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कभी इस नजर से भी किसी स्त्री को देख लिया करो दुनिया की सबसे घटिया कौम......वासना के भूखे भेड़ियों।सत्यं शिवं सुन्दरम्" भा...
15/10/2026

कभी इस नजर से भी किसी स्त्री को देख लिया करो दुनिया की सबसे घटिया कौम......वासना के भूखे भेड़ियों।

सत्यं शिवं सुन्दरम्" भारतीय दर्शन और उपनिषदों से जुड़ा एक अत्यंत पवित्र और गहरा संस्कृत वाक्यांश है, जिसका अर्थ है— "जो सत्य है, वही कल्याणकारी (शिव) है और वही सुंदर (सुन्दरम) है। स्त्री देह को भी परम पिता परमेश्वर ने बनाया है।

पश्चिम के समुद्र तटों में बिकनी पहने एक से बढ़कर एक सुंदर स्त्री लेटी रहती हैं। लेकिन कोई आँख उन्हें ऐसी आंख से नहीं देखती जैसी आंख से हिंदू सनातन धर्म के तथाकथित मर्यादा का ज्ञान बताने वाले लोग देखते है।

@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

मशीनों और फैक्ट्री में निर्मित कॉर्पोरेट और ब्रांडेड ज्वेलर्स शोरूम सोने की ज्वैलरी और आभूषणों के मेकिंग चार्जेस सोने के...
15/10/2026

मशीनों और फैक्ट्री में निर्मित कॉर्पोरेट और ब्रांडेड ज्वेलर्स शोरूम सोने की ज्वैलरी और आभूषणों के मेकिंग चार्जेस सोने के रेट के अनुपात में प्रतिशत % में क्यों लेते हैं?

@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

अधिकांश कॉर्पोरेट और ब्रांडेड ज्वेलरी जैसे टाटा ग्रुप का तनिष्क, मलाबार गोल्ड, कल्याण ज्वेलर्स, बिड़ला ग्रुप का इन्द्रिया, PNG ज्वेलर्स...…आदि की अधिकांश ज्वेलरी मशीनों और फैक्ट्रियों में ही बनाई जाती हैं। इसके बावजूद भी इन कॉर्पोरेट शोरूम पर मेकिंग चार्जेस सोने के बाजार भाव के 10 से लेकर 20 फीसदी तक लिए जाते है! जो सोने की ज्वेलरी और बहुमूल्य आभूषणों को अत्यधिक महंगा कर देते है!!

सोना एक मूल्यवान अंतरराष्ट्रीय धातु है, जिसकी बाजार कीमत तो वैश्विक स्तर पर तय होती है और सभी ज्वेलर्स के लिए समान होती हैं। लेकिन सोने से बनायी जाने वाली ज्वेलरी और खूबसूरत आभूषणों के ‘मेकिंग चार्जेस’ पूरी तरह से ज्वेलर्स के हाथ में होते हैं।

पारंपरिक रूप से भारत में हमेशा ‘प्रति ग्राम’ (Per Gram) के हिसाब से ही गढ़ाई या मेकिंग चार्जेस लिया जाता था (जैसे: ₹50 या ₹100 प्रति ग्राम)। लेकिन 1990 के दशक के अंत और 2000 के दशक की शुरुआत में जब भारत में बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियां जैसे टाटा (तनिष्क), रिलायंस, बिड़ला (इंद्रिया) और चैन ऑफ ज्वेलरी शोरूम जैसे कल्याण, मलाबार, PNG, TBZ जैसे ब्रांडेड ज्वेलरी कंपनियों का आगमन हुआ, तो उन्होंने धीरे-धीरे प्रतिशत-आधारित (Percentage-based) मॉडल को बढ़ावा देना शुरू किया।

पिछले 5 वर्षों में सोने की कीमतों में भारी उछाल आया है, लेकिन इसके साथ मेकिंग चार्जेस बढ़ने के पीछे मुख्य कारण “प्रतिशत-आधारित गणना” और बढ़ती परिचालन लागत है।

ज्यादातर कॉर्पोरेट ज्वेलर्स मेकिंग चार्जेस को सोने की कीमत के एक निश्चित प्रतिशत (जैसे 10%, 12%, 15%, 20% या उससे ज्यादा तक) के रूप में तय करते हैं। जब सोने का दाम बढ़ता है, तो वही मेकिंग चार्जेस प्रतिशत के आधार पर गणना करने की वजह से ज्वेलरी और आभूषणों का मूल्य बहुत ज्यादा बढ़ जाता है।

• उदाहरण के तौर पर मान लीजिए मेकिंग चार्ज 12% है।

• पहले जब 22 कैरेट 10 ग्राम सोना ₹40,000 का था, तब 12% के हिसाब से मेकिंग चार्ज ₹4,800 होता था।

• आज जब वही 22 कैरेट 10 ग्राम सोना करीब ₹1,40,000 के पास पहुंच गया है तो 12% के हिसाब से मेकिंग चार्ज सीधे ₹16,800 हो जाता है।

यदि ग्राहक ने 30 ग्राम (3 तोला) की सोने की ज्वेलरी खरीदी तो ग्राहक को कुल 50,400 रुपए सिर्फ मेकिंग चार्ज के देना पड़ेंगे और यदि 50 ग्राम (5 तोला) सोने की ज्वेलरी खरीदी तो 84,000 रूपए मेकिंग चार्जेस के देना पड़ेंगे।

• यानी कारीगरी उतनी ही रही, लेकिन सोने का भाव बढ़ने से मेकिंग चार्जेस की गणना प्रतिशत के गणित से करने की वजह से मेकिंग चार्ज कई गुना बढ़ा जाता हैं।

जैसे-जैसे सोने के दाम तेजी से बढ़े, कॉर्पोरेट ज्वेलर्स ने अपने मुनाफे, शोरूम के खर्च, इंश्योरेंस, बैंक लोन और जोखिम (Risk Factor) को मेंटेन करने के लिए इसे सोने की कुल कीमत के प्रतिशत से जोड़ दिया।

@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

इंदौर शहर में पुलिस के रिकॉर्ड में जो भू माफिया हिस्ट्री शीटर है! थानों में अनेको FIR है! न्यायालय में जिन जमीनों के माम...
12/10/2026

इंदौर शहर में पुलिस के रिकॉर्ड में जो भू माफिया हिस्ट्री शीटर है! थानों में अनेको FIR है! न्यायालय में जिन जमीनों के मामले में क्रिमिनल केस पेंडिंग हैं! उन्हीं जमीनों के मालिक घोषित किए जा रहे है सिविल न्यायालयों के फैसलों में? कैसे मिलेगा पीड़ित को इंसाफ?

@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

इंदौर शहर में दिवंगत सुरेन्द संघवी, उसका बेटा प्रतीक संघवी, दीपक मद्दा, बॉबी छाबड़ा कुख्यात और हिस्ट्रीशीटर भू माफिया गैंग द्वारा 350 करोड़ रुपए की एबी रोड, LIG चौराहे से लगी अयोध्या पुरी की बेशकीमती जमीन और 500 करोड़ की कनाड़िया रोड स्थित डायमंड कॉलोनी की जमीन को कानूनी रूप से हड़पने के लिए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और परिवार, इंदौर कलेक्टर कार्यालय, नगर निगम, पुलिस, इंदौर की राजनीति के कांग्रेसी और भाजपाई कद्दावर एवं बाहुबली नेताओं को बहुत बहुत बधाई और हार्दिक शुभकामनाएं।

उपरोक्त दोनों ग्रह निर्माण संस्थाओं के सदस्यों को आवंटित प्लॉट की जमीनें हड़पने में एक जैसी Modus Operandi (मोडस ऑपेरेंडी) षडयंत्र का इस्तेमाल किया गया!! बधाई हो।

हमे भू माफिया कहते है। तुम्हारी औकात क्या है डायमंड कॉलोनी और अयोध्या पुरी रहवासी संघ के प्लाॅट धारकों? कोर्ट को जो हम बताएंगे वही अंतिम सत्य होगा। किस कलेक्टर और सरकारी अधिकारी की इतनी हिम्मत और औकात है कि हमारे खिलाफ कोर्ट में जवाब दे दे? तुम्हारे नेताओं, सरकार और प्रशासन को हम अपनी जेब में रखते है।

जालसाजी और धोखाधड़ी करने वाला भू-माफिया समाज के लिए साधारण चोरों या जेबकतरों से कहीं अधिक खतरनाक और घातक होता है। जेबकतरे या छोटे-मोटे चोर किसी व्यक्ति का कुछ नगदी, सोना या सामान चुराते हैं, जिससे पीड़ित को तुरंत झटका तो लगता है, लेकिन वह पूरी तरह तबाह नहीं होता।

इसके विपरीत, भू-माफिया जालसाजी, धोखाधड़ी, फर्जी और कूट रचित दस्तावेजों का ऐसा जाल बुनता है कि उस जाल में इंसान की जीवनभर की जमा-पूंजी और उसकी छत ही छीन लेता है। एक आम आदमी अपनी पूरी जिंदगी मेहनत करके, पेट काटकर एक प्लॉट या मकान के लिए पैसे जोड़ता है। भू-माफिया का शिकार होने के बाद पीड़ित व्यक्ति सालों-साल कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने को मजबूर हो जाता है।

छोटे चोर कानून से डरकर भागते हैं, जबकि भू-माफिया कानून, प्रशासन और सिस्टम की खामियों का पूरे सिस्टम के साथ मिलीभगत कर फायदा उठाते हैं। समाज का सफेद पोश और धनाढ्य वर्ग नेताओं और भ्रष्ट आला प्रशासनिक अधिकारियों के साथ संबंध रखकर रसूखदार कहलाते है। नेताओं के वरदहस्त और भ्रष्ट अधिकारियों के साथ मिलकर संगठित अपराध चलाते हैं।

यह माफिया सरकारी जमीनों, गृह निर्माण सहकारी साख संस्थाओं और विवादित संपत्तियों पर अपनी पैनी नजर रखते हैं।

@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
#हिंदीसमाचार . #भूमाफिया

यह रिश्ता क्या कहलाता हैं? इस प्यार को क्या नाम दे?लिविंग रिलेशनशिप में "पैसा, सेक्स और धोखा" जीवनशैली के आधार स्तंभ है।...
10/10/2026

यह रिश्ता क्या कहलाता हैं? इस प्यार को क्या नाम दे?

लिविंग रिलेशनशिप में "पैसा, सेक्स और धोखा" जीवनशैली के आधार स्तंभ है। चरित्र की कोई खास अहमियत नहीं है!!

25 साल के एक चोर के साथ निपानिया स्थित हाई प्रोफाइल सोसाइटी निवासी 44 वर्षीय महिला लिविंग रिलेशनशिप में रह रही थी !!

महिला के घर में लिविंग रिलेशनशिप में रहने वाला महिला का चोर साथी 1 करोड़ रुपए का सोने का बिस्किट, 2 लाख रुपए नगद सहित कुल 1.10 करोड़ का माल चोरी कर भाग गया था। इंदौर लसूड़िया पुलिस थाने ने आरोपी को राजस्थान के जोधपुर से माल सहित पकड़ा।

@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
#हिंदीसमाचार *x

असली सरकार जिला मुख्यालयों में बैठती हैं न कि राज्यों और देश की राजधानी में। मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री से आज तक 140 कर...
09/10/2026

असली सरकार जिला मुख्यालयों में बैठती हैं न कि राज्यों और देश की राजधानी में। मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री से आज तक 140 करोड़ देशवासियों को सीधे कोई काम नहीं पड़ा है।

@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

लोकतन्त्र में जनता का सबसे बड़ा और पहला गद्दार, धोखेबाज़ और चालबाज़ क्षेत्र का सरपंच, पार्षद, विधायक और सांसद होता हैं, क्योंकि जनता ने इन्हें विश्वास के साथ चुना है। दूसरा नंबर आता है क्षेत्र के विपक्षी दलों के नेताओं का। तीसरा नंबर आता है विभाग के मंत्री का। चौथे नंबर आता है मुख्यमंत्री का। और सबसे आखिरी में पार्टी आलाकमान और प्रधानमंत्री का जिनकी जिम्मेवारी है इस पूरे सिस्टम की जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करने की।

यदि आप और हम यह समझते हैं कि चीफ सेक्रेटरी, कलेक्टर, कमिश्नर, पुलिस के आला अधिकारी और इनके मातहत सरकारी महकमा जनता के लिए काम करते हैं? तो हम न सिर्फ गलतफहमी में जी रहे वरन् पीढ़ियों से मूर्ख हैं। ये नौकरशाह और इनके अधीनस्थ आप और हमारे द्वारा चुने गए विधायकों, पार्टी द्वारा बनाए गए मंत्रियों, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के लिए काम करते हैं।

और इसी भ्रष्ट, दुष्ट, और धृष्ट सरकारी सिस्टम को अपनी उंगली और पांवों तले रखने के लिए लोकतंत्र में चुनाव की परंपरा है। जिस पार्टी को बहुमत है उस पार्टी की सरकार है। और उसका मुखिया इस सरकारी सिस्टम का शहंशाह है। और शहंशाह के नौकरो को नौकरशाह कहा जाता हैं।

क्या आज तक इस देश के किसी नेता, विधायक, सांसद, मंत्री, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री ने कभी उन “सरकारी दफ्तरों” के भीतर झांककर देखा है, जहाँ जनता की पीढ़ियां अपने हक, अधिकार और इंसाफ पाने के लिए सदियों से दम तोड़ती आ रही हैं?

क्या देश के किसी भी विधायक, मंत्री, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री में आज यह नैतिक साहस और हिम्मत बची है कि वे सार्वजनिक मंच से किसी अदना कर्मचारी से लेकर आला अधिकारी तक को खुलेआम यह चेतावनी दे सकें कि वे जनता के सेवक हैं, शासक नहीं?

सरकारों के चीफ सेक्रेटरी, कमिश्नर, कलेक्टर से लेकर SDM, तहसीलदार, पटवारी तक… और थानों के TI, पुलिस कप्तान, IG, DGP से लेकर आरटीओ, आबकारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, पीडब्ल्यूडी और नगर निगम के इन आला अफसरों के एयर कंडीशन ऑफिस के दरवाजों पर इस देश का आम नागरिक आज भी न्याय की भीख मांग रहा है। लेकिन इन सरकारी दफ्तरों में इंसाफ की देवी को वैश्या बनाकर उसकी नीलामी की बोलिया लगाई जा रही हैं।

ये कोई सरकारी दफ्तर नहीं, बल्कि वह यातना गृह हैं जहाँ लोग अपने हक और अधिकारों के लिए पीढ़ियों से चप्पलें घिस रहे हैं, नाक रगड़ रहे हैं और हाथ जोड़कर पैरों में गिर रहे हैं। हद तो यह है कि अपनी खून-पसीने की कमाई लुटाने के बाद भी जब इन अफसरों की अवैध मांगें और रिश्वत की भूख शांत नहीं होती, तो इस देश की बेबस परिवारों, माताओं-बहनों को अपने मंगलसूत्र, गहने और पुश्तैनी जमीन तक सूदखोरों के पास गिरवी रखनी पड़ती है।

क्या कॉकरोच, कांग्रेस और विपक्षी दलों के नेता लोकतंत्र में “सरकार” का क्या मतलब होता हैं इतना भी नहीं जानते है? या जनता को बताना नहीं चाहते है?

कॉकरोच जनता पार्टी का संस्थापक अभिषेक दीपके, प्रवक्ता सौरभ दास और यू ट्यूबर ध्रुव राठी ये सब पोलिटिकल टूल किट हैं कांग्रेस और विपक्षी पार्टियों के?

@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
#हिंदीसमाचार

माइक्रो मिट्टी के स्वयंभू CEO और तथाकथित रियल एस्टेट फिनटेक विशेषज्ञ मनोज धनोतिया आखिर कॉर्पोरेट सेलिब्रिटी लेखक चेतन भग...
03/10/2026

माइक्रो मिट्टी के स्वयंभू CEO और तथाकथित रियल एस्टेट फिनटेक विशेषज्ञ मनोज धनोतिया आखिर कॉर्पोरेट सेलिब्रिटी लेखक चेतन भगत को भी नहीं समझा पाए कि माइक्रो मिट्टी क्या है और वो उसमें निवेश क्यों करे?

@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

अखबारों, इंटरनेट और सोशल मीडिया पर करोड़ों रुपये के विज्ञापनों और सैकड़ों प्रायोजित (पैसे और विज्ञापन देकर) इंटरव्यूज की बाढ़ लाने के बावजूद, माइक्रो मिट्टी (Micro Mitti) और इसके स्वयंभू रियल एस्टेट विशेषज्ञ व CEO मनोज धनोतिया आज तक इंदौर की जागरूक और शिक्षित जनता को यह समझाने में नाकाम रहे हैं कि आखिर यह कंपनी है क्या?

स्थिति यह है कि चेतन भगत जैसे कॉर्पोरेट जगत के दिग्गज लेखक और सेलिब्रिटी भी इस उलझन को नहीं सुलझा पाए कि माइक्रो मिट्टी असल में एक रियल एस्टेट डेवलपर है? जमीन की मालिक है? या सिर्फ फ्लैट और प्लॉट बेचती है? या एक प्रॉप फिनटेक दलाल है? जो आम जनता को प्रोजेक्ट का मालिक बताकर उनसे पैसा निवेश कराकर वास्तविक मालिक को प्रॉफिट दिलाकर एक्जिट करवाने का कोई सुनियोजित खेल?

पिछले हफ्ते इंदौर में दैनिक भास्कर स्टार कनेक्ट के तहत देश के जाने-माने लेखक चेतन भगत ने माइक्रो मिट्टी के फाउंडर व CEO मनोज धनोतिया का इंटरव्यू लिया। इसमें उन्होंने मनोज धनोतिया के व्यक्तिगत जीवन और बिज़नेस में उनकी शुरुआत और उनके विज़न के बारे में खुलकर बात की।

इंटरव्यू के दौरान माइक्रो मिट्टी के इस स्वयंभू कर्ताधर्ता ने पूरे समय फ़िज़ूल की बेबुनियाद, अतार्किक, असंगत, अव्यावहारिक और अनुपयोगी बातें की लेकिन किसी भी बात का स्पष्ट और पारदर्शी जवाब नहीं दिया!

1 घंटे से ज्यादा चले इस इंटरव्यू में माइक्रो मिट्टी के स्वयंभू CEO मनोज धनोतिया अपने शुरूआती जीवन से लेकर उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक अभावों के चलते अमेरिका कैसे पहुंचे, अमेरिका से रातों रात अचानक भारत कैसे आ गए? यह स्पष्ट तरीके से बताने में पूर्ण रूप से असफल रहे?

भारत आने के बाद माइक्रो मिट्टी की शुरुआत कैसे हुई? किसके निवेश से 1000 करोड़ का लैंडबैक तैयार हुआ? माइक्रो मिट्टी के बैनर तले डेवलप होने वाले तीनों प्रोजेक्ट में लैंड से लेकर डेवलपमेंट तक कौन पैसा लगा रहा हैं? प्रोजेक्ट का असली मालिक कौन है और वो मीडिया या पब्लिक के सामने क्यों नहीं जा रहे है? इन महत्वपूर्ण प्रश्नों के कोई जवाब माइक्रो मिट्टी के तथाकथित स्वयंभू फाउंडर ने अपनी तरफ से नहीं दिए?

अगर यह एक प्रॉप-टेक कंपनी है, तो सवाल उठता है कि इसके बैनर तले इंदौर में चल रहे तीन प्रोजेक्ट्स में अब तक कितने लोगों ने मुनाफा कमाने के लिए निवेश किया है— 50, 100, 500 या 1000? या करेंगे?

कॉर्पोरेट लेखक चेतन भगत ने जब उनसे पूछा कि यदि कोई आम निवेशक 5 से 10 लाख रूपए माइक्रो मिट्टी में 3 साल के लिए निवेश करता है, तो उसे कितना प्रॉफिट कब और कैसे मिलेगा? तो इसका कोई स्पष्ट जवाब माइक्रो मिट्टी के स्वयंभू CEO मनोज धनोतिया के पास नहीं था?

ज़मीन से लेकर प्रोजेक्ट डेवलपमेंट और इसके भारी-भरकम प्रचार-प्रसार में पूंजी लगाने वाला असली मालिक कौन है, और वह अपना कितना प्रॉफिट कमाकर कब और कैसे एग्जिट लेगा?

प्रॉप-टेक के इस उलझाऊ फॉर्मेट में निवेश करके इंदौर शहर के इन प्रोजेक्ट्स में कितने लोग ‘कागज़ी’ मालिक बन चुके हैं या बनेंगे?

उपरोक्त सभी बुनियादी और महत्वपूर्ण सवालो के सीधे और पारदर्शी जवाब देने में माइक्रो मिट्टी के तथाकथित रियल एस्टेट फिनटेक विशेषज्ञ मनोज धनोतिया पूरी तरह असफल रहे हैं।

@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
#हिंदीसमाचार

धूर्त, धोखेबाज़ भू माफियों के साथ संपूर्ण षड्यंत्र में बराबर की भागीदार फरार श्रीमती नीना पति संजय अग्रवाल और रितु पति म...
02/10/2026

धूर्त, धोखेबाज़ भू माफियों के साथ संपूर्ण षड्यंत्र में बराबर की भागीदार फरार श्रीमती नीना पति संजय अग्रवाल और रितु पति मनोज अग्रवाल को प्लॉट के नाम पर करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी के मामले में सेशन न्यायालय द्वारा अग्रिम जमानत!!

@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

आरोपियों के खिलाफ 17 गंभीर आपत्तियां....! गैर जमानतीय 7 से 10 साल की जेल की सजा के अपराध में FIR....! करोड़ो रूपए लेकर न तो प्लॉट दिए और न ही रजिस्ट्री करवाई....! पति और साथी आरोपी वर्षों से फरार है....! निगम में बंधक प्लॉट भी अवैध रूप से बेच डाले....! टाउनशिप की संपूर्ण भूमि की टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से अनुमति के बावजूद टाउनशिप की भूमि का एक तिहाई से ज्यादा हिस्सा अवैध रूप से अन्य को विक्रय किया....! आरोपी महिलाओं के घर इंदौर में विभिन्न जगहों से लेकर मुम्बई और विदेशों तक में.…सभी आरोपियों के पास पासपोर्ट भी है....! टाउनशिप की जमीनें आरोपी पत्नियों के नाम….! न्यायालय की आदेश पत्र में आरोपी महिलाओं को गृहिणी की जगह व्यवसायिक और बिजनेस महिलाएं बताया गया है, ज़मीन के मालिकाना हक और संपूर्ण सरकारी अनुमतियाँ आरोपी महिलाओं के नाम पर ही है....! फिर गृहिणी और सीमित भूमिका बताकर इंदौर सेशन न्यायालय ने कैसे अग्रिम जमानत के आदेश दे दिए!!

देश के न्यायिक सिस्टम (पुलिस, वकील और न्यायालयों में बैठे जज) से किसी पीड़ित को सही वक्त पर न्याय न मिलने की मुख्य वजह न्याययिक सिस्टम में बैठा हर वो शख़्स हैं, जो धूर्त, भ्रष्ट और अपराधी है। चूंकि वो संवैधानिक और वैधानिक पद पर बैठे है। और सरकार की सेवा में है तो उसके फैसले के खिलाफ आवाज उठाना इस आजाद हो चुके गुलाम देश में कानून की अवमानना, सरकारी काम में हस्तक्षेप और राष्ट्रद्रोह या राष्ट्रविरोधी जैसे गंभीर अपराध का दोषी है??

कुख्यात आशीष दास, पुष्पेंद्र वढेरा, गुरुनाम सिंह धालीवाल, गिरीश वाधवानी, रविंद्र, नवीन और दीपक तीनों पिता अमरदास माटा के साथ नीना पति संजय अग्रवाल और रितु पति मनोज अग्रवाल ने अपने धूर्त और धोखेबाज़ पतियों के साथ धूर्तता, धोखेबाजी, कूटरचना, जालसाजी और बेईमानी की सभी सीमाओं को पार करते हुए पिनेकल ड्रीम और पिनेकल द ग्रांड टाउनशिप का ऐसा जाल बुना और उस जाल से घर और प्लॉट खरीदने वालों से करोड़ो रूपए हड़प लिए। आज 11 साल बाद भी पीड़ितों को न तो प्लॉट मिला और न ही खून पसीने की गाढ़ी कमाई वापस मिली!!

तकरीबन 17 पीड़ितों द्वारा जिला कलेक्टर इंदौर, इंदौर नगर निगम, राज्य आर्थिक अपराध शाखा, क्राइम ब्रांच इंदौर के अलावा विभिन्न फोरमो में शिकायते की गई।

न्यायालय अपर कलेक्टर जिला इंदौर के अपर कलेक्टर श्रीमान गौरव बेनल ( IAS) के न्यायालय में प्रकरण क्रमांक 0224/ब -121/2024-25 में समस्त सबूतों और साक्ष्यों के साथ विस्तृत सुनवाई कर आदेश पारित किया।

पारित आदेश में अपर कलेक्टर गौरव बेनल ने स्पष्ट रूप से यह फैसला देते हुए आदेश दिया कि “प्रकरण में यह सिद्ध पाया जाता है कि अनावेदकगणों द्वारा साथ मिलकर शिकायतकर्ताओं से प्लॉट के एवज में राशि प्राप्त की गई, परंतु प्लॉट नहीं दिया गया और न ही राशि वापस की गई। प्रतीत होता है कि शिकायतकर्ताओं के साथ धोखाधड़ी की गई है। धोखाधड़ी के संबंध में कार्यवाही हेतु शिकायतकर्ताओं को सक्षम पुलिस अधिकारी के समक्ष समस्त साक्ष्यों के साथ आवेदन प्रस्तुत किया जाना चाहिए।”

2 सितंबर 2026 को थाना क्राइम ब्रांच ने नीना अग्रवाल, रितु अग्रवाल और संजय अग्रवाल के खिलाफ भादवि की धारा 420, 409, 467, 468 और 120 बी 7 साल से लेकर 10 साल तक कि सजा और गैर जमानतीय अपराध की धाराओं में FIR दर्ज की।

दिनांक 29 सितंबर 2026 को अपर सत्र न्यायालय इंदौर के माननीय न्यायाधीश मनीष कुमार लोवंशी ने 6 पीड़ित आवेदकों की गंभीर आपत्तियो के अलावा एक मुख्य फरियादी आपत्तिकर्ता रोहित सूद की तरफ से माननीय न्यायालय को बताया गया कि आरोपीगणों द्वारा BNSS की धारा 528 के तहत लगाई गई एक याचिका क्रमांक 45227/2026 लंबित है!!

इसके अलावा नगर निगम में बंधक रखे प्लॉटो को अवैध रूप से विक्रय करना! टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से 22 एकड़ की अनुमति प्राप्त करने के बाद उसमें से 9.3 एकड़ जमीन किसी अन्य को विक्रय करना! 17 पीड़ितों एवं आवेदक गणों से करोड़ो रूपए प्लॉट के नाम पर लेने के बाद भी न तो रजिस्ट्री की और न ही कब्जा दिया!! फरियादियों और पीड़ितों की उपरोक्त गंभीर आपत्तियो के बावजूद न्यायाधीश ने मात्र 50 – 50 हजार रुपए की जमानत राशि पर नीना पति संजय अग्रवाल और रितु पति मनोज अग्रवाल को अग्रिम जमानत के आदेश दे दिए!!

क्या यह जमानत स्थिर रखे जाने योग्य है? यदि आरोपी ही पुलिस की गिरफ्तारी से बचाए जायेगे तो जाँच कैसे होगी?

@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर
#भूमाफिया #हिंदीसमाचार

क्या मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी दिसम्बर 2028 में होने वाले विधानसभा चुनावों में एक बार ...
01/10/2026

क्या मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी दिसम्बर 2028 में होने वाले विधानसभा चुनावों में एक बार फिर पूर्ण बहुमत से सरकार बना पाएगी?

@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

पश्चिम के प्रसिद्ध राजनीतिक विचारक निकोलो मैकियावेली ने अपनी कालजयी पुस्तक ‘द प्रिंस’ में लिखा है कि एक कुशल शासक को शेर की तरह पराक्रमी और लोमड़ी की तरह चतुर होना चाहिए।

प्रदेश के आला प्रशासनिक अधिकारियों और सरकारी अमले के बीच मुख्यमंत्री के व्यक्तित्व, बौद्धिकता, निर्णय लेने की क्षमता और कठोरता को लेकर क्या छवि है? यह तो प्रदेश के चीफ सेक्रेटरी और पार्टी के कार्यकर्ता ही बता सकते हैं, कि मुख्यमंत्री का कोई डर या खौफ सरकारी अमले में है कि नहीं?

बीते तीन वर्षों में डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री के रूप में भाजपा संगठन, कार्यकर्ताओं और आम जनता—विशेषकर युवाओं, किसानों, व्यापारियों एवं समाज के वंचित वर्गों के बीच अपनी और भाजपा सरकार की कैसी छवि स्थापित की है?

क्या मुख्यमंत्री प्रदेश में एक लोकप्रिय नेता के रूप में अपनी पहचान बनाने में सफल रहे हैं?

क्या मुख्यमंत्री की वक्तव्य और भाषण देने की शैली, भाषा और शब्दों से उनके उच्च शिक्षित और डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त ज्ञान, विवेक और बौद्धिक क्षमता परिलक्षित होती है?

क्या मुख्यमंत्री जी अपने भाषणों और वक्तव्य से जनता और कार्यकर्ताओं को प्रभावित कर पाते है?

कार्यकर्ताओं से मिलने, बात करने, उनकी समस्याओं के त्वरित निदान और आम जनता के बीच अपनत्व और पारिवारिक छवि का निर्माण करने में मुख्यमंत्री कितने सफल हुए हैं?

उल्लेखनीय है कि 13 दिसम्बर 2023 को केंद्रीय नेतृत्व द्वारा भेजे गए नाम के आधार पर, प्रदेश भाजपा और आम जनता को चौंकाते हुए डॉ. मोहन यादव को मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री चुना गया था। आगामी 13 दिसम्बर 2026 को उनके मुख्यमंत्री काल के 3 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं।

सिर्फ भ्रष्टाचार से सरोबार विकास और लोकलुभावन योजनाओं की घोषणाएं करने मात्र से कोई सरकार और मुख्यमंत्री अपनी पार्टी को चुनावों में विजय नहीं दिलवा सकता हैं।

@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

क्या यह वाकई सच है? और यदि यह सच है तो मुख्यमंत्री जी बताए पीड़ित क्या करे?@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर उज्जैन से लेकर...
26/09/2026

क्या यह वाकई सच है? और यदि यह सच है तो मुख्यमंत्री जी बताए पीड़ित क्या करे?

@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

उज्जैन से लेकर इंदौर तक जमीनों से जुड़े कई विवादास्पद मामलों को सुलझाने और लटकाने में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के बड़े भाई नंदू यादव,नारायण यादव और चचेरे भाई बबलू यादव के नाम का खुलकर इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है??

उज्जैन और इंदौर जिले के कई तहसीलों के एसडीएम, तहसीलदार और पटवारीयों के ऊपर मुख्यमंत्री के भाइयों और रिश्तेदारों के नाम का इस्तेमाल कर दवाब बनाया जा रहा है!?

@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

बहुत ना इंसाफी है!? करोड़ो रूपए के विज्ञापन सहयोग देने के बावजूद शहर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक छवि खराब करने से नहीं चूक...
26/09/2026

बहुत ना इंसाफी है!? करोड़ो रूपए के विज्ञापन सहयोग देने के बावजूद शहर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक छवि खराब करने से नहीं चूकते हैं??

@री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

चुनावों के मैनेजमेंट से लेकर, भव्य, दिव्य और विशाल कथाओं एवं भजन, भोजन, भंडारो के अलावा राजनैतिक और सामाजिक विराट आयोजनों को सफलता पूर्वक अंजाम देने में राष्ट्रीय स्तर पर महारथ हासिल होने के बावजूद मीडिया प्रबंधन में इतनी बड़ी चूक कैसे कर रहे हैं कैलाश विजयवर्गीय और रमेश मेंदोला मित्रमंडली?

मुख्यमंत्री बनने की काबिलियत, योग्यता, अनुभव रखने वाला और मित्रता को सर्वोच्च दर्जा देने वाला देश का कद्दावर और पूरे प्रदेश के कार्यकर्ताओं का चहेता नेता कैलाश विजयवर्गीय प्रदेश की राजनीति में हाशिये पर क्यों? क्या इसके पीछे मित्र मोह, कार्यकर्ता मोह, पुत्र मोह, शहर मोह के अलावा मीडिया प्रबंधन में बड़ी चूक तो नहीं?

रमेश मेंदोला मित्र मंडल, आकाश विजयवर्गीय मित्र मंडल, कल्पेश विजयवर्गीय मित्र मंडल, कैलाश विजयवर्गीय मित्र मंडल और इनके समर्थक कार्यकर्ता हर साल करोड़ो रूपए के विज्ञापन, सहयोग और सुविधाएं इंदौर के कुछ खास मीडिया संस्थानों और अखबारों को पिछले कई दशकों से हर साल देते आ रहे हैं!!

लेकिन उनके मुंह से निकली कोई ऐसी बात जो आम बोल चाल की भाषा में हँसी मजाक में स्वस्थ और पवित्र नीयत से इस्तेमाल की गई हैं। सभ्यता, संस्कृति और शारीरिक सुरक्षा को ध्यान में रखकर भावनात्मक रूप से कही गई हो और कही गई बात का राजनैतिक, संवैधानिक और सामाजिक दायित्व, कर्तव्य और जिम्मेदारी से कोई लेना देना नहीं है। फिर भी उसे अपने हिसाब से तोड़ मरोड़कर, अर्थ का अनर्थ बनाकर प्रकाशित या प्रसारित करने को पत्रकारिता कम, इमेज और व्यक्तित्व की छवि खराब या धूमिल करना ही कहेंगे।

यही सलूक सहज, सरल और सहृदय स्वभाव के कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय के साथ शहर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक का मीडिया कर रहा है!?

इंदौर शहर में राजस्थान से आए एक अखबार ने अपने शुरूआती दौर से आज तक शहर में जड़े मजबूत करने के लिए मुख्य आधार ही कैलाश विजयवर्गीय, विधायकों और उनसे जुड़े कार्यकर्ताओं और मित्रों की छोटी से छोटी नकारात्मक खबर को प्रमुखता से अपने अखबार में स्थान देने को ही पत्रकारिता का मुख्य धर्म मानकर प्रकाशित करते आ रहा हैं!!

@प्रदीप मिश्रा री डिस्कवर इंडिया न्यूज इंदौर

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