, पार्टी को भी नही हुआ हज़म_*
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_सांसद-महापौर की हिस्सेदारी नाममात्र की रही, विधायकों की हुई बल्ले-बल्ले_
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*_ख़ुलासा फर्स्ट ने 15 अक्टूबर को ही कर दिया था टीम सुमित के सदस्यों का खुलासा, हूबहू वही टीम आई_*
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*नितिनमोहन शर्मा*
*_...आखिरकार भाजपा की नगर कार्यकारणी मामले में वही हुआ और वैसे ही हुआ, जैसा आपके अपने पक्का इन्दौरी अखबार ख़ुलासा फर्स्ट ने 14 दिन पहले कहा-लिखा-ख़ुलासा किया था। कमल दल के नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा के साथी अक्षरशः वैसे ही सामने आए जैसा ' सुमति ' से आ रही ' टीम सुमित ' में उदघाटित हुआ था। नगर इकाई के लिए पार्टी के तमाम छोटे बड़े नेताओं की सुमति काम आई और बिना किसी बड़े मतभेद के सत्तारूढ़ दल का ये ' भागीरथी काम ' मुक्कमल हुआ। जीतू जिराती व नीलेश चौधरी समर्थकों के 20 मिनिट के हंगामे को छोड़ दिया जाए तो टीम सुमित के खुलासे ने समूची भाजपा में खुशी, उत्साह व उत्सव की जाजम बिछा दी। इस जाजम पर पहले पार्टी दफ़्तर दीनदयाल भवन व बाद में शहर के अलग अलग हिस्से में देर रात तक जश्न मनता रहा। नगर इकाई का गठन एक तरह से भाजपा के लोकप्रिय नारे ' सबका साथ-सबका विकास ' की तर्ज पर हुआ।_*
नई नगर इकाई में वटवृक्ष हुई भाजपा के तमाम गुटों व क्षत्रपों को जगह मिली। खासकर जब तब शोर मचाने वाले विधायको को इस कार्यकारणी में ख़ासा तव्वजो मिली और उनके खास समर्थक टीम सुमित का हिस्सा बगैर किसी किंतु परन्तु के बनाये गए। ये बात और है कि इनमें से कुछ इस लायक नही थे लेकिन बड़े नेता या विधायक के लाड़ के थे तो अयोग्यता के बाद भी योग्य लोगों की कतार में शामिल हो गए।
*इस मामले में उपाध्यक्ष का पद झपट ले गई नई नई भाजपा नेत्री दीप्ति हाड़ा का नाम सबसे अव्वल रहा। दीप्ति का सीधे उपाध्यक्ष बन जाना भाजपा की महिला नेताओ को ही नही, पूरी पार्टी को हजम नही हुआ। पार्टी की महिला विंग की वे नेता तो जबरदस्त गुस्से से भर गई, जो बरसो से चौका-चूल्हा व घर गृहस्थी छोड़ कमलदल का इकबाल बुलंद कर रही हैं। इस वर्ग में हाड़ा के रूप में हुई 'पैराशूट लैंडिंग' आक्रोश का कारण बन गई।*
नगर इकाई में विधायकों के लिहाज से सबसे ज़्यादा फ़ायदे में इंदौर विधानसभा 3 के विधायक राकेश यानी गोलू शुक्ला रहें। उसके बाद नंम्बर दादा दयालु यानी इंदौर विधानसभा 2 के विधायक रमेश मेंदोला रहें। हालांकि समूची टीम सुमित पर मेंदोला का असर ज़्यादा ही नज़र आ रहा हैं। उसका कारण भी साफ़ हैं। नगर अध्यक्ष मिश्रा, मेंदोला के बरसों बरस से ख़ास सिपहसालार जो ठहरे। लिहाज़ा भाजपाई कुनबा जुटाने में होना वही था, जो ' दादा ' की मंशा थी।
*राऊ विधायक मधु वर्मा भी नफ़े में रहें और उनके खाते में भी समर्थक दर्ज हो गए और ये ही कारण पार्टी कार्यालय पर हुए हंगामे का असली कारण बनकर सामने आया। राउ विधानसभा क्षेत्र में मधु वर्मा और जीतू जिराती के बीच '36 का आंकड़ा' बरसों से रहा है जो कल के हंगामे से और स्पष्ट भी हो गया।*
इंदौर 4 की विधायक मालिनी गौड़ तीन में से एक महामंत्री बनाकर गदगद हुई। एक महिला नेता को मंडल अध्यक्ष से इस्तीफा करवाकर नगर इकाई में लाने में भी सफल रही। महापौर पुष्यमित्र भार्गव भी सफ़ल रहे औऱ वे अपने खास समर्थक को नगर इकाई के अहम उपाध्यक्ष पद पर काबिज करने में सफ़ल रहे।
*टीम सुमित से नाराज़गी की बात सांसद शंकर लालवानी खेमे की तरफ़ से उजागर हुई लेक़िन इस रुसवाई को कही से भी मुखर स्वर नही मिला। नाराज़गी की मुखरता पूर्व विधायक जीतू जिराती व पूर्व पार्षद पति नीलेश चौधरी के खाते में जमा हुई। इन नेताओं के समथकों में पार्टी कार्यालय पर जमकर हंगामा किया। नगर अध्यक्ष की नाम पट्टिका पर न सिर्फ़ कालिख़ पोती बल्कि भाजपा के राजनीतिक संस्कारों पर भी कालिख़ लगा दी।*
आमतौर पर ऐसे हंगामे का कभी दीनदयाल भवन गवाह नही रहा लेक़िन खाती समाज की नजरअंदाजी के नाम पर पार्टी दफ़्तर पर जो कुछ मंगलवार को करीब 20 मिनिट घटा, उसने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को बहुत कुछ सोचने, कर गुजरने को विवश कर दिया। नगर अध्यक्ष के ख़िलाफ़ अपशब्दों का उपयोग व पुतला फूंकने की घटना ने उन नेताओं का बड़ा राजनीतिक नुकसान जरूर कर दिया जो समाज के नाम पर विरोध के अगुवाकार बने।
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*स्वाति काशिद की ताजपोशी ने नारी ही नही, भाजपा का भी बढ़ाया मान*
*यू तो नगर इकाई में बहुत कुछ परंपरा से हटकर हुआ लेकिन सबसे अहम फैसला स्वाति काशिद को लेकर हुआ। स्वाति का नगर इकाई में मंत्री बनना न केवल साहसिक फैसला रहा बल्कि ये नारी अस्मिता के मान सम्मान को भी स्थापित कर गया। इस निर्णय के लिए न सिर्फ़ नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा बल्कि विधायक व सबके ' दादा दयालु ' रमेश मेंदोला बधाई के पात्र बनकर उभरे। जब देश मे सब तरफ़ नारी सशक्तिकरण के वादे-इरादे व नारों का शोर मचा हुआ हैं, वहां किसी महिला की योग्यता को सिर्फ़ इसलिए दरकिनार नही किया जा सकता कि उसका जीवनसाथी आपराधिक पृष्ठभूमि का हैं। स्वाति काशिद के साथ एक बार ये अन्याय 3 बरस पहले हो चुका हैं। तब उनको नगर निगम के चुनाव में भाजपा से टिकट मिल गया था लेक़िन पति की आपराधिक छवि के कारण टिकट देकर वापस ले लिया गया था। तब भी ये सवाल सामने आया था कि परिवार-परिजन के कृत्य की सज़ा, परिवार की गृहणी को क्यो? जबकि स्वाति का एकेडमिक प्रोफाईल यानी पढ़ाई-लिखाई समूची भाजपा के लिए ही नहीं, पूरे इंदौर को भी चमत्कृत करने जैसी हैं। खैर, कल के फैसले से एक तरह से भाजपा में अपनी एक ' लाड़ली बहना ' के साथ हुई बड़ी गलती को दुरुस्त कर लिया और उन्हें भाजपा की नगर इकाई का हिस्सा बनाते हुए नगर मन्त्री जैसे पद पर सुशोभित भी किया। 'कमलदल' की 'मातृ संस्था' एक तरफ एक जमाने के कुख्यात चंदन तस्कर विरप्पन की बीटिया को पढ़ा लिखाकर डॉक्टर बनाने कर समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का दांवा करती है, वही दूसरी तरफ़ स्वाति को सिर्फ़ इसलिए उसके हक से दूर कर दिया जाए कि पति का नाता अपराध जगत से है। ये बात वर्तमान के दौर में हज़म नही। वह भी उस दल में जो नारी अस्मिता व नारी सशक्तिकरण का केंद्र से लेकर राज्य सरकारों तक मे दम भर रहा हो। ऐसे में स्वाति की ताजपोशी भाजपा की महिलाओ के प्रति बनी नीतियों को मजबूती ही प्रदान करेगी।यू भी स्वाति काशिद ने न सिर्फ़ राजनीतिक स्तर पर बल्कि सामाजिक स्तर पर अपनी कार्यशैली व सांगठनिक क्षमता का परिचय अनेकानेक बार दिया। इसमें इंदौर ही नही, महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव तक शामिल है।*