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Tatkal Times Laxmikant Pandit
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लक्ष्मीकांत पंडित
सलाहकार संपादक समाचार समन्वयक
भारतीय हिंदी पत्रकारिता के "नर्सरी" के नाम से मशहूर इंदौर में रचनात्मक, सकारात्मक नवाचार, पत्रकारिता के वरिष्ट नाम है। लक्ष्मीकांत पंडित १९८८ से पत्रकारिकता के विभिन्न आयामो में अपने कौशल का परिचय दे चुके है ।विधि स्नातक एव राजनीति विज्ञानं में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की. श्री पंडित माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिकता विश्व विद्यालय भोपाल, सागर विश्व विद्यालय सागर मध्य प्रदेश से पत्रकारिता पाठयक्रमों का अध्ययन कर स्नातक एवं स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त कर चुके है । पर्यटन पत्रकारिता व राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विषयो के विशेषज्ञ श्री पंडित पत्रकारिता विषयो पर अध्यापन भी कराते रहे हे.
पत्रकारिता के माध्यम से ही अपने रूचि अनुसार इन दिनों राष्ट्रीयता से ओत-प्रोत समाजिक, आर्थिक, वैचारिक अभियानों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हे.

समाचार पत्र नवीनतम अंक
26/08/2026

समाचार पत्र नवीनतम अंक

11/08/2026

पैमाना: डेटा-आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर गवर्नेंस को मज़बूत करना

एक परिचय

इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को समय पर लागू करने, पारदर्शिता और गवर्नेंस के लिए उनकी कुशल निगरानी ज़रूरी है। इसी मकसद से, भारत में सेंट्रल सेक्टर के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की निगरानी के लिए 25 सितंबर 2025 को एक वेब-आधारित प्लेटफ़ॉर्म पैमाना (राष्ट्र-निर्माण के लिए प्रोजेक्ट असेसमेंट, इंफ्रास्ट्रक्चर मॉनिटरिंग और एनालिटिक्स) लॉन्च किया गया था। यह प्लेटफ़ॉर्म पहले के OCMS-2006 (ऑनलाइन कंप्यूटराइज्ड मॉनिटरिंग सिस्टम) की जगह लेता है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा विकसित, PAIMANA का इस्तेमाल ₹150 करोड़ या उससे ज़्यादा लागत वाले सेंट्रल सेक्टर के चल रहे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की निगरानी के लिए किया जाता है।

MoSPI ने 08 जुलाई 2026 को PAIMANA-CRIP नाम का एक मॉड्यूल लॉन्च किया, जिसने DPIIT के इंटीग्रेटेड प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग पोर्टल (IPMP) की जगह ली है। इसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के सेंट्रल रिपॉजिटरी (केंद्रीय भंडार) के तौर पर विकसित करने की योजना है। प्रगति (प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन), पीएमजी और अन्य समीक्षा तंत्रों के लिए प्रोजेक्ट से जुड़ा डेटा बाद में इसी के ज़रिए लिया और अपडेट किया जाएगा।

20 से ज़्यादा मंत्रालय/विभाग/कार्यान्वयन एजेंसियां ​​डेटा एंट्री या API (एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस) मोड के ज़रिए PAIMANA-CRIP पर प्रोजेक्ट्स की जानकारी नियमित रूप से अपडेट करती हैं।

फिलहाल, PAIMANA पोर्टल का प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग वर्टिकल API-आधारित डेटा एक्सचेंज के ज़रिए DPIIT के IPMP/IIG के साथ जुड़ा हुआ है। PAIMANA पर 60 प्रतिशत से ज़्यादा प्रोजेक्ट्स संबंधित मंत्रालयों/विभागों के MIS या वेब प्लेटफ़ॉर्म से API के ज़रिए अपने-आप अपडेट हो रहे हैं।

प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग को मज़बूत करने के अलावा, पैमाना ने एक समर्पित परफॉर्मेंस मॉनिटरिंग डैशबोर्ड के ज़रिए इंफ्रास्ट्रक्चर परफॉर्मेंस की निगरानी में मदद करने के लिए अपनी भूमिका का विस्तार किया है। 16 अप्रैल 2026 को लॉन्च किया गया यह डैशबोर्ड व्यापक संकेतकों के सेट के ज़रिए प्रमुख उप-क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर परफॉर्मेंस को ट्रैक करता है। यह डेटा-आधारित गवर्नेंस और सबूत-आधारित नीति-निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति है।

06/08/2026

सरकार का उद्देश्य भारत के इंटरनेट को गैरकानूनी और अश्लील कॉन्टेंट से मुक्त रखना और एक सुरक्षित व भरोसेमंद डिजिटल वातावरण सुनिश्चित करना है
नई दिल्ली सरकार की नीतियों का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों के साथ-साथ सभी यूजर्स के लिए एक खुला, सुरक्षित, भरोसेमंद और जवाबदेह इंटरनेट सुनिश्चित करना है। सरकार भारत में इंटरनेट को किसी भी प्रकार की गैरकानूनी सामग्री या सूचना, विशेष रूप से अश्लील और आपत्तिजनक कॉन्टेंट से मुक्त रखने के प्रति प्रतिबद्ध है।

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (आईटी अधिनियम) और सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियमावली, 2021 (आईटी नियमावली) मिलकर डिजिटल क्षेत्र में गैरकानूनी और हानिकारक कॉन्टेंट से निपटने के लिए एक व्यापक फ्रेमवर्क प्रदान करते हैं और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए मध्यस्थों पर स्पष्ट दायित्व लागू करते हैं।

सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के अंतर्गत सोशल मीडिया मध्यस्थों के साथ-साथ सभी मध्यस्थों पर यह सुनिश्चित करने का दायित्व है कि उनके कंप्यूटर संसाधनों का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स कोई भी ऐसा कॉन्टेंट होस्ट, प्रदर्शित, अपलोड, संशोधित, प्रकाशित, प्रसारित, संग्रहीत, अपडेट या साझा न करें जो अश्लील, पोर्नोग्राफिक, बाल यौन शोषण से संबंधित, बच्चों के लिए हानिकारक, निजता का उल्लंघन करने वाली, लिंग के आधार पर अपमानजनक या उत्पीड़न करने वाली हो या किसी भी लागू कानून का उल्लंघन करती हो। सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 में दिए गए कानूनी दायित्वों का पालन न करने की स्थिति में, मध्यस्थ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के अंतर्गत प्राप्त थर्ड पार्टी सूचना से छूट खो देंगे। वे किसी भी मौजूदा कानून के अंतर्गत परिणामी कार्रवाई या अभियोजन के लिए उत्तरदायी होंगे।

10 फरवरी 2026 को, सरकार ने कृत्रिम रूप से तैयार जानकारी (एसजीआई) से होने वाले नुकसानों को दूर करने के लिए आईटी नियमों में संशोधन करके नियामक फ्रेमवर्क को मजबूत किया, जिसमें डीपफेक और एआई से तैयार की गई सामग्री शामिल है।

संशोधनों के अनुसार, मध्यस्थों और बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को अवैध आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) के माध्यम से तैयार कॉन्टेंट, जिसमें अश्लील, भ्रामक, व्यक्तियों का प्रतिरूपण करने वाला या बच्चों के लिए हानिकारक कॉन्टेंट शामिल है, के निर्माण और प्रसार को रोकने के लिए उचित तकनीकी उपाय करने होंगे। प्लेटफॉर्म को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 या यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम, 2012 जैसे कानूनों के अंतर्गत संबंधित अपराधों की रिपोर्ट उचित अधिकारियों को देनी होगी।

इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आई4सी) के एक अंग के तौर पर, ‘राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल’ (एनसीआरपी) (https://cybercrime.gov.in) को शुरू किया गया है, जिससे आम जनता सभी प्रकार के साइबर अपराधों से संबंधित घटनाओं की रिपोर्ट कर सके। एनसीआरपी में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराधों की कुछ श्रेणियों की गुमनाम आधार पर रिपोर्ट करने का प्रावधान भी शामिल है। “महिला/ बाल संबंधित अपराध की रिपोर्ट करें” मॉड्यूल के अंतर्गत, शिकायतकर्ता “गुमनाम आधार पर रिपोर्ट करें” विकल्प चुन सकते हैं, जिससे निजी पहचान विवरण प्रकट किए बिना शिकायतें दर्ज की जा सकती हैं।

एनआरसीपी ने 'संदिग्ध की रिपोर्ट करें और जांच करें' नामक एक मॉड्यूल शुरू किया है, जिससे नागरिक संदिग्ध वेबसाइट यूआरएल, व्हाट्सएप नंबर/ टेलीग्राम हैंडल, फोन नंबर, ईमेल आईडी, एसएमएस हेडर/ नंबर, डीप फेक और सोशल मीडिया यूआरएल को रिपोर्ट कर सकें।

सरकार ने 'महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध रोकथाम (सीसीपीडब्ल्यूसी)' योजना के अंतर्गत राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों को क्षमता निर्माण के लिए 132.93 करोड़ रुपये की वित्तीय मदद जारी की है। इस सहायता का उद्देश्य साइबर फोरेंसिक-सह-प्रशिक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना करना, कनिष्ठ साइबर सलाहकारों की नियुक्ति और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के कर्मियों, लोक अभियोजकों और न्यायिक अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान करना है। 33 राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों में साइबर फोरेंसिक-सह-प्रशिक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की जा चुकी हैं और 24,600 से अधिक कानून प्रवर्तन एजेंसी कर्मियों, न्यायिक अधिकारियों और अभियोजकों को साइबर अपराध जागरूकता, जांच, फोरेंसिक आदि का प्रशिक्षण दिया गया है।

गृह मंत्रालय के इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आई4सी) ने देश भर में 2 लाख से अधिक एनसीसी, एनएसएस और एनवाईकेएस के छात्रों को साइबर स्वच्छता प्रशिक्षण प्रदान किया।

आई4सी ने छात्रों को साइबर अपराध की रोकथाम के बारे में शिक्षित करने के उद्देश्य से 'किशोरों/ शिक्षार्थियों के लिए हैंडबुक' और महिलाओं में जागरूकता बढ़ाने के लिए 'महिला सुरक्षा के लिए साइबर सुरक्षा हैंडबुक' जारी की हैं।

सरकार सूचना सुरक्षा में मानव संसाधन निर्माण करने और आम जनता के बीच साइबर स्वच्छता और साइबर सुरक्षा के कई पहलुओं के बारे में सामान्य जागरूकता पैदा करने के लिए 'सूचना सुरक्षा शिक्षा और जागरूकता (आईएसईए)' नामक एक परियोजना लागू कर रही है।

यह जानकारी सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने आज लोकसभा में श्री प्रभाकर रेड्डी वेमिरेड्डी की ओर से पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

06/08/2026

कार्यवाही

सिनेमाटोग्राफ (संशोधन) अधिनियम और आईटी ढांचा पायरेसी विरोधी प्रवर्तन को मजबूत करते हैं। 4,996 टेलीग्राम चैनलों और 1,263 वेबसाइटों सहित 7,393 यूआरएल निष्क्रिय किए गए।
सरकार ने सिनेमाई फिल्मों की ऑनलाइन पायरेसी से निपटने के लिए कानूनी और संस्थागत ढांचे को मजबूत किया है। जिसमें टेलीग्राम के माध्यम से फिल्मों का अनधिकृत प्रसार भी शामिल है। सिनेमाई अधिनियम, 1952 को सिनेमाई (संशोधन) अधिनियम, 2023 के माध्यम से संशोधित किया गया ताकि फिल्मों की अनधिकृत रिकॉर्डिंग और प्रदर्शन पर अंकुश लगाने के लिए विशिष्ट प्रावधान शामिल किए जा सकें। नवगठित धारा 7(1ख)(ii) सरकार को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79(3) के अंतर्गत पायरेटेड सामग्री होस्ट करने वाले मध्यस्थों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार देती है।

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79(3)(ख) के अंतर्गत उपयुक्त सरकारों द्वारा मध्यस्थों को अवैध सामग्री को हटाने/उस तक पहुंच को अक्षम करने के लिए अधिसूचना जारी करने का प्रावधान है। सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के अंतर्गत, मध्यस्थों को किसी भी ऐसी सामग्री को हटाना अनिवार्य है जो उस समय लागू किसी भी कानून का उल्लंघन करती हो, जैसे ही उन्हें न्यायालय के आदेश या उपयुक्त सरकार या उसकी अधिकृत एजेंसी द्वारा जारी नोटिस के माध्यम से इसकी जानकारी प्राप्त होती है।

फिल्मों की पायरेसी से संबंधित शिकायतें प्राप्त होने पर, मंत्रालय मध्यस्थों को अधिसूचना जारी कर उन्हें उल्लंघनकारी सामग्री को तुरंत हटाने या उस तक पहुंच को अक्षम करने का निर्देश देता है। सरकार ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के संयुक्त सचिव (फिल्म) को सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 और सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 के अंतर्गत मध्यस्थों को सामग्री हटाने के नोटिस जारी करने के लिए अधिकृत किया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में एक संस्थागत तंत्र भी स्थापित किया गया है, जिसके तहत इंटरनेट पर उपलब्ध फिल्मों की पायरेटेड प्रतियों के संबंध में कॉपीराइट धारकों से शिकायतें प्राप्त की जाती हैं और मध्यस्थों को ऐसी सामग्री तक पहुंच को अक्षम करने के लिए अधिसूचना जारी की जाती है।

पायरेसी विरोधी कार्रवाई

कानून के उपर्युक्त प्रावधानों के अनुसार, मध्यस्थों को फिल्म पायरेसी के लिए 1,263 वेबसाइटों और 4,996 टेलीग्राम चैनलों सहित 7,393 यूआरएल को निष्क्रिय करने का निर्देश दिया गया है।

असम से भूटान को पूरबी आइसक्रीम की पहली अंतरराष्ट्रीय खेप का निर्यातअसम के डेयरी सेक्टर और पूर्वोत्तर क्षेत्र के प्रसंस्क...
30/07/2026

असम से भूटान को पूरबी आइसक्रीम की पहली अंतरराष्ट्रीय खेप का निर्यात

असम के डेयरी सेक्टर और पूर्वोत्तर क्षेत्र के प्रसंस्कृत खाद्य के निर्यात के लिए एक अहम पड़ाव साबित करते हुए, 5,627 लीटर पूरबी आइसक्रीम का पहली अंतरराष्ट्रीय खेप असम से भूटान निर्यात किया गया, जिससे इस इलाके से मूल्य-संवर्धित डेयरी निर्यात के नए रास्ते खुले।

निर्यात की इस खेप को असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने 28 जुलाई, 2026 को गुवाहाटी में हरी झंडी दिखाई। नॉर्थ ईस्ट डेयरी एंड फूड्स लिमिटेड (एनईडीएफएल) द्वारा निर्यात की गई यह खेप भूटान के थिम्पू, पारो, फुएंत्शोलिंग और वांगड्यू जैसे मुख्य बाजारों में पूरबी आइसक्रीम की आपूर्ति करेगी, जिससे आस-पास के अंतरराष्ट्रीय बाजारों में असम और पूर्वोत्तर क्षेत्र के डेयरी उत्पादों की मौजूदगी मजबूत होगी।

वेस्ट असम मिल्क प्रोड्यूसर्स कोऑपरेटिव यूनियन लिमिटेड (डब्ल्यूएएमयूएल) इसे बनाती है और नॉर्थ ईस्ट डेयरी एंड फूड्स लिमिटेड (एनईडीएफएल) इसकी मार्केटिंग करती है। पूरबी आइसक्रीम को असम में पूरबी डेयरी के डेयरी किसानों के बड़े सहकारी नेटवर्क से खरीदे गए दूध से बनाया जाता है। पहली खेप में कप, फैमिली पैक, कोन और गैलन पैक जैसे कई तरह के उत्पाद शामिल हैं, जो भूटान में खुदरा उपभोक्ताओं और संस्थागत खरीदारों, दोनों के लिए हैं।

भारत सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा), निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय मानदंड को पूरा करने और विदेशी बाजार तक पहुंचने में मदद करके पूर्वोत्तर क्षेत्र से कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को लगातार बढ़ावा दे रहा है। यह निर्यात इस क्षेत्र से मूल्य-संवर्धित उत्पादों को बढ़ावा देने और उनकी वैश्विक बाजार पहुंच बढ़ाने के लिए एपीडा की लगातार कोशिशों को दर्शाता है।

एपीडा ने निर्यात दस्तावेजीकरण, नियामक अनुपालन, बाजार पहुंच की सुविधा और हितधारकों के बीच समन्वय स्थापित करने में मदद करके खेप को आसान बनाया, जिससे भूटान तक इस खेप की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित हुई और साथ ही पूर्वोत्तर क्षेत्र से प्रसंस्कृत डेयरी उत्पादों के लिए निर्यात इकोसिस्टम भी मजबूत हुआ।

भूटान की भौगोलिक निकटता असम से डेयरी निर्यात बढ़ाने के लिए एक स्वाभाविक लाभ देती है और पड़ोसी अंतरराष्ट्रीय बाजार असम में तैयार किए गए डेयरी उत्पादों की मौजूदगी बढ़ाने के लिए एक जरूरी मार्ग के तौर पर काम करती है। आगे चलकर, एनईडीएफएल अपने निर्यात के मदों में और ज़्यादा पूरबी डेयरी उत्पादों को शामिल कर और बाजार की मांग के हिसाब से निर्यात की मात्रा को धीरे-धीरे बढ़ाकर विविधीकृत करने की योजना बना रहा है।

इस पहल से पूर्वोत्तर क्षेत्र के डेयरी उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय पहचान मजबूत होने, डेयरी उद्योग के लिए सतत निर्यात के मौके बनने और असम के सहकारी दुग्ध नेटवर्क से जुड़े हजारों डेयरी किसानों के लिए आय बढ़ने की उम्मीद है।

एपीडा राज्य सरकारों, निर्यातकों, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओएस), सहकारी समितियों और अन्य हितधारकों के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि भारत के कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ाया जा सके और साथ ही देश भर के किसानों और कृषि आधारित उद्यमों के लिए सतत निर्यात संचालित विकास के अवसर तैयार हो सकें।

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