16/08/2022
अब समय आ गया है कि प्राइवेट और सरकारी स्कूलों पर उपभोक्ता कानून और आई पी सी की धाराओं के अंतर्गत प्रकरण दर्ज करवाने की कारवाई सुनिश्चित की जाए!?
@प्रदीप मिश्रा री डिसकवर इंडिया न्यू्ज इंदौर
महंगी फीस लेकर फर्जी मार्कशीट, अयोग्य छात्रों को भी फर्स्ट डिविजन मे पास करना! डमी स्कूल, अयोग्य और नाकाबिल टीचर, कोचिंग संस्थानों से कमिशन, छात्रों का पारिवारिक डाटा व्यवसायिक संस्थानों को बेचना! कॉपी किताबों और यूनीफॉर्म मे कमिशन खाना! ये अपराध नही तो और क्या है!?
कक्षा 1 से 12 वी तक किसी महंगे स्कूल मे फीस के रूप में 12 सालो में 6 लाख से 12 लाख रुपए जमा करने के बाद भी यदि छात्र को गणित, भूगोल, विज्ञान, अंग्रेजी और हिंदी का समुचित ज्ञान और सबसे खास बात फर्राटेदार अंग्रेजी बोलना न सिखा पाए !? उसके बावजूद भी छात्र हर साल प्रथम श्रेणी और द्वितीय श्रेणी में पास होता रहे! तो इसे आप क्या कहेंगे!?
हम अपने बच्चों को कान्वेंट स्कूल क्यों भेजते हैं? महंगी से महंगी फीस क्यों देते हैं! 30 हजार से लेकर 3 लाख रुपए सालाना तक की फीस व अन्य ख़र्चे! माँ - बाप अपने बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करते हैं! सिर्फ इसलिए कि उनके बच्चों को अच्छी तालीम मिल सके!
और यदि 10 वी 12 वी के बाद भी ये महंगे कान्वेंट और भारी भरकम सरकारी तनख्वाह पर नौकरी करने वाले नाकाबिल टीचर हमारे बच्चों को हिन्दी, अंग्रेजी, गणित, भूगोल, विज्ञान, सामन्य ज्ञान मे पारंगत न कर पाए!? और साल दर साल फर्स्ट डिविजन मे पास करते जाएँ! मार्कशीट दे दे!?
तो क्या यह भादवि (इंडियन पेनल कोड) की धारा 406,409 420 463 467, 468 , 471 , 120 B, 34 के तहत बेइमानी, छल, कूट रचना, ब्रीच ऑफ ट्रस्ट और अपराधिक षड्यंत्र का अपराध नही है!? या उपभोक्ता कानूनों के तहत पैसे लेने के बाद भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा जिसका दावा किया गया नही प्रदान की गई!?
@प्रदीप मिश्रा री डिसकवर इंडिया न्यू्ज इंदौर