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32 करोड़ रूपए की जमीन के मालिक किसान की आत्महत्या के मामले मे इंदौर की रियल एस्टेट कंपनी सफल डेवलपर्स के प्रतिष्ठित बिल्...
08/06/2026

32 करोड़ रूपए की जमीन के मालिक किसान की आत्महत्या के मामले मे इंदौर की रियल एस्टेट कंपनी सफल डेवलपर्स के प्रतिष्ठित बिल्डर अशोक एरन और उनके पुत्र केशव एरन भी अपराधिक भू माफियाओं के साथ सवालो के घेरे में है?

@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

आखिर थाना खुड़ैल किसे बचाने की कोशिश कर रहा है? उन काले और सफेदपोश लोगो को जिन्होंने इंदौर जिले में 32 करोड़ रुपए की जमीन को हथियाने के लिए जानलेवा षड्यंत्र का ऐसा जाल बुना कि जमीन मालिक किसान को आत्महत्या करना पड़ी?

(उपरोक्त खबर पुलिस को दिए आवेदन, थाना खुड़ैल द्वारा दर्ज की गई FIR और मृत किसान विजय सिंह के परिवार के द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों, आडिओ और विडिओ साक्ष्य पर आधारित है।)

इंदौर जिले के खुड़ेल थाना क्षेत्र के अंतर्गत नेमावर रोड पर स्थित ग्राम असरावद बुजुर्ग में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ ३२ करोड़ रुपए बाजार मूल्य की बेशकीमती जमीन को कौड़ियों के दाम हड़पने के लिए एक खूनी साजिश रची गई। इस जानलेवा जाल में आपराधिक, दबंग और राजनीतिक पृष्ठभूमि के भू-माफिया रामसिंह पारिया, प्रॉपर्टी दलाल निलेश (पिता लक्ष्मीनारायण वर्मा), योगेश कुमरावत और धोखेबाज आपत्तिकर्ता फूलसिंह, बाबूलाल व उसके परिवार ने मिलकर किसान को चारों तरफ से घेर लिया। अपनी पैतृक और बहुमूल्य जमीन को इस खौफनाक आपराधिक षड्यंत्र के दलदल में फंसता देख जमीन मालिक, ४५ वर्षीय भोले – भाले किसान विजय (पिता स्व. निर्भय सिंह) पूरी तरह टूट गए। भू-माफियाओं द्वारा पैदा किए गए षड्यंत्र से उत्पन्न घोर मानसिक तनाव, डर और खौफ के आगे जब कोई रास्ता नहीं सूझा, तो उन्होंने बेहद हताशा में फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। इस बेरहम और क्रूर तंत्र की साजिश ने एक हंसते-खेलते किसान को मौत के मुंह में धकेल दिया।

मृत किसान विजय की बेशकीमती 8 बीघा जमीन को कौडियों के दाम खरीदने की क्रूर और बेरहम अपराधिक साजिश को अंजाम देने मे इंदौर के प्रतिशत बिल्डर और कालोनाईजर अशोक एरन और सफल डेवलपर्स के मालिक केशव एरन की भूमिका भी न सिर्फ सवालो के घेरे में है, वरन बहुत हद तक गहरे संदेह मे है!

1 मार्च 2025 को ग्राम असरावद बुजुर्ग के किसान विजय सिंह ने आत्महत्या की थी और 11 अप्रैल 2025 को मृत किसान विजय सिंह की माँ ने थाना खुड़ेल मे अपने बेटे विजय सिंह को आत्महत्या करने के लिए मजबूर करने वाले आरोपियों के खिलाफ कारवाई करने के लिए आवेदन दिया!

6 महीने बाद दिनांक 14/10/2025 को थाना खुड़ैल द्वारा मात्र दो दलालो नीलेश गुर्जर और योगेश कुमरावत के खिलाफ भारतीय न्याय सहिंता की धारा 108 और 318(4) के तहत FIR दर्ज कर ली। आरोपी नीलेश फरार है और उसकी हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत खारिज हो गई है। दूसरे आरोपी योगेश कुमरावत को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

लेकिन मुख्य साजिश कर्ता रामसिंह पारिया और 80 लाख रुपए नगद लेन देन करने वाले बिल्डर अशोक ऐरन एवं उनके पुत्र केशव ऐरन को न तो मुलजिम बनाया और न हीं उनके बयान लिए? जबकि मृत किसान विजय की मां के द्वारा दिनांक 11 अप्रैल 2025 को पुलिस थाना खुड़ैल को दिये गये लिखित आवेदन और बयान में रामसिंह पारिया को आरोपी बताते हुए गंभीर आरोप लगाये है। और मृत किसान विजय की मां के द्वारा दिए गए आवेदन और बयान में रामसिंह पारिया से बात होने के बाद बिल्डर अशोक ऐरन के द्वारा 80 लाख रुपए दलाल निलेश वर्मा को देना बताया है।

जिसकी पुष्टि मृत विजय के भाई संजय द्वारा रिकॉर्ड वीडियो में अशोक ऐरन के पुत्र केशव ऐरन से बातचीत से लेन देन की पुष्टि होती हैं। बातचीत रिकॉर्डेड वीडियो मृत किसान विजय के भाई संजय के पास है। पुलिस ने उसे जांच में क्यों शामिल नहीं किया?

पुलिस को दिए आवेदन मे माँ ने नामज़द आरोपियों के अपराधिक षड्यंत्र का सम्पूर्ण खुलासा करते हुए बताया कि कैसे उनके पुत्र पर दवाब बनाया गया! थाना खुड़ेल के बिहारी सिंह सांवले इस प्रकरण में जांच कर रहे हैं।

क्यों, कैसे और किन सवालो के घेरे में है, बिल्डर अशोक एरन और उनके पुत्र केशव एरन तर्फे सफल डेवलपर्स?

1) बिल्डर अशोक एरन के अपराधिक, दबंग रामसिंह पारियां और उसके परिवार से ग्राम असरावद बुजुर्ग मे स्थित जमीन खरीद फ़रोख्त के पुराने व्‍यवसायिक संबंध थे! अशोक एरन ने अपने पुत्र केशव एरन तर्फे सफल डेवलपर्स की कंपनी के नाम पर रामसिंह पारीया और उसके परिवार से ग्राम असरावद बुजुर्ग मे काफी जमीनें 2022 से 2024 मे खरीदी!

2) मृत किसान विजय सिंह की ग्राम असरावद बुजुर्ग स्थित खसरा नंबर 136 /2, 290/5, 292 कुल रकबा 1.923 हेक्टेयर (7.6 बीघा) जिस पर पहले से ही सिविल और राजस्व न्यायालय मे तथाकथित फर्जी आपत्ति कर्ताओ फूल सिंह और बाबूलाल से विवाद चल रहा था! वही दूसरी तरफ ग्राम असरावद बुजुर्ग की कृषि भूमि पर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से कालोनी विकास के लिए अनुमति पर रोक लगी हुई है।

3) तो फिर किस आधार पर केशव एरन तर्फे सफल डेवलपर्स ने 2022 मे ही मृत किसान विजय सिंह और उसके परिवार से एक कच्चा कालोनी विकास का 63 और 37 प्रतिशत के हिसाब से रेशों डील कर ली? और इस कच्चे विकास अनुबंध को 50 लाख रुपए (रिफंडेबल सिक्युरिटी डिपाजिट) चेक के माध्यम से मृत विजय सिंह और उसके परिवार के परिजनों को अलग अलग चेक के माध्यम से पेमेंट कर 22 जून 2023 को रजिस्टर्ड करवा लिया?

4) चूंकि मृत किसान विजय सिंह की ग्राम असरावद बुजुर्ग की उपरोक्त जमीन पर लंबे समय से सिविल और राजस्व न्यायालय मे फूल सिंह और बाबूलाल के परिवार से मुकदमा चल रहा था। इन्ही विवादित मुकदमों को न्यायालय के बाहर सुलझाने और खत्म करने के लिए दलाल निलेश पिता लक्ष्मीनारायण वर्मा और मुरली महाराज दलाल ने मृत किसान विजय सिंह को 2022 मे अशोक एरन से मिलवाया। दलाल निलेश ने अशोक एरन की बात राम सिंह पारिया से कराई, तो अशोक एरन ने बताया कि फूल सिंह और उसके परिवार से झगड़ा खत्म करने के लिए प्रति बीघा 10 लाख रुपए खर्च लगेगा। इस प्रकार अशोक एरन द्वारा दलाल निलेश पिता लक्ष्मीनारायण वर्मा को 80 लाख रुपए नगद रामसिंह पारिया के कहने पर दिए। उक्त रुपए निलेश ने फूल सिंह और बाबूलाल से राजीनामा करने और राजस्व न्यायालय के खसरो मे त्रुटिवश जो नाम फूल सिंह और बाबूलाल के चढ़ गए थे उन लोगों का नाम खसरो से कम करने का बोलकर प्राप्त किए थे। थाना खुड़ैल के जांच अधिकारी ने आपत्तिकर्ता बाबूलाल और फूल सिंह के न तो बयान लिए और न हीं यह जानने की कोशिश की कि उन्हें कितना पैसा प्राप्त हुआ है राजीनामा करने के लिए?

5) रुपए प्राप्त करने के बाद 4 अगस्त 2022 को निलेश के द्वारा राम सिंह पिता वृंदावन पारिया के मार्फत फूलसिंह और बाबूलाल को सिविल कोर्ट मे लेकर आए थे और उनसे राजीनामा का शपथ पत्र भी बनवाया था और कोर्ट मे प्रस्तुत भी किया था। और इसके बाद राजस्व न्यायालय मे फूल सिंह और उसके परिवार के सभी सदस्यों का नाम भी हट गया था।

लेकिन जनवरी 2025 मे फूलसिंह और बाबूलाल ने फ़िर से जमीन पर आपत्ति ले ली और राजस्व न्यायालय मे फ़िर से अपना नाम चढ़ाने के लिए आवेदन कर दिया। जब इस बात से नाराज मृत किसान विजय सिंह दलाल निलेश को लेकर राम सिंह पारिया के पास गया तो राम सिंह पारिया ने कहा 2 करोड़ रुपए और लगेगे नहीं तो उक्त जमीन मुझे बेच दो और कहा जब तक मै नहीं चाहूँगा तब तक तुम्हारी जमीन का कुछ नहीं होगा।

(जैसा की मृत किसान विजय सिंह की माँ ने 11 अप्रैल 2025 को पुलिस को दिए गए शिकायती आवेदन मे बताया।)

6) आत्महत्या के लिए किसान विजय सिंह को मजबूर करने के लिए मृत किसान विजय सिंह की माँ के द्वारा 11 अप्रैल 2025 को थाना खुड़ेल को दिए गए आवेदन मे आरोपियों की आपराधिक साजिश और सम्पूर्ण घटनाक्रम मे बिल्डर अशोक एरन और उनके पुत्र केशव एरन का बयान लिया जाना नितांत आवश्यक है। क्योंकि आरोपियों को लाखों रुपए का सम्पूर्ण लेन देंन नगद मे बिल्डर अशोक एरन द्वारा रामसिंह पारिया के कहने पर किया है। इस सम्पूर्ण घटनाक्रम मे बिल्डर अशोक एरन और उनके पुत्र केशव एरन की चुप्पी संदेहस्पद है।

थाना खुड़ैल के जांच अधिकारी के द्वारा इस केस में की गई जांच पूरी तरह से दवाब, प्रभाव और प्रलोभन के साथ नगद नारायण पर आधारित है। जब जांच ही निष्पक्ष नहीं है, तो मृत किसान विजय के परिवार वालों को न्याय कैसे मिलेगा?

मृत किसान को न्याय अशोक एरन और उनके पुत्र केशव एरन, की गवाही के बाद ही मिलेगा। रामसिंह पारिया, आपत्तिकर्ता बाबूलाल और फूलसिंह को बिना मुल्जिम बनाए थाना खुड़ैल द्वारा दर्ज की गई FIR सिर्फ और सिर्फ़ रद्दी कागज के टुकड़े के अलावा कुछ नहीं है।

@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
#हिंदीसमाचार

ऑथराइज्ड ऑटोमोबाइल कार सर्विस सेंटर्स में ग्राहकों से 'खुलेआम लूट'! फर्जी बिल, बिलों में हेरफेर और अप्रशिक्षित स्टाफ से ...
07/06/2026

ऑथराइज्ड ऑटोमोबाइल कार सर्विस सेंटर्स में ग्राहकों से 'खुलेआम लूट'!

फर्जी बिल, बिलों में हेरफेर और अप्रशिक्षित स्टाफ से लोग परेशान।

• फर्जी बिलिंग: जो काम किया ही नहीं, उसके पैसे भी बिल में जोड़े जा रहे हैं।
• अप्रशिक्षित मैकेनिक: गाड़ियों की मरम्मत करने वाले मैकेनिक्स पूरी तरह से प्रशिक्षित नहीं हैं।
• महंगे स्पेयर पार्ट्स: बाजार की तुलना में कई गुना ऊंचे दामों पर बेचे जा रहे हैं पार्ट्स।
• रिपेयर नहीं, सिर्फ रिप्लेस: सर्विस सेंटर गाड़ियों को ठीक करने के बजाय सीधे पार्ट्स बदलने पर जोर देते हैं ताकि लंबा बिल बनाया जा सके।

@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

कांग्रेस के सबसे अनुभवी निडर, प्रभावशाली, प्रखर और मुखर नेता सज्जन वर्मा को मध्यप्रदेश से राज्यसभा न भेजना कांग्रेस की स...
05/06/2026

कांग्रेस के सबसे अनुभवी निडर, प्रभावशाली, प्रखर और मुखर नेता सज्जन वर्मा को मध्यप्रदेश से राज्यसभा न भेजना कांग्रेस की सबसे बड़ी राजनैतिक भूल साबित होगी?

सज्जन वर्मा जी को राज्यसभा भेजते तो इंदौर और पूरे मालवा के कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नए प्राण फूंकने जैसा होता।

देश के उच्च सदन में सज्जन वर्मा जैसा प्रखर नेतृत्व और मुखर आवाज होने से इंदौर सहित पूरे मध्य प्रदेश की गूंज मोदी सरकार तक मजबूती से पहुंचती।

@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
#कांग्रेस

छात्र और अभिभावक कैसे पता करे कि किस यूनिवर्सिटी और किस कॉलेज में एडमिशन उनके भविष्य के बेहतर निर्माण के लिए सर्वश्रेष्ठ...
02/06/2026

छात्र और अभिभावक कैसे पता करे कि किस यूनिवर्सिटी और किस कॉलेज में एडमिशन उनके भविष्य के बेहतर निर्माण के लिए सर्वश्रेष्ठ होगा? ये कौन बताएगा और किसकी जिम्मेदारी है?

@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

इससे ज्यादा शर्मनाक बात क्या होगी मध्यप्रदेश उच्च शिक्षा विभाग और यूनिवर्सिटियों के लिए कि उनके पास प्रदेश के कॉलेजों और यूनिवर्सिटियों का रिजल्ट, शोध, उपलब्धि, प्लेसमेंट और स्किल के वार्षिक आधार पर सार्वजनिक किये जाने वाला कोई डाटा उपलब्ध नहीं है?

आज मध्यप्रदेश में तकरीबन 30 सरकारी और 40 से ज्यादा प्राइवेट यूनिवर्सिटियां संचालित हो रही हैं, इसके अलावा तकरीबन 3500 कॉलेज संचालित हो रहे है। प्रति वर्ष लाखों छात्र इन कॉलेजों में एडमिशन के लिए आते है। लेकिन छात्रों और उनके अभिभावकों के सामने सबसे बड़ी दुविधा यह रहती हैं कि कौनसा कॉलेज या यूनिवर्सिटी छात्र के भविष्य निर्माण के लिए बेहतर या सर्वश्रेष्ठ होगी?

देश में उच्च शिक्षा की सर्वोच्च नियामक संस्था UGC (University Grants Commission) और सरकार का उच्च शिक्षा विभाग रिजल्ट, प्लेसमेंट और स्किल के आधार पर यूनिवर्सिटियों और मान्यता प्राप्त कॉलेजों की रैंकिंग क्यों नहीं लागू करती हैं?

इंदौर में मध्यप्रदेश सरकार की देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) से मान्यता प्राप्त तकरीबन 230 से ज्यादा कॉलेज संचालित हो रहे है!! लेकिन आज तक देवी अहिल्या विश्वविद्यालय ने इन 230 कॉलेजों के वार्षिक रिजल्ट, शोध, और प्लेसमेंट से संबंधित कोई जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं करवाई है, और न ही इन 230 कॉलेजों की श्रेष्ठता, उपलब्धि, प्लेसमेंट और रिजल्ट के आधार पर कोई रैंकिंग प्रथम 1 से अंतिम 230वें नंबर तक की वरीयता सूची जारी की है!?

यही हाल पूरे प्रदेश की सभी सरकारी और प्राइवेट यूनिवर्सिटीयो का है।

प्रदेश की सभी यूनिवर्सिटियों और कॉलेजो में पढ़ने वाले छात्रों जिनको प्लेसमेंट की आवश्यकता है, उन्हें उनकी योग्यता के अनुसार 100 फीसदी प्लेसमेंट के अधिकार की जिम्मेदारी यूनिवर्सिटियों और उनसे मान्यता प्राप्त कॉलेजों के लिए आवश्यक होगा। ऐसा कानून भारत सरकार और प्रदेश सरकार क्यों पारित नहीं करती हैं।

प्रदेश सरकार और भारत सरकार की सरकारी नौकरियों में योग्यता और काबिलियत के आधार पर प्रदेश की यूनिवर्सिटियों का कोटा निर्धारित करें।

राज्य के इंडस्ट्रियल क्षेत्रों और व्यवसायिक जगत में कितने उद्योगों में किस प्रकार के रोजगार उपलब्ध हैं? कितनी वेकेंसी है? क्या योग्यता और स्किल की आवश्यकता है? इसका कोई डाटा किसी भी वर्ष में प्रदेश सरकार ने कभी भी यूनिवर्सिटियों और कॉलेजो को उपलब्ध नहीं कराया है।

सरकार के सरकारी विभागों, निकायों और निगमों द्वारा प्रति वर्ष कितने छात्रों को परमानेंट या कुछ वर्षों के लिए प्लेसमेंट दिया जा सकता है। ऐसा कोई डाटा प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों को कभी उपलब्ध नहीं करवाया जाता हैं??

@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

31/05/2026

महापौर से मुख्यमंत्री तक पैराशूट लीडरशिप की अयोग्यता और अनुभवहीनता की कीमत चुका रहा हैं इंदौर शहर?

@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

इसमें महापौर और मुख्यमंत्री की कोई गलती नहीं है। उन्होंने कभी भी पार्टी आलाकमान को जाकर यह नहीं कहा था कि हमें महापौर या मुख्यमंत्री बनवाओ।

भारतीय जनता पार्टी में लाइन तोड़कर शहर में महापौर, और प्रदेश में मुख्यमंत्री जैसे अहम पदों पर जूनियर, अनुभवहीन, अ - योग्य कार्यकर्ता और नेता को बैठाने की सजा सबसे ज्यादा शहर और प्रदेश की जनता भुगतती है। और शर्मिंदगी उठानी पड़ती है पार्टी के कार्यकर्ताओं को जो जमीनी स्तर पर काम करते है। वही दूसरी तरफ पार्टी के वरिष्ठ नेता अपनी ही पार्टी में "फूफा" बनकर मुँह फुलाए इधर उधर घूमते रहते है?

@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

#महापौर #मुख्यमंत्री #मोहनयादव #भाजपा #इंदौर #हिंदीसमाचार #मध्यप्रदेश

कैसा भारत छोड़ कर जाएंगे?देश के 22 लाख छात्रों के अभिभावक, परिवार, माता - पिता, स्कूल और कोचिंग के टीचरो में से कोई सड़क प...
30/05/2026

कैसा भारत छोड़ कर जाएंगे?

देश के 22 लाख छात्रों के अभिभावक, परिवार, माता - पिता, स्कूल और कोचिंग के टीचरो में से कोई सड़क पर नहीं? कोई कैंडल मार्च नहीं? कोई काली पट्टी नहीं? कोई धरना प्रदर्शन नही? सब चुप और मौन?

इस देश की पढ़ी लिखी मिडिल क्लास और उच्च मिडिल क्लास जनता से हमारी वर्तमान पीढ़ी और आने वाली पीढ़ी क्या उम्मीद रखे?

22 लाख छात्रों की मेहनत और भविष्य के नाम पर मेडिकल कॉलेज प्रवेश परीक्षा "नीट" का पेपर सरकारी धांधली और लापरवाही की वजह से आउट हो गया! और परीक्षा रद्द करनी पड़ी! और अब CUET परीक्षा में धांधली?

@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

#हिंदीसमाचार

इंदौर रियल एस्टेट: प्रॉपटेक कंपनियों का ‘कॉर्पोरेट खेल’ या अवैध डायरी जैसा बड़ा जोखिम?@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौरकुछ ...
27/05/2026

इंदौर रियल एस्टेट: प्रॉपटेक कंपनियों का ‘कॉर्पोरेट खेल’ या अवैध डायरी जैसा बड़ा जोखिम?

@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

कुछ सालों में रियल एस्टेट क्षेत्र में आयी प्रॉपटेक कंपनियों का मॉडल पारंपरिक बिल्डरों जैसा नहीं है जो बैंक लोन या खुद की पूंजी से जमीन खरीदते हैं। ये प्रॉपटेक कंपनियां क्राउडफंडिंग (Crowdfunding) पर चलती हैं। हाल ही में इंदौर की ही एक प्रॉपटेक कंपनी जिसकी पेड अप कैपिटल मात्र 1 लाख रुपए है और लाखों रुपए के घाटे में चल रही हैं उसके द्वारा ₹90 करोड़ की फंडिंग जुटाने की खबर सामने आई है।

‘ग्लोबल आईटी हब’ और ‘इंदौर का नया भविष्य’ जैसे भारी-भरकम मार्केटिंग विज्ञापनों के पीछे छिपा कानूनी चक्रव्यूह!! न रजिस्ट्री, न रेरा (RERA) की सुरक्षा, न सेबी (SEBI) में रजिस्ट्रेशन!!

आखिर किसका डूबेगा पैसा?

इंदौर का रियल एस्टेट बाजार इस समय एक अभूतपूर्व बदलाव के दौर से गुजर रहा है। एक तरफ जहां पारंपरिक रूप से जमीनों के सौदे ‘डायरी’ और पर्चियों पर होते आए हैं (जिन्हें पूरी तरह अवैध माना जाता है), वहीं दूसरी तरफ कॉर्पोरेट इंफ्रास्ट्रक्चर, चकाचौंध भरी ब्रांडिंग और भ्रामक डिजिटल मार्केटिंग के सहारे एक नया ‘प्रॉपटेक’ (Property Technology) निवेश मॉडल पैर पसार रहा है।

ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर के आस पास, सुपर कॉरिडोरऔर बायपास जैसी प्राइम लोकेशंस को “इंदौर का नया भविष्य” और “ग्लोबल आईटी हब” दिखाकर निवेशकों से करोड़ों रुपये जुटाए जा रहे हैं।

लेकिन इस कॉर्पोरेट चमक-दमक के पीछे एक ऐसा कानूनी और वित्तीय रिस्क छिपा है, जो आने वाले समय में छोटे निवेशकों के लिए एक बड़ा वित्तीय हादसा साबित हो सकता है। जमीनी हकीकत यह है कि यह पूरा रिस्क चालाकी से आम निवेशक के सिर पर ट्रांसफर करने का खेल है।

क्या है प्रॉपटेक का मायाजाल? आप ‘ग्राहक’ नहीं, ‘बिजनेस पार्टनर’ हैं!

यह “हाई-रिस्क और भ्रामक मार्केटिंग” का सटीक उदाहरण है। आम आदमी जब ऐसी छोटी प्रॉपटेक कंपनियों में पैसा लगाता है, तो उसे लगता है कि वह जमीन या दुकान खरीद रहा है, उसमें निवेश कर रहा है, प्रॉफिट में बराबर का हिस्सेदार होगा। लेकिन असलियत बेहद चौंकाने वाली है!!

जब आप किसी पारंपरिक बिल्डर से प्लॉट या फ्लैट खरीदते हैं, तो आप कानून की नजर में “Allottee” (खरीदार) होते हैं। प्रोजेक्ट लेट होने या धोखा होने पर रेरा (RERA) आपको तगड़ा संरक्षण देता है। लेकिन प्रॉपटेक कंपनियां आपको जमीन की रजिस्ट्री नहीं देतीं।

आपका पैसा एक LLP (Limited Liability Partnership) या SPV (Special Purpose Vehicle) में जाता है। कानूनी रूप से आप उस प्रोजेक्ट के सह-मालिक (Co-owner) या बिजनेस पार्टनर बन जाते हैं। कल को अगर प्रोजेक्ट डूबता है या कंस्ट्रक्शन रुकता है, तो आप कोर्ट में ‘ठगी’ का केस नहीं कर सकते, क्योंकि कानून कहेगा—आप तो खुद उस बिजनेस के नफा-नुकसान के पार्टनर थे?

‘लिमिटेड लायबिलिटी’ कंपनियों की आड़ में खेला जा रहा है खेल:

हर नए प्रोजेक्ट के लिए एक नई LLP कंपनी बनाई जाती है। यदि वह प्रोजेक्ट फेल होता है, या रुक जाता है, मंदी की वजह से नहीं बिक पाता है तो आपका पैसा लंबे समय के लिए अटक सकता है, फंस सकता है, यहाँ तक कि वह पर्टिकुलर LLP, फर्म खुद को दिवालिया (Bankrupt) घोषित कर सकती हैं!

लेकिन आप मुख्य प्रॉपटेक कंपनी या उसके प्रमोटर्स की व्यक्तिगत संपत्ति पर कोई दावा नहीं ठोक सकते।

न सेबी (SEBI) का डर, न तुरंत लिक्विडिटी की गारंटी

भारत में फ्रैक्शनल रियल एस्टेट (एक ही प्रॉपर्टी में कई लोगों की छोटी हिस्सेदारी) के लिए सेबी (SEBI) के नियम बेहद कड़े हैं। इस कड़े नियंत्रण से बचने के लिए कई प्रॉपटेक कंपनियां सेबी से मान्यता लेने के बजाय मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स (MCA) के तहत सिर्फ LLP बनाकर काम कर रही हैं। इसके चलते निवेशकों के पास कोई मजबूत संस्थागत शिकायत निवारण मंच (Grievance Redressal Forum) नहीं बचता।

इमरजेंसी में फंसेगा पैसा: नो एग्जिट ऑप्शन

प्रॉपटेक कंपनियां अपने ऐप पर दावा करती हैं कि आप शेयर मार्केट की तरह एक क्लिक में अपनी हिस्सेदारी बेचकर बाहर निकल सकते हैं। लेकिन यह पूरी तरह भ्रामक है। यह कोई ओपन स्टॉक एक्सचेंज नहीं है, बल्कि कंपनी का “प्राइवेट मार्केटप्लेस” है। जब तक ऐप के अंदर ही कोई दूसरा खरीदार आपकी हिस्सेदारी लेने को तैयार नहीं होता, आपका पैसा पूरी तरह ब्लॉक रहेगा। किसी मेडिकल या बिजनेस इमरजेंसी में आप इस प्रॉपर्टी से तुरंत कैश नहीं निकाल सकते।

रिटेल निवेशको, आईटी प्रोफेशनल्स, डॉक्टर्स और प्रवासी भारतीय (NRIs)। इन लोगों से मोबाइल ऐप के जरिए ₹5 लाख, ₹10 लाख या ₹25 लाख के छोटे टिकट साइज में अलग-अलग प्रोजेक्ट्स की LLPs या पार्टनरशिप फर्म को दिखाकर पैसा निवेश करवाया जा रहा हैं।

कई टाउनशिप और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स के पूर्ण होने की RERA टाइमलाइन 2029 या उसके बाद की है। यानी अगले कई सालों तक निवेशकों का पैसा केवल कंस्ट्रक्शन के रिस्क पर लगा रहेगा।

जिस दिन कंस्ट्रक्शन कॉस्ट लिमिट से बाहर हुई या बाजार में मंदी आई, या प्रोजेक्ट नहीं बिकता है, उस दिन छोटे व मध्यम वर्गीय निवेशकों के लिए एक बहुत बड़ी वित्तीय त्रासदी में बदल सकता है।

@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

#हिंदीसमाचार

Experience 42 years of trust with Dugar TVS and upgrade to a new TVS Jupiter. "Summer Bonanza Offer" is here—enjoy free ...
27/05/2026

Experience 42 years of trust with Dugar TVS and upgrade to a new TVS Jupiter.

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Dugar TVS: कुंडली में जुपिटर (बृहस्पति) और परिवार में "TVS Jupiter" दोनों बदल देते हैं आपका भाग्य!@री डिस्कवर इंडिया न्य...
25/05/2026

Dugar TVS: कुंडली में जुपिटर (बृहस्पति) और परिवार में "TVS Jupiter" दोनों बदल देते हैं आपका भाग्य!

@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

देवों के गुरु जुपिटर का शुभ प्रभाव लेकर सुख, समृद्धि और सुरक्षा लेकर आया है "TVS Jupiter" स्कूटर आपके और परिवार के लिए

भारतीय संस्कृति में ज्योतिष के सबसे शुभ ग्रह जुपिटर (बृहस्पति या गुरु ग्रह) और भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में उन्नत तकनीक और बेहतरीन इंजीनियरिंग में बेजोड़ TVS Jupiter में एक अनोखा और गहरा संबंध दिखता है।

ज्योतिष में जूपिटर को ज्ञान, भाग्य, समृद्धि और स्थिरता का कारक माना जाता है। ठीक इसी तरह, टीवीएस जुपिटर स्कूटर भी अपने उन्नत तकनीक और स्मार्ट फीचर के साथ आपके जीवन में खुशहाली, भरोसा और प्रगति लेकर आता है।

पूरे विश्व में टीवीएस जुपिटर अपनी श्रेणी में सबसे उन्नत तकनीक का स्कूटर माना जाता है। ज्योतिषियों और ऑटो एक्सपर्ट्स के विश्लेषण के अनुसार, कुंडली के 'मजबूत जुपिटर के सारे शुभ लक्षण टीवीएस जुपिटर स्कूटर में हूबहू नजर आते हैं।

आइए जानते हैं कि कैसे कुंडली के 'मजबूत जुपिटर' के गुण टीवीएस जुपिटर स्कूटर में पूरी तरह सटीक बैठते हैं:

TVS Jupiter अपनी श्रेणी में सबसे स्मार्ट स्कूटर माना जाता है। इसमें मौजूद -

1. SmartXonnect ब्लूटूथ कनेक्टिविटी, डिजिटल कंसोल और वॉइस असिस्ट जैसी आधुनिक तकनीक चालक को हर सफर में सही और 'स्मार्ट' निर्णय लेने में मदद करती है।

2. शानदार माइलेज और वैल्यू फॉर मनी -
जुपिटर स्कूटर अपनी बेहतरीन Ecothrust Fuel Injection (ET-Fi) तकनीक के कारण जबरदस्त माइलेज देता है। इसकी कम रखरखाव लागत और पेट्रोल की बचत आर्थिक समृद्धि और खुशहाली लाती है।

3. जुपिटर स्कूटर का सिर्फ भारत ही नहीं वरन् पूरे विश्व के स्कूटर बाजार में टीवीएस जुपिटर का एक अलग ही रुतबा है। करोड़ों परिवारों का भरोसा जीतकर इस स्कूटर ने ऑटोमोबाइल जगत में कई प्रतिष्ठित पुरस्कार हासिल किए हैं। इसका शानदार लुक सड़क पर चलते समय चालक को गर्व और सम्मान की अनुभूति कराता है।

4. चालकों की सुरक्षा के लिए TVS Jupiter में Synchronized Braking Technology (SBT), बड़े व्हील्स और मजबूत मेटल बॉडी दी गई है। यह उबड़-खाबड़ रास्तों पर भी संतुलन बनाए रखता है।

5. परफेक्ट फैमिली स्कूटर -
TVS Jupiter को आदर्श फैमिली स्कूटर के रूप में डिज़ाइन किया गया है। इसका बड़ा लेगरूम, आरामदायक लंबी सीट और विशाल अंडर-सीट स्टोरेज (डिक्की) परिवार के हर सदस्य—चाहे बुजुर्ग हों, महिलाएं हों या युवा—सभी की जरूरतों को आसानी से पूरा करता है।

जिस प्रकार कुंडली में बृहस्पति का मजबूत होना जीवन को सुखी, सुरक्षित और समृद्ध बनाता है, ठीक उसी तरह परिवार में TVS Jupiter का होना रोजमर्रा के सफर को आसान और खुशहाल बनाता है। यह सिर्फ एक स्कूटर नहीं, बल्कि आपके परिवार का 'सच्चा गुरु' है जो हर राह पर आपका सही मार्गदर्शन करता है।

भारतीय सड़कों पर अगर आपके पास TVS Jupiter है, तो आपका हर सफर सुरक्षित, किफायती और आरामदायक बन जाता है। यह सिर्फ एक स्कूटर नहीं, बल्कि आपके परिवार की प्रगति, समृद्धि और सुरक्षा का सच्चा सारथी है।

@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

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